Mars in the 3rd House

44 min read · Drawn from 54 classical and modern works · Updated August 2026

वैदिक ज्योतिष में, मंगल (जिसे संस्कृत में Mangal या Kuja [मंगल] कहा जाता है) जब तीसरे भाव में, जिसे Tritiya Bhava [तीसरा भाव] या Sahaja Bhava [सहज भाव] भी कहा जाता है, स्थित होता है, तो यह एक अत्यंत ऊर्जावान स्थिति बनाता है। तीसरा भाव मुख्य रूप से साहस, छोटे भाई-बहनों, व्यक्तिगत प्रयासों, संचार और दृढ़ संकल्प को नियंत्रित करता है, जबकि मंगल शक्ति, आक्रामकता, तकनीकी कौशल और भाई-बहनों के नैसर्गिक कारक, यानी Bhratrukaraka [भाई-बहनों का कारक] का प्रतिनिधित्व करता है। सामान्य तौर पर, यह संयोजन जातक में अदम्य साहस, अटूट दृढ़ संकल्प और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रवृत्ति पैदा करता है, हालांकि भाई-बहनों के साथ संबंधों में यह कुछ तनाव भी ला सकता है। इस स्थिति के अंतिम और सटीक परिणाम मंगल की राशिगत गरिमा, युति और उस पर पड़ने वाली Drishti [दृष्टि] द्वारा तय होते हैं। वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रंथ अक्सर अत्यधिक स्पष्ट और कठोर शब्दों में भविष्यवाणियां प्रदान करते हैं; पाठकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी एकल स्थिति अलगाव में काम नहीं करती है और ऐसे गंभीर परिणाम केवल तभी प्रकट होते हैं जब संपूर्ण कुंडली में कई अन्य प्रतिकूल प्रभाव मौजूद हों।

Classical Position

शास्त्रीय ज्योतिषीय परंपराओं में इस बात पर व्यापक सहमति है कि तीसरे भाव में मंगल की उपस्थिति जातक को अत्यधिक साहसी और बाधाओं से लड़ने में सक्षम बनाती है। पराशरीय सिद्धांत के अनुसार, यदि कोई Papa Graha [क्रूर या पापी ग्रह] तीसरे, छठे या ग्यारहवें भाव में स्थित हो, तो यह जातक को निरंतर प्रयास करने और जीवन की सभी बाधाओं को पार करने की असाधारण क्षमता प्रदान करता है। भाई-बहनों और संपत्ति के मामले में, Sarvartha Chintamani स्पष्ट रूप से सहमति व्यक्त करता है कि यदि चतुर्थ भाव या उसका स्वामी तीसरे भाव के स्वामी और मंगल के साथ संबंध बनाता है, तो जातक को अपने भाई से संपत्ति की प्राप्ति होती है। इसके विपरीत, भाई-बहनों के सुख में कमी के संबंध में भी ग्रंथों में सहमति है। Phaladeepika के अनुसार, यदि तीसरे भाव का स्वामी और उसका कारक (मंगल) दोनों कमजोर हों और कुंडली के किसी Dusthana [दुस्थान या अशुभ भाव, जैसे 6, 8, 12] में स्थित हों, तो यह भाई-बहनों के विनाश या उनके सुख में भारी कमी का कारण बनता है।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय स्रोतों और नाडी ग्रंथों में इस स्थिति को लेकर कई विशिष्ट और भिन्न दृष्टिकोण भी मिलते हैं, जिन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है:

Physical Appearance and Health

  • कान के रोग: Phaladeepika के अनुसार, यदि तीसरा भाव, ग्यारहवां भाव और Jupiter [बृहस्पति] मंगल या शनि से युक्त या दृष्ट हों, तो जातक को कान से संबंधित बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है। एक अन्य नाडी ग्रंथ के अनुसार, यदि मंगल तीसरे भाव में 'प्रेतपुरी' अंश में स्थित हो, तो कान में गंभीर विकार की संभावना होती है।
  • गले और गर्दन की समस्या: एक चिकित्सा ज्योतिष ग्रंथ के अनुसार, यदि शनि और मंगल दोनों तीसरे भाव पर अपनी दृष्टि डालते हैं, तो जातक को गर्दन या गले से संबंधित पुरानी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
  • हड्डियों की चोट: Sanketanidhi के अनुसार, तीसरे भाव में Mars with Sun (मंगल और सूर्य की युति) होने पर, यदि वहां कोई शुभ ग्रह मौजूद न हो, तो जातक को हड्डियों के टूटने या फ्रैक्चर का सामना करना पड़ सकता है।
  • सिर की समस्या: एक नाडी ग्रंथ के अनुसार, यदि तीसरे भाव का स्वामी और Lagna [लग्न] स्वामी के नवांश का स्वामी केंद्र में हों, या शनि, मंगल और राहु एक ही राशि में हों, तो जातक को सिर में गंभीर पीड़ा या चोट लग सकती है।
  • त्वचा के रोग: एक शास्त्रीय स्रोत के अनुसार, यदि मंगल तीसरे भाव में स्थित हो (वृषभ और कर्क राशि को छोड़कर) और उस पर शनि, केतु या सूर्य का प्रभाव हो, तो जातक को शरीर पर फोड़े-फुंसियां होने की प्रवृत्ति होती है।

Temperament and Mental State

  • आक्रामक संचार: पाश्चात्य ज्योतिषीय विचारों के अनुसार, तीसरे भाव का मंगल जातक को बहुत सीधा, आक्रामक और स्पष्टवादी वक्ता बनाता है, जिससे उसका मन अक्सर अशांत रहता है।
  • कम साहस और अधिक बहनें: Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, कुछ विशेष परिस्थितियों में तीसरे भाव का मंगल जातक को कम साहसी बना सकता है, जिसके परिणामस्वरूप जातक की बहनें अधिक और भाई कम होते हैं।
  • तार्किक और आक्रामक भाषण: कृष्णमूर्ति पद्धति (केपी) के अनुसार, यदि मंगल अपनी Dasha [महादशा] या Bhukti [अंतर्दशा] में बुध के नक्षत्र से गोचर करता है, तो जातक अत्यधिक तर्क-वितर्क करने वाला बन जाता है और अपनी वाणी से दूसरों को डराता है।

Wealth, Status and Life Events

  • भाइयों से धन लाभ: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि दूसरे भाव का स्वामी तीसरे भाव में मंगल के साथ स्थित हो और उस पर लग्न स्वामी की दृष्टि हो, तो जातक को अपने भाइयों के माध्यम से प्रचुर धन की प्राप्ति होती है।
  • शत्रुओं पर विजय: एक शास्त्रीय ग्रंथ के अनुसार, यदि तीसरे भाव में मंगल मजबूत स्थिति में हो, तो जातक को कड़े संघर्ष के बाद भारी धन लाभ होता है और वह अपने शत्रुओं पर पूर्ण विजय प्राप्त करता है।
  • भाई का प्रसिद्ध होना: Jataka Parijata के अनुसार, यदि तीसरे भाव का स्वामी लग्न में हो या तीसरे भाव का स्वामी और मंगल दोनों एक साथ मजबूत होकर किसी भाव में बैठे हों, तो जातक का भाई अत्यंत प्रसिद्ध और सम्मानित होता है।
  • भाई की पत्नी से संबंध: Satyajatakam (ध्रुव नाडी) के अनुसार, यदि तीसरे भाव का स्वामी सातवें भाव में किसी स्त्री राशि या नक्षत्र में हो और वह शनि और मंगल के बीच फंसा हो (पापकर्तरी योग), तो जातक के अपने भाई की पत्नी के साथ अनुचित संबंध हो सकते हैं।
  • युद्ध में मृत्यु: एक शास्त्रीय स्रोत के अनुसार, यदि छठे या आठवें भाव का स्वामी मंगल के साथ तीसरे भाव के स्वामी से युति करे और वे शनि या राहु के साथ क्रूर Navamsha [नवमांश] में हों, तो जातक की मृत्यु संघर्ष या युद्ध के मैदान में हो सकती है।
  • भाई के श्राप से संतान हानि: एक चिकित्सा ज्योतिष ग्रंथ के अनुसार, यदि तीसरे भाव का स्वामी पांचवें भाव में मंगल और राहु के साथ हो, और पांचवें व लग्न का स्वामी आठवें भाव में हो, तो जातक को 'भ्रातृश्राप' (भाई के श्राप) के कारण संतान हानि का सामना करना पड़ता है।

Aspect and Directional Strength

तीसरे भाव में स्थित होकर, मंगल अपनी पूर्ण सातवीं Drishti [दृष्टि] नौवें भाव पर डालता है, जिसे Dharma Bhava [धर्म और भाग्य का भाव] कहा जाता है। चूंकि मंगल एक क्रूर और उग्र ग्रह है, इसलिए नौवें भाव पर इसकी दृष्टि जातक के भाग्य, धार्मिक विश्वासों और पिता के साथ संबंधों में एक प्रकार का संघर्ष या आक्रामकता पैदा करती है। जातक अपने सिद्धांतों और मान्यताओं की रक्षा के लिए अत्यधिक आक्रामक हो सकता है। वह भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय अपने पुरुषार्थ और कर्म पर अधिक विश्वास करता है। दिशात्मक बल या Digbala [दिशा बल] के संदर्भ में, मंगल दसवें भाव में सबसे मजबूत होता है। तीसरे भाव में मंगल को Digbala प्राप्त नहीं होता है, लेकिन एक उपचय भाव होने के कारण, यहाँ मंगल का होना जातक को अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और अपने लक्ष्यों के प्रति लगातार प्रयास करने के लिए अत्यधिक अनुकूल और शक्तिशाली बनाता है।

The Placement Across the Twelve Rashis

Aries (Mesha)

मेष राशि में मंगल अपनी moolatrikona [मूलत्रिकोण] राशि में होता है, जिसका स्वामी स्वयं मंगल है। यह स्थिति कुंभ लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल तीसरे और दसवें भाव का स्वामी बनता है। Saravali के अनुसार, यदि जन्म के समय Mars in Aries (मंगल मेष राशि में) हो, तो जातक अत्यंत तेजस्वी, सत्यवादी, शूरवीर, राजा के समान, युद्धप्रिय, साहसिक कार्यों में रुचि रखने वाला और सेना या किसी बड़े समूह का प्रमुख होता है। यह स्थिति जातक को अत्यधिक मुखर, आक्रामक, ऊर्जावान और उदार बनाती है। चूंकि मंगल तीसरे भाव में अपनी ही राशि में है, इसलिए यह जातक को अदम्य साहस और अद्वितीय संगठनात्मक क्षमता प्रदान करता है। जातक अपने करियर में अपनी मेहनत के बल पर सर्वोच्च स्थान प्राप्त करता है।

Taurus (Vrishabha)

वृषभ राशि में मंगल neutral [तटस्थ] गरिमा में होता है, जिसका स्वामी शुक्र है। यह स्थिति मीन लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल दूसरे और नौवें भाव का स्वामी बनता है। पाश्चात्य ज्योतिष के अनुसार, Mars in Taurus (मंगल वृषभ राशि में) होने पर जातक सीधे संघर्ष से बचता है, लेकिन वह अत्यधिक जिद्दी और दृढ़ निश्चयी होता है। वह अपने काम में धीमा लेकिन निरंतर प्रयास करने वाला होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, जातक विपरीत लिंग के प्रभाव में आसानी से आ सकता है। मंगल की दशा के दौरान जातक में धार्मिक सुधार और आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रति गहरी रुचि जागृत होती है। यह दर्शाता है कि जातक अपने साहस का उपयोग पारिवारिक धन संचय और धार्मिक कार्यों में करेगा।

Gemini (Mithuna)

मिथुन राशि में मंगल inimical [शत्रुवत] गरिमा में होता है, जिसका स्वामी बुध है। यह स्थिति मेष लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल पहले और आठवें भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Gemini (मंगल मिथुन राशि में) जातक को कलात्मक और वैज्ञानिक रुचि, महत्वाकांक्षा और साहसिक कार्य प्रदान करता है, लेकिन वह स्वभाव से थोड़ा अविवेकी और अत्यधिक बातूनी हो सकता है। यदि शनि कुंडली में मजबूत न हो, तो जातक में निरंतरता की कमी हो सकती है। यशोधर मेहता के शोध के अनुसार, जातक कभी-कभी आलसी और निष्क्रिय भी हो सकता है। इसकी दशा के दौरान जातक को यात्राएं, कलात्मक विकास और अत्यधिक वित्तीय खर्चों का सामना करना पड़ता है।

Cancer (Karka)

कर्क राशि में मंगल debilitated [नीच का] होता है, जिसका स्वामी चंद्रमा है। यह स्थिति वृषभ लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल बारहवें और सातवें भाव का स्वामी बनता है। Timing of Events के अनुसार, तीसरे भाव में नीच का मंगल आमतौर पर छोटे भाई-बहनों के सुख में कमी करता है, लेकिन यदि यह कर्क राशि में हो, तो एक बहुत ही शक्तिशाली छोटे भाई का जन्म हो सकता है। जातक अत्यधिक संवेदनशील, भावनात्मक और अपने परिवार के प्रति समर्पित होता है, लेकिन वह बहुत जल्दी चिढ़ जाता है। चूंकि मंगल की शक्ति यहाँ क्षीण हो जाती है, इसलिए जातक के प्रयासों में कभी-कभी आत्मविश्वास की कमी दिखाई दे सकती है, और उसे अपने वैवाहिक जीवन तथा बाहरी संबंधों में अधिक ऊर्जा लगानी पड़ती है।

Leo (Simha)

सिंह राशि में मंगल friendly [मित्रवत] गरिमा में होता है, जिसका स्वामी सूर्य है। यह स्थिति मिथुन लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल ग्यारहवें और छठे भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Leo (मंगल सिंह राशि में) होने से जातक में गूढ़ विद्याओं के प्रति रुचि, गणित और खगोल विज्ञान का अध्ययन करने की इच्छा, बड़ों के प्रति सम्मान और मौलिक सोच विकसित होती है। यदि इस मंगल पर बृहस्पति की दृष्टि हो, तो जातक शासकों का प्रिय, एक उत्कृष्ट शिक्षक और स्वच्छ मन वाला होता है। नाडी ज्योतिष के अनुसार, यह जातक को अत्यधिक अहंकारी और शाही ठाट-बाठ की इच्छा देता है। जातक अपने साहस से बड़े लाभ अर्जित करता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करता है।

Virgo (Kanya)

कन्या राशि में मंगल inimical [शत्रुवत] गरिमा में होता है, जिसका स्वामी बुध है। यह स्थिति कर्क लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल दसवें और पांचवें भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Virgo (मंगल कन्या राशि में) जातक को हर छोटी से छोटी बात पर अत्यधिक ध्यान देने वाला और बारीक काम करने में कुशल बनाता है। हालांकि, जातक स्वभाव से प्रतिशोधी, आत्म-अभिमानी, दिखावा करने वाला और दूसरों की आलोचना करने वाला हो सकता है। पाश्चात्य ज्योतिष के अनुसार, जातक अपने संबंधों में बहुत अधिक मीन-मेख निकालने वाला होता है। यह दर्शाता है कि जातक की बुद्धि और करियर उसके व्यक्तिगत प्रयासों से जुड़े हैं, लेकिन अत्यधिक विश्लेषणात्मक स्वभाव के कारण भाई-बहनों से मतभेद हो सकते हैं।

Libra (Tula)

तुला राशि में मंगल neutral [तटस्थ] गरिमा में होता है, जिसका स्वामी शुक्र है। यह स्थिति सिंह लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल नौवें और चौथे भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Libra (मंगल तुला राशि में) होने पर जातक महत्वाकांक्षी, आत्म-विश्वासी और गहरी अवलोकन क्षमता वाला होता है। वह अपने परिवार से गहरा प्यार करता है, लेकिन महिलाओं द्वारा धोखा खा सकता है और बहुत जल्दी उत्तेजित हो जाता है। मंगल की दशा के दौरान जातक के विवाह और करियर में उन्नति के बेहतरीन अवसर मिलते हैं, हालांकि शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता कुछ कम हो सकती है। जातक के प्रयास मुख्य रूप से घरेलू सुख और भाग्य निर्माण की ओर केंद्रित होते हैं।

Scorpio (Vrischika)

वृश्चिक राशि में मंगल अपनी own sign [स्वराशि] में होता है, जिसका स्वामी स्वयं मंगल है। यह स्थिति कन्या लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल आठवें और तीसरे भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Scorpio (मंगल वृश्चिक राशि में) जातक को अत्यंत गहरी और तीव्र भावनाएं, मजबूत इच्छाशक्ति, उत्कृष्ट स्मृति और एक कुशल राजनयिक का व्यवहार प्रदान करता है। नाडी ज्योतिष के अनुसार, इस स्थिति में जातक के जीवन में सर्जरी या शल्य चिकित्सा की संभावना बढ़ जाती है। मंगल की दशा के दौरान जातक को भूमि के क्रय-विक्रय और कृषि कार्यों में बड़ी सफलता मिलती है। जातक का साहस और गुप्त विद्याओं में रुचि बहुत गहरी होती है।

Sagittarius (Dhanu)

धनु राशि में मंगल friendly [मित्रवत] गरिमा में होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति तुला लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल सातवें और दूसरे भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Sagittarius (मंगल धनु राशि में) होने पर जातक सज्जन, स्पष्टवादी, अधीर और कभी-कभी झगड़ालू होता है। वह बड़े विचारों और जीवन के आनंदमय तरीकों की तलाश में रहता है। एक अन्य शास्त्रीय स्रोत के अनुसार, जातक को कड़े संघर्ष के बाद ही सुख और धन की प्राप्ति होती है। यदि मंगल पीड़ित न हो, तो यह अत्यंत शुभ परिणाम देता है। जातक के प्रयास मुख्य रूप से साझेदारी, व्यापार और पारिवारिक संपत्ति के विकास की ओर निर्देशित होते हैं।

Capricorn (Makara)

मकर राशि में मंगल exalted [उच्च का] होता है, जिसका स्वामी शनि है। यह स्थिति वृश्चिक लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल छठे और पहले भाव का स्वामी बनता है। Saravali के अनुसार, यदि Mars in Capricorn (मंगल मकर राशि में) हो, तो जातक अत्यंत धनवान, प्रसिद्ध, सफल और अदम्य साहसी होता है। जातक में असाधारण शारीरिक सहनशक्ति और कार्य करने की ऊर्जा होती है। मंगल की दशा के दौरान जातक को नए उद्यमों, पदोन्नति और अदालती मामलों में शानदार सफलता मिलती है। चूंकि मंगल यहाँ अपनी सर्वोच्च शक्ति में होता है, इसलिए जातक अपने व्यक्तिगत प्रयासों और पराक्रम से जीवन की सभी कठिनाइयों और शत्रुओं को पूरी तरह कुचलने में सक्षम होता है।

Aquarius (Kumbha)

कुंभ राशि में मंगल neutral [तटस्थ] गरिमा में होता है, जिसका स्वामी शनि है। यह स्थिति धनु लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल पांचवें और बारहवें भाव का स्वामी बनता है। नाडी ज्योतिष के अनुसार, Mars in Aquarius (मंगल कुंभ राशि में) होने पर जातक अपने गुरु की सेवा करने वाला और आयुर्वेद या चिकित्सा पद्धतियों का अभ्यास करने वाला हो सकता है। मंगल की दशा के दौरान जातक के वित्तीय और पारिवारिक जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अपने साहस और बुद्धि का उपयोग सामाजिक कल्याण, अनुसंधान या आध्यात्मिक यात्राओं के लिए करेगा, हालांकि संतान पक्ष को लेकर कुछ चिंताएं रह सकती हैं।

Pisces (Meena)

मीन राशि में मंगल friendly [मित्रवत] गरिमा में होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति मकर लग्न को दर्शाती है, जहाँ मंगल चौथे और ग्यारहवें भाव का स्वामी बनता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Mars in Pisces (मंगल मीन राशि में) होने पर जातक कभी-कभी उदास, विदेशों में भटकने वाला, रिश्तेदारों द्वारा उपेक्षित और चापलूसी पसंद करने वाला हो सकता है। नाडी ज्योतिष के अनुसार, जातक को भूमि के माध्यम से अच्छा वित्तीय लाभ होता है। यदि इस मंगल पर सूर्य और बुध दोनों की दृष्टि हो, तो जातक को रंगमंच, सिनेमा या कला के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिलती है। जातक के प्रयास मुख्य रूप से सुख-सुविधाओं और संपत्ति के अर्जन की ओर होते हैं।

Conjunctions in This House

Sun

तीसरे भाव में Sun with Mars (सूर्य और मंगल की युति) जातक को अत्यधिक पराक्रमी, साहसी और निडर बनाती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि तीसरे भाव में सूर्य, मंगल और शनि की युति हो, तो जातक अत्यंत बुद्धिमान और शक्तिशाली होता है। हालांकि, यदि इस युति पर किसी शुभ ग्रह का प्रभाव न हो, तो जातक को हड्डियों में चोट या फ्रैक्चर का सामना करना पड़ सकता है। यह युति जातक के भीतर नेतृत्व क्षमता को बहुत बढ़ा देती है।

Moon

तीसरे भाव में Moon with Mars (चंद्रमा और मंगल की युति) होने पर, यदि चंद्रमा शुभ ग्रहों से युक्त न हो, तो इसे सामान्यतः अशुभ माना जाता है। हालांकि, यह युति एक प्रकार का 'चंद्र-मंगल योग' बनाती है, जो जातक को अपने प्रयासों से धन कमाने के लिए प्रेरित करता है। जातक स्वभाव से अत्यधिक भावुक और आवेगी हो सकता है, जिससे भाई-बहनों के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव आते हैं।

Mercury

तीसरे भाव में Mercury with Mars (बुध और मंगल की युति) जातक को तीक्ष्ण बुद्धि और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है। कृष्णमूर्ति पद्धति के अनुसार, यदि मंगल और बुध का संबंध तीसरे और ग्यारहवें भाव से हो, तो जातक लेखन, मुद्रण (प्रिंटिंग) और पुस्तक प्रकाशन के कार्यों में बड़ी सफलता प्राप्त करता है। हालांकि, यह युति कभी-कभी जातक को अत्यधिक तर्क-वितर्क करने वाला और कटु भाषी बना सकती है।

Jupiter

तीसरे भाव में Jupiter with Mars (बृहस्पति और मंगल की युति) एक अत्यंत शुभ और पवित्र योग का निर्माण करती है। यदि तीसरे भाव का स्वामी केंद्र में हो और उच्च का मंगल बृहस्पति के साथ त्रिकोण में स्थित हो, तो यह जातक को धार्मिक, परोपकारी और समाज में अत्यधिक सम्मानित बनाता है। बृहस्पति की उपस्थिति मंगल की उग्रता को शांत करती है, जिससे जातक अपने साहस का उपयोग सही और न्यायपूर्ण कार्यों के लिए करता है।

Venus

तीसरे भाव में Venus with Mars (शुक्र और मंगल की युति) जातक को कलात्मक, उत्साही और विपरीत लिंग के प्रति अत्यधिक आकर्षित बनाती है। नाडी ज्योतिष के अनुसार, यदि मंगल, शुक्र और शनि तीसरे, छठे या सातवें भाव में एक साथ हों, तो जातक का जीवनसाथी नौकरी करने वाला होता है और जातक को 34-35 वर्ष की आयु के बाद बड़ी वित्तीय समृद्धि मिलती है, हालांकि वैवाहिक जीवन में कुछ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं।

Saturn

तीसरे भाव में Saturn with Mars (शनि और मंगल की युति) एक अत्यंत जटिल और तनावपूर्ण स्थिति पैदा करती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि शनि और मंगल तीसरे भाव में एक साथ हों, तीसरे भाव का स्वामी मंगल से पीड़ित हो और चंद्रमा पर इनका प्रतिकूल प्रभाव हो, तो यह भाई-बहनों के लिए अत्यंत कष्टकारी होता है। यह युति जातक को अत्यधिक परिश्रमी बनाती है, लेकिन उसे हर कदम पर कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ता है।

Rahu

तीसरे भाव में Rahu with Mars (राहु और मंगल की युति) जातक के भीतर अदम्य और अनियंत्रित साहस पैदा करती है। पराशरीय सिद्धांतों के अनुसार, यदि मंगल राहु के साथ हो और तीसरे भाव का स्वामी नीच का हो, तो यह छोटे भाई-बहनों के सुख को पूरी तरह समाप्त कर देता है। जातक अत्यंत महत्वाकांक्षी होता है और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

Ketu

तीसरे भाव में Ketu with Mars (केतु और मंगल की युति) जातक को आध्यात्मिक रूप से दृढ़ निश्चयी बनाती है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, तीसरे भाव में केतु या मंगल जैसे क्रूर ग्रहों की उपस्थिति जातक को मानसिक रूप से अत्यंत मजबूत और आध्यात्मिक साधनाओं के प्रति समर्पित बनाती है। जातक में किसी भी प्रकार के भय का अभाव होता है, लेकिन भाई-बहनों से अलगाव की स्थिति बन सकती है। तीन या अधिक क्रूर ग्रहों की तीसरे भाव में युति जातक को अत्यंत जिद्दी, कभी-कभी समाज विरोधी या अत्यधिक संघर्षमय जीवन दे सकती है। हालांकि, यदि इस संकेंद्रण पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो, तो यह जातक को एक महान तपस्वी या संन्यासी भी बना सकता है, विशेष रूप से जब चंद्रमा का संबंध विशिष्ट अंशों से हो।

Aspects Received

Jupiter

बृहस्पति की दृष्टि जब तीसरे भाव में स्थित मंगल पर पड़ती है, तो यह मंगल की उग्र और विनाशकारी ऊर्जा को पूरी तरह से नियंत्रित और परिष्कृत कर देती है। यह जातक के साहस को धर्म और न्याय के मार्ग पर ले जाती है। जातक अपने भाइयों के प्रति अत्यंत स्नेही होता है और समाज में अपनी बुद्धिमत्ता के कारण सम्मान प्राप्त करता है।

Saturn

शनि की दृष्टि जब तीसरे भाव के मंगल पर पड़ती है, तो यह जातक के जीवन में अत्यधिक विलंब, कड़ा परिश्रम और संघर्ष की स्थिति पैदा करती है। चिकित्सा ज्योतिष के अनुसार, यह दृष्टि गर्दन, कंधे या कान से संबंधित पुरानी बीमारियों का कारण बन सकती है। हालांकि, यह जातक को अत्यधिक अनुशासित और धैर्यवान भी बनाती है।

Rahu

राहु की दृष्टि जब तीसरे भाव के मंगल पर पड़ती है, तो यह जातक के भीतर छिपे हुए आक्रामक और विद्रोही स्वभाव को बहुत अधिक बढ़ा देती है। जातक जोखिम भरे कार्यों में रुचि लेने लगता है और उसमें किसी भी तरह से सफल होने की तीव्र लालसा पैदा होती है, जिससे कभी-कभी कानूनी विवादों की संभावना बढ़ जाती है।

Ketu

केतु की दृष्टि जब तीसरे भाव के मंगल पर पड़ती है, तो यह जातक के प्रयासों में निरंतरता की कमी लाती है। जातक कभी अत्यधिक ऊर्जा के साथ काम करता है, तो कभी पूरी तरह से उदासीन हो जाता है। यह दृष्टि जातक को भौतिक प्रयासों के बजाय आध्यात्मिक और गुप्त विषयों की ओर अधिक आकर्षित करती है।

Strength and Condition

तीसरे भाव में मंगल के वास्तविक परिणामों को समझने के लिए निम्नलिखित ज्योतिषीय घटकों का गहन विश्लेषण करना अनिवार्य है:

Baladi Avastha

जातक को सबसे पहले मंगल की अंशगत स्थिति की जांच करनी चाहिए, जो इस प्रकार काम करती है:
  • विषम राशियों में (Aries, Gemini, Leo, Libra, Sagittarius, Aquarius): 0-6° तक मंगल Bala [बाल्यावस्था] में होता है जो परिणाम देने में कमजोर है; 6-12° तक Kumara [कौमारावस्था]; 12-18° तक Yuva [युवावस्था] जो पूर्ण परिणाम देता है; 18-24° तक Vridha [वृद्धावस्था]; और 24-30° तक Mrita [मृतावस्था] में होता है जो शून्य परिणाम देता है।
  • सम राशियों में (Taurus, Cancer, Virgo, Scorpio, Capricorn, Pisces): यह क्रम पूरी तरह से उलट जाता है। यहाँ 0-6° तक मंगल Mrita [मृतावस्था] में होता है और 24-30° तक मंगल Bala [बाल्यावस्था] में होता है।

Ashtakavarga

अष्टकवर्ग चार्ट में तीसरे भाव को मिलने वाले Bindu [अंक] अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि तीसरे भाव में 5 या उससे अधिक बिंदु हों, तो मंगल अपनी दशा में जातक को अत्यधिक साहस, संपत्ति और शत्रुओं पर विजय प्रदान करेगा। इसके विपरीत, यदि बिंदु 4 से कम हों, तो जातक के प्रयास अक्सर निष्फल हो जाते हैं।

Nakshatra

मंगल जिस नक्षत्र में स्थित है, उसका स्वामी मंगल के परिणामों को बहुत प्रभावित करता है। यदि मंगल अपने मित्र ग्रहों (सूर्य, चंद्र, बृहस्पति) के नक्षत्र में हो, तो परिणाम अत्यंत शुभ होते हैं। यदि वह शत्रु ग्रहों (बुध, राहु) के नक्षत्र में हो, तो जातक को संचार और भाई-बहनों के मामले में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

Navamsa (D9)

नवमांश कुंडली जन्म कुंडली के वादों की पुष्टि या उन्हें रद्द करती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि मंगल नवमांश कुंडली में तीसरे भाव में उच्च का होकर स्थित हो और उस पर बली चंद्रमा की दृष्टि पड़ रही हो, तो यह जन्म कुंडली के कई दोषों को पूरी तरह से समाप्त कर देता है और जातक को अदम्य शक्ति प्रदान करता है।

Condition of the House Lord

तीसरे भाव के स्वामी (भावेश) की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण है। यदि तीसरे भाव का स्वामी मजबूत, शुभ ग्रहों से दृष्ट और केंद्र या त्रिकोण में हो, तो मंगल इस भाव के सभी शुभ परिणामों को पूर्ण रूप से प्रदान करता है। यदि भावेश कमजोर या दुस्थान में हो, तो मंगल के शुभ प्रभाव बहुत कम हो जाते हैं।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (केपी) के अनुसार, किसी भी भाव के परिणामों का अंतिम निर्णय उस भाव के कस्पल सब-लॉर्ड (उप-स्वामी) द्वारा किया जाता है। यदि मंगल तीसरे भाव का सब-लॉर्ड बनता है या तीसरे और ग्यारहवें भाव के कार्येश (सिग्निफिकेटर) के रूप में काम करता है, तो यह जातक को संचार, लेखन और तकनीकी क्षेत्रों में बड़ी सफलता देता है। केपी सिद्धांतों के अनुसार, किसी पुस्तक के लेखन कार्य को पूरा करने के लिए तीसरे और ग्यारहवें भाव के कार्येशों का बुध से संबंध होना अनिवार्य है। पुस्तक के प्रकाशन के लिए बृहस्पति का इन भावों से संबंध होना चाहिए, जबकि पुस्तक की छपाई या मुद्रण के लिए मंगल और बुध का तीसरे और ग्यारहवें भाव से जुड़ना आवश्यक माना गया है। इसके अतिरिक्त, यदि मंगल अपनी दशा-भुक्ति के दौरान शुक्र (जो बारहवें भाव का सब-लॉर्ड हो) के नक्षत्र में गोचर करता है और तीसरा भाव छठे, सातवें या आठवें भाव से जुड़ता है, तो जातक को निवेश में भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

Practical Significations

Courage and Initiative

  • अदम्य साहस: जातक किसी भी कठिन परिस्थिति में घबराता नहीं है और अपनी शारीरिक व मानसिक शक्ति से बाधाओं को दूर करता है।
  • तकनीकी कौशल: जातक मशीनरी, इंजीनियरिंग, कंप्यूटर या हथियारों के संचालन में अत्यधिक कुशल होता है।

Siblings and Family

  • भाई-बहनों से संबंध: जातक के अपने भाई-बहनों के साथ संबंध अत्यधिक प्रतिस्पर्धी होते हैं। शुभ प्रभाव में भाइयों से संपत्ति का लाभ होता है, जबकि अशुभ प्रभाव में विवाद की स्थिति बनती है।
  • पारिवारिक जिम्मेदारी: जातक अपने परिवार की रक्षा और उनके भरण-पोषण के लिए हमेशा तत्पर रहता है।

Communication and Skills

  • स्पष्टवादी वक्ता: जातक बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी बात सीधे तौर पर रखता है, जिससे कभी-कभी लोग उसे कठोर समझ लेते हैं।
  • लेखन और प्रकाशन: यदि बुध का सहयोग मिले, तो जातक एक उत्कृष्ट लेखक, प्रकाशक या मुद्रक बनता है।

Frequently Asked Questions

क्या तीसरे भाव में मंगल भाई-बहनों के लिए हमेशा खराब होता है?
नहीं, यह हमेशा खराब नहीं होता। यदि तीसरे भाव का स्वामी मजबूत हो और मंगल अपनी स्वराशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में हो, तो जातक को भाइयों से अत्यधिक सहयोग और संपत्ति की प्राप्ति होती है। केवल पीड़ित होने पर ही यह भाई-बहनों से मतभेद या उनके सुख में कमी का कारण बनता है।
तीसरे भाव में मंगल होने पर जातक का करियर कैसा रहता है?
तीसरा भाव प्रयासों का है, इसलिए यहाँ मंगल जातक को अत्यधिक उद्यमी बनाता है। जातक सेना, पुलिस, इंजीनियरिंग, खेल, लेखन, प्रकाशन, मीडिया या किसी भी ऐसे क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकता है जहाँ शारीरिक या मानसिक साहस और तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती है।
क्या तीसरे भाव का मंगल कान की बीमारियों का कारण बन सकता है?
हाँ, शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार यदि तीसरे भाव में मंगल 'प्रेतपुरी' अंश में हो, या तीसरा भाव, ग्यारहवां भाव और बृहस्पति दोनों मंगल और शनि से पीड़ित हों, तो जातक को कान से संबंधित रोग या सुनने की क्षमता में कमी का सामना करना पड़ सकता है।
मंगल के लिए तीसरे भाव में कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
मकर राशि सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि यहाँ मंगल उच्च का होता है, जो जातक को अदम्य साहस और सफलता देता है। इसके अलावा मेष, वृश्चिक, सिंह और धनु राशियां भी मंगल के लिए यहाँ अत्यंत शुभ और शक्तिशाली परिणाम देने वाली मानी गई हैं।
क्या तीसरे भाव में मंगल होने से दुर्घटनाओं का खतरा रहता है?
यदि तीसरे भाव में मंगल के साथ छठे भाव का स्वामी स्थित हो, या मंगल शनि और राहु के साथ क्रूर नवमांश में हो, तो जातक के जीवन में संघर्ष, चोट या दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। शुभ ग्रहों की दृष्टि होने पर यह खतरा पूरी तरह टल जाता है।
क्या तीसरे भाव का मंगल वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है?
सीधे तौर पर नहीं, लेकिन यदि तीसरे भाव का स्वामी सातवें भाव में शनि और मंगल से घिरा हो, तो यह वैवाहिक जीवन में गंभीर तनाव या भाई की पत्नी के साथ अनुचित संबंधों का कारण बन सकता है। सामान्य तौर पर, यह स्थिति सीधे तौर पर विवाह में देरी नहीं करती है।

Remedial Measures

यदि कुंडली में तीसरे भाव का मंगल पीड़ित होकर अशुभ परिणाम दे रहा हो, तो निम्नलिखित शास्त्रीय और व्यावहारिक उपाय किए जा सकते हैं: नाडी ज्योतिष के अनुसार, यदि मंगल के कारण कोई गंभीर बीमारी या दुर्घटना का योग बन रहा हो, तो जातक को मंगल से संबंधित धातु (तांबा या लोहा) के रासायनिक संयोजन वाली दवाओं का सेवन करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, गंभीर संकटों और अकाल मृत्यु के भय से बचने के लिए 'महामृत्युंजय जप' का अनुष्ठान करना अत्यंत फलदायी और सुरक्षा प्रदान करने वाला माना गया है।

Standard Remedies for Mars

  • आध्यात्मिक उपाय: प्रत्येक मंगलवार को हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का पाठ करें। भगवान कार्तिकेय या हनुमान जी की पूजा करें और उन्हें लाल फूल अर्पित करें।
  • व्यवहारिक उपाय: अपने छोटे भाई-बहनों के साथ संबंध मधुर रखें और उनकी हर संभव सहायता करें। अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और बिना वजह के वाद-विवाद से बचें। अपनी अतिरिक्त शारीरिक ऊर्जा को खेल या व्यायाम में लगाएं।
  • दान कार्य: मंगलवार के दिन लाल मसूर की दाल, तांबे के बर्तन, लाल कपड़े, गुड़ या मीठा भोजन जरूरतमंदों या मजदूरों को दान करें।
  • रत्न चिकित्सा: मंगल की शक्ति को बढ़ाने के लिए मंगलवार के दिन सोने या तांबे की अंगूठी में अनामिका उंगली में लाल मूंगा (Red Coral) धारण करें। विशेष चेतावनी: मूंगा केवल तभी धारण करना चाहिए जब मंगल आपकी कुंडली के लिए एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (जैसे मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु या मीन लग्न) हो। यदि मंगल आपकी कुंडली के लिए एक कार्यात्मक अशुभ ग्रह (जैसे वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर या कुंभ लग्न) है, तो मूंगा कभी धारण न करें, क्योंकि यह मंगल के नकारात्मक प्रभावों को और अधिक बढ़ा देगा।
जातक को अपनी कुंडली में तीसरे भाव के मंगल का विश्लेषण करते समय केवल इस एकल स्थिति को देखकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। उसे मंगल के सटीक अंश, उसकी राशि, तीसरे भाव के स्वामी की स्थिति, अष्टकवर्ग के बिंदु और नवमांश कुंडली में मंगल की स्थिति का समग्र रूप से अध्ययन करना चाहिए, तभी कोई सटीक और व्यावहारिक निष्कर्ष निकाला जा सकता है।

See this in your own chart

Rajvidya calculates this placement from your birth details and reads it alongside the rest of your chart.

Create your free kundli

Free to start — no card required.

Sources consulted

The 54 classical and modern works consulted while compiling this entry. Statements held by a single text are attributed to that text in the body above.

These works are listed as sources consulted, not as material reproduced. Positions are summarised in our own words; no passage is quoted from a work still in copyright, and no translation is reproduced. Titles name the work a position is drawn from and imply no endorsement by its author or publisher. Where a reading rests on one text alone, treat it as that text's position rather than settled doctrine.

  1. (I)Timing of Events Crux of Vedic Astrology 1
  2. 300 Important Combinations
  3. Advanced Techniques of Astrological Predictions
  4. An Astrobiographical Sketchof Dr BVRaman By KNRao Part1
  5. Applications of Cuspal Interlinks Part 1
  6. arudha pada
  7. Bhrigu Nadi Jyotisham
  8. Birth Time Rectification – The Chandra Navamsa Paddathi
  9. Book. Encyclopedia of vedic astro dasha systems
  10. Book. Prasana A Contemporary Treatise
  11. book1 for CD
  12. book2 for CD
  13. Brihat Parashara Hora Shastra
  14. BV Raman Notable Horoscopes
  15. Doctrines of Suka Nadi(1)
  16. Essence of Nadi Astrology Rao R.G.
  17. Graha Yuddha
  18. Hindu Predictive Astrology B.V. Raman
  19. How to Judge a Horoscope
  20. How to judge horoscope 1
  21. Jaimini Sutras
  22. Jatak Alankaar
  23. Jataka Parijata
  24. Jataka tattvam Kadalangudi
  25. Jyotisha Chandrika
  26. K.P reader 3
  27. Kalamsa and Cuspal Interlinks
  28. KN RAO S Astrology Lessons
  29. Marvel of Vedic Astrology Blind Chart Analysis
  30. medical astrology horoscop of sthethoscop
  31. munden astrology Mediniya Jyotish
  32. My Experiences in Astrology B.V Raman
  33. Navamsa by C.S. Patel
  34. Navamsa in Astrology by C. S. Patel
  35. Navamsa or the D/9 Chart in Astrology
  36. Neecha Bhanga Rajayoga ANew Look
  37. New Techniques of Prediction
  38. Notable Horoscopes
  39. Phaladeepika
  40. Prasana A Contemporary Treatise
  41. Predictive Jyotish by m n kedaar
  42. Predictive Stellar Astrology
  43. Roots of Naadi Astrology
  44. Roots of Nadi Satyanarayan Naik
  45. Saral Vastu Shastra Hindi
  46. Saravali
  47. Sarvartha Chintamani
  48. Sarvartha Chinthamani
  49. Satyajatakam Dhruva Nadi
  50. Scientific Hindu Astrology
  51. Uttara Kalamrita
  52. vedic astro textbook
  53. Vrishabha Vijaya Jyothisha Prakaasham
  54. Western Astrology - Planets in Signs and Houses

Community

No community activity yet. Be the first to leave a comment, review, or question!

Sign in to leave a comment, review, question, or suggestion.

Sign In to Contribute

Related entries

पूरा विश्वकोश देखें