Mars in the 4th House

56 min read · Drawn from 51 classical and modern works · Updated August 2026

वैदिक ज्योतिष में, मंगल (Mangala या Kuja) एक अत्यंत ऊर्जावान, साहसी और उग्र ग्रह है। जब यह कुंडली के चतुर्थ भाव (Chaturtha Bhava या Matru Bhava [माता और सुख का घर]) में स्थित होता है, तो यह जीवन के सबसे संवेदनशील और आंतरिक क्षेत्रों को प्रभावित करता है। चतुर्थ भाव मुख्य रूप से माता, गृह जीवन, भूमि, वाहन, पैतृक संपत्ति और आंतरिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि मंगल (Mangala) साहस, अग्नि, भूमि, अचल संपत्ति और भाइयों का कारक (Karaka) है। इस भाव में मंगल (Mangala) की उपस्थिति आमतौर पर घरेलू जीवन में अत्यधिक ऊर्जा, सक्रियता और कभी-कभी संघर्ष या अशांति उत्पन्न करती है। इस स्थिति का अंतिम परिणाम पूरी तरह से ग्रह की राशिगत गरिमा, युति और उस पर पड़ने वाली दृष्टि (Drishti) पर निर्भर करता है। शास्त्रीय ग्रंथों में परिणामों को अत्यंत स्पष्ट और पूर्ण शब्दों में प्रस्तुत किया गया है, परंतु किसी भी एकल स्थिति को अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए; ऐसे गंभीर परिणाम तभी घटित होते हैं जब संपूर्ण कुंडली में कई अन्य पीड़ित स्थितियां मौजूद हों।

Classical Position

शास्त्रीय ज्योतिषीय परंपराओं में चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) की स्थिति को लेकर व्यापक सहमति पाई जाती है। Phaladeepika के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव का स्वामी किसी दुस्थान (Dusthana [त्रिक भाव - छठा, आठवां या बारहवां घर]) में स्थित हो, या सूर्य (Surya) और मंगल (Mangala) के साथ युति कर रहा हो, अथवा सूर्य (Surya) और मंगल (Mangala) दोनों ही चतुर्थ भाव में स्थित हों, तो जातक का जन्म स्थान या घर अग्नि से नष्ट हो सकता है। यह योग घरेलू वातावरण में अग्नि तत्व की अत्यधिक वृद्धि को दर्शाता है, जिससे घर में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बनी रहती हैं। इसके विपरीत, Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में कोई स्थिर राशि (Sthira Rashi) हो और चतुर्थेश तथा मंगल (Mangala) दोनों ही स्थिर राशियों में स्थित हों, तो जातक के गृह जीवन और संपत्ति में स्थिरता बनी रहती है। ऐसा जातक लंबे समय तक अपने स्थायी निवास स्थान पर सुखपूर्वक निवास करता है। इसके अतिरिक्त, Sarvartha Chintamani यह भी स्पष्ट करता है कि यदि चतुर्थ भाव में कोई चर राशि (Chara Rashi) हो और उसका स्वामी मंगल (Mangala) हो, तो जातक के पास कई अलग-अलग स्थानों पर घर या संपत्तियां होती हैं। भाई-बहनों से मिलने वाले सहयोग के संदर्भ में, यदि चतुर्थ भाव या उसका स्वामी तृतीयेश (तीसरे भाव के स्वामी) और मंगल (Mangala) के साथ संबंध बनाता है, तो जातक को अपने भाई से भूमि या संपत्ति प्राप्त होती है। Brihat Parashara Hora Shastra जैसी पराशरी परंपराएं चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) की स्थिति को एक अत्यंत प्रभावशाली कारक मानती हैं, जो जातक के सुख और संपत्ति के अर्जन को गहराई से प्रभावित करता है।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय ग्रंथों और नाड़ी परंपराओं में चतुर्थ भाव के मंगल (Mangala) के विशिष्ट प्रभावों को लेकर कई अनूठे और भिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं। इन भिन्नताओं को जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।

Physical Appearance and Health

  • गुदा रोग की संभावना: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि लग्न का स्वामी, मंगल (Mangala) और बुध (Budha) एक साथ चतुर्थ या बारहवें भाव में स्थित हों और छठे भाव को प्रभावित कर रहे हों, तो यह गुदा मार्ग के निकट किसी रोग का संकेत देता है।
  • हृदय रोग का जोखिम: Predictive Stellar Astrology के अनुसार, यदि सूर्य (Surya), चंद्र (Chandra), मंगल (Mangala), कर्क (Karka) राशि, चतुर्थ भाव या चतुर्थेश का संबंध छठे भाव, छठे के स्वामी या कन्या (Kanya) राशि से हो, तो हृदय रोग की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
  • गंभीर अल्सर और हृदय विकार: Jataka Alankara के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala), शनि (Shani) और गुरु (Guru) एक साथ स्थित हों, तो जातक को हृदय रोग और गंभीर अल्सर का सामना करना पड़ सकता है।
  • पांडु रोग और कुष्ठ रोग: चिकित्सा ज्योतिष के ग्रंथों के अनुसार, यदि लग्नेश मंगल (Mangala) और बुध (Budha) चतुर्थ या बारहवें भाव में युति करते हैं, तो जातक को पांडु रोग (Pandu Roga [एनीमिया]) और कुष्ठ रोग जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
  • अचानक हृदय आघात: एक अन्य शास्त्रीय स्रोत के अनुसार, यदि मंगल (Mangala) चतुर्थ भाव, सूर्य (Surya), चंद्र (Chandra) और चतुर्थेश पर अपनी पूर्ण दृष्टि (Drishti) डालता है, तो यह अचानक होने वाले हृदय आघात का संकेत हो सकता है।
  • पत्थर से चोट लगना: Vrishabha Vijaya Jyothisha Prakaasham के अनुसार, यदि सूर्य (Surya) और मंगल (Mangala) चतुर्थ भाव में हों और वे चतुर्थेश या दशमेश से दृष्ट या युत हों, तो जातक को पत्थर से चोट लगने का भय रहता है।

Temperament and Mental State

  • अशुद्ध हृदय और भावनाओं को छिपाना: 300 Important Combinations के अनुसार, चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala), शनि (Shani) या राहु (Rahu) जैसे क्रूर ग्रहों की उपस्थिति जातक को अपनी भावनाओं को छिपाने वाला और अशुद्ध हृदय वाला बना सकती है।
  • कुटिल बुद्धि और मानसिक चिंताएं: शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) और चंद्र (Chandra) की युति हो, तो जातक को अत्यधिक चिंताएं, दुर्भाग्य, निर्धनता और कुटिल मानसिकता का सामना करना पड़ सकता है।
  • अस्थिर स्वभाव: चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) की उग्र ऊर्जा जातक के मन को अशांत और क्रोधी बना सकती है, जिससे वह घरेलू मामलों में बहुत जल्दी उत्तेजित हो जाता है।

Wealth, Status and Life Events

  • प्रचुर भूमि और संपत्ति: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि चतुर्थेश दशम भाव में और दशमेश चतुर्थ भाव में स्थित हो और मंगल (Mangala) बलवान हो, तो जातक के पास प्रचुर मात्रा में कृषि भूमि और अचल संपत्ति होती है।
  • मूल्यवान संपत्तियों का सुख: यदि चतुर्थ भाव में शुभ ग्रह (Benefic) स्थित हों, चतुर्थेश शुभ ग्रहों के साथ हो और संपत्ति का कारक मंगल (Mangala) भी शुभ ग्रहों से प्रभावित हो, तो जातक के पास अत्यंत मूल्यवान संपत्तियां होती हैं।
  • गृहहीनता का योग: Jataka Parijata के अनुसार, यदि मंगल (Mangala) या सूर्य (Surya) चतुर्थ भाव में नीच राशि या शत्रु राशि में स्थित हों, तो जातक गृहहीन (बिना अपने घर के) हो सकता है।
  • धन और सुख से हीनता: Vrishabha Vijaya Jyothisha Prakaasham के अनुसार, यदि सूर्य (Surya) और मंगल (Mangala) चतुर्थ भाव में पापक ग्रहों से दृष्ट हों और चतुर्थेश पापक अंशों में हो, तो जातक धन और गृह सुख से वंचित रह सकता है।
  • विनाशकारी व्यय: नाड़ी ग्रंथ Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि सूर्य (Surya), मंगल (Mangala), लग्नेश और दशमेश एक साथ चतुर्थ भाव में स्थित हों, तो जातक को अत्यधिक और विनाशकारी खर्चों का सामना करना पड़ता है।
  • कुज दोष और वैवाहिक जीवन: How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि मंगल (Mangala) लग्न, चंद्र (Chandra) या शुक्र (Shukra) से प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम या द्वादश भाव में हो, तो कुज दोष (Kuja Dosha) बनता है। चतुर्थ भाव का मंगल (Mangala) वैवाहिक सुख को प्रभावित कर सकता है, विशेषकर स्त्रियों की कुंडली में यह विवाह में देरी या अलगाव का कारण बन सकता है।
  • माता की आयु पर प्रभाव: Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि दशम भाव में राहु (Rahu), मंगल (Mangala) और शनि (Shani) स्थित हों और चतुर्थ तथा सप्तम भाव प्रतिकूल ग्रहों से पीड़ित हों, तो जातक के जन्म के दो वर्ष के भीतर माता की मृत्यु की संभावना होती है।
  • सिविल इंजीनियरिंग में शिक्षा: Planets and Education के अनुसार, चतुर्थ, पंचम और दशम भाव का संबंध जब मंगल (Mangala), शनि (Shani) और बुध (Budha) के प्रभाव से जुड़ता है, तो यह सिविल इंजीनियरिंग जैसी तकनीकी शिक्षा का संकेत देता है।

Aspect and Directional Strength

वैदिक ज्योतिष में मंगल (Mangala) को एक क्रूर ग्रह (Krura) माना जाता है, जिसकी दृष्टियां अत्यंत ऊर्जावान और दबाव बनाने वाली होती हैं। चतुर्थ भाव में स्थित होकर, मंगल (Mangala) अपनी चतुर्थ, सप्तम और अष्टम पूर्ण दृष्टि (Drishti) क्रमशः कुंडली के सप्तम, दशम और एकादश भाव पर डालता है। सप्तम भाव (साझेदारी और विवाह) पर मंगल (Mangala) की चतुर्थ दृष्टि वैवाहिक जीवन में वैचारिक मतभेद और तनाव उत्पन्न कर सकती है, क्योंकि जातक अपने जीवनसाथी पर नियंत्रण रखने का प्रयास करता है। दशम भाव (करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा) पर पड़ने वाली सप्तम दृष्टि जातक को अपने कार्यक्षेत्र में अत्यंत महत्वाकांक्षी, साहसी और नेतृत्व क्षमता से युक्त बनाती है, हालांकि यह वरिष्ठ अधिकारियों के साथ टकराव भी पैदा कर सकती है। एकादश भाव (लाभ और इच्छा पूर्ति) पर पड़ने वाली अष्टम दृष्टि जातक को आय के नए स्रोत खोजने के लिए प्रेरित करती है, लेकिन बड़े भाई-बहनों या मित्रों के साथ संबंधों में उतार-चढ़ाव ला सकती है। दिशा बल (Digbala) के सिद्धांतों के अनुसार, मंगल (Mangala) को दशम भाव (Dashama Bhava) में पूर्ण दिशा बल प्राप्त होता है। इसके विपरीत, चतुर्थ भाव (Chaturtha Bhava) में स्थित होने पर मंगल (Mangala) पूरी तरह से दिशा बल से हीन (Digbala Heena) हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) अपनी उग्र और साहसी ऊर्जा को बाहरी दुनिया में सकारात्मक रूप से व्यक्त करने के बजाय आंतरिक रूप से केंद्रित कर देता है। दिशा बल की इस कमी के कारण जातक को मानसिक शांति प्राप्त करने में कठिनाई होती है और वह अपने ही घर में असुरक्षित या तनावग्रस्त महसूस कर सकता है, जब तक कि मंगल (Mangala) किसी शुभ राशि या शुभ ग्रहों के प्रभाव में न हो।

The Placement Across the Twelve Rashis

Aries (Mesha)

मेष राशि में मंगल (Mangala) अपनी मूलत्रिकोण (Moolatrikona) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी स्वयं मंगल (Mangala) है। यह स्थिति मकर लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) चतुर्थ और एकादश भाव का स्वामी बनता है। चतुर्थेश का अपने ही भाव में होना और एकादशेश का चतुर्थ में आना यह दर्शाता है कि जातक की इच्छाएं और लाभ उसके गृह जीवन और अचल संपत्ति से सीधे जुड़े हुए हैं। Saravali के अनुसार, यदि मंगल (Mangala) मेष राशि में हो, तो जातक तेजस्वी, सत्यवादी, पराक्रमी, राजा के समान, युद्धप्रिय, साहसी कार्यों में रुचि रखने वाला और सेना या समूह का प्रमुख होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मेष राशि का मंगल (Mangala) जातक को अत्यधिक मुखर, आक्रामक, ऊर्जावान, शक्तिशाली और उदार बनाता है। हालांकि, इसी ग्रंथ में यह भी चेतावनी दी गई है कि अपने ही क्षेत्र में होने के कारण इसकी उग्र किरणें कभी-कभी विनाशकारी भी हो सकती हैं। चूंकि मंगल (Mangala) यहाँ केंद्र में अपनी ही राशि में है, इसलिए यह एक शक्तिशाली रुचक योग (Ruchaka Yoga) का निर्माण करता है, जो जातक को प्रचुर भूमि, आलीशान मकान और समाज में उच्च पद-प्रतिष्ठा प्रदान करता है।

Taurus (Vrishabha)

वृषभ राशि में मंगल (Mangala) तटस्थ गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी शुक्र (Shukra) है। यह स्थिति कुंभ लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) तृतीय और दशम भाव का स्वामी बनता है। तृतीयेश और दशमेश का चतुर्थ भाव में स्थित होना यह दर्शाता है कि जातक का करियर, पराक्रम और व्यावसायिक प्रयास उसके घरेलू वातावरण और भूमि संबंधी कार्यों से जुड़े हुए हैं। Western Astrology: Planets in Signs and Houses के अनुसार, वृषभ राशि में मंगल (Mangala) जातक को विवादों से बचने वाला परंतु अत्यंत जिद्दी और दृढ़ निश्चयी बनाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यह स्थिति जातक को अपनी संपत्ति के प्रति अत्यधिक आग्रही और विपरीत लिंग के प्रति संवेदनशील बनाती है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, वृषभ राशि में स्थित मंगल (Mangala) की दशा (Dasha) के दौरान जातक में धार्मिक सुधार और आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रति गहरी रुचि जाग्रत होती है। इस प्रकार, शुक्र की इस पृथ्वी तत्व राशि में मंगल (Mangala) की उग्रता शांत होती है, जिससे जातक व्यावहारिक रूप से अपनी संपत्ति का प्रबंधन करता है और गृह जीवन में स्थिरता प्राप्त करने का प्रयास करता है।

Gemini (Mithuna)

मिथुन राशि में मंगल (Mangala) शत्रु (Inimical) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी बुध (Budha) है। यह स्थिति मीन लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) द्वितीय और नवम भाव का स्वामी बनता है। धन भाव (द्वितीय) और भाग्य भाव (नवम) के स्वामी का चतुर्थ भाव में शत्रु राशि में बैठना यह दर्शाता है कि जातक के पारिवारिक धन और भाग्य को प्राप्त करने में कुछ संघर्ष या उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। Western Astrology: Planets in Signs and Houses के अनुसार, मिथुन राशि में मंगल (Mangala) में निरंतरता की कमी होती है, जब तक कि शनि (Shani) कुंडली में मजबूत न हो। Yashodhar Mehta’s Research in Astrology के अनुसार, मिथुन राशि का मंगल (Mangala) जातक को आलसी और निष्क्रिय बना सकता है। हालांकि, Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यह स्थिति जातक में कलात्मक और वैज्ञानिक रुचि, महत्वाकांक्षा और साहसिक कार्यों के प्रति झुकाव पैदा करती है, लेकिन वह बातचीत में अत्यधिक उग्र या अपनी ऊर्जा को व्यर्थ नष्ट करने वाला हो सकता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इसकी दशा (Dasha) में जातक को यात्राएं, कलात्मक विकास और पारिवारिक मतभेदों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति दर्शाती है कि बुध की वायु तत्व राशि में मंगल (Mangala) की ऊर्जा मानसिक अशांति और घरेलू विवादों को जन्म दे सकती है।

Cancer (Karka)

कर्क राशि में मंगल (Mangala) नीच (Debilitated) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी चंद्र (Chandra) है। यह स्थिति मेष लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) प्रथम (लग्न) और अष्टम भाव का स्वामी बनता है। लग्नेश और अष्टमेश का चतुर्थ भाव में नीच का होना यह दर्शाता है कि जातक का स्वास्थ्य, आत्म-पहचान और जीवन के बड़े बदलाव सीधे उसके गृह जीवन और माता के साथ संबंधों से प्रभावित होते हैं। Western Astrology: Planets in Signs and Houses के अनुसार, कर्क राशि में मंगल (Mangala) को कमजोर माना जाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, कर्क राशि में मंगल (Mangala) अपनी शक्ति खो देता है, जिससे जातक अत्यधिक भावुक, संवेदनशील और अपने परिवार के प्रति सुरक्षात्मक तो बनता है, लेकिन वह बहुत जल्दी आहत भी हो जाता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, कर्क राशि में मंगल (Mangala) अपने स्वाभाविक उग्र गुणों के विपरीत कार्य करता है। हालांकि, How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि कुंडली में गुरु (Guru) कर्क राशि में उच्च का होकर इसके साथ स्थित हो, तो मंगल (Mangala) का नीच भंग (Neecha Bhanga) हो जाता है। यह स्थिति दर्शाती है कि बिना शुभ प्रभाव के, कर्क राशि का मंगल (Mangala) घरेलू कलह और मानसिक अशांति का कारण बन सकता है।

Leo (Simha)

सिंह राशि में मंगल (Mangala) मित्र (Friendly) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी सूर्य (Surya) है। यह स्थिति वृषभ लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) द्वादश और सप्तम भाव का स्वामी बनता है। व्ययेश (द्वादश) और सप्तमेश का चतुर्थ भाव में मित्र राशि में बैठना यह दर्शाता है कि जातक के वैवाहिक संबंध और बाहरी खर्चे उसके घरेलू सुख-सुविधाओं को प्रभावित करेंगे। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, सिंह राशि का मंगल (Mangala) जातक को अहंकारी और शाही महत्व की भावना देता है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, सिंह राशि में स्थित होने पर मंगल (Mangala) का कुज दोष (Kuja Dosha) लागू नहीं होता या न्यूनतम हो जाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, सिंह राशि में मंगल (Mangala) जातक को गणित, खगोल विज्ञान और गुप्त विद्याओं के प्रति रुचि, बड़ों के प्रति सम्मान, मौलिक सोच और रचनात्मक क्षमता प्रदान करता है, हालांकि उसका स्वभाव थोड़ा क्रोधी हो सकता है। सूर्य की इस अग्नि तत्व राशि में मंगल (Mangala) की उपस्थिति जातक को अपने घर में एक राजा की तरह अधिकार जमाने की प्रवृत्ति देती है।

Virgo (Kanya)

कन्या राशि में मंगल (Mangala) शत्रु (Inimical) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी बुध (Budha) है। यह स्थिति मिथुन लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) एकादश और छठे भाव का स्वामी बनता है। लाभेश (एकादश) और रोगेश (छठे) का चतुर्थ भाव में शत्रु राशि में बैठना यह दर्शाता है कि जातक को अपनी सुख-सुविधाओं और संपत्तियों को प्राप्त करने के लिए शत्रुओं या ऋणों का सामना करना पड़ सकता है। Western Astrology: Planets in Signs and Houses के अनुसार, कन्या राशि में मंगल (Mangala) जातक को हर छोटी बात पर ध्यान केंद्रित करने वाला और संबंधों में अत्यधिक आलोचनात्मक बनाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, कन्या राशि का मंगल (Mangala) जातक को प्रतिशोधी, अभिमानी, आत्म-केंद्रित और डींगें मारने वाला बना सकता है। बुध की इस पृथ्वी तत्व राशि में मंगल (Mangala) की उग्रता जातक के घरेलू जीवन में अत्यधिक मीन-मेख निकालने (नकारात्मक आलोचना करने) की आदत पैदा करती है, जिससे परिवार के सदस्यों के साथ वैचारिक मतभेद बने रहते हैं।

Libra (Tula)

तुला राशि में मंगल (Mangala) तटस्थ गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी शुक्र (Shukra) है। यह स्थिति कर्क लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) दशम और पंचम भाव का स्वामी बनता है। दशमेश (कर्म) और पंचमेश (बुद्धि/संतान) का चतुर्थ भाव में बैठना एक अत्यंत शुभ योग है, जो जातक के करियर और बुद्धि को उसके घर और भूमि से जोड़ता है। Western Astrology: Planets in Signs and Houses के अनुसार, तुला राशि में मंगल (Mangala) जातक को अनिर्णायक बनाता है, लेकिन अन्याय के खिलाफ वह दृढ़ता से खड़ा होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, तुला राशि का मंगल (Mangala) जातक को महत्वाकांक्षी, आत्म-विश्वासी और परिवार से गहरा प्रेम करने वाला बनाता है, लेकिन वह महिलाओं द्वारा धोखा खाने की संभावना रखता है और एकांतप्रिय होता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इसकी दशा (Dasha) विवाह और करियर के लिए अनुकूल होती है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति सावधानी आवश्यक है। शुक्र की इस वायु तत्व राशि में मंगल (Mangala) जातक को कलात्मक अभिरुचि और समाज में एक सम्मानित स्थान प्रदान करता है।

Scorpio (Vrischika)

वृश्चिक राशि में मंगल (Mangala) अपने स्वक्षेत्र (Own Sign) की गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी स्वयं मंगल (Mangala) है। यह स्थिति सिंह लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) नवम (भाग्य) और चतुर्थ भाव का स्वामी बनता है। चतुर्थेश का अपने ही भाव में होना और भाग्येश का चतुर्थ में आना जातक को पैतृक संपत्ति और भूमि का अपार सुख प्रदान करता है। Western Astrology: Planets in Signs and Houses के अनुसार, वृश्चिक राशि में मंगल (Mangala) का व्यवहार अत्यंत उग्र और समझौता न करने वाला होता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यह स्थिति जातक को गहरी भावनाएं, तीव्र इच्छाएं, कूटनीतिक व्यवहार और एक शक्तिशाली स्मरण शक्ति प्रदान करती है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, वृश्चिक राशि के मंगल (Mangala) की दशा में जातक को कृषि और भूमि के क्रय-विक्रय में बड़ी सफलता मिलती है। चूंकि मंगल (Mangala) यहाँ अपने ही घर में केंद्र में स्थित है, इसलिए यह रुचक योग (Ruchaka Yoga) का निर्माण करता है, जो जातक को अचल संपत्ति का स्वामी और समाज में एक प्रभावशाली व्यक्तित्व बनाता है।

Sagittarius (Dhanu)

धनु राशि में मंगल (Mangala) मित्र (Friendly) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी गुरु (Guru) है। यह स्थिति कन्या लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) अष्टम और तृतीय भाव का स्वामी बनता है। अष्टमेश और तृतीयेश का चतुर्थ भाव में मित्र राशि में बैठना यह दर्शाता है कि जातक को अपने जीवन में अचानक आने वाले बदलावों और अपने स्वयं के प्रयासों के माध्यम से गृह सुख प्राप्त होगा। Western Astrology: Planets in Signs and Houses के अनुसार, धनु राशि में मंगल (Mangala) की ऊर्जा रुक-रुक कर चलती है और जातक उबाऊ कार्यों से बहुत जल्दी थक जाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, धनु राशि का मंगल (Mangala) जातक को स्पष्टवादी, उदार, लेकिन कभी-कभी अधीर और तार्किक बहसों में उग्र बनाता है। Predictive Jyotish के अनुसार, यदि मंगल (Mangala) धनु राशि में होकर किसी शुभ भाव में हो, तो यह अत्यंत शुभ परिणाम देता है। गुरु की इस अग्नि तत्व राशि में मंगल (Mangala) जातक को धार्मिक और दार्शनिक विचारों की ओर प्रवृत्त करता है, जिससे वह अपने घर में नैतिक मूल्यों को प्राथमिकता देता है।

Capricorn (Makara)

मकर राशि में मंगल (Mangala) अपनी उच्च (Exalted) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी शनि (Shani) है। यह स्थिति तुला लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) सप्तम और द्वितीय भाव का स्वामी बनता है। सप्तमेश (साझेदारी) और द्वितीयेश (धन) का चतुर्थ भाव में उच्च का होकर बैठना जातक को विवाह के बाद प्रचुर धन और संपत्ति प्राप्त होने का संकेत देता है। Saravali के अनुसार, मकर राशि में मंगल (Mangala) जातक को अत्यंत धनी, प्रसिद्ध और जीवन में सफल बनाता है। Western Astrology: Planets in Signs and Houses के अनुसार, यह स्थिति जातक को उच्च ऊर्जा और अद्भुत सहनशक्ति प्रदान करती है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, मकर राशि के उच्च मंगल (Mangala) की दशा जातक के लिए नए उद्यमों, पदोन्नति और कानूनी मामलों में विजय के लिए अत्यंत भाग्यशाली सिद्ध होती है। मकर राशि में मंगल (Mangala) का उच्च होना चतुर्थ भाव में एक अत्यंत शक्तिशाली रुचक योग (Ruchaka Yoga) का निर्माण करता है, जो जातक को समाज में सर्वोच्च स्थान, प्रशासनिक अधिकार और विशाल भू-संपत्ति का स्वामी बनाता है।

Aquarius (Kumbha)

कुंभ राशि में मंगल (Mangala) तटस्थ गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी शनि (Shani) है। यह स्थिति वृश्चिक लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) छठे और प्रथम (लग्न) भाव का स्वामी बनता है। लग्नेश और रोगेश का चतुर्थ भाव में बैठना यह दर्शाता है कि जातक का स्वास्थ्य और उसका व्यक्तित्व उसके घरेलू वातावरण और शत्रुओं या ऋणों के प्रबंधन से गहराई से जुड़ा हुआ है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, कुंभ राशि में स्थित होने पर मंगल (Mangala) का कुज दोष (Kuja Dosha) समाप्त हो जाता है। नाड़ी ग्रंथ Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, कुंभ राशि का मंगल (Mangala) जातक को आयुर्वेद के अभ्यास या पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की ओर ले जा सकता है, साथ ही वह अपने गुरु की सेवा करने वाला होता है। शनि की इस वायु तत्व राशि में मंगल (Mangala) की ऊर्जा जातक को सामाजिक सुधारों और तकनीकी कार्यों में सक्रिय बनाती है, जिससे वह अपने घर को भी एक व्यवस्थित और बौद्धिक केंद्र के रूप में विकसित करता है।

Pisces (Meena)

मीन राशि में मंगल (Mangala) मित्र (Friendly) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी गुरु (Guru) है। यह स्थिति धनु लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां मंगल (Mangala) पंचम (संतान/बुद्धि) और द्वादश (व्यय/मोक्ष) भाव का स्वामी बनता है। पंचमेश और द्वादशेश का चतुर्थ भाव में मित्र राशि में बैठना यह दर्शाता है कि जातक की बुद्धि, संतान और आध्यात्मिक व्यय उसके गृह जीवन और मानसिक सुख को प्रभावित करेंगे। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मीन राशि में मंगल (Mangala) जातक को थोड़ा संवेदनशील, विदेश यात्रा करने वाला और कभी-कभी कपट के कारण धन की हानि उठाने वाला बना सकता है। हालांकि, नाड़ी ग्रंथ Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, मीन राशि का मंगल (Mangala) जातक को भूमि के माध्यम से बड़ा वित्तीय लाभ प्रदान करता है। गुरु की इस जल तत्व राशि में मंगल (Mangala) की उग्रता पूरी तरह से शांत और आध्यात्मिक हो जाती है, जिससे जातक अपने घर में धार्मिक अनुष्ठान और ध्यान जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देता है।

Conjunctions in This House

चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) के साथ अन्य ग्रहों की युति जातक के गृह जीवन, मानसिक शांति और संपत्ति के अर्जन को पूरी तरह से एक नया रंग देती है।

Sun (Surya)

सूर्य के साथ मंगल की युति चतुर्थ भाव में होने पर अग्नि तत्व की अत्यधिक वृद्धि होती है। Phaladeepika के अनुसार, यदि सूर्य और मंगल चतुर्थ भाव में एक साथ स्थित हों, तो जातक का जन्म स्थान या घर अग्नि दुर्घटना से प्रभावित हो सकता है। Vrishabha Vijaya Jyothisha Prakaasham के अनुसार, यदि इस युति पर चतुर्थेश या दशमेश का प्रभाव हो, तो जातक को पत्थर से चोट लगने का भय रहता है। यह युति जातक के भीतर अत्यधिक अहंकार और घरेलू स्तर पर गंभीर मतभेद पैदा कर सकती है।

Moon (Chandra)

चंद्र के साथ मंगल की युति को सामान्यतः चंद्र-मंगल योग कहा जाता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यदि यह युति पीड़ित हो, तो यह जातक को मानसिक चिंताएं, निर्धनता, संतानहीनता और एक कुटिल मानसिकता दे सकती है। हालांकि, The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यदि चंद्र अपनी उच्च या स्वराशि में होकर केंद्र में मंगल के साथ हो, तो यह जातक को अपार धन, शक्ति और संपत्ति का सुख प्रदान करता है।

Mercury (Budha)

बुध के साथ मंगल की युति चतुर्थ भाव में होने पर बुद्धि और साहस का मिलन होता है। चिकित्सा ज्योतिष के ग्रंथों के अनुसार, यदि लग्नेश मंगल और बुध चतुर्थ या बारहवें भाव में युति करते हैं, तो जातक को पांडु रोग और त्वचा संबंधी विकार हो सकते हैं। Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि लग्नेश, मंगल और बुध चतुर्थ या बारहवें भाव में होकर छठे भाव को प्रभावित करें, तो यह गुदा मार्ग के रोगों का संकेत देता है।

Jupiter (Guru)

गुरु के साथ मंगल की युति को गुरु-मंगल योग कहा जाता है, जो एक अत्यंत शुभ योग है। Notable Horoscopes के अनुसार, यदि गुरु और मंगल चतुर्थ भाव को प्रभावित करते हैं, तो जातक को प्रचुर संपत्ति, वाहन सुख, समृद्धि और एक अत्यंत सुखी घरेलू वातावरण प्राप्त होता है। गुरु की ज्ञानमयी ऊर्जा मंगल की उग्रता को नियंत्रित कर उसे सही दिशा में निर्देशित करती है।

Venus (Shukra)

शुक्र के साथ मंगल की युति चतुर्थ भाव में होने पर जातक के भीतर भौतिक सुखों और कामुकता की तीव्र इच्छा जाग्रत होती है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यदि मंगल और शुक्र के बीच की दूरी 12 डिग्री से कम हो, तभी यह युति पूर्ण रूप से प्रभावी होती है। यह युति जातक को कलात्मक कार्यों, घर की सजावट और विलासिता की वस्तुओं पर खर्च करने के लिए प्रेरित करती है, लेकिन वैवाहिक जीवन में कभी-कभी ईर्ष्या या तनाव भी ला सकती है।

Saturn (Shani)

शनि के साथ मंगल की युति को अत्यंत विस्फोटक और तनावपूर्ण माना जाता है। मेदिनी ज्योतिष के अनुसार, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में शनि और मंगल की युति दुर्घटनाओं, विस्फोटों और सार्वजनिक अशांति का संकेत देती है। व्यक्तिगत जीवन में, यह युति जातक के गृह जीवन में निरंतर कलह, माता के स्वास्थ्य में गिरावट और संपत्ति को लेकर कानूनी विवाद उत्पन्न कर सकती है।

Rahu

राहु के साथ मंगल की युति को अंगारक योग कहा जाता है। 300 Important Combinations के अनुसार, चतुर्थ भाव में राहु और मंगल जैसे क्रूर ग्रहों की उपस्थिति जातक को अपनी वास्तविक भावनाओं को छिपाने वाला और भीतर से अशांत हृदय वाला बनाती है। यह युति जातक को घर में अचानक होने वाले विवादों और मानसिक भ्रम का सामना कराती है।

Ketu

केतु के साथ मंगल की युति चतुर्थ भाव में होने पर जातक के भीतर अपने घर और भौतिक सुखों के प्रति एक प्रकार का वैराग्य उत्पन्न हो सकता है। केतु मंगल की तरह ही व्यवहार करता है, जिससे घरेलू वातावरण में अचानक और अप्रत्याशित बदलाव आते हैं। जातक अपने जन्म स्थान से दूर जाकर बसने का प्रयास कर सकता है। चतुर्थ भाव में तीन या अधिक ग्रहों की युति (Stellium) जातक के संपूर्ण जीवन का ध्यान पूरी तरह से उसके गृह जीवन, भूमि और आंतरिक सुख पर केंद्रित कर देती है। Jataka Alankara के अनुसार, यदि मंगल, शनि और गुरु एक साथ चतुर्थ भाव में स्थित हों, तो जातक को हृदय रोग और गंभीर अल्सर का सामना करना पड़ सकता है। इसी प्रकार, Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि मंगल, राहु और शनि चतुर्थ भाव में हों, तो जातक को जल से मृत्यु का भय रहता है। चतुर्थ भाव में अत्यधिक ग्रहों का जमाव जातक के भीतर संन्यास (Sanyasa) की प्रवृत्ति को भी जन्म दे सकता है, जिससे वह सांसारिक सुखों को छोड़कर आध्यात्मिक एकांत की ओर आकर्षित होता है।

Aspects Received

चतुर्थ भाव में स्थित मंगल (Mangala) पर अन्य ग्रहों से प्राप्त होने वाली दृष्टि (Drishti) उसके शुभ या अशुभ परिणामों को पूरी तरह से बदल देती है।

Jupiter (Guru)

गुरु की दृष्टि चतुर्थ भाव के मंगल पर पड़ने से मंगल की उग्रता और क्रूरता पूरी तरह से शांत हो जाती है। Notable Horoscopes के अनुसार, गुरु का शुभ प्रभाव जातक को प्रचुर भूमि, आलीशान वाहन, समाज में सम्मान और एक अत्यंत शांतिपूर्ण घरेलू वातावरण प्रदान करता है। यह दृष्टि जातक को अपनी पैतृक संपत्ति का पूर्ण सुख दिलाने में सहायक होती है।

Saturn (Shani)

शनि की दृष्टि जब चतुर्थ भाव के मंगल पर पड़ती है, तो यह जातक के जीवन में अत्यधिक संघर्ष और देरी की स्थिति उत्पन्न करती है। KN RAO S Astrology Lessons के अनुसार, शनि और मंगल का यह संयुक्त नकारात्मक प्रभाव जातक की माता के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत कष्टकारी होता है और जातक को बचपन में किसी न किसी प्रकार के मानसिक आघात का सामना करना पड़ सकता है।

Rahu and Ketu

राहु और केतु की दृष्टि चतुर्थ भाव के मंगल पर पड़ने से जातक के घरेलू जीवन में अचानक और अप्रत्याशित संकट उत्पन्न होते हैं। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि पंचमेश अष्टम भाव में हो और उस पर मंगल तथा राहु का प्रभाव हो, तो यह माता के जीवन में बड़े संकटों का संकेत देता है। राहु की दृष्टि मंगल की आक्रामक ऊर्जा को कई गुना बढ़ा देती है, जिससे जातक का अपनी माता और परिवार के साथ गंभीर विवाद हो सकता है।

Strength and Condition

चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) के वास्तविक परिणामों को समझने के लिए केवल उसकी स्थिति को देखना पर्याप्त नहीं है; इसके लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण ज्योतिषीय पैमानों का सूक्ष्म परीक्षण आवश्यक है।

Baladi Avastha

  • बाल्यावस्था (0° से 6°): विषम राशियों (मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु, कुंभ) में यह अवस्था मंगल को कमजोर बनाती है, जिससे वह अपने पूर्ण परिणाम नहीं दे पाता। सम राशियों (वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर, मीन) में यह अवस्था इसके विपरीत परिणाम देती है।
  • मृतावस्था (24° से 30°): विषम राशियों में यह अवस्था मंगल को पूरी तरह से बलहीन कर देती है, जिससे जातक को संपत्ति और सुख प्राप्त करने में अत्यधिक कठिनाई होती है। सम राशियों में यह अवस्था अत्यंत बलवान मानी जाती है।
  • जातक को यह अवश्य देखना चाहिए कि उसका मंगल विषम राशि में है या सम राशि में, क्योंकि इसी के आधार पर उसकी युवा (Yuva) या मृत (Mrita) अवस्था का निर्धारण होता है।

Ashtakavarga

  • उच्च बिंदु (30 से अधिक): यदि अष्टकवर्ग (Ashtakavarga) में चतुर्थ भाव को 30 या उससे अधिक बिंदु (Bindu) प्राप्त होते हैं, तो मंगल चतुर्थ भाव के शुभ परिणामों को पूर्ण रूप से प्रदान करता है।
  • निम्न बिंदु (25 से कम): यदि इस भाव को कम बिंदु प्राप्त होते हैं, तो मंगल की शुभता में भारी कमी आती है और जातक को भूमि या वाहन सुख प्राप्त करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।

Nakshatra

  • नक्षत्र स्वामी की स्थिति: मंगल जिस नक्षत्र में स्थित है, उस नक्षत्र के स्वामी की कुंडली में स्थिति मंगल के परिणामों को गहराई से प्रभावित करती है। यदि नक्षत्र स्वामी शुभ भावों में स्थित हो, तो मंगल के अशुभ प्रभावों में कमी आती है।

Navamsa (D9)

  • नवांश कुंडली में स्थिति: यदि मंगल जन्म कुंडली के साथ-साथ नवांश (Navamsha) कुंडली में भी मजबूत या उच्च का है, तो वह अपने शुभ परिणाम निश्चित रूप से देगा। Vrishabha Vijaya Jyothisha Prakaasham के अनुसार, यदि चतुर्थेश सूर्य के साथ हो और मंगल बिना किसी शुभ दृष्टि के पापक नवांश में स्थित हो, तो जातक का जीवन अत्यंत दुखमय हो जाता है।

Condition of the Lord of the 4th House

  • चतुर्थेश की स्थिति: चतुर्थ भाव का स्वामी यदि कुंडली में मजबूत, स्वराशि या उच्च का होकर शुभ भावों में स्थित है, तो वह मंगल के नकारात्मक प्रभावों को नियंत्रित कर लेता है। इसके विपरीत, यदि चतुर्थेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में पीड़ित है, तो मंगल चतुर्थ भाव के सुखों को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) की स्थिति को कस्पल सब-लॉर्ड (Cuspal Sub-Lord) के सिद्धांतों के माध्यम से समझा जाता है। इस पद्धति में राशि स्वामी की तुलना में उप-स्वामी (Sub-Lord) को अधिक सटीक और निर्णायक माना जाता है।
  • संपत्ति का अर्जन: Predictive Stellar Astrology के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव का उप-स्वामी मंगल (Mangala) से जुड़ा हो और वह चतुर्थ, एकादश और द्वादश भावों को दर्शाता हो, तो जातक को संपत्ति और वाहन की प्राप्ति होती है। यदि चतुर्थ भाव का संबंध दशम भाव के स्वामी से हो, तो जातक को पैतृक संपत्ति प्राप्त होती है; यदि इसका संबंध प्रथम और द्वादश भाव के स्वामियों से हो, तो जातक स्वयं के निवेश से घर खरीदता है।
  • समझौतों का रद्द होना: Applications of Cuspal Interlinks के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव का उप-स्वामी द्वादश और सप्तम भाव के कार्येश (Significator) के रूप में कार्य कर रहा हो, और वह अपनी दशा-भुक्ति-अंतर्दशा (DBA) के दौरान तृतीय भाव के उप-स्वामी के नक्षत्र से गोचर करे, तो जातक के संपत्ति संबंधी समझौते रद्द हो जाते हैं।

Practical Significations

चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) की स्थिति व्यावहारिक जीवन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण क्षेत्रों को प्रभावित करती है।

Real Estate and Property

  • स्थिर निवास: यदि चतुर्थ भाव में स्थिर राशि हो और चतुर्थेश तथा मंगल (Mangala) भी स्थिर राशियों में हों, तो जातक जीवन भर एक ही घर में स्थायी रूप से निवास करता है।
  • बहु-संपत्ति योग: यदि चतुर्थ भाव में चर राशि हो और उसका स्वामी मंगल (Mangala) हो, तो जातक के पास देश-विदेश में कई स्थानों पर संपत्तियां होती हैं।
  • भाई से संपत्ति: यदि चतुर्थ भाव का संबंध तृतीयेश और मंगल (Mangala) से हो, तो जातक को अपने भाइयों के माध्यम से भूमि या मकान की प्राप्ति होती है।

Domestic Environment and Mother

  • घरेलू अशांति: मंगल की उग्र प्रकृति के कारण जातक के घर का वातावरण अक्सर तनावपूर्ण रहता है। परिवार के सदस्यों के बीच छोटी-छोटी बातों पर विवाद होने की संभावना बनी रहती है।
  • माता का स्वास्थ्य: चतुर्थ भाव माता का स्थान है, जहां मंगल की उपस्थिति माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव या उनके स्वभाव में उग्रता ला सकती है।

Frequently Asked Questions

क्या चतुर्थ भाव में मंगल का होना हमेशा खराब होता है?
नहीं, चतुर्थ भाव में मंगल का होना हमेशा खराब नहीं होता है। यदि मंगल अपनी स्वराशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में स्थित हो, तो यह एक शक्तिशाली रुचक योग का निर्माण करता है, जो जातक को अपार भूमि, संपत्ति और समाज में उच्च पद-प्रतिष्ठा प्रदान करता है। केवल पीड़ित या नीच का मंगल ही घरेलू अशांति का कारण बनता है।
क्या चतुर्थ भाव का मंगल वैवाहिक जीवन में समस्याएं पैदा करता है?
हाँ, चतुर्थ भाव में स्थित मंगल अपनी चतुर्थ पूर्ण दृष्टि से सप्तम भाव (विवाह स्थान) को देखता है। इसे कुज दोष या मांगलिक दोष माना जाता है। इसके कारण वैवाहिक जीवन में वैचारिक मतभेद, जीवनसाथी के साथ टकराव या विवाह में देरी जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं, विशेषकर यदि मंगल पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि न हो।
चतुर्थ भाव में मंगल के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
चतुर्थ भाव में मंगल के लिए मकर राशि सबसे अच्छी मानी जाती है, क्योंकि यहाँ मंगल उच्च का होता है। इसके अतिरिक्त, मेष और वृश्चिक राशियां भी अत्यंत शुभ परिणाम देती हैं क्योंकि ये मंगल की अपनी राशियां हैं। इन राशियों में स्थित होकर मंगल जातक को प्रचुर मात्रा में अचल संपत्ति और वाहन सुख प्रदान करता है।
क्या चतुर्थ भाव में मंगल माता के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है?
हाँ, चतुर्थ भाव माता का प्रतिनिधित्व करता है। इस भाव में मंगल जैसे उग्र और क्रूर ग्रह की उपस्थिति माता के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। यदि मंगल पर शनि या राहु का भी नकारात्मक प्रभाव हो, तो माता को रक्त संबंधी विकार या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
चतुर्थ भाव में मंगल होने पर घर में आग लगने का भय क्यों होता है?
शास्त्रीय ग्रंथ Phaladeepika के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव का स्वामी दुस्थान में हो या सूर्य और मंगल के साथ युति कर रहा हो, अथवा सूर्य और मंगल दोनों चतुर्थ भाव में हों, तो घर में अग्नि दुर्घटना का भय रहता है। मंगल और सूर्य दोनों ही अग्नि तत्व के ग्रह हैं, जो इस भाव में अत्यधिक गर्मी उत्पन्न करते हैं।
क्या चतुर्थ भाव का मंगल जातक को Civil Engineer बना सकता है?
हाँ, ज्योतिषीय सिद्धांतों के अनुसार, यदि चतुर्थ, पंचम और दशम भाव का संबंध मंगल, शनि और बुध के प्रभाव से जुड़ता है, तो जातक सिविल इंजीनियरिंग या तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। मंगल भूमि और निर्माण का कारक है, इसलिए यह इस क्षेत्र में बड़ी सफलता देता है।
चतुर्थ भाव में मंगल के अशुभ प्रभावों को कैसे कम किया जा सकता है?
मंगल के अशुभ प्रभावों को कम करने के लिए जातक को हनुमान जी की आराधना करनी चाहिए, मंगलवार का व्रत रखना चाहिए और लाल वस्तुओं जैसे मसूर की दाल या तांबे का दान करना चाहिए। इसके अतिरिक्त, घर के लिविंग रूम में नारंगी-लाल रंग का उपयोग करने से भी मंगल की सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।

Remedial Measures

चतुर्थ भाव में मंगल (Mangala) के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और उसकी सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित शास्त्रीय और व्यावहारिक उपाय (Upaya) किए जा सकते हैं।
  • रंग चिकित्सा (Color Therapy): Saral Vastu Shastra के अनुसार, यदि मंगल कुंडली में प्रभावी हो या मेष, वृश्चिक या मकर राशि में स्थित हो, तो जातक को अपने घर के लिविंग रूम (बैठक कक्ष) में नारंगी-लाल (Orange-Red) रंग का उपयोग करना चाहिए। यह रंग मंगल की सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करने में सहायक होता है।
  • अग्नि दुर्घटना से बचाव: यदि कुंडली में सूर्य और मंगल की युति चतुर्थ भाव में हो, तो जातक को अपने घर की रसोई और बिजली के उपकरणों की सुरक्षा के प्रति अत्यंत सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यह योग अग्नि दुर्घटनाओं का संकेत देता है।

Standard Remedies for Mars (Mangala)

  • आध्यात्मिक उपाय (Spiritual Remedies): जातक को प्रतिदिन या प्रत्येक मंगलवार को हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए। सूर्य देव को तांबे के पात्र से अर्घ्य (Arghya) देना और मंगल गायत्री मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है।
  • व्यवहारिक उपाय (Behavioural Remedies): जातक को अपने छोटे भाइयों और माता के साथ संबंधों को मधुर बनाए रखना चाहिए। घर में अनावश्यक क्रोध और आक्रामक व्यवहार से बचना चाहिए, क्योंकि इससे मंगल की नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • दान कार्य (Charitable Remedies): मंगलवार के दिन लाल मसूर की दाल, तांबे के बर्तन, लाल कपड़े या गुड़ का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में करना चाहिए।
  • रत्न धारण (Gemological Remedies): मंगल का मुख्य रत्न लाल मूंगा (Moonga) है। चेतावनी: लाल मूंगा केवल तभी धारण किया जाना चाहिए जब मंगल जातक की कुंडली के लिए एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (Functional Benefic) हो (जैसे मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न)। यदि मंगल कुंडली के लिए एक कार्यात्मक पापी ग्रह (Functional Malefic) है (जैसे वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न), तो मूंगा धारण करने से मंगल के नकारात्मक प्रभाव और अधिक बढ़ सकते हैं।
जातक को अपनी कुंडली में चतुर्थ भाव के मंगल (Mangala) के प्रभावों का सटीक विश्लेषण करने के लिए केवल इस एकल स्थिति पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके लिए जन्म कुंडली (D1) के साथ-साथ नवांश कुंडली (D9), अष्टकवर्ग (Ashtakavarga) के बिंदु, मंगल की अवस्था (Avastha) और चतुर्थेश की स्थिति का समग्र रूप से अध्ययन करना चाहिए। एक अनुभवी ज्योतिषी के मार्गदर्शन में इन सभी कारकों का विश्लेषण करके ही जातक अपने जीवन में मंगल की ऊर्जा का सर्वोत्तम उपयोग कर सकता है।

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Sources consulted

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