Mars in the 6th House
41 min read · Drawn from 56 classical and modern works · Updated August 2026
Classical Position
शास्त्रीय ज्योतिषीय परंपराओं में इस बात पर व्यापक सहमति है कि छठे भाव में मंगल जैसे क्रूर ग्रह की उपस्थिति जातक के लिए कई मायनों में शुभ फलदायी होती है। पाराशरीय और अन्य प्रमुख परंपराओं के अनुसार, यदि कोई क्रूर ग्रह तीसरे, छठे या ग्यारहवें भाव में स्थित हो, तो यह जातक को अत्यधिक साहस, निरंतर प्रयास करने की क्षमता और जीवन की कठिन बाधाओं को पार करने की शक्ति प्रदान करता है। छठे भाव का मंगल जातक को एक योद्धा की तरह जुझारू प्रवृत्ति देता है, जिससे वह अपने शत्रुओं का दमन करने और अपने ऋणों से मुक्त होने में सफल होता है। Saravali के अनुसार, क्रूर ग्रह छठे, आठवें और बारहवें जैसे त्रिक भावों में होने पर शुभ फल प्रदान करते हैं, जबकि शुभ ग्रह इन भावों में विपरीत प्रभाव दे सकते हैं। इस प्रकार, छठे भाव में मंगल की स्थिति जातक को प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में सफलता और शत्रुओं पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान करने वाली मानी गई है।Variant Readings
विभिन्न शास्त्रीय और नाड़ी ग्रंथों में छठे भाव में मंगल की स्थिति को लेकर कई विशिष्ट और भिन्न दृष्टिकोण भी मिलते हैं। इन मतों को जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।Physical Appearance and Health
जातक के स्वास्थ्य और शारीरिक स्थिति को लेकर विभिन्न ग्रंथों में कई विशिष्ट योग बताए गए हैं:- त्वचा और रक्त विकार: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि छठे भाव में स्थित मंगल पर अशुभ ग्रहों की अंतर्दशा (Bhukti) चल रही हो, तो जातक को शरीर पर फोड़े-फुंसी और मूत्र संबंधी विकारों का सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, यदि मंगल छठे भाव का स्वामी होकर स्वयं Atmakaraka (आत्मकारक) बने और छठे भाव में ही स्थित हो, तो शरीर पर फोड़े और मुंहासे होने की संभावना रहती है।
- गंभीर और दीर्घकालिक रोग: 300 Important Combinations के अनुसार, यदि छठे भाव में शनि और मंगल की युति हो और उस पर सूर्य तथा राहु की पूर्ण दृष्टि हो, तो जातक को क्षय रोग (टीबी) जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि छठे भाव में मंगल या शनि स्थित हों और उन पर राहु या सूर्य की दृष्टि हो, तथा Lagna Lord (लग्नेश) कमजोर हो, तो यह लंबे समय तक चलने वाली बीमारी का संकेत देता है।
- गुप्त रोग और अन्य शारीरिक कष्ट: Prasna Arudhaphala के अनुसार, छठे भाव पर मंगल की दृष्टि सिरदर्द और बुखार का कारण बनती है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो और शनि व मंगल की युति हो, तो जातक दृष्टिहीन हो सकता है। इसके अलावा, यदि छठे या बारहवें भाव में मंगल या शनि बिना किसी शुभ ग्रह की दृष्टि के स्थित हों, तो जातक को कण्ठमाला (मम्प्स) रोग हो सकता है।
Temperament and Mental State
मानसिक स्थिति और स्वभाव के संबंध में शास्त्रीय ग्रंथों में निम्नलिखित बातें कही गई हैं:- उग्र और विद्रोही स्वभाव: 300 Important Combinations के अनुसार, यदि मंगल छठे या आठवें भाव में स्थित बुध के साथ युति करे या उस पर पूर्ण दृष्टि डाले, तो यह जातक में मानसिक अस्थिरता या उन्माद की स्थिति उत्पन्न कर सकता है। इसके अतिरिक्त, एक अन्य शास्त्रीय स्रोत के अनुसार, छठे भाव में बुध के साथ राहु या मंगल की युति जातक को विद्रोही या अत्यधिक आक्रामक बना सकती है।
- मनोवैज्ञानिक जटिलताएं: My Experiences in Astrology के अनुसार, यदि छठे भाव में मंगल और केतु की युति हो, तो यह जातक में एक अजीब मनोवैज्ञानिक सनक या मानसिक ग्रंथि को जन्म देती है, जो अंततः जातक के लिए खतरे और बदनामी का कारण बन सकती है।
Wealth, Status and Life Events
जातक के धन, सामाजिक स्थिति और जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं के विषय में ग्रंथों के मत इस प्रकार हैं:- शत्रुओं के माध्यम से धन लाभ: Jataka Tattvam के अनुसार, यदि छठे भाव का स्वामी छठे भाव में ही स्थित हो और उसके साथ शनि तथा मंगल भी छठे भाव में हों, और वे दूसरे भाव के स्वामी (Dhana Lord) से युति या दृष्टि संबंध रखते हों, तो जातक अपने शत्रुओं के माध्यम से धन प्राप्त करता है।
- पशु धन और संपत्ति: Sanketanidhi के अनुसार, छठे भाव में शुभ ग्रह होने से गायों का सुख मिलता है, जबकि सूर्य और मंगल की उपस्थिति जातक को ऊंट और बकरियों जैसे पशु धन का स्वामी बनाती है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, छठे भाव का मंगल जातक को प्रचुर संपत्ति, प्रसिद्धि, शक्ति और तीव्र जठराग्नि (भूख) प्रदान करता है।
- मुकदमेबाजी और संघर्ष: Satyajatakam Dhruva Nadi के अनुसार, यदि Lagna Lord छठे भाव में छठे भाव के स्वामी के साथ स्थित हो, तो जातक को गरीबी, मुकदमेबाजी और शारीरिक चोटों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, यदि छठे भाव का स्वामी नीच का हो और Lagna Lord Navamsha (नवांश) में उच्च का हो, तो यह प्रतिकूल प्रभाव समाप्त हो जाता है और जातक को सैन्य या युद्ध क्षेत्र में बड़ी सफलता मिलती है।
- युद्ध में मृत्यु के योग: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि छठे भाव का स्वामी और मंगल, तीसरे भाव के स्वामी के साथ स्थित हों और उन पर शनि, राहु या मांदी का प्रभाव हो, तो जातक की मृत्यु युद्ध या संघर्ष के दौरान होती है।
Aspect and Directional Strength
छठे भाव में स्थित होकर, मंगल अपनी चतुर्थ, सप्तम और अष्टम दृष्टि (Drishti) क्रमशः नवम भाव (भाग्य और धर्म), द्वादश भाव (व्यय और मोक्ष) और प्रथम भाव (Lagna - शरीर और व्यक्तित्व) पर डालता है। चूंकि मंगल एक क्रूर ग्रह (Krura Graha) है, इसलिए इसकी दृष्टियां संबंधित भावों पर दबाव और संघर्ष उत्पन्न करती हैं। नवम भाव पर मंगल की चतुर्थ दृष्टि जातक के पिता के साथ संबंधों में वैचारिक मतभेद या संघर्ष की स्थिति उत्पन्न कर सकती है। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि छठे भाव का स्वामी नवम भाव में प्रतिकूल रूप से स्थित हो, तो छठे भाव के स्वामी की महादशा और मंगल की अंतर्दशा में पिता को गंभीर कष्ट या मृत्यु का सामना करना पड़ सकता है। द्वादश भाव पर मंगल की सप्तम दृष्टि जातक के खर्चों में अत्यधिक वृद्धि और अनिद्रा जैसी समस्याएं दे सकती है। प्रथम भाव (Lagna) पर मंगल की अष्टम दृष्टि जातक को साहसी, निडर और शारीरिक रूप से मजबूत बनाती है। Notable Horoscopes के अनुसार, यदि बृहस्पति का प्रभाव हो और मंगल Lagna Lord पर दृष्टि डाले, तो जातक का शरीर एथलेटिक और कद लंबा होता है। हालांकि, यदि मंगल Gandanta (नक्षत्र संधि) में होकर Lagna पर दृष्टि डाले, तो सिर में चोट लगने की संभावना रहती है। दिशात्मक बल (Digbala) की बात करें, तो मंगल कुंडली के दसवें भाव (Kendra) में पूर्ण Digbala प्राप्त करता है। छठे भाव में मंगल को दिशात्मक बल तो प्राप्त नहीं होता, लेकिन एक Upachaya (उपचय) भाव होने के कारण, यहाँ मंगल शत्रुओं और ऋणों से लड़ने के लिए जातक को असाधारण आंतरिक शक्ति प्रदान करता है।The Placement Across the Twelve Rashis
मंगल की छठे भाव में स्थिति बारह अलग-अलग राशियों में जातक के जीवन को विभिन्न रूपों में प्रभावित करती है।Aries (Mesha)
मेष राशि में मंगल अपनी मूलत्रिकोण (Moolatrikona) राशि में होता है। इस राशि का स्वामी स्वयं मंगल है। यह स्थिति वृश्चिक Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल प्रथम और छठे भाव का स्वामी होकर छठे भाव में स्थित होता है।- Saravali के अनुसार, Mars in Aries जातक को अत्यंत तेजस्वी, सत्यवादी, पराक्रमी, युद्धप्रिय और साहसी बनाता है। वह सेना या किसी बड़े समूह का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यह स्थिति जातक को अत्यधिक मुखर, आक्रामक, ऊर्जावान और कुशल संगठक बनाती है। जातक उदार और बेहद सतर्क होता है।
- चूंकि मंगल अपनी ही राशि में छठे भाव में है, इसलिए जातक अपने शत्रुओं पर पूर्ण विजय प्राप्त करता है। हालांकि, अत्यधिक आक्रामकता के कारण रक्त विकार या सिरदर्द की समस्या हो सकती है।
Taurus (Vrishabha)
वृषभ राशि में मंगल तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी शुक्र है। यह स्थिति धनु Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल पांचवें और बारहवें भाव का स्वामी होता है।- पश्चिमी ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार, Mars in Taurus जातक को जिद्दी और दृढ़ निश्चयी बनाता है। वह सीधे संघर्ष से बचता है लेकिन अपने काम में लगातार लगा रहता है।
- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, जातक विपरीत लिंग के प्रभाव में आसानी से आ सकता है और कामुक प्रवृत्ति का हो सकता है।
- The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इस स्थिति में मंगल की Dasha जातक में धार्मिक सुधार और आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रति रुचि जागृत करती है।
Gemini (Mithuna)
मिथुन राशि में मंगल शत्रु (Inimical) राशि में होता है, जिसका स्वामी बुध है। यह स्थिति मकर Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल चौथे और ग्यारहवें भाव का स्वामी होता है।- एक ज्योतिषीय शोध के अनुसार, Mars in Gemini जातक को कभी-कभी आलसी या निष्क्रिय बना सकता है, और शनि की मजबूत स्थिति के बिना उसमें निरंतरता की कमी होती है।
- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, जातक कलात्मक और वैज्ञानिक रुचि रखने वाला, बातूनी और जल्दबाज होता है। वह अपनी ऊर्जा को व्यर्थ के कामों में नष्ट कर सकता है।
- How to Judge a Horoscope के अनुसार, मिथुन राशि का मंगल यदि छठे भाव में हो, तो जातक को अपेंडिसाइटिस या पेट के निचले हिस्से में दर्द की समस्या होने की संभावना रहती है।
Cancer (Karka)
कर्क राशि में मंगल अपनी नीच (Debilitated) स्थिति में होता है, जिसका स्वामी चंद्रमा है। यह स्थिति कुंभ Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल तीसरे और दसवें भाव का स्वामी होता है।- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, कर्क राशि में मंगल अपनी शक्ति खो देता है, जिससे जातक अत्यधिक भावुक, संवेदनशील और चिड़चिड़ा हो जाता है।
- Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि नीच का मंगल छठे भाव में हो और उस पर पापी ग्रहों की दृष्टि हो, तो उसकी Dasha में धन की हानि और मानसिक कष्ट होता है।
- हालांकि, यदि कर्क राशि में बृहस्पति उच्च का होकर मंगल के साथ स्थित हो, तो मंगल का नीच भंग (Neecha Bhanga) हो जाता है, जिससे जातक को तकनीकी क्षेत्रों में बड़ी सफलता मिलती है।
Leo (Simha)
सिंह राशि में मंगल मित्र (Friendly) राशि में होता है, जिसका स्वामी सूर्य है। यह स्थिति मीन Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल दूसरे और नवम भाव का स्वामी होता है।- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Leo जातक को खगोल विज्ञान, गणित और गुप्त विद्याओं में रुचि प्रदान करता है। जातक बड़ों का सम्मान करने वाला और दृढ़ संकल्पी होता है।
- यदि इस मंगल पर बृहस्पति की दृष्टि हो, तो जातक शासकों का प्रिय, एक योग्य शिक्षक और शुद्ध विचारों वाला होता है।
- Essence of Nadi Astrology के अनुसार, सिंह राशि का मंगल जातक को अत्यधिक आत्मसम्मान और राजा जैसी गरिमा प्रदान करता है।
Virgo (Kanya)
कन्या राशि में मंगल शत्रु (Inimical) राशि में होता है, जिसका स्वामी बुध है। यह स्थिति मेष Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल प्रथम (लग्नेश) और आठवें भाव का स्वामी होता है।- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Virgo जातक को हर छोटी से छोटी बात पर ध्यान देने वाला, प्रतिशोधी, आत्म-अभिमानी और दिखावा करने वाला बनाता है।
- चूंकि लग्नेश स्वयं छठे भाव में शत्रु राशि में है, इसलिए जातक को अपने स्वास्थ्य के प्रति बेहद सतर्क रहना चाहिए। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि मीन राशि का चंद्रमा इस मंगल पर दृष्टि डाले, तो जातक को जलोदर (शरीर में पानी भरना) की समस्या हो सकती है।
- इस राशि में शास्त्रीय ग्रंथों द्वारा दी गई जानकारी सीमित है, अतः जातक को अपने शत्रुओं से निपटने में अत्यधिक कूटनीति का सहारा लेना पड़ता है।
Libra (Tula)
तुला राशि में मंगल तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है, जिसका स्वामी शुक्र है। यह स्थिति वृषभ Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल बारहवें और सातवें भाव का स्वामी होता है।- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Libra जातक को महत्वाकांक्षी, आत्मविश्वासी और अच्छी अवलोकन क्षमता वाला बनाता है। हालांकि, वह महिलाओं द्वारा धोखा खा सकता है और अपनों से विवाद कर सकता है।
- The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, तुला राशि के मंगल की Dasha विवाह और रोजगार के लिए अनुकूल होती है, लेकिन यह जातक की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर सकती है।
- सप्तमेश का छठे भाव में होना वैवाहिक जीवन में कुछ मतभेद या जीवनसाथी के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव का संकेत देता है।
Scorpio (Vrischika)
वृश्चिक राशि में मंगल अपनी स्वराशि (Own Sign) में होता है। इस राशि का स्वामी स्वयं मंगल है। यह स्थिति मिथुन Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल ग्यारहवें और छठे भाव का स्वामी होता है।- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Scorpio जातक को गहरी और मजबूत भावनाओं वाला, अत्यधिक प्रतिशोधी और एक कुशल राजनयिक बनाता है।
- The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इस मंगल की Dasha में जातक को भूमि की खरीद और कृषि कार्यों में बड़ी सफलता मिलती है।
- चूंकि छठे भाव का स्वामी छठे भाव में ही मजबूत स्थिति में है, इसलिए यह एक उत्कृष्ट Harsha Vipreet Raja Yoga का निर्माण करता है, जिससे जातक अपने सभी शत्रुओं और ऋणों को पूरी तरह नष्ट कर देता है।
Sagittarius (Dhanu)
धनु राशि में मंगल मित्र (Friendly) राशि में होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति कर्क Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल पांचवें और दसवें भाव का स्वामी होकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण Yogakaraka (योगकारक) ग्रह बनता है।- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Sagittarius जातक को सज्जन, स्पष्टवादी, अधीर और तार्किक रूप से तीखा बनाता है। जातक को जीवन में कड़े संघर्ष के बाद ही सफलता मिलती है।
- Predictive Jyotish के अनुसार, यदि धनु राशि का मंगल छठे भाव में पीड़ित हो, तो जातक को शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में कठिनाई होती है और वह कानूनी विवादों में फंस सकता है।
- Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि सूर्य पंचम भाव में वृश्चिक राशि में हो और मंगल छठे भाव में धनु राशि में हो, तो जातक को बड़ी उम्र में संतान सुख प्राप्त होता है।
Capricorn (Makara)
मकर राशि में मंगल अपनी उच्च (Exalted) स्थिति में होता है, जिसका स्वामी शनि है। यह स्थिति सिंह Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल नौवें (भाग्येश) और चौथे भाव का स्वामी होता है।- Saravali के अनुसार, Mars in Capricorn जातक को अत्यंत धनवान, प्रसिद्ध, सफल और उच्च पद प्राप्त करने वाला बनाता है।
- पश्चिमी ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार, उच्च का मंगल जातक को अद्भुत शारीरिक सहनशक्ति और अटूट ऊर्जा प्रदान करता है।
- The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, मकर राशि के मंगल की Dasha जातक के लिए नई परियोजनाओं को शुरू करने, पदोन्नति प्राप्त करने और मुकदमों में जीत हासिल करने के लिए अत्यंत भाग्यशाली साबित होती है।
Aquarius (Kumbha)
कुंभ राशि में मंगल तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है, जिसका स्वामी शनि है। यह स्थिति कन्या Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल आठवें और तीसरे भाव का स्वामी होता है।- Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, Mars in Aquarius जातक को अपने गुरु की सेवा करने वाला या आयुर्वेद और चिकित्सा के क्षेत्र में काम करने वाला बना सकता है।
- चूंकि कुंभ राशि में मंगल पर कुज दोष (Kuja Dosha) लागू नहीं होता, इसलिए यह वैवाहिक जीवन के लिए कुछ राहत प्रदान करता है।
- इस राशि में शास्त्रीय सामग्री सीमित है; हालांकि, अष्टमेश का छठे भाव में होना जातक को अचानक आने वाली बाधाओं से लड़ने की शक्ति देता है, लेकिन उसे रक्त संबंधी विकारों के प्रति सचेत रहना चाहिए।
Pisces (Meena)
मीन राशि में मंगल मित्र (Friendly) राशि में होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति तुला Lagna के लिए बनती है, जहाँ मंगल सातवें और दूसरे भाव का स्वामी होता है।- Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Pisces जातक को कभी-कभी अकेलापन, रिश्तेदारों द्वारा उपेक्षा और धोखे के कारण धन की हानि दे सकता है।
- Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, मीन राशि का मंगल जातक को भूमि और अचल संपत्ति के माध्यम से अच्छा वित्तीय लाभ प्रदान करता है।
- Roots of Nadi के अनुसार, यदि गोचर में बृहस्पति मीन राशि में स्थित वक्री मंगल के ऊपर से गुजरता है, तो जातक को रक्त से संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
Conjunctions in This House
छठे भाव में मंगल के साथ अन्य ग्रहों की युति जातक के जीवन में अत्यंत विशिष्ट और गहरे प्रभाव उत्पन्न करती है।Sun
छठे भाव में Sun with Mars की युति जातक को अत्यधिक साहसी और पराक्रमी बनाती है। Sanketanidhi के अनुसार, यह युति जातक को ऊंट और बकरियों जैसे पशु धन का स्वामी बनाती है। हालांकि, दो उग्र ग्रहों की युति होने के कारण जातक को पित्त विकार, तेज बुखार और सिरदर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।Moon
छठे भाव में Moon with Mars की युति जातक को मानसिक रूप से अशांत कर सकती है। Saravali के अनुसार, चंद्रमा और मंगल की युति (दसवें भाव को छोड़कर) सामान्यतः शुभ नहीं मानी जाती। यदि चंद्रमा छठे भाव में हो और शनि व मंगल की युति हो, तो जातक को गंभीर नेत्र विकार या दृष्टिहीनता का सामना करना पड़ सकता है।Mercury
छठे भाव में Mercury with Mars की युति जातक के विचारों में उग्रता लाती है। 300 Important Combinations के अनुसार, यह युति जातक को मानसिक रूप से अस्थिर या अत्यधिक क्रोधी बना सकती है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि यह युति पापी नवांश में हो और इस पर चंद्रमा व शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक को कफ संबंधी रोग होते हैं।Jupiter
छठे भाव में Jupiter with Mars की युति जातक को कानून और न्याय के क्षेत्र में बड़ी सफलता दिला सकती है। हालांकि, Notable Horoscopes के अनुसार, यदि बृहस्पति छठे भाव में मंगल की राशि में हो और उस पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो, तो जातक को लापरवाही के कारण आंखों में चोट या बीमारी का खतरा रहता है।Venus
छठे भाव में Venus with Mars की युति जातक के वैवाहिक और सामाजिक जीवन को प्रभावित करती है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, छठे भाव में शुक्र का मंगल, शनि या राहु के साथ होना जातक के जीवन में गंभीर बीमारियों, आपसी झगड़ों और अदालती विवादों का कारण बनता है।Saturn
छठे भाव में Saturn with Mars की युति एक अत्यंत विस्फोटक और दमनकारी योग बनाती है। Saravali के अनुसार, यदि छठे भाव में मंगल स्थित हो और उस पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक को शत्रुओं का अत्यधिक भय रहता है। 300 Important Combinations के अनुसार, यदि इस युति पर सूर्य और राहु की दृष्टि हो, तो जातक को फेफड़ों के रोग हो सकते हैं।Rahu
छठे भाव में Rahu with Mars की युति जातक को तकनीकी और इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में सफलता दिला सकती है। आधुनिक शोध ग्रंथों के अनुसार, यह युति जातक को हार्डवेयर इंजीनियर या तकनीकी विशेषज्ञ बना सकती है। हालांकि, Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यह युति जातक को दुर्घटनाओं के प्रति संवेदनशील भी बनाती है।Ketu
छठे भाव में Ketu with Mars की युति जातक के स्वभाव में एक अजीब सनक पैदा करती है। My Experiences in Astrology के अनुसार, यह युति शासकों या उच्च अधिकारियों के लिए अपमान और खतरे का कारण बनती है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, महादशा के प्रारंभ में यह युति अग्नि से दुर्घटना या गंभीर संकट का संकेत देती है।Stellium (Three or more planets)
Saravali के अनुसार, छठे भाव में तीन या अधिक पापी ग्रहों की युति जातक को अभागा, दरिद्र और दुखों से पीड़ित बना सकती है। हालांकि, यदि आध्यात्मिक ग्रह इस युति में शामिल हों, तो जातक सांसारिक संघर्षों से तंग आकर संन्यास (Sanyasa) की ओर प्रवृत्त हो सकता है।Aspects Received
छठे भाव में स्थित मंगल पर अन्य ग्रहों की दृष्टि जातक के जीवन में निम्नलिखित बदलाव लाती है:Jupiter
बृहस्पति की शुभ दृष्टि छठे भाव के मंगल के नकारात्मक प्रभावों को काफी हद तक शांत करती है। Notable Horoscopes के अनुसार, यदि शनि और मंगल चंद्रमा पर दृष्टि डाल रहे हों और बृहस्पति भी उस पर दृष्टि डाले, तो पापी प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाता है और जातक में समझौता करने की अच्छी प्रवृत्ति विकसित होती है।Saturn
शनि की दृष्टि छठे भाव के मंगल पर होने से जातक के जीवन में संघर्ष और शत्रुओं का भय बढ़ जाता है। Saravali के अनुसार, यदि छठे भाव में स्थित मंगल पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक को शत्रुओं से लगातार बाधाओं और पराजय का सामना करना पड़ सकता है।Rahu
राहु की दृष्टि मंगल की उग्रता को और अधिक बढ़ा देती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि छठे भाव के मंगल पर राहु या सूर्य की दृष्टि हो और लग्नेश कमजोर हो, तो जातक को लंबे समय तक चलने वाली और रहस्यमयी बीमारियों का सामना करना पड़ता है।Ketu
केतु की दृष्टि छठे भाव के मंगल पर होने से जातक को अचानक और अप्रत्याशित दुर्घटनाओं, सर्जरी या अग्नि से जुड़े खतरों का सामना करना पड़ सकता है। यह जातक के सामाजिक जीवन में अचानक बदनामी का कारण भी बन सकती है।Strength and Condition
छठे भाव में मंगल का परिणाम पूरी तरह से उसकी ताकत और कुंडली में उसकी स्थिति पर निर्भर करता है। इसके आकलन के लिए निम्नलिखित कारकों की जांच की जानी चाहिए:Baladi Avastha
- विषम राशियां (Aries, Gemini, Leo, Libra, Sagittarius, Aquarius): इन राशियों में 0-6° तक मंगल शिशु (Bala), 6-12° तक कुमार (Kumara), 12-18° तक युवा (Yuva), 18-24° तक वृद्ध (Vridha) और 24-30° तक मृत (Mrita) अवस्था में होता है।
- सम राशियां (Taurus, Cancer, Virgo, Scorpio, Capricorn, Pisces): इन राशियों में यह क्रम पूरी तरह उलट जाता है, जहाँ 0-6° तक मंगल मृत (Mrita) और 24-30° तक शिशु (Bala) अवस्था में होता है।
- एक युवा (Yuva) मंगल अपने पूर्ण और सकारात्मक परिणाम देने में सक्षम होता है, जबकि मृत या शिशु अवस्था का मंगल जातक को कमजोर और संघर्षों से हारने वाला बनाता है।
Ashtakavarga
अष्टकवर्ग में छठे भाव को मिलने वाले बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि छठे भाव में मंगल को 5 या उससे अधिक बिंदु प्राप्त होते हैं, तो जातक अपने शत्रुओं और ऋणों पर आसानी से विजय प्राप्त कर लेता है। इसके विपरीत, कम बिंदु होने पर जातक को लगातार कर्ज और बीमारियों से जूझना पड़ता है।Nakshatra
मंगल जिस नक्षत्र में स्थित है, उसका स्वामी ग्रह मंगल के परिणामों को रंग देता है। उदाहरण के लिए, यदि मंगल बुध के नक्षत्र में हो, तो जातक की वाणी में उग्रता और तार्किकता बढ़ जाती है।Navamsa (D9)
नवांश कुंडली जन्म कुंडली के वादों की पुष्टि या उन्हें रद्द करती है। Satyajatakam Dhruva Nadi के अनुसार, यदि छठे भाव का स्वामी नवांश में छठे, आठवें या बारहवें अंश (Amsas) में स्थित हो और लग्नेश अपने ही अंश में हो, तो छठे भाव के सभी बुरे प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।Condition of the House Lord
छठे भाव में स्थित मंगल कितना भी मजबूत क्यों न हो, यदि छठे भाव का स्वामी कमजोर या पीड़ित है, तो मंगल अपने शुभ परिणाम नहीं दे पाएगा। यदि छठे भाव का स्वामी नीच का हो और लग्नेश नवांश में उच्च का हो, तो जातक को जीवन में अपार सफलता और विजय प्राप्त होती है।In the KP System
कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में ग्रहों के नक्षत्र और उप-स्वामी (Sub-lord) को अत्यधिक महत्व दिया जाता है।- K.P. Reader III के अनुसार, जातक के पेशे का निर्धारण करने के लिए दूसरे, छठे और दसवें भाव की जांच की जानी चाहिए। यदि इन भावों में कोई ग्रह न हो, तो उस भाव के स्वामी के नक्षत्र में स्थित ग्रह के आधार पर आजीविका का निर्णय किया जाता है।
- यदि Lagna का उप-उप स्वामी (Sub-Sub Lord) या चंद्रमा का उप-स्वामी (Sub-lord) छठे भाव के पुच्छीय बिंदु (Cusp) से संबंध बनाता है, तो जातक के बीमार होने की संभावना बहुत अधिक होती है।
- यदि सातवें भाव का स्वामी छठे भाव के स्वामी के उप-भाग (Sub) में स्थित हो, तो जातक का जीवनसाथी उसे छोड़कर चला जाता है; और यदि वह बारहवें भाव के स्वामी के उप-भाग में हो, तो जातक स्वयं अपने साथी को छोड़ देता है।
Practical Significations
छठे भाव में मंगल की व्यावहारिक व्याख्या को निम्नलिखित श्रेणियों में समझा जा सकता है:Professional Directions
- सुरक्षा और जांच सेवाएं: यदि छठे या दसवें भाव का संबंध मंगल, शनि और सूर्य के संयोजन से हो, तो जातक CID या CBI जैसी खुफिया और जांच एजेंसियों में काम करता है।
- वित्तीय संस्थान: यदि मंगल, शुक्र और राहु का संबंध तीसरे, छठे या आठवें भाव से हो, तो जातक बड़े वित्तीय संस्थानों में कंप्यूटर या भारी मशीनरी से जुड़े क्षेत्रों में काम करता है।
- हार्डवेयर इंजीनियरिंग: छठे भाव में राहु और मंगल की उपस्थिति जातक को एक सफल हार्डवेयर इंजीनियर या तकनीकी विशेषज्ञ बना सकती है।
Health and Vitality
- छिपी हुई बीमारियां: छठे भाव में मंगल की उपस्थिति के कारण शारीरिक बीमारियां लंबे समय तक गुप्त या सुप्त अवस्था में रह सकती हैं, जिनका पता आसानी से नहीं चलता।
- अग्नि और पित्त विकार: जातक को शरीर में अत्यधिक गर्मी, उच्च रक्तचाप, फोड़े-फुंसी और एसिडिटी जैसी समस्याओं के प्रति हमेशा सावधान रहना चाहिए।
Frequently Asked Questions
क्या छठे भाव में मंगल होना अच्छा माना जाता है?
क्या छठे भाव का मंगल वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है?
छठे भाव में मंगल होने पर कौन सी बीमारियां हो सकती हैं?
क्या छठे भाव का मंगल सरकारी नौकरी दिला सकता है?
छठे भाव में मंगल के लिए सबसे अच्छी राशि कौन सी है?
क्या छठे भाव में मंगल होने से दुर्घटनाओं का खतरा रहता है?
Remedial Measures
छठे भाव में मंगल के प्रतिकूल प्रभावों को शांत करने और इसके शुभ फलों को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं: Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि कुंडली में मंगल, शुक्र और राहु का प्रतिकूल प्रभाव हो, तो जातक को संभावित गंभीर दुर्घटनाओं से बचने के लिए नियमित रूप से महामृत्युंजय जप (Mrutyunjaya Japa) करवाना चाहिए।Standard Remedies for Mars
- आध्यात्मिक उपाय: प्रत्येक मंगलवार को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। भगवान कार्तिकेय या हनुमान जी की पूजा करें और उन्हें लाल फूल अर्पित करें।
- व्यवहारिक उपाय: अपने छोटे भाइयों (जो मंगल के कारक हैं) के साथ संबंध मधुर रखें और उनकी हर संभव सहायता करें। अत्यधिक क्रोध और वाद-विवाद से बचें।
- दान कार्य: मंगलवार के दिन तांबा, लाल वस्त्र, मसूर की दाल, गुड़ और लाल चंदन का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में करें।
- रत्न धारण: मंगल का मुख्य रत्न लाल मूंगा (Moonga) है। विशेष चेतावनी: लाल मूंगा केवल तभी धारण किया जाना चाहिए जब मंगल जातक की कुंडली के लिए एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (Functional Benefic) हो (जैसे मेष, वृश्चिक, कर्क, सिंह, धनु और मीन Lagna)। इसे वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ Lagna वाले जातकों को भूलकर भी धारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि पापी ग्रह के रत्न को पहनने से उसका नकारात्मक प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
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Sources consulted
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