Mars in the 2nd House

47 min read · Drawn from 44 classical and modern works · Updated August 2026

वैदिक ज्योतिष में, मंगल (Mangal), जिसे ऊर्जा, साहस, आक्रामकता और भाइयों का कारक (Karaka [significator]) माना जाता है, जब कुंडली के द्वितीय भाव (Dwitiya Bhava), जिसे धन भाव (Dhan Bhava [house of wealth]) भी कहा जाता है, में स्थित होता है, तो यह जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित करता है। द्वितीय भाव मुख्य रूप से संचित धन, वाणी, प्रारंभिक शिक्षा, मुख और परिवार का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि मंगल ग्रह (Graha [planet]) अग्नि तत्व, साहस और आक्रामक ऊर्जा का प्रतीक है। इन दोनों का यह संयोजन जातक के जीवन में वित्तीय उतार-चढ़ाव, तीखी या आक्रामक वाणी और पारिवारिक संबंधों में तनाव या संघर्ष की स्थिति उत्पन्न करने की प्रवृत्ति रखता है। इस स्थिति का अंतिम परिणाम पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि मंगल किस राशि में स्थित है, उसकी गरिमा क्या है और उस पर किन ग्रहों की दृष्टि (Drishti [aspect]) पड़ रही है। ज्योतिषीय विश्लेषण में यह ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है कि शास्त्रीय ग्रंथ अक्सर परिणामों को अत्यंत निरपेक्ष और गंभीर शब्दों में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन किसी भी जातक की कुंडली में केवल एक ग्रह की स्थिति के आधार पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता; इसके लिए पूरी कुंडली में कई सहायक और पुष्टिकारक योगों की उपस्थिति अनिवार्य होती है।

Classical Position

वैदिक ज्योतिष के स्वीकृत सिद्धांतों के अनुसार, द्वितीय भाव में मंगल की स्थिति को मुख्य रूप से नेत्र स्वास्थ्य और पारिवारिक सुख के संदर्भ में अत्यंत सावधानी से देखा जाता है। शास्त्रीय ग्रंथों में इस बात पर पूर्ण सहमति है कि यदि सूर्य या चंद्रमा द्वितीय या द्वादश भाव में स्थित हों और उन पर मंगल या शनि की दृष्टि हो या वे इनके साथ युति कर रहे हों, तो जातक को गंभीर नेत्र रोगों का सामना करना पड़ता है। Phaladeepika इस बात की पुष्टि करती है कि द्वितीय और द्वादश भाव नेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और जब इन भावों में स्थित प्रकाशमान ग्रहों (सूर्य और चंद्रमा) पर मंगल जैसे क्रूर ग्रह की दृष्टि पड़ती है, तो यह दृष्टि नेत्र ज्योति को कमजोर करती है या आंखों से संबंधित विकार उत्पन्न करती है। इसके अतिरिक्त, शास्त्रीय परंपरा यह भी मानती है कि द्वितीय भाव में मंगल की उपस्थिति जातक की वाणी में एक विशेष प्रकार की तीव्रता या उग्रता लाती है। चूंकि द्वितीय भाव संचित धन का भी है, इसलिए मंगल की आक्रामक ऊर्जा जातक को धन कमाने के लिए अत्यधिक प्रेरित तो करती है, लेकिन साथ ही यह आवेगी खर्चों के माध्यम से संचित धन के नुकसान का कारण भी बन सकती है।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय ग्रंथों और नाड़ी परंपराओं में द्वितीय भाव में मंगल के प्रभाव को लेकर कई अनूठे और विशिष्ट दृष्टिकोण मिलते हैं। इन विभिन्न मतों को जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।

Physical Appearance and Health

  • चेहरे की बनावट और सौंदर्य: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि द्वितीय भाव में पापी ग्रह स्थित हों और द्वितीय भाव का स्वामी भी पापी ग्रहों के साथ हो या नीच का होकर पापी ग्रहों से दृष्ट हो, तो जातक का चेहरा विकृत या अरुचिकर हो सकता है।
  • कान की चोट या रोग: Jataka Parijata और Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि द्वितीय भाव का स्वामी लग्न में शनि और मंगल के साथ स्थित हो, तो जातक के कान में चोट लग सकती है या उसका कान कटा हुआ हो सकता है।
  • गले की समस्या: एक अन्य शास्त्रीय स्रोत Marvel of Vedic Astrology के अनुसार, यदि द्वितीय भाव में बृहस्पति के साथ मंगल स्थित हो और उस पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक को गले की बीमारी या गले में तकलीफ होने की संभावना रहती है।
  • गंभीर त्वचा रोग: How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि चंद्रमा और मंगल द्वितीय भाव में स्थित हों और शनि उन पर दृष्टि डाल रहा हो, तो जातक को एक विशिष्ट प्रकार का त्वचा रोग हो सकता है।
  • नेत्रहीनता के योग: 300 Important Combinations के अनुसार, यदि मंगल द्वितीय भाव में हो, चंद्रमा छठे भाव में, शनि बारहवें भाव में और सूर्य आठवें भाव में स्थित हो, तो यह संयोजन जातक को पूर्ण रूप से अंधा (stone-blindness) बना सकता है।

Temperament and Mental State

  • आक्रामक और तर्कशील वाणी: नाड़ी और KP (KP [Krishnamurti Paddhati]) प्रणाली के सिद्धांतों के अनुसार, यदि मंगल अपनी दशा-अंतर्दशा में हो और बुध के नक्षत्र में गोचर कर रहा हो, तथा बुध द्वितीय भाव का उप-स्वामी (sub-lord) हो, तो जातक अत्यधिक तर्कशील हो जाता है और अपनी वाणी के माध्यम से दूसरों को डराता या धमकाता है।
  • स्पष्टवादी और उदार स्वभाव: My Experiences in Astrology के अनुसार, यदि मंगल लग्न का स्वामी होकर द्वितीय भाव में स्थित हो और शनि उस पर दृष्टि डाल रहा हो, तो जातक का स्वभाव अत्यंत स्पष्ट, खुला, निडर और उदार होता है।
  • धार्मिक मामलों में चरम दृष्टिकोण: Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यदि द्वितीय भाव में स्थित मंगल का आठवें भाव में स्थित बृहस्पति के साथ आमने-सामने का संबंध (समसप्तक दृष्टि) हो, तो जातक धार्मिक या आध्यात्मिक मामलों में अत्यधिक भावुक, तनावग्रस्त और चरमपंथी दृष्टिकोण अपना सकता है।
  • वचन से मुकर जाना: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि द्वितीयेश जिस नवांश (Navamsha [nine-fold division]) में स्थित हो, उस नवांश का स्वामी केंद्र या त्रिकोण में किसी पापी ग्रह के साथ बैठा हो, तो जातक अपने दिए गए वचन से पीछे हट जाता है।

Wealth, Status and Life Events

  • धन संचय में कठिनाई: पश्चिमी ज्योतिषीय दृष्टिकोण के अनुसार, द्वितीय भाव में मंगल जातक को त्वरित और आसान आय तो प्रदान करता है, लेकिन आवेगी और अनियोजित खर्चों के कारण वह धन का संचय करने में असमर्थ रहता है।
  • चोरी और अग्नि से धन हानि: Jataka Tattvam के अनुसार, यदि द्वितीय या एकादश भाव के स्वामी पर मंगल की दृष्टि हो या वे पापी ग्रहों के साथ युति कर रहे हों, तो जातक को चोरों, अग्नि या सरकारी अधिकारियों के कारण धन की हानि उठानी पड़ती है।
  • दशा काल में धन हानि: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि द्वितीय भाव का स्वामी अपनी महादशा में हो और उसमें शनि, मंगल, राहु या सूर्य की अंतर्दशा (Antardasha [sub-period]) चल रही हो, तो यह समय भारी धन हानि का कारण बनता है।
  • अचानक धन लाभ: KN Rao's Astrology Lessons के अनुसार, यदि लग्नेश द्वितीय भाव में स्थित हो और आठवें भाव से बृहस्पति तथा चंद्रमा उस पर दृष्टि डाल रहे हों, तो जातक को अचानक अप्रत्याशित धन लाभ या गुप्त धन प्राप्त होता है।
  • भाइयों के सहयोग से धन: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि द्वितीयेश द्वितीय भाव में ही वैशेषिकांश (Vaisheshikamsha [a high-dignity divisional state]) में मंगल के साथ स्थित हो और लग्नेश द्वारा दृष्ट हो, तो जातक को अपने भाइयों के माध्यम से प्रचुर धन की प्राप्ति होती है।

Marriage and Family Relationships

  • कुज दोष या अंगारक दोष: My Experiences in Astrology और New Techniques of Prediction के अनुसार, यदि मंगल लग्न, चंद्रमा या शुक्र से द्वितीय भाव में स्थित हो, तो यह Kuja Dosha (कुज दोष) या Angaraka Dosha (अंगारक दोष) का निर्माण करता है, जो जीवनसाथी की लंबी आयु और वैवाहिक सुख को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
  • वैवाहिक जीवन का अंत: Vedic Astro Textbook के अनुसार, यदि उपपद लग्न (Upapada Lagna [arudha of the 12th house]) से द्वितीय भाव पापी ग्रहों (जैसे मंगल, राहु या केतु) द्वारा आक्रांत या दृष्ट हो, तो यह विवाह के टूटने या समाप्त होने का संकेत देता है।
  • पत्नी का त्याग और पुनर्विवाह: Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि द्वितीय भाव में कोई पापी ग्रह स्थित हो और सातवें भाव पर मंगल की दृष्टि हो जो स्वयं किसी अन्य पापी ग्रह के साथ युति में हो, तो जातक अपनी पहली पत्नी में दोष ढूंढकर उसे छोड़ देता है और दूसरा विवाह करता है।
  • दो विवाह के योग: Bhavartha Chandrika के अनुसार, यदि चंद्रमा, मंगल और शुक्र तीनों ही कुंडली के द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में बलहीन होकर स्थित हों, तो जातक के दो विवाह होने की प्रबल संभावना रहती है।

Education and Intellectual Pursuits

  • गणितज्ञ बनने के योग: Jataka Parijata और Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि मंगल द्वितीय भाव में किसी शुभ ग्रह के साथ युति कर रहा हो और बुध उस पर दृष्टि डाल रहा हो या बुध केंद्र (Kendra [quadrant]) में स्थित हो, तो जातक एक महान गणितज्ञ बनता है।
  • तर्कशास्त्र का विद्वान: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि द्वितीय भाव का स्वामी बृहस्पति या शुक्र हो, और उस पर सूर्य तथा मंगल की दृष्टि पड़ रही हो, तथा वह स्वयं उच्च का या त्रिकोण (Trikona [trine]) में स्थित हो, तो जातक तर्कशास्त्र (Logic) का बहुत बड़ा विद्वान होता है।

Aspect and Directional Strength

द्वितीय भाव में स्थित होकर, मंगल अपनी पूर्ण सातवीं दृष्टि (Drishti) से कुंडली के अष्टम भाव (Ashtama Bhava [eighth house]) को देखता है। इसके अतिरिक्त, मंगल के पास विशेष दृष्टियां भी होती हैं, जिसके कारण वह द्वितीय भाव से पंचम भाव (Panchama Bhava [fifth house]) और नवम भाव (Navama Bhava [ninth house]) पर भी अपनी चौथी और आठवीं दृष्टि डालता है। चूंकि मंगल एक क्रूर (Krura [fierce]) और उग्र ग्रह है, इसलिए अष्टम भाव पर उसकी सातवीं दृष्टि इस भाव के कारकतों पर अत्यधिक दबाव डालती है। अष्टम भाव आयु, गुप्त धन, दुर्घटनाओं और अचानक होने वाली घटनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। मंगल की यह दृष्टि जातक को साहसी और रहस्यमयी विद्याओं में रुचि रखने वाला तो बनाती है, लेकिन साथ ही यह अचानक चोट, दुर्घटना या शल्य चिकित्सा (सर्जरी) के खतरों को भी बढ़ा देती है। दिशात्मक बल या दिग्बल (Digbala [directional strength]) के संदर्भ में, मंगल कुंडली के दशम भाव (Dashama Bhava [tenth house]) में सबसे मजबूत होता है, जहां उसे पूर्ण दिग्बल प्राप्त होता है। द्वितीय भाव में स्थित होने पर मंगल के पास कोई दिग्बल नहीं होता। इसलिए, इस भाव में मंगल का प्रदर्शन पूरी तरह से उसकी राशि गरिमा (Dignity) और उसके डिस्पोजिटर (भाव स्वामी) की स्थिति पर निर्भर करता है। दिग्बल की अनुपस्थिति के कारण, जातक को अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाने के लिए अधिक सचेत प्रयास करने पड़ते हैं।

The Placement Across the Twelve Rashis

Aries (Mesha)

मंगल अपनी मूलत्रिकोण (Moolatrikona) राशि मेष में स्थित होता है, जिसका स्वामी स्वयं मंगल है। यह स्थिति मीन लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल द्वितीय और नवम भाव का स्वामी बनता है। नवम (भाग्य) के स्वामी का द्वितीय (धन) में अपनी ही राशि में होना एक अत्यंत शक्तिशाली धन योग बनाता है। Saravali के अनुसार, मेष राशि में मंगल जातक को तेजस्वी, सत्यवादी, पराक्रमी, सेना या किसी बड़े समूह का प्रमुख और युद्ध कला में रुचि रखने वाला बनाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यह स्थिति जातक को अत्यधिक मुखर, ऊर्जावान और उदार बनाती है। जातक अपने भाग्य और पुरुषार्थ के बल पर प्रचुर धन अर्जित करता है, हालांकि उसकी वाणी में एक स्वाभाविक अधिकार और उग्रता देखी जा सकती है।

Taurus (Vrishabha)

वृषभ राशि में मंगल तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी शुक्र है। यह स्थिति मेष लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल लग्न और अष्टम भाव का स्वामी बनता है। लग्नेश का द्वितीय भाव में जाना जातक के व्यक्तित्व को सीधे तौर पर धन और परिवार से जोड़ता है। Western Astrology के अनुसार, वृषभ राशि का मंगल जातक को जिद्दी, दृढ़ संकल्पी और सीधे संघर्ष से बचने वाला बनाता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इस स्थिति में मंगल की दशा जातक के भीतर धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्तियों को जागृत करती है। जातक धीरे-धीरे लेकिन निरंतरता के साथ अपनी संपत्ति का निर्माण करता है, हालांकि अष्टमेश होने के कारण उसे पारिवारिक संपत्ति को लेकर कुछ विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

Gemini (Mithuna)

मिथुन राशि में मंगल शत्रु (Inimical) राशि में होता है, जिसका स्वामी बुध है। यह स्थिति वृषभ लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल द्वादश और सप्तम भाव का स्वामी बनता है। Yashodhar Mehta's Research in Astrology के अनुसार, मिथुन राशि में मंगल जातक को थोड़ा आलसी या निष्क्रिय बना सकता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, जातक कलात्मक और वैज्ञानिक रुचि रखने वाला, महत्वाकांक्षी लेकिन अत्यधिक बातूनी और कभी-कभी अपनी ऊर्जा को व्यर्थ के कामों में नष्ट करने वाला होता है। द्वादशेश का द्वितीय भाव में होना वित्तीय अस्थिरता और अत्यधिक खर्चों को दर्शाता है। जातक की वाणी तीखी और व्यंग्यात्मक हो सकती है, जिससे पारिवारिक संबंधों में मतभेद पैदा होते हैं।

Cancer (Karka)

कर्क राशि में मंगल अपनी नीच (Debilitated) अवस्था में होता है, जिसका स्वामी चंद्रमा है। यह स्थिति मिथुन लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल एकादश और छठे भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, नीच का मंगल जातक को अत्यधिक संवेदनशील, भावुक और अपने परिवार के प्रति सुरक्षात्मक लेकिन जल्दी नाराज होने वाला बनाता है। K.P. Reader के अनुसार, यह स्थिति कुछ विशेष परिस्थितियों में धन लाभ तो करा सकती है, लेकिन स्वास्थ्य और वाणी के लिए यह अत्यंत प्रतिकूल है। जातक को संचित धन को बचाने में भारी संघर्ष करना पड़ता है और उसकी वाणी में असुरक्षा की भावना झलक सकती है। यदि चंद्रमा मजबूत न हो, तो पारिवारिक सुख में भारी कमी आती है।

Leo (Simha)

सिंह राशि में मंगल मित्र (Friendly) राशि में होता है, जिसका स्वामी सूर्य है। यह स्थिति कर्क लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल दशम और पंचम भाव का स्वामी होकर एक अत्यंत शुभ योगकारक ग्रह बनता है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, सिंह का मंगल जातक को अत्यधिक अहंकारी, शाही ठाट-बाठ पसंद करने वाला और नेतृत्व गुणों से युक्त बनाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, जातक गणित, खगोल विज्ञान या गुप्त विद्याओं का ज्ञाता हो सकता है। योगकारक मंगल का द्वितीय भाव में होना जातक को अपनी बुद्धि, शिक्षा और करियर के माध्यम से अपार धन और समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्रदान करता है। जातक की वाणी प्रभावशाली और प्रेरक होती है।

Virgo (Kanya)

कन्या राशि में मंगल शत्रु (Inimical) राशि में होता है, जिसका स्वामी बुध है। यह स्थिति सिंह लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल नवम और चतुर्थ भाव का स्वामी होकर पुनः एक योगकारक ग्रह बनता है। हालांकि, शत्रु राशि में होने के कारण इसकी शुभता में कुछ कमी आती है। Western Astrology के अनुसार, कन्या राशि का मंगल जातक को हर छोटी से छोटी बात पर ध्यान देने वाला और संबंधों में अत्यधिक आलोचनात्मक बनाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, जातक प्रतिशोधी, अभिमानी और खुद को बहुत अधिक प्रदर्शित करने वाला हो सकता है। जातक को संपत्ति और भूमि से लाभ तो मिलता है, लेकिन उसकी अत्यधिक विश्लेषणात्मक और दोष खोजने वाली वाणी परिवार में अशांति का कारण बनती है।

Libra (Tula)

तुला राशि में मंगल तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है, जिसका स्वामी शुक्र है। यह स्थिति कन्या लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल अष्टम और तृतीय भाव का स्वामी बनता है। Western Astrology के अनुसार, तुला राशि का मंगल जातक को अनिर्णायक बना सकता है, जो केवल अन्याय के खिलाफ ही अपनी पूरी ताकत दिखाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, जातक महत्वाकांक्षी, दूरदर्शी और अपने परिवार से गहरा प्रेम करने वाला होता है, लेकिन वह महिलाओं द्वारा धोखा खा सकता है और अकेले रहना पसंद करता है। अष्टमेश का द्वितीय भाव में होना अचानक धन हानि और स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत देता है। जातक को अपनी वाणी और वित्तीय निवेशों में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।

Scorpio (Vrischika)

मंगल अपनी स्वराशि (Own Sign) वृश्चिक में स्थित होता है, जिसका स्वामी स्वयं मंगल है। यह स्थिति तुला लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल सप्तम और द्वितीय भाव का स्वामी बनता है। द्वितीयेश का द्वितीय भाव में ही स्वराशि में होना एक अत्यंत मजबूत धन योग बनाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, वृश्चिक का मंगल जातक को गहरी और तीव्र भावनाओं वाला, उत्कृष्ट स्मृति शक्ति से युक्त और एक कुशल राजनयिक (diplomat) बनाता है। Nadi Astrological Researches के अनुसार, जातक के जीवन में शल्य चिकित्सा (सर्जरी) की संभावनाएं अधिक होती हैं। जातक अपनी मेहनत और व्यावसायिक साझेदारियों के माध्यम से बड़ी संपत्ति अर्जित करता है, लेकिन उसकी वाणी अत्यधिक मर्मभेदी और रहस्यमयी हो सकती है।

Sagittarius (Dhanu)

धनु राशि में मंगल मित्र (Friendly) राशि में होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति वृश्चिक लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल लग्न और छठे भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, धनु राशि का मंगल जातक को सज्जन, खुला, स्पष्टवादी, स्वतंत्र विचारों वाला और तर्क में तीखा बनाता है। यदि मंगल पीड़ित हो, तो जातक को शारीरिक चोटें, कठोर वाणी और संघर्ष के बाद ही सफलता मिलती है। लग्नेश का द्वितीय भाव में मित्र राशि में होना जातक को स्वाभिमानी और अपने दम पर धन कमाने वाला बनाता है। जातक की वाणी में एक उपदेशक या शिक्षक जैसी गरिमा होती है, हालांकि वह कभी-कभी अत्यधिक खर्चीला भी हो सकता है।

Capricorn (Makara)

मकर राशि में मंगल अपनी उच्च (Exalted) अवस्था में होता है, जिसका स्वामी शनि है। यह स्थिति धनु लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल पंचम और द्वादश भाव का स्वामी बनता है। Saravali के अनुसार, मकर राशि में मंगल जातक को अत्यधिक धनवान, प्रसिद्ध, सफल और उच्च पद प्राप्त करने वाला बनाता है। Western Astrology के अनुसार, जातक के भीतर असीम ऊर्जा और सहनशक्ति होती है। पंचमेश (बुद्धि और संतान) का द्वितीय भाव में उच्च का होना जातक को असाधारण रूप से बुद्धिमान, चतुर और वित्तीय मामलों में बेहद सफल बनाता है। जातक की वाणी अत्यंत अनुशासित, तार्किक और प्रभावशाली होती है, जिससे वह समाज में एक सम्मानित स्थान प्राप्त करता है।

Aquarius (Kumbha)

कुंभ राशि में मंगल तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है, जिसका स्वामी शनि है। यह स्थिति वृश्चिक लग्न के बजाय मकर लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल चतुर्थ और एकादश भाव का स्वामी बनता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, कुंभ राशि का मंगल जातक को आयुर्वेद का ज्ञाता या अपने गुरु की सेवा करने वाला बना सकता है। चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी का द्वितीय भाव में होना भूमि, भवन और बड़े सामाजिक संपर्कों के माध्यम से प्रचुर धन लाभ को दर्शाता है। जातक की वाणी थोड़ी रूखी या तकनीकी हो सकती है, लेकिन वह अपने परिवार की भौतिक आवश्यकताओं को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम होता है।

Pisces (Meena)

मीन राशि में मंगल मित्र (Friendly) राशि में होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति कुंभ लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल तृतीय और दशम भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मीन राशि का मंगल जातक को थोड़ा अशांत, विदेशों में यात्रा करने वाला और कभी-कभी धोखे से धन गंवाने वाला बना सकता है। हालांकि, Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यह स्थिति भूमि और कृषि के माध्यम से अच्छे वित्तीय लाभ भी प्रदान करती है। दशमेश का द्वितीय भाव में होना यह दर्शाता है कि जातक का करियर सीधे तौर पर उसके परिवार और संचित धन से जुड़ा होगा। जातक की वाणी में एक दार्शनिक पुट होता है, लेकिन वह कभी-कभी चापलूसी पसंद भी हो सकता है।

Conjunctions in This House

Sun with Mars

द्वितीय भाव में सूर्य और मंगल की युति अग्नि तत्व की अत्यधिक वृद्धि करती है। यह युति जातक को बेहद आक्रामक और क्रोधी वाणी प्रदान करती है। Saravali के अनुसार, यदि इस युति पर शनि का भी प्रभाव हो, तो जातक के संचित धन का पूर्ण विनाश हो सकता है। यह युति नेत्र विकारों और पारिवारिक कलह के लिए भी जिम्मेदार मानी जाती है।

Moon with Mars

द्वितीय भाव में चंद्रमा और मंगल की युति को ज्योतिष में Chandra-Mangala Yoga (चंद्र-मंगल योग) कहा जाता है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली धन-दायक योग है। Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि इस युति पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक एक असाधारण गणितज्ञ बनता है। हालांकि, यदि इस युति पर शनि की क्रूर दृष्टि हो, तो जातक को त्वचा संबंधी रोगों का सामना करना पड़ सकता है।

Mercury with Mars

द्वितीय भाव में बुध और मंगल की युति जातक को तीक्ष्ण बुद्धि और अत्यंत तार्किक वाणी प्रदान करती है। जातक अपनी वाकपटुता से दूसरों को परास्त करने में सक्षम होता है। हालांकि, Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यदि इस युति में सूर्य भी शामिल हो जाए, तो यह घरेलू अशांति, वित्तीय तनाव और बच्चों से संबंधित चिंताओं को जन्म दे सकती है।

Jupiter with Mars

द्वितीय भाव में बृहस्पति और मंगल की युति ज्ञान और ऊर्जा का एक सुंदर समन्वय है। यह युति जातक को धार्मिक, परोपकारी और अपने सिद्धांतों पर चलने वाला बनाती है। हालांकि, Marvel of Vedic Astrology के अनुसार, यदि इस युति पर शनि की दृष्टि पड़ रही हो, तो जातक को गले या वोकल कॉर्ड से संबंधित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

Venus with Mars

द्वितीय भाव में शुक्र और मंगल की युति जातक के भीतर तीव्र भौतिक और कामुक इच्छाओं को जन्म देती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यह युति जातक को विपरीत लिंग के प्रति अत्यधिक आकर्षित और वैवाहिक जीवन में तनाव का सामना करने वाला बना सकती है। जातक विलासिता की वस्तुओं पर अत्यधिक और आवेगी खर्च करता है।

Saturn with Mars

द्वितीय भाव में शनि और मंगल की युति को ज्योतिष में अत्यंत विस्फोटक और प्रतिकूल माना गया है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यह युति जातक के संचित धन का नाश करती है और उसे भारी कर्ज में ढकेल सकती है। Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि द्वितीयेश लग्न में इन दोनों ग्रहों के साथ स्थित हो, तो जातक के कान में गंभीर चोट लग सकती है।

Rahu with Mars

द्वितीय भाव में राहु और मंगल की युति जातक को अत्यधिक आक्रामक, अनियंत्रित और कटु भाषी बनाती है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यदि मंगल की महादशा में द्वितीय भाव में स्थित राहु की अंतर्दशा आए, तो जातक को गंभीर संकट या अकाल मृत्यु का भय रहता है। महिलाओं की कुंडली में यह युति वैधव्य का कारण भी बन सकती है।

Ketu with Mars

द्वितीय भाव में केतु और मंगल की युति वाणी में एक अजीब सा रूखापन और अलगाव पैदा करती है। जातक बिना सोचे-समझे ऐसी बातें बोल देता है जो दूसरों को आहत करती हैं। PAC DARES के अनुसार, यह युति द्वितीय भाव और उसके स्वामी को गंभीर रूप से पीड़ित करती है, जिससे आंखों की रोशनी को नुकसान पहुंच सकता है। द्वितीय भाव में तीन या अधिक ग्रहों की युति (Stellium) जातक के पूरे जीवन की ऊर्जा को इसी भाव पर केंद्रित कर देती है। उदाहरण के लिए, यदि मंगल, शनि और सूर्य एक साथ द्वितीय भाव में स्थित हों, तो Saravali के अनुसार जातक का धन पूरी तरह नष्ट हो जाता है। ऐसी भारी युतियां जातक को सांसारिक सुखों से विमुख कर आध्यात्मिक संन्यास (Sanyasa) की ओर भी धकेल सकती हैं।

Aspects Received

Jupiter's Aspect

द्वितीय भाव में स्थित मंगल पर जब देवगुरु बृहस्पति की शुभ दृष्टि पड़ती है, तो यह मंगल की उग्रता और क्रूरता को काफी हद तक शांत कर देती है। बृहस्पति की यह दृष्टि जातक की वाणी में ज्ञान, शालीनता और मधुरता लाती है। यह दृष्टि जातक को वित्तीय संकटों से बचाती है और उसे अपनी पैतृक संपत्ति को सुरक्षित रखने में मदद करती है।

Saturn's Aspect

शनि की मंगल पर दृष्टि को ज्योतिष में अत्यधिक तनावपूर्ण माना जाता है। जब शनि द्वितीय भाव में स्थित मंगल को देखता है, तो यह जातक के धन संचय में भारी रुकावटें और देरी पैदा करता है। जातक की वाणी अत्यंत कठोर और रूखी हो सकती है। पारिवारिक संबंधों में हमेशा एक ठंडापन या दूरी बनी रहती है, और जातक को दांतों या मसूड़ों की पुरानी बीमारियां हो सकती हैं।

Rahu's Aspect

राहु की दृष्टि द्वितीय भाव के मंगल पर पड़ने से जातक की वित्तीय महत्वाकांक्षाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ जाती हैं। जातक त्वरित धन कमाने के लिए अनैतिक या सट्टा बाजार जैसे तरीकों को अपना सकता है, जिससे अंततः उसे भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यह दृष्टि जातक की वाणी में भ्रम और झूठ का पुट भी ला सकती है।

Ketu's Aspect

केतु की दृष्टि मंगल पर पड़ने से जातक के भीतर अपने परिवार और संचित धन के प्रति एक अजीब सी विरक्ति या उदासीनता पैदा होती है। जातक को ऐसा महसूस हो सकता है कि उसे अपने परिवार से वह प्रेम और समर्थन नहीं मिल रहा है जिसका वह हकदार है। यह दृष्टि अचानक होने वाली वित्तीय हानियों का भी संकेत देती है।

Strength and Condition

द्वितीय भाव में मंगल के वास्तविक परिणामों को समझने के लिए केवल उसकी स्थिति देखना पर्याप्त नहीं है; इसके लिए निम्नलिखित पांच महत्वपूर्ण घटकों का विश्लेषण करना अनिवार्य है:

Baladi Avastha

जातक को सबसे पहले मंगल की अंश-आधारित अवस्था (Avastha [state]) की जांच करनी चाहिए। विषम राशियों (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ) में अंशों का क्रम इस प्रकार चलता है:
  • 0 से 6 अंश: बाल अवस्था (Bala [infant]) - अत्यंत कमजोर परिणाम।
  • 6 से 12 अंश: कुमार अवस्था - मध्यम परिणाम।
  • 12 से 18 अंश: युवा अवस्था (Yuva [youthful]) - पूर्ण और शक्तिशाली परिणाम।
  • 18 से 24 अंश: वृद्ध अवस्था - अत्यंत क्षीण परिणाम।
  • 24 से 30 अंश: मृत अवस्था (Mrita [dead]) - शून्य परिणाम।
सम राशियों (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन) में यह क्रम पूरी तरह से उलट जाता है, जहां 0 से 6 अंश मृत अवस्था होती है और 24 से 30 अंश बाल अवस्था होती है।

Ashtakavarga

अष्टकवर्ग (Ashtakavarga) तालिका में द्वितीय भाव को प्राप्त होने वाले बिंदुओं (bindu) की संख्या यह तय करती है कि मंगल इस भाव के शुभ फलों को कितनी आसानी से दे पाएगा। यदि द्वितीय भाव में 5 या अधिक बिंदु हैं, तो मंगल विपरीत परिस्थितियों में भी जातक के धन और परिवार की रक्षा करेगा। इसके विपरीत, यदि बिंदु 3 से कम हैं, तो उच्च का मंगल भी अपने पूर्ण शुभ फल देने में असमर्थ रहेगा।

Nakshatra

मंगल किस नक्षत्र में स्थित है और उस नक्षत्र का स्वामी कुंडली में किस स्थिति में है, यह परिणाम को बहुत अधिक प्रभावित करता है। यदि मंगल अपने मित्र ग्रहों (सूर्य, बृहस्पति, चंद्रमा) के नक्षत्रों में हो, तो परिणाम अनुकूल होते हैं। यदि वह शत्रु नक्षत्रों में हो, तो जातक को जीवन में अधिक संघर्ष करना पड़ता है।

Navamsha (D9)

नवांश कुंडली (Navamsha [D9 chart]) लग्न कुंडली के वादे की पुष्टि या उसे रद्द करती है। यदि मंगल लग्न कुंडली (D1) के द्वितीय भाव में उच्च का है, लेकिन नवांश कुंडली (D9) में वह नीच का या शत्रु राशि में चला जाता है, तो जातक को मिलने वाले शुभ फलों में भारी कमी आएगी। इसके विपरीत, यदि वह नवांश में मजबूत होता है, तो उसके अशुभ फल कम हो जाते हैं।

Condition of the Lord of the 2nd House

द्वितीय भाव का स्वामी (भावपति) मंगल का मित्र है, तटस्थ है या शत्रु, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि द्वितीयेश स्वयं मजबूत, उच्च का या शुभ भावों में स्थित है, तो वह मंगल की उग्रता को नियंत्रित कर जातक को धन और सुखी पारिवारिक जीवन प्रदान करेगा। यदि द्वितीयेश स्वयं पीड़ित या नीच का है, तो मंगल द्वितीय भाव को पूरी तरह से बिगाड़ देगा।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में, किसी भी भाव के परिणामों का अंतिम निर्णय उस भाव के कस्पल सब-लॉर्ड (Cuspal Sub-Lord) द्वारा किया जाता है। यदि मंगल द्वितीय भाव का उप-स्वामी (Sub-Lord) बनता है, तो वह जातक के जीवन में धन, वाणी और परिवार के मामलों का मुख्य निर्धारक बन जाता है। KP सिद्धांतों के अनुसार, यदि मंगल द्वितीय भाव का उप-स्वामी होकर सकारात्मक भावों (2, 6, 10, 11) का कार्येश (Significator) बनता है, तो जातक को अपने करियर में भारी वित्तीय सफलता और पदोन्नति मिलती है। इसके विपरीत, यदि वह नकारात्मक भावों (5, 8, 12) से जुड़ता है, तो भारी वित्तीय नुकसान और पारिवारिक विवाद होते हैं। Applications of Cuspal Interlinks के अनुसार, जब मंगल बुध के नक्षत्र में गोचर करता है और बुध द्वितीय भाव का उप-स्वामी होता है, तो जातक की वाणी में अत्यधिक तार्किकता और दूसरों को धमकाने की प्रवृत्ति देखी जाती है।

Practical Significations

Financial Management

  • त्वरित आय लेकिन आवेगी खर्च: जातक के पास धन कमाने की तीव्र इच्छा और ऊर्जा होती है, जिससे वह कई स्रोतों से धन अर्जित कर सकता है।
  • बचत में कठिनाई: जातक अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं रख पाता और आवेगी रूप से बड़ी खरीदारी कर लेता है, जिससे उसकी बचत प्रभावित होती है।

Speech and Communication

  • तीखी और अधिकारपूर्ण वाणी: जातक की वाणी में एक स्वाभाविक आक्रामकता और स्पष्टवादिता होती है, जो कभी-कभी दूसरों को अपमानजनक लग सकती है।
  • तर्क करने की अद्भुत क्षमता: जातक किसी भी बहस में बहुत जल्दी हार नहीं मानता और अपने तर्कों से सामने वाले को चुप कराने की क्षमता रखता है।

Family Dynamics

  • पारिवारिक मतभेद: द्वितीय भाव में मंगल की उपस्थिति परिवार के सदस्यों के साथ वैचारिक मतभेद और बार-बार होने वाले विवादों को दर्शाती है।
  • भाइयों से वित्तीय संबंध: जातक को अपने भाइयों के साथ वित्तीय लेनदेन में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि यह संबंधों में दरार का कारण बन सकता है।

Frequently Asked Questions

क्या द्वितीय भाव में मंगल हमेशा धन का नुकसान कराता है?
नहीं, यह हमेशा धन का नुकसान नहीं कराता। यदि मंगल अपनी स्वराशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में स्थित हो, तो यह जातक को अत्यधिक धनवान और सफल बनाता है। नुकसान केवल तब होता है जब मंगल पीड़ित या नीच राशि (कर्क) में हो।
क्या द्वितीय भाव का मंगल वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है?
हां, द्वितीय भाव में मंगल की स्थिति Kuja Dosha (कुज दोष) का निर्माण करती है। यह स्थिति जातक की वाणी को कठोर बनाकर और पारिवारिक कलह पैदा करके वैवाहिक जीवन के सुख और जीवनसाथी की लंबी आयु को प्रभावित कर सकती है।
द्वितीय भाव में मंगल होने पर जातक की वाणी कैसी होती है?
ऐसे जातक की वाणी आमतौर पर तीखी, स्पष्ट, अधिकारपूर्ण और तार्किक होती है। यदि मंगल पर शुभ ग्रहों का प्रभाव न हो, तो जातक बिना सोचे-समझे कठोर शब्द बोल देता है, जिससे उसके संबंध खराब होते हैं।
क्या द्वितीय भाव का मंगल नेत्र रोग दे सकता है?
हां, शास्त्रीय ग्रंथों जैसे Phaladeepika के अनुसार, यदि सूर्य या चंद्रमा द्वितीय या द्वादश भाव में हों और उन पर मंगल या शनि की दृष्टि हो, तो जातक को गंभीर नेत्र रोगों का सामना करना पड़ता है।
मंगल के लिए कौन सी राशि द्वितीय भाव में सबसे अच्छी मानी जाती है?
मकर राशि द्वितीय भाव में मंगल के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि यहां मंगल उच्च का होता है। इसके अलावा मेष और वृश्चिक राशियां भी अत्यंत शुभ परिणाम देती हैं।
क्या द्वितीय भाव का मंगल जातक को गणितज्ञ बना सकता है?
हां, यदि द्वितीय भाव में मंगल के साथ चंद्रमा की युति हो और उस पर बुध की दृष्टि पड़ रही हो, तो जातक एक बहुत अच्छा गणितज्ञ या तार्किक विश्लेषक बनता है।

Remedial Measures

Sarvartha Chintamani और अन्य शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि द्वितीय भाव में मंगल पीड़ित हो और अशुभ परिणाम दे रहा हो, तो जातक को निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:
  • भोजन की शुद्धता: जातक को तामसिक, बासी या अत्यधिक तीखा भोजन करने से बचना चाहिए, क्योंकि पीड़ित मंगल जातक को अशुद्ध भोजन की ओर प्रवृत्त करता है।
  • वाणी पर नियंत्रण: जातक को मौन रहने का अभ्यास करना चाहिए और किसी भी विवाद में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बचना चाहिए।

Standard Remedies for Mars

  • आध्यात्मिक उपाय: प्रतिदिन हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। प्रत्येक मंगलवार को भगवान कार्तिकेय या हनुमान जी की पूजा करें और उन्हें लाल फूल अर्पित करें।
  • व्यवहारिक उपाय: अपने छोटे भाइयों का सम्मान करें और उनके साथ किसी भी प्रकार के विवाद से बचें। सेना, पुलिस या चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों की सहायता करें।
  • दान (Charity): मंगलवार के दिन लाल मसूर की दाल, तांबा, लाल कपड़ा या गुड़ किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में दान करें।
  • रत्न (Gemstone): मंगल का मुख्य रत्न लाल मूंगा (Red Coral) है।
    चेतावनी: लाल मूंगा केवल तभी धारण करना चाहिए जब मंगल जातक की कुंडली के लिए एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (Functional Benefic) हो, जैसे मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न के जातकों के लिए। वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न के जातकों को मूंगा पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि यह उनके जीवन में दुर्घटनाओं और विवादों को बढ़ा सकता है।
अपनी कुंडली में द्वितीय भाव के मंगल का सटीक प्रभाव जानने के लिए, जातक को सबसे पहले मंगल की राशि, उसके अंश, अष्टकवर्ग में प्राप्त बिंदुओं और द्वितीयेश की स्थिति का सावधानीपूर्वक विश्लेषण करना चाहिए। एक योग्य ज्योतिषी से पूरी कुंडली का विश्लेषण कराने के बाद ही किसी अंतिम निष्कर्ष और रत्न धारण करने के निर्णय पर पहुंचना चाहिए।

See this in your own chart

Rajvidya calculates this placement from your birth details and reads it alongside the rest of your chart.

Create your free kundli

Free to start — no card required.

Sources consulted

The 44 classical and modern works consulted while compiling this entry. Statements held by a single text are attributed to that text in the body above.

These works are listed as sources consulted, not as material reproduced. Positions are summarised in our own words; no passage is quoted from a work still in copyright, and no translation is reproduced. Titles name the work a position is drawn from and imply no endorsement by its author or publisher. Where a reading rests on one text alone, treat it as that text's position rather than settled doctrine.

  1. (I)Timing of Events Crux of Vedic Astrology 1
  2. 300 Important Combinations
  3. Applications of Cuspal Interlinks Part 1
  4. Bhavartha Chandrika
  5. Bhrigu Nandi Nadi
  6. Birth Time Rectification – The Chandra Navamsa Paddathi
  7. Book. Encyclopedia of vedic astro dasha systems
  8. Book. Key to Learn K.P. cuspal system S.P. Khullar
  9. book2 for CD
  10. Brihat Parashara Hora Shastra
  11. Cancellation of Manglik Dosh
  12. Dhanu Vijaya- Jyothisha Prakaasham
  13. Doctrines of Suka Nadi
  14. Essence of Nadi Astrology
  15. Fateand Fortune Part II
  16. Gandantha Casestudies
  17. Hindu Vedic Astrology 01
  18. How to Judge a Horoscope
  19. How to judge horoscope 1
  20. Jataka Parijata
  21. Jataka tattvam Kadalangudi
  22. K.P reader 3
  23. Kalamsa and Cuspal Interlinks
  24. Key to Learn K.P. cuspal system S.P. Khullar
  25. KN RAO S Astrology Lessons
  26. Marvel of Vedic Astrology Blind Chart Analysis
  27. Muhurtha Or Electional Astrology
  28. My Experiences in Astrology B.V Raman
  29. New Techniques of Prediction
  30. Notable Horoscopes
  31. Phaladeepika
  32. prashna tantra
  33. Predictive Jyotish
  34. Predictive Stellar Astrology
  35. Roots of Naadi Astrology
  36. Roots of Nadi
  37. Saral Vastu Shastra Hindi
  38. Saravali
  39. Sarvartha Chintamani
  40. Satyajatakam Dhruva Nadi
  41. Scientific Hindu Astrology
  42. vedic astro textbook
  43. Western Astrology - Planets in Signs and Houses
  44. Yashodhar Mehta’s Researchin Astrology

Community

No community activity yet. Be the first to leave a comment, review, or question!

Sign in to leave a comment, review, question, or suggestion.

Sign In to Contribute

Related entries

पूरा विश्वकोश देखें