Mars in the 10th House
42 min read · Drawn from 51 classical and modern works · Updated August 2026
Classical Position
वैदिक ज्योतिष के स्वीकृत सिद्धांतों के अनुसार, दशम भाव में मंगल की उपस्थिति जातक को अत्यधिक साहसी और कार्य-उन्मुख बनाती है। शास्त्रीय परंपरा इस बात पर पूरी तरह सहमत है कि यदि दशम भाव में सूर्य और मंगल एक साथ स्थित हों, तो जातक समाज में एक अत्यंत प्रभावशाली, शक्तिशाली और सम्मानित व्यक्ति बनता है। यह युति जातक को प्रशासनिक क्षमता और नेतृत्व के शिखर पर ले जाती है।Variant Readings
विभिन्न शास्त्रीय और नाड़ी ग्रंथों में दशम भाव में मंगल की स्थिति को लेकर कई विशिष्ट और भिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं। इन विचारों को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता है:Career, Status and Professional Life
Saravali के अनुसार, दशम भाव में मंगल होने से जातक अपने कार्यों में अत्यंत निपुण, वीर, अजेय होता है और वह महत्वपूर्ण या उच्च पदस्थ लोगों की सेवा करता है। Jataka Parijata का मत है कि दशम भाव का मंगल जातक को पराक्रम, प्रचुर धन और समाज में महान प्रसिद्धि प्रदान करता है। आधुनिक पश्चिमी ज्योतिषीय दृष्टिकोण (Western Astrology Planets in Signs and Houses) यह संकेत देता है कि यह स्थिति ऐसे व्यवसायों की ओर ले जाती है जिनमें अत्यधिक ऊर्जा, पहल और त्वरित कार्रवाई की आवश्यकता होती है, हालांकि इसके कारण कभी-कभी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वैचारिक मतभेद या टकराव भी हो सकता है। Saravali का एक अन्य मत यह भी है कि ऐसा जातक साहसिक कार्यों में गहरी रुचि रखने वाला, विदेशों में रहने वाला और स्वभाव से थोड़ा कठोर या क्रूर हो सकता है। महिलाओं की कुंडली के संदर्भ में, STRIJATAKA का मानना है कि दशम भाव में मंगल जातक को कभी-कभी लीक से हटकर या संदेहास्पद कार्य करने की प्रवृत्ति, लीक से इतर धार्मिक विचार और अत्यधिक निर्भीकता दे सकता है। Jatak Alankaar के अनुसार, इस भाव में मंगल की उपस्थिति जातक को भूमि, संपत्ति और कृषि संबंधी गतिविधियों में विशेष रूप से संलग्न रखती है। नाड़ी परंपरा (Doctrines of Suka Nadi) के अनुसार, यदि दशमेश (दशम भाव का स्वामी) और मंगल का आपस में संबंध हो, तो जातक भूमि और भवनों के माध्यम से कृषि कार्यों को बड़े पैमाने पर अपनाता है। यदि मंगल दशम भाव में अपनी नीच (Neecha) राशि में हो, लेकिन उसे लग्न केंद्र में Neecha Bhanga (नीच भंग) प्राप्त हो रहा हो और लग्न स्वामी चंद्रमा उसे देख रहा हो, तो शास्त्रीय ग्रंथ How to judge horoscope 2 इसे एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शक्तिशाली Raja Yoga के रूप में स्वीकार करता है। Phaladeepika के अनुसार, यदि मंगल अपनी उच्च राशि में या किसी ऊर्ध्वमुख (Urdhvamukha) राशि में होकर दशम या एकादश भाव में स्थित हो, तो जातक अपनी Dasha अवधि के दौरान राज्य या महान अधिकार प्राप्त करता है।Physical Appearance, Health and Temperament
एक नाड़ी ग्रंथ (Kalamsa and Cuspal Interlinks) के अनुसार, यदि मंगल पहले, छठे और दशम भाव का कार्येश बनता है, तो जातक अत्यधिक प्रतिस्पर्धी स्वभाव का होता है, अपने पद के लिए कठिन संघर्ष करता है, और उसे पित्त या अग्नि तत्व से संबंधित शारीरिक बीमारियां हो सकती हैं। यदि छठे भाव का स्वामी मंगल एक पापी ग्रह के रूप में दशम भाव में स्थित हो और उस पर शनि की दृष्टि हो, तो 300 Important Combinations के अनुसार यह मलाशय से संबंधित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत दे सकता है। दशम भाव में स्थित मंगल की Dasha अवधि के दौरान, Sarvartha Chintamani के अनुसार जातक को मानसिक संताप, भय, फोड़े-फुंसी, चेचक, भोजन के प्रति अरुचि, संपत्ति की हानि और अनपेक्षित विदेश यात्राओं का सामना करना पड़ सकता है।Wealth, Property and Family Events
Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव का स्वामी दशम भाव में हो और दशम भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में स्थित हो, और साथ ही मंगल अत्यंत बली हो, तो जातक के पास प्रचुर मात्रा में अचल संपत्ति और भूमि होती है। इसके विपरीत, यदि दशम भाव का स्वामी, सूर्य और मंगल तीनों ही पापी ग्रहों के Navamsha में हों या अपनी नीच राशि के अत्यंत निकट हों, तो Sarvartha Chintamani के अनुसार जातक को सरकारी आदेशों या कानूनी विवादों के कारण अपनी भूमि से हाथ धोना पड़ सकता है। नाड़ी ग्रंथ (Doctrines of Suka Nadi) यह संकेत देता है कि यदि मंगल दशमेश के साथ प्रतिकूल रूप से जुड़ता है, तो दशमेश की Dasha और एकादशेश या मंगल की Bhukti के दौरान जातक के बड़े भाई-बहन को गंभीर संकट का सामना करना पड़ सकता है। यदि दशम भाव में स्थित मंगल पर पापी ग्रहों की दृष्टि हो, तो Sarvartha Chintamani के अनुसार यह जातक के मामा के जीवन के लिए अनिष्टकारी हो सकता है।Aspect and Directional Strength
दशम भाव में स्थित होकर, मंगल अपनी पूर्ण चतुर्थ, सप्तम और अष्टम Drishti (दृष्टि) क्रमशः प्रथम (लग्न), चतुर्थ और पंचम भाव पर डालता है। चूंकि मंगल एक Krura (उग्र) ग्रह है, इसलिए चतुर्थ भाव (घर, माता, सुख और भूमि) पर इसकी दृष्टि घरेलू वातावरण में कुछ तनाव या अचानक बदलाव ला सकती है, लेकिन यह जातक को भूमि अर्जित करने के लिए अत्यधिक प्रेरित भी करती है। लग्न पर इसकी दृष्टि जातक को एक साहसी, ऊर्जावान और कभी-कभी आक्रामक व्यक्तित्व प्रदान करती है। दिशात्मक बल के संदर्भ में, मंगल दशम भाव में पूर्ण दिग्बल (Digbala) प्राप्त करता है। यह कुंडली का वह स्थान है जहां मंगल अपनी सर्वोत्तम कार्यक्षमता में होता है। दिग्बल प्राप्त होने के कारण, मंगल जातक को अद्भुत प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व के गुण, और विपरीत परिस्थितियों में भी बिना डरे कार्य करने की अद्वितीय शक्ति प्रदान करता है।The Placement Across the Twelve Rashis
Aries (Mesha)
दशम भाव में मेष राशि होने पर मंगल अपनी Moolatrikona राशि में स्थित होता है, जिसका स्वामी स्वयं मंगल है। यह स्थिति कर्क लग्न (Lagna) को दर्शाती है, जहां मंगल पंचम (बुद्धि, संतान) और दशम (करियर) भाव का स्वामी होकर अत्यंत शुभ Yogakaraka बनता है। Saravali के अनुसार, मेष राशि का मंगल जातक को अत्यंत तेजस्वी, सत्यवादी, पराक्रमी, राजा के समान प्रभावशाली, युद्धप्रिय, साहसी और किसी सेना या समूह का प्रमुख बनाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यह स्थिति जातक को अत्यधिक मुखर, आक्रामक, ऊर्जावान, अद्भुत संगठनात्मक क्षमता से युक्त, उदार और अत्यंत सतर्क बनाती है। हालांकि, इसकी तीव्र किरणें कभी-कभी जीवन में बड़े संघर्षों को भी जन्म देती हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अपनी तीक्ष्ण बुद्धि और रणनीतिक कौशल के बल पर अपने करियर में सर्वोच्च स्थान और मान-सम्मान प्राप्त करेगा।Taurus (Vrishabha)
दशम भाव में वृषभ राशि होने पर मंगल एक तटस्थ राशि में होता है, जिसका स्वामी शुक्र है। यह स्थिति सिंह लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल चतुर्थ (सुख, भूमि) और नवम (भाग्य) भाव का स्वामी होकर एक परम Yogakaraka ग्रह बनता है। पश्चिमी ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार, वृषभ राशि में मंगल जातक को सीधे संघर्षों से बचाने वाला, लेकिन अपने विचारों में अत्यधिक जिद्दी और दृढ़ बनाता है। वह किसी भी कार्य को शुरू करने में धीमा हो सकता है, लेकिन अत्यंत निरंतरता के साथ काम करता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यह स्थिति जातक को थोड़ा अधिकारवादी, जिद्दी और विपरीत लिंग के प्रति संवेदनशील बना सकती है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इस स्थिति में मंगल की Dasha अवधि जातक के भीतर धार्मिक सुधार और आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रति गहरी रुचि जागृत करती है। नाड़ी ग्रंथ Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि शनि भी वृषभ राशि में मंगल के साथ स्थित हो, तो जातक लेखाकार (accountant) के रूप में अपना करियर बना सकता है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अपने भाग्य और अचल संपत्ति के सहयोग से व्यावसायिक जीवन में धीरे-धीरे लेकिन अत्यंत मजबूत और स्थायी सफलता प्राप्त करेगा।Gemini (Mithuna)
दशम भाव में मिथुन राशि होने पर मंगल अपने शत्रु बुध की राशि में स्थित होता है। यह स्थिति कन्या लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल तृतीय (पुरुषार्थ) और अष्टम (बाधाएं, परिवर्तन) भाव का स्वामी होता है। पश्चिमी ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार, यदि कुंडली में शनि मजबूत न हो, तो मिथुन राशि का मंगल जातक में निरंतरता और धैर्य की कमी पैदा करता है। ज्योतिषीय शोध ग्रंथों के अनुसार, मिथुन राशि में मंगल जातक को कभी-कभी मानसिक रूप से सक्रिय लेकिन शारीरिक रूप से आलसी बना सकता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यह जातक को कलात्मक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण, साहसिक यात्राओं की इच्छा, लेकिन स्वभाव में थोड़ी जल्दबाजी और वाचालता प्रदान करता है, जिससे कभी-कभी उसकी ऊर्जा व्यर्थ नष्ट हो जाती है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इसकी Dasha अवधि में जातक का जीवन अत्यंत व्यस्त रहता है, जिसमें छोटी यात्राएं, कलात्मक विकास, अत्यधिक खर्च और पारिवारिक मतभेद शामिल हो सकते हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक को अपने करियर में सफलता पाने के लिए अपनी मानसिक ऊर्जा को केंद्रित करना होगा और वाणी पर नियंत्रण रखना होगा।Cancer (Karka)
दशम भाव में कर्क राशि होने पर मंगल अपनी नीच (Neecha) राशि में होता है, जिसका स्वामी चंद्रमा है। यह स्थिति तुला लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल द्वितीय (धन, वाणी) और सप्तम (साझेदारी) भाव का स्वामी होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, कर्क राशि में मंगल अपनी शक्ति खो देता है, जिससे जातक अत्यधिक संवेदनशील, भावनात्मक और अपने परिवार के प्रति समर्पित होता है। वह छोटी-छोटी बातों पर भी जल्दी आहत हो सकता है। हालांकि, The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, कर्क राशि का मंगल जातक को प्रचुर धन संचय करने में सहायता कर सकता है। यदि इस नीच मंगल पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि हो, तो Scientific Hindu Astrology के अनुसार जातक समाज में प्रसिद्ध, विद्वान, परोपकारी और मंत्री पद प्राप्त करने वाला होता है, हालांकि वह व्यक्तिगत सुखों से थोड़ा वंचित रह सकता है। यह स्थिति दर्शाती है कि यद्यपि मंगल यहाँ नीच का है, लेकिन दशम भाव में दिग्बल प्राप्त होने के कारण जातक अपनी व्यावसायिक चुनौतियों का डटकर सामना करेगा और अंततः धन और प्रतिष्ठा अर्जित करने में सफल होगा।Leo (Simha)
दशम भाव में सिंह राशि होने पर मंगल अपने परम मित्र सूर्य की राशि में स्थित होता है। यह स्थिति वृश्चिक लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल प्रथम (लग्न) और छठे (शत्रु, ऋण) भाव का स्वामी होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, सिंह राशि का मंगल जातक को गणित, खगोल विज्ञान, और रहस्यमयी विद्याओं के प्रति रुचि प्रदान करता है। ऐसा जातक बड़ों का सम्मान करने वाला, मौलिक विचारक, कुलीन और दृढ़ संकल्पी होता है, हालांकि उसका स्वभाव थोड़ा उग्र हो सकता है। यदि इस पर बृहस्पति की दृष्टि हो, तो जातक शासकों का प्रिय, एक कुशल शिक्षक और अत्यंत शुद्ध विचारों वाला होता है। नाड़ी ग्रंथ Essence of Nadi Astrology के अनुसार, सिंह राशि में मंगल होने से जातक के भीतर अत्यधिक स्वाभिमान और राजा के समान शासन करने की प्रवृत्ति जन्म लेती है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक का संपूर्ण व्यक्तित्व उसके करियर और कर्म क्षेत्र से जुड़ा होगा। वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हुए समाज में एक महान और प्रभावशाली नेता के रूप में उभरेगा।Virgo (Kanya)
दशम भाव में कन्या राशि होने पर मंगल अपने शत्रु बुध की राशि में स्थित होता है। यह स्थिति धनु लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल पंचम (बुद्धि) और द्वादश (व्यय, विदेश) भाव का स्वामी होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, कन्या राशि में मंगल जातक को हर छोटे से छोटे कार्य को अत्यंत बारीकी और सूक्ष्मता से करने की प्रवृत्ति देता है। हालांकि, यह जातक को थोड़ा प्रतिशोधी, अभिमानी, अत्यधिक आत्मविश्वासी और दिखावा करने वाला भी बना सकता है। पश्चिमी सिद्धांतों के अनुसार, ऐसा जातक अपने काम में अत्यधिक विश्लेषणात्मक होता है और संबंधों में आलोचनात्मक दृष्टिकोण रख सकता है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक का करियर अनुसंधान, तकनीकी विश्लेषण या विदेशी संपर्कों से जुड़ा हो सकता है, जहां उसकी सूक्ष्म दृष्टि उसे सफलता दिलाएगी।Libra (Tula)
दशम भाव में तुला राशि होने पर मंगल एक तटस्थ राशि में होता है, जिसका स्वामी शुक्र है। यह स्थिति मकर लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल चतुर्थ (भूमि, सुख) और एकादश (लाभ) भाव का स्वामी होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, तुला राशि का मंगल जातक को अत्यधिक सक्रिय, महत्वाकांक्षी और आत्मविश्वासी बनाता है। जातक के भीतर गजब की अवलोकन शक्ति और दूरदर्शिता होती है, लेकिन वह अपने प्रियजनों के साथ जल्दी ही विवादों में उलझ सकता है और कभी-कभी एकांत पसंद करता है। पश्चिमी सिद्धांतों के अनुसार, ऐसा जातक आम तौर पर शांतिप्रिय होता है, लेकिन अन्याय के खिलाफ वह अत्यधिक आक्रामक रूप से खड़ा हो सकता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इसकी Dasha अवधि जातक को विवाह के अवसर और करियर में बेहतरीन प्रगति प्रदान करती है, हालांकि शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता में थोड़ी कमी आ सकती है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अपनी महत्वाकांक्षा और सामाजिक संपर्कों के माध्यम से जीवन में प्रचुर लाभ और अचल संपत्ति अर्जित करने में सफल रहेगा।Scorpio (Vrischika)
दशम भाव में वृश्चिक राशि होने पर मंगल अपनी स्वराशि में स्थित होता है। यह स्थिति कुंभ लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल तृतीय (साहस) और दशम (करियर) भाव का स्वामी होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, वृश्चिक राशि का मंगल जातक को अत्यंत गहरी और तीव्र भावनाएं, दृढ़ इच्छाशक्ति, अद्भुत स्मरण शक्ति और एक कुशल राजनयिक (diplomat) का व्यवहार प्रदान करता है। पश्चिमी सिद्धांतों के अनुसार, ऐसा जातक अपने संघर्षों में अत्यधिक आक्रामक और समझौता न करने वाला हो सकता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इसकी Dasha अवधि के दौरान जातक को कृषि कार्यों में भारी सफलता और नई भूमि खरीदने के बेहतरीन अवसर प्राप्त होते हैं। नाड़ी सिद्धांतों के अनुसार, वृश्चिक राशि में मंगल की उपस्थिति जातक को शल्य चिकित्सा (surgery) या तकनीकी क्षेत्रों में सफलता दिला सकती है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अपने अदम्य साहस, रणनीतिक कौशल और स्व-प्रयासों के बल पर अपने व्यावसायिक जीवन में पूर्ण वर्चस्व और सफलता स्थापित करेगा।Sagittarius (Dhanu)
दशम भाव में धनु राशि होने पर मंगल अपने मित्र बृहस्पति की राशि में स्थित होता है। यह स्थिति मीन लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल द्वितीय (धन) और नवम (भाग्य) भाव का स्वामी होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, धनु राशि का मंगल जातक को स्पष्टवादी, ईमानदार, महत्वाकांक्षी, लेकिन स्वभाव से थोड़ा अधीर और तार्किक रूप से आक्रामक बनाता है। जातक बड़े और दूरगामी विचारों पर काम करना पसंद करता है, हालांकि उसे जीवन में कड़े संघर्ष के बाद ही वास्तविक सुख प्राप्त होता है। पश्चिमी ज्योतिष के अनुसार, इस राशि में मंगल की ऊर्जा रुक-रुक कर चलती है, जिससे जातक उबाऊ या एकरस कार्यों से जल्दी थक जाता है। Predictive Jyotish के अनुसार, यदि धनु राशि का मंगल किसी शुभ भाव (जैसे दशम भाव) में स्थित हो और पीड़ित न हो, तो यह जातक को अत्यंत शुभ और कल्याणकारी परिणाम प्रदान करता है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक का करियर ज्ञान, कानून, धर्म या उच्च शिक्षा से जुड़ा होगा, जहां उसका भाग्य और धन उसका पूरा साथ देंगे।Capricorn (Makara)
दशम भाव में मकर राशि होने पर मंगल अपनी उच्च राशि में स्थित होता है, जिसका स्वामी शनि है। यह स्थिति मेष लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल प्रथम (लग्न) और अष्टम (परिवर्तन) भाव का स्वामी होता है। Saravali के अनुसार, मकर राशि में स्थित मंगल जातक को अत्यंत धनवान, प्रसिद्ध, सफल और समाज में एक प्रतिष्ठित नायक बनाता है। पश्चिमी सिद्धांतों के अनुसार, ऐसा जातक अद्भुत शारीरिक सहनशक्ति, उच्च ऊर्जा और दीर्घकालिक लक्ष्यों को प्राप्त करने की अटूट क्षमता से संपन्न होता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, मकर राशि के मंगल की Dasha अवधि जातक के जीवन का सबसे भाग्यशाली समय होती है, जो नए व्यवसायों की शुरुआत, पदोन्नति और कानूनी विवादों में बड़ी विजय दिलाती है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अपनी उच्च ऊर्जा, अनुशासन और अदम्य साहस के बल पर करियर के उच्चतम शिखर पर पहुंचेगा और समाज में एक असाधारण मुकाम हासिल करेगा।Aquarius (Kumbha)
दशम भाव में कुंभ राशि होने पर मंगल एक तटस्थ राशि में होता है, जिसका स्वामी शनि है। यह स्थिति वृषभ लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल द्वादश (व्यय, विदेश) और सप्तम (साझेदारी) भाव का स्वामी होता है। नाड़ी ग्रंथ Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, कुंभ राशि का मंगल जातक को आयुर्वेद के अभ्यास या चिकित्सा क्षेत्र से जोड़ सकता है। यह जातक के भीतर अपने गुरु या आध्यात्मिक शिक्षक के प्रति गहरी सेवा भावना भी जागृत करता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इस स्थिति में मंगल की Dasha अवधि जातक के वित्तीय और घरेलू जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाती है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक का करियर विदेशी व्यापार, चिकित्सा, या सेवा-उन्मुख क्षेत्रों से जुड़ा हो सकता है, जहां उसे अपनी ऊर्जा को अनुशासित रखना होगा।Pisces (Meena)
दशम भाव में मीन राशि होने पर मंगल अपने मित्र बृहस्पति की राशि में स्थित होता है। यह स्थिति मिथुन लग्न को दर्शाती है, जहां मंगल एकादश (लाभ) और छठे (प्रतिस्पर्धा) भाव का स्वामी होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मीन राशि का मंगल जातक को थोड़ा संवेदनशील बना सकता है। कभी-कभी जातक को विदेशों में भटकना पड़ सकता है, या उसे वित्तीय धोखाधड़ी के कारण धन की हानि का सामना करना पड़ सकता है। वह प्रशंसा का भूखा हो सकता है। हालांकि, नाड़ी ग्रंथ Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, मीन राशि में मंगल होने से जातक को भूमि और अचल संपत्ति के माध्यम से बेहतरीन वित्तीय लाभ प्राप्त होते हैं। यदि मीन राशि के मंगल पर सूर्य और बुध दोनों की शुभ दृष्टि हो, तो जातक को सिनेमा, रंगमंच या कलात्मक क्षेत्रों में बड़ी सफलता प्राप्त होती है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अपनी कल्पनाशीलता और रणनीतिक कौशल के बल पर प्रतिस्पर्धा पर विजय प्राप्त करेगा और अपने करियर में लाभ के नए रास्ते खोलेगा।Conjunctions in This House
Sun
दशम भाव में सूर्य और मंगल की युति अत्यंत शक्तिशाली मानी जाती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यह युति जातक को समाज में एक अत्यंत प्रभावशाली और शक्तिशाली व्यक्ति बनाती है। यदि मंगल गरिमापूर्ण स्थिति में हो, तो जातक चिकित्सा के क्षेत्र में जा सकता है या राजनीति में उच्च पद प्राप्त कर सकता है।Moon
दशम भाव में चंद्रमा और मंगल की युति जातक को साहसी और पराक्रमी बनाती है। Saravali के अनुसार, ऐसा जातक हाथियों, घोड़ों और वाहनों से युक्त सेना के समान प्रचुर धन का स्वामी होता है। यह युति जीवन में सुख, संपत्ति और व्यावसायिक सफलता सुनिश्चित करती है।Mercury
दशम भाव में बुध और मंगल की युति जातक को तकनीकी और प्रशासनिक कार्यों में निपुण बनाती है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यह युति जातक को तीक्ष्ण बुद्धि, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और व्यावसायिक क्षेत्रों में बड़ी सफलता प्रदान करती है।Jupiter
दशम भाव में बृहस्पति और मंगल की युति जातक को धार्मिक और परोपकारी बनाती है। यदि बृहस्पति दशम भाव में हो और मंगल उसे देख रहा हो, तो जातक अपनी Dasha अवधि के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करता है और तीर्थ यात्राओं पर जाता है।Venus
दशम भाव में शुक्र और मंगल की युति जातक के भीतर कलात्मक और रचनात्मक ऊर्जा का संचार करती है। हालांकि, यदि यह युति शनि या राहु द्वारा पीड़ित हो, तो यह वैवाहिक जीवन में असंतोष या अनैतिक संबंधों की ओर झुकाव पैदा कर सकती है।Saturn
दशम भाव में शनि और मंगल की युति को शास्त्रीय ग्रंथों में संघर्षपूर्ण माना गया है। यदि इन पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो, तो जातक को करियर में अपयश और अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। बिना शुभ प्रभाव के यह युति जातक को कठिन शारीरिक श्रम की ओर धकेल सकती है।Rahu
दशम भाव में राहु और मंगल की युति जातक के भीतर अत्यधिक महत्वाकांक्षा और कुछ कर गुजरने की तीव्र इच्छा पैदा करती है। हालांकि, यदि चतुर्थ भाव भी पीड़ित हो, तो यह पारिवारिक जीवन में अशांति और माता के स्वास्थ्य के लिए कष्टकारी हो सकती है।Ketu
दशम भाव में केतु और मंगल की युति जातक को गुप्त विद्याओं या तकनीकी कार्यों की ओर प्रेरित करती है। यदि केतु दशम भाव में हो और मंगल उसे देख रहा हो, तो जातक को तरल पदार्थों, होटलों, या खान-पान के व्यवसाय से विशेष लाभ प्राप्त होता है। जब दशम भाव में तीन या अधिक पापी ग्रह एक साथ स्थित होते हैं, तो Saravali के अनुसार जातक दुर्भाग्यशाली, दरिद्र और शोकग्रस्त हो सकता है। यह भारी जमावड़ा जीवन की ऊर्जा को पूरी तरह से कर्म क्षेत्र में केंद्रित कर देता है, जो कभी-कभी संन्यास (Sanyasa) की प्रवृत्तियों को भी जन्म दे सकता है।Aspects Received
Jupiter
जब बृहस्पति दशम भाव में स्थित मंगल पर अपनी शुभ दृष्टि डालता है, तो यह मंगल की उग्रता को नियंत्रित करता है। यह प्रभाव जातक को समाज में सम्मान, धार्मिक कार्यों में रुचि और नैतिक नेतृत्व प्रदान करता है।Saturn
शनि की दृष्टि यदि दशम भाव के मंगल पर हो, तो यह कार्यों में अत्यधिक देरी, बाधाएं और संघर्ष लाती है। 300 Important Combinations के अनुसार, यदि छठे भाव का स्वामी मंगल दशम भाव में हो और शनि उसे देखता हो, तो यह मलाशय के कैंसर जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत दे सकता है।Mars
चूंकि मंगल स्वयं दशम भाव में स्थित है, इसलिए वह स्वयं पर दृष्टि नहीं डाल सकता। हालांकि, उसकी अपनी स्थिति ही इतनी मजबूत होती है कि वह पूरे चार्ट को प्रभावित करती है।Rahu
राहु की दृष्टि या प्रभाव दशम भाव के मंगल पर होने से जातक के भीतर महत्वाकांक्षा और तकनीकी कार्यों के प्रति गहरा आकर्षण पैदा होता है, लेकिन यह करियर में अचानक उतार-चढ़ाव और अनपेक्षित विवाद भी ला सकता है।Ketu
केतु का प्रभाव मंगल की ऊर्जा को आध्यात्मिक या गुप्त दिशा में मोड़ सकता है। यदि केतु दशम भाव में हो और मंगल उसे देखता हो, तो जातक को तरल पदार्थों, होटलों या खान-पान के व्यवसायों से लाभ हो सकता है।Strength and Condition
Baladi Avastha
मंगल की शक्ति का आकलन करने के लिए उसकी अंशात्मक स्थिति (Baladi Avastha) को देखना अनिवार्य है: विषम राशियों में: 0-6° शिशु (Bala), 6-12° कुमार (Kumara), 12-18° युवा (Yuva), 18-24° वृद्ध (Vriddha), 24-30° मृत (Mrita)। सम राशियों में: यह क्रम बिल्कुल उल्टा हो जाता है; 0-6° मृत (Mrita) और 24-30° शिशु (Bala) होता है। प्रभाव: युवा अवस्था में मंगल अपनी पूर्ण ऊर्जा और दशम भाव के शुभ फल प्रदान करता है, जबकि मृत या शिशु अवस्था में इसकी कार्यक्षमता अत्यंत कमजोर हो जाती है।Ashtakavarga
अष्टकवर्ग चार्ट में दशम भाव की स्थिति मंगल के प्रदर्शन को बहुत प्रभावित करती है: बिन्दु संख्या: दशम भाव में अष्टकवर्ग के उच्च बिन्दु (5 या अधिक) मंगल के व्यावसायिक वादों को सुदृढ़ करते हैं। प्रभाव: यदि बिन्दु संख्या कम हो, तो जातक को कड़ी मेहनत के बाद भी करियर में उचित पहचान और सफलता प्राप्त करने में कठिनाई होती है।Nakshatra
मंगल जिस नक्षत्र में स्थित है, उसका स्वामी इस प्लेसमेंट के अंतिम परिणाम को तय करता है: नक्षत्र स्वामी: यदि नक्षत्र स्वामी कुंडली में अनुकूल और बली हो, तो मंगल का दशम भाव में प्रदर्शन अत्यंत उत्कृष्ट हो जाता है।Navamsa (D9)
नवांश कुंडली मुख्य जन्म कुंडली के वादों की पुष्टि या उन्हें रद्द करती है: नवांश स्थिति: यदि मंगल नवांश कुंडली में अपनी उच्च या स्वराशि में हो, तो जन्म कुंडली का कमजोर मंगल भी शुभ फल देने लगता है। प्रभाव: इसके विपरीत, यदि मंगल नवांश में नीच या शत्रु राशि में हो, तो वह अपने शुभ प्रभावों को खो देता है।Lord of the 10th House
दशम भाव के स्वामी (दशमेश) की स्थिति मंगल के लिए आधार का काम करती है: दशमेश की स्थिति: यदि दशमेश स्वयं पीड़ित या कमजोर हो, तो दशम भाव में स्थित बली मंगल भी अपने पूर्ण और स्थायी परिणाम नहीं दे पाता।In the KP System
कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) के अनुसार, दशम भाव के कस्प (भाव-मध्य) का उप-स्वामी (Sub-lord) यह तय करता है कि जातक का करियर कैसा होगा। यदि मंगल प्रथम, छठे और दशम भाव का कार्येश (Significator) बनता है, तो जातक कड़ी प्रतिस्पर्धा पसंद करता है, प्रतिष्ठा के लिए कठिन परिश्रम करता है, और तकनीकी क्षेत्रों में सफल होता है। पुस्तक लेखन और प्रकाशन के संदर्भ में, Predictive Stellar Astrology के अनुसार, तीसरे और ग्यारहवें भाव के कार्येशों के साथ बुध का संबंध पुस्तक पूर्ण करने के लिए आवश्यक है, जबकि छपाई (printing) के लिए मंगल और बुध का तीसरे और ग्यारहवें भाव से जुड़ना अनिवार्य है।Practical Significations
व्यवसाय और करियर
सेना और पुलिस: दशम भाव में मंगल सेना, पुलिस या रक्षा बलों में उच्च पद का संकेत देता है। इंजीनियरिंग: जातक मैकेनिकल, सिविल या तकनीकी इंजीनियरिंग के क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है। भूमि और कृषि: भूमि, भवन निर्माण और कृषि संबंधी कार्यों में जातक की गहरी रुचि और लाभ होता है।सामाजिक प्रतिष्ठा
प्रभावशाली व्यक्तित्व: जातक समाज में एक साहसी, निडर और शक्तिशाली नेता के रूप में जाना जाता है। प्रतिस्पर्धा में विजय: जातक अपने शत्रुओं और प्रतिस्पर्धियों पर आसानी से विजय प्राप्त कर लेता है।Frequently Asked Questions
क्या दशम भाव में मंगल शुभ होता है?
क्या दशम भाव का मंगल विवाह में देरी करता है?
दशम भाव में मंगल के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी है?
क्या दशम भाव का मंगल सरकारी नौकरी देता है?
क्या दशम भाव में मंगल संपत्ति का नुकसान करा सकता है?
क्या दशम भाव का मंगल जातक को क्रूर बनाता है?
क्या दशम भाव में मंगल और शनि का संबंध खराब है?
Remedial Measures
New Techniques of Prediction के अनुसार, यदि कोई बीमारी मंगल के कारण हो और जातक उसकी Dasha अवधि से गुजर रहा हो, तो मंगल की धातु (तांबा) के रासायनिक संयोजन वाली औषधियों का सेवन करना चाहिए।Standard Remedies for Mars
आध्यात्मिक उपाय: भगवान कार्तिकेय या हनुमान जी की पूजा करें। प्रतिदिन हनुमान चालीसा या 'ऋणमोचक मंगल स्तोत्र' का पाठ करें। मंगल के बीज मंत्र 'ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः' का जाप करें। व्यवहारिक उपाय: अपने छोटे भाइयों और सहकर्मियों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखें। क्रोध और आक्रामकता पर नियंत्रण रखें और भूमि से जुड़े विवादों से बचें। दान कार्य: मंगलवार के दिन लाल मसूर की दाल, तांबा, गुड़, या लाल वस्त्र किसी जरूरतमंद या मंदिर में दान करें। रत्न चिकित्सा: मंगल का मुख्य रत्न मूंगा (Red Coral) है। इसे केवल तभी धारण करना चाहिए जब मंगल आपकी कुंडली के लिए एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (Functional Benefic) हो, जैसे मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु या मीन Lagna के लिए। वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर या कुंभ Lagna वाले जातकों को मूंगा पहनने से बचना चाहिए क्योंकि यह उनके लिए हानिकारक हो सकता है। अपनी कुंडली में दशम भाव के मंगल का विश्लेषण करते समय, जातक को सबसे पहले उसकी राशि, गरिमा (Dignity), और दशमेश की स्थिति की जांच करनी चाहिए। इसके बाद, नवांश कुंडली (Navamsha) और अष्टकवर्ग में बिन्दुओं की संख्या का आकलन करके ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।See this in your own chart
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Sources consulted
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