Moon in the 8th House

55 min read · Drawn from 44 classical and modern works · Updated August 2026

वैदिक ज्योतिष में, अष्टम भाव (जिसे Ashtama Bhava या रंध्र भाव भी कहा जाता है) जीवन के सबसे रहस्यमयी और संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। यह भाव मुख्य रूप से दीर्घायु (Ayus), अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव, गुप्त विद्याओं (Gupta Vishay), विरासत, और छिपे हुए मामलों को नियंत्रित करता है। दूसरी ओर, चंद्रमा (Chandra) हमारे मन (Manas), भावनाओं, मानसिक शांति और माता (Matru) का कारक (Karaka) है। जब मन का कारक यह संवेदनशील ग्रह अष्टम भाव के गहन और परिवर्तनकारी वातावरण में प्रवेश करता है, तो यह जातक के जीवन में अत्यधिक भावनात्मक तीव्रता, मानसिक उतार-चढ़ाव और छिपी हुई शक्तियों को जाग्रत करता है। इस संयोजन का अंतिम परिणाम पूरी तरह से ग्रह की गरिमा, युति और उस पर पड़ने वाली दृष्टि (Drishti) पर निर्भर करता है। शास्त्रीय ग्रंथ अक्सर अष्टम भाव में ग्रहों की स्थिति के परिणामों को अत्यंत निरपेक्ष और गंभीर शब्दों में प्रस्तुत करते हैं, जिसमें गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं या अल्पायु की भविष्यवाणियां भी शामिल होती हैं। पाठकों और ज्योतिष के छात्रों को यह समझना चाहिए कि किसी भी कुंडली में एक अकेले ग्रह की स्थिति को कभी भी अलगाव में नहीं देखा जाना चाहिए। इस तरह के गंभीर और नकारात्मक परिणाम केवल तभी घटित होते हैं जब कुंडली में कई अन्य सहायक और पीड़ित स्थितियां मौजूद हों। एक संतुलित विश्लेषण के लिए पूरे चार्ट का व्यापक अध्ययन आवश्यक है।

Classical Position

वैदिक ज्योतिष के स्वीकृत और प्रामाणिक ग्रंथों में अष्टम भाव में चंद्रमा (Chandra) की स्थिति को लेकर कुछ मूलभूत सिद्धांतों पर व्यापक सहमति है। इस स्थिति को सामान्यतः स्वास्थ्य और मानसिक स्थिरता के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थान माना जाता है। Brihat Parashara Hora Shastra और अन्य स्थापित ग्रंथों के अनुसार, यदि लग्न का स्वामी (Lagna Lord) या चंद्रमा (Chandra) छठे, आठवें या बारहवें भाव (जिन्हें Trika भाव कहा जाता है) में स्थित हो, तो यह जातक के लिए संभावित खराब स्वास्थ्य और शारीरिक कमजोरी का संकेत देता है। परंपरा इस बात पर पूरी तरह सहमत है कि यह स्थिति शारीरिक और मानसिक ऊर्जा के प्रवाह में बाधा उत्पन्न करती है। गोचर के संदर्भ में भी शास्त्रीय ग्रंथों में स्पष्ट सहमति दिखाई देती है। Phaladeepika के अनुसार, जब गोचर का चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव के स्वामी (8th Lord) की राशि, उसके त्रिकोण या सूर्य की राशि से गुजरता है, तो यह समय जातक के स्वास्थ्य या जीवन के लिए अत्यंत संकटपूर्ण और मृत्युतुल्य कष्ट देने वाला हो सकता है। इसके अतिरिक्त, कृष्णमूर्ति पद्धति (KP) के सिद्धांतों के अनुसार, यदि सूर्य या चंद्रमा (Chandra) का गोचर अष्टम भाव के उप-उप-स्वामी (Sub-Sub Lord) से संबंधित नक्षत्र या अष्टम भाव के नक्षत्र स्वामी के नक्षत्र में होता है, तो यह जीवन के अंत या गंभीर संकट का संकेत देता है।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय स्रोतों और नाड़ी ग्रंथों में अष्टम भाव के चंद्रमा (Chandra) को लेकर कई विशिष्ट और भिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं। ये विवरण जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर इस ग्रह स्थिति के प्रभाव को गहराई से समझने में मदद करते हैं।

Physical Appearance and Health

शारीरिक बनावट और दृष्टि: How to Judge a Horoscope के अनुसार, अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) जातक को छरहरी काया (slender build) और कमजोर दृष्टि (weak eyesight) प्रदान करता है। जातक का स्वास्थ्य अक्सर नाजुक रहता है। प्लीहा रोग (Spleen Disease): Jatak Alankaar के अनुसार, यदि अष्टम भाव का स्वामी और चंद्रमा (Chandra) दोनों ही शुभ ग्रहों की दृष्टि से रहित हों और पापी ग्रहों (Papa Graha) के प्रभाव में हों, तो जातक को प्लीहा रोग (Pleeha Roga) होने की संभावना रहती है। नासिका रोग और साइनस: Three Hundred Important Combinations और नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) छठे भाव में हो, शनि अष्टम में हो, कोई पापी ग्रह बारहवें भाव में हो और लग्नेश अशुभ अंश में हो, तो जातक को साइनस या नासिका संबंधी गंभीर रोग हो सकते हैं। नेत्रहीनता के योग: Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो और शनि व मंगल की युति हो, तो जातक दृष्टिहीन हो सकता है। इसके अलावा, यदि चतुर्थ और पंचम भाव में पापी ग्रह हों और चंद्रमा (Chandra) अष्टम, छठे या बारहवें भाव में बिना किसी शुभ दृष्टि के हो, तो भी अंधापन हो सकता है। मधुमेह (Diabetes): केपी पद्धति के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव का स्वामी हो और उसका संबंध शुक्र (Venus) से बन रहा हो, तो यह मूत्र संबंधी विकारों और मधुमेह का संकेत देता है।

Temperament and Mental State

मानसिक अस्थिरता और भय: How to Judge a Horoscope के अनुसार, अष्टम भाव में चंद्रमा (Chandra) जातक को मानसिक भटकाव, अज्ञात भय, मनोवैज्ञानिक परिसरों (psychological complexes) और चंचल स्वभाव से पीड़ित कर सकता है। अवसाद और डिप्रेशन: नाड़ी और चंद्र नवांश पद्धतियों के अनुसार, यदि अष्टम भाव में चंद्रमा (Chandra) के साथ अष्टम आरूढ़ (A5) स्थित हो, और उस पर राहु व मंगल की दृष्टि हो तथा शनि, बृहस्पति या शुक्र (Venus) इसके विपरीत खड़े हों, तो जातक गंभीर मानसिक अवसाद का शिकार होता है। लड़ाकू और उदार स्वभाव: शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, ऐसा जातक लड़ाई-झगड़े और विवादों में रुचि रखने वाला होता है, लेकिन साथ ही वह बड़ा दिल रखने वाला, उदार और मनोरंजन व विद्या का प्रेमी भी होता है।

Wealth, Status and Life Events

विरासत से लाभ: How to Judge a Horoscope के अनुसार, अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) जातक को वसीयत, विरासत या उपहारों के माध्यम से आसानी से संपत्ति और धन प्राप्त करने में मदद करता है। अचानक धन लाभ: PAC DARES kn rao के अनुसार, यदि लग्नेश द्वितीय भाव में हो और अष्टम भाव से बृहस्पति और चंद्रमा (Chandra) उस पर दृष्टि डाल रहे हों, तो जातक को जीवन में अचानक अप्रत्याशित वित्तीय लाभ या गुप्त धन प्राप्त होता है। करियर में उतार-चढ़ाव: नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यदि अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा (Chandra) पर केतु की दृष्टि हो, तो जातक को अपने करियर से इस्तीफा देना पड़ सकता है या उसकी नौकरी छूटने का खतरा रहता है। राजसी प्रतीकों की हानि: Jatak Alankaar के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) या शुक्र (Venus) छठे, आठवें या बारहवें भाव में हों, तो जातक को राजकीय सम्मान या राजसी प्रतीकों (जैसे छत्र और चंवर) के नुकसान का सामना करना पड़ता है।

Longevity and Cause of Death

मृत्यु का कारण: Saravali के अनुसार, अष्टम भाव में स्थित ग्रह मृत्यु के कारण को निर्धारित करता है। यदि चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव में हो, तो मृत्यु का कारण जल (water) या जल से संबंधित दुर्घटनाएं हो सकती हैं। अप्राकृतिक मृत्यु के योग: Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो, लग्नेश द्वारा देखा जा रहा हो, और शनि, मांदी व राहु के साथ युति में हो, तो जातक की अप्राकृतिक मृत्यु हो सकती है। दुर्घटनाएं और बिजली गिरना: यदि चंद्रमा (Chandra), सूर्य, मंगल या शनि अष्टम, पंचम या नवम भाव में हों, तो ऊंचाई से गिरने, डूबने, आंधी-तूफान या बिजली गिरने से मृत्यु की आशंका रहती है। दीर्घायु के योग: Jatak Alankaar के अनुसार, यदि मीन लग्न हो, शुक्र (Venus) लग्न में उच्च का होकर शुभ ग्रहों से दृष्ट हो, चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव में हो और बृहस्पति केंद्र (Kendra) में हो, तो जातक 100 वर्ष की लंबी आयु जीता है।

Maternal Welfare and Family

माता को कष्ट: How to Judge a Horoscope के अनुसार, अष्टम भाव में चंद्रमा (Chandra) के होने से जातक अपनी बाल्यावस्था या किशोरावस्था में ही अपनी माता को खो सकता है। माता की हानि के विशिष्ट योग: Jataka Parijata के अनुसार, यदि घटता हुआ चंद्रमा (waning Moon) किसी पापी ग्रह के साथ छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो और चतुर्थ भाव में भी पापी ग्रह स्थित हो, तो माता की शीघ्र मृत्यु होती है। मातृ शाप से संतान हानि: Three Hundred Important Combinations के अनुसार, यदि अष्टमेश पंचम में हो, पंचमेश अष्टम में हो, और चंद्रमा (Chandra) व चतुर्थेश छठे भाव में चले जाएं, तो माता के शाप के कारण संतान की हानि होती है। पत्नी का चरित्र: नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यदि तृतीय या एकादश भाव में चंद्रमा (Chandra), शुक्र (Venus), बृहस्पति और बुध स्थित हों और अष्टमेश उन पर दृष्टि डाल रहा हो, तो जातक की पत्नी के अन्य पुरुषों के साथ संबंध हो सकते हैं।

Aspect and Directional Strength

अष्टम भाव में स्थित होकर चंद्रमा (Chandra) अपनी पूर्ण सातवीं दृष्टि (Drishti) द्वितीय भाव (धन भाव) पर डालता है। द्वितीय भाव मुख्य रूप से संचित धन, परिवार, वाणी, और प्राथमिक शिक्षा का प्रतिनिधित्व करता है। चूंकि चंद्रमा (Chandra) एक सौम्य ग्रह है (जब तक कि वह अत्यधिक क्षीण या कृष्ण पक्ष का न हो), इसकी दृष्टि द्वितीय भाव को पोषण और संवेदनशीलता प्रदान करती है। जातक की वाणी मधुर और प्रभावशाली हो सकती है, और वह अपने परिवार के प्रति अत्यधिक भावनात्मक रूप से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, अष्टम भाव की अनिश्चितता के कारण, जातक के संचित धन और पारिवारिक संबंधों में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं। दिशा बल (Digbala) के सिद्धांतों के अनुसार, चंद्रमा (Chandra) चतुर्थ भाव में होने पर पूर्ण दिशा बल प्राप्त करता है। चतुर्थ भाव मन की शांति और घरेलू सुख का स्थान है। अष्टम भाव, चतुर्थ भाव से पंचम और लग्न से अष्टम होने के कारण, चंद्रमा (Chandra) के लिए दिशा बल के दृष्टिकोण से एक कमजोर और प्रतिकूल स्थान है। यहाँ चंद्रमा (Chandra) अपने प्राकृतिक सुख और शांति को खो देता है, जिससे जातक को आंतरिक अशांति और भावनात्मक असुरक्षा का अनुभव होता है।

The Placement Across the Twelve Rashis

Aries (Mesha)

मेष राशि में चंद्रमा (Chandra) तटस्थ (neutral) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी मंगल (Mars) है। मेष राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने का अर्थ है कि जातक का लग्न कन्या (Virgo) है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) एकादश भाव (लाभ भाव) का स्वामी बनता है। एकादशेश का अष्टम भाव में जाना यह दर्शाता है कि जातक के लाभ और आय के स्रोतों में अचानक बड़े बदलाव आ सकते हैं। नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, मेष राशि का चंद्रमा (Chandra) जातक के जीवन में आक्रामकता बनाम मुखरता (aggression versus assertion) के कर्मिक मुद्दों को जन्म देता है। जातक को अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना सीखना होता है। मंगलवार के दिन, मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा या धनिष्ठा नक्षत्र में मूंगा खरीदना इस स्थिति के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए शुभ माना गया है। समग्र रूप से, यह स्थिति जातक को साहसी बनाती है लेकिन वित्तीय उतार-चढ़ाव भी देती है।

Taurus (Vrishabha)

वृषभ राशि में चंद्रमा (Chandra) अपने परम उच्च (exalted) रूप में होता है, और इस राशि का स्वामी शुक्र (Venus) है। वृषभ राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न तुला (Libra) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) दशम भाव (कर्म भाव) का स्वामी बनता है। उच्च का चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव के दोषों को काफी हद तक कम कर देता है। Jatak Alankaar के अनुसार, यदि शुभ ग्रह केंद्र (Kendra) में हों और लग्नेश लग्न में मजबूत हो, तो जातक 60 वर्ष की आयु प्राप्त करता है। Saravali के अनुसार, यदि सूर्य इस चंद्रमा (Chandra) को देखता है, तो जातक एक मेहनती किसान या उद्यमी बनता है जो ब्याज पर पैसा देता है। यदि मंगल देखता है, तो जातक कामुक होता है और माता के लिए यह प्रतिकूल होता है। बुध की दृष्टि जातक को विद्वान और प्रिय बनाती है, जबकि बृहस्पति की दृष्टि दीर्घायु पत्नी, संतान और स्थायी धन देती है। शुक्र (Venus) की दृष्टि से जातक को वाहन और विलासिता के साधन मिलते हैं, जबकि शनि की दृष्टि धन की कमी और माता के लिए कष्ट लाती है। जातक अतीत की यादों में खोया रहने वाला और लंबे समय तक सोचने वाला होता है।

Gemini (Mithuna)

मिथुन राशि में चंद्रमा (Chandra) अपने मित्र (friendly) ग्रह बुध (Mercury) की राशि में होता है। मिथुन राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न वृश्चिक (Scorpio) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) नवम भाव (भाग्य भाव) का स्वामी बनता है। नवमेश का अष्टम में जाना भाग्य में अचानक उतार-चढ़ाव और आध्यात्मिक झुकाव को दर्शाता है। चंद्र नवांश पद्धति के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) मिथुन नवांश में हो, तो जातक का विवाह 30वें वर्ष में होता है। Saravali के अनुसार, यदि सूर्य इस चंद्रमा (Chandra) को देखता है, तो जातक विद्वान और सुंदर होता है, लेकिन गरीब और दुखी हो सकता है। यदि मंगल की दृष्टि हो, तो यह अत्यंत अनुकूल और समृद्धि देने वाली होती है। नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, मिथुन का चंद्रमा (Chandra) जातक को लेखन और संचार में निपुण बनाता है, लेकिन यदि केतु के साथ युति हो, तो जातक सिलाई या हस्तशिल्प के कार्यों में संलग्न हो सकता है। जातक में कुछ असामान्य झुकाव भी हो सकते हैं।

Cancer (Karka)

कर्क राशि में चंद्रमा (Chandra) अपनी स्वराशि (own sign) में होता है, और इसका स्वामी स्वयं चंद्रमा (Chandra) ही है। कर्क राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न धनु (Sagittarius) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव का ही स्वामी बनता है। अष्टमेश का अष्टम में होना दीर्घायु के लिए अच्छा है, लेकिन यह मानसिक अशांति को बढ़ाता है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि इस चंद्रमा (Chandra) पर बृहस्पति और शुक्र (Venus) की दृष्टि हो और यह पारवत अंश में हो, तो जातक को महान प्रसिद्धि और प्रचुर धन प्राप्त होता है। Saravali के अनुसार, यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो यह करियर के लिए अच्छा है। मंगल की दृष्टि जातक के चरित्र को मजबूत करती है, बुध की दृष्टि बुद्धि और मंत्री पद देती है, जबकि बृहस्पति की दृष्टि राजा के समान सुखी जीवन देती है। शुक्र (Venus) की दृष्टि जातक को विलासी बनाती है, जबकि शनि की दृष्टि जातक को भटकाव और गरीबी देती है। जातक पुरानी भावनात्मक चोटों को आसानी से नहीं भूल पाता।

Leo (Simha)

सिंह राशि में चंद्रमा (Chandra) अपने मित्र ग्रह सूर्य (Sun) की राशि में होता है। सिंह राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न मकर (Capricorn) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) सप्तम भाव (साझेदारी और विवाह) का स्वामी बनता है। सप्तमेश का अष्टम में जाना वैवाहिक जीवन में गोपनीयता और अचानक बदलावों को दर्शाता है। चंद्र नवांश पद्धति के अनुसार, सिंह नवांश का चंद्रमा (Chandra) जातक के जीवन में 20वें, 32वें और 44वें वर्ष को अत्यधिक सक्रिय बनाता है। Saravali के अनुसार, यदि सूर्य इस चंद्रमा (Chandra) को देखता है, तो जातक राजा के समान राजसी गुणों और गंभीर आवाज वाला होता है। मंगल की दृष्टि सेना प्रमुख या नेतृत्व क्षमता और अच्छी पत्नी व संतान देती है। बुध की दृष्टि जातक को स्त्रीवत कोमलता और सेवा भाव देती है, जबकि बृहस्पति की दृष्टि समाज में उच्च स्थान देती है। जातक स्वभाव से महत्वाकांक्षी, साहसी और उदार होता है।

Virgo (Kanya)

कन्या राशि में चंद्रमा (Chandra) अपने मित्र ग्रह बुध (Mercury) की राशि में होता है। कन्या राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न कुंभ (Aquarius) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) छठे भाव (रोग और शत्रु) का स्वामी बनता है। षष्ठेश का अष्टम में जाना विपरीत राजयोग बना सकता है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए संवेदनशील है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि शुक्र (Venus) सप्तम में हो और चंद्रमा (Chandra) कन्या में हो, तो जातक परम सुख प्राप्त करता है। Saravali के अनुसार, यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक का करियर और प्रतिष्ठा अच्छी होती है। मंगल की दृष्टि कौशल और परिवार देती है, जबकि बुध की दृष्टि जातक को ज्योतिष, साहित्य और विवादों में सफलता दिलाती है। बृहस्पति की दृष्टि सामाजिक स्थिति और धन देती है, जबकि शुक्र (Venus) की दृष्टि कई पत्नियों और विलासिता का संकेत देती है। शनि की दृष्टि मानसिक तनाव और गरीबी ला सकती है। जातक अत्यधिक आत्म-आलोचनात्मक और काम में व्यस्त रहने वाला होता है।

Libra (Tula)

तुला राशि में चंद्रमा (Chandra) तटस्थ (neutral) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी शुक्र (Venus) है। तुला राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न मीन (Pisces) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) पंचम भाव (बुद्धि और संतान) का स्वामी बनता है। पंचमेश का अष्टम में जाना जातक को गहरी अंतर्दृष्टि और गुप्त विद्याओं का ज्ञान देता है। Saravali के अनुसार, यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक को स्वास्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। मंगल की दृष्टि जातक को तीक्ष्ण बुद्धि लेकिन चोर या व्यभिचारी प्रवृत्ति का बना सकती है। बुध की दृष्टि कला में निपुणता और प्रसिद्धि देती है, जबकि बृहस्पति की दृष्टि उच्च सामाजिक स्थिति देती है। शुक्र (Venus) की दृष्टि शारीरिक आकर्षण देती है, जबकि शनि की दृष्टि जातक को मीठी वाणी और वाहनों का सुख देती है। जातक सौंदर्यप्रिय होता है लेकिन वैवाहिक जीवन में कुछ असंतोष का सामना करना पड़ सकता है।

Scorpio (Vrischika)

वृश्चिक राशि में चंद्रमा (Chandra) अपने परम नीच (debilitated) रूप में होता है, और इस राशि का स्वामी मंगल (Mars) है। वृश्चिक राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न मेष (Aries) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) चतुर्थ भाव (सुख और माता) का स्वामी बनता है। चतुर्थेश का अष्टम में नीच का होना माता के स्वास्थ्य और जातक की मानसिक शांति के लिए अत्यंत प्रतिकूल है। Saravali के अनुसार, यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक का जीवन संघर्षमय होता है। मंगल की दृष्टि जातक को अतुलनीय साहस और राजा के समान अधिकार देती है। बुध की दृष्टि जातक को कठोर वाणी और चालाकी देती है, जबकि बृहस्पति की दृष्टि जातक को सुंदर और कर्तव्यनिष्ठ बनाती है। शुक्र (Venus) की दृष्टि भाग्यशाली बनाती है लेकिन महिलाओं के कारण शक्ति का ह्रास होता है। शनि की दृष्टि बीमारी और गरीबी लाती है। जातक अत्यंत ईर्ष्यालु, रहस्यमयी और कभी-कभी तंत्र-मंत्र या गुप्त शक्तियों के प्रभाव में आ सकता है।

Sagittarius (Dhanu)

धनु राशि में चंद्रमा (Chandra) तटस्थ (neutral) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी बृहस्पति (Jupiter) है। धनु राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न वृष (Taurus) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) तृतीय भाव (साहस और भाई-बहन) का स्वामी बनता है। तृतीयेश का अष्टम में होना जातक को खोजी और साहसी बनाता है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि धनु राशि में चंद्रमा (Chandra) पर बृहस्पति की दृष्टि या युति हो, तो जातक को मूल्यवान रत्न या लाल वस्त्र प्राप्त होते हैं। Saravali के अनुसार, यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक राजा के समान सुखी और प्रसिद्ध होता है। मंगल की दृष्टि सेना प्रमुख जैसी नेतृत्व क्षमता और अपार धन देती है। बुध की दृष्टि जातक को एक कुशल ज्योतिषी, कलाकार या नर्तक बनाती है, जबकि बृहस्पति की दृष्टि आकर्षक शरीर और मंत्री पद देती है। जातक स्वभाव से आशावादी, बेचैन और रोमांचप्रिय होता है।

Capricorn (Makara)

मकर राशि में चंद्रमा (Chandra) तटस्थ (neutral) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी शनि (Saturn) है। मकर राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न मिथुन (Gemini) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) द्वितीय भाव (धन और परिवार) का स्वामी बनता है। द्वितीयेश का अष्टम में जाना पैतृक संपत्ति या विरासत से अचानक धन लाभ का संकेत देता है, लेकिन पारिवारिक सुख में कमी लाता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, मकर का चंद्रमा (Chandra) जातक को अपनी भावनाओं को छिपाने वाला और ठंडी कार्यकुशलता (cold efficiency) वाला बनाता है। यदि शुक्र (Venus) की दृष्टि हो, तो जातक का चरित्र अच्छा होता है, जबकि शनि की दृष्टि संघर्ष बढ़ाती है। जातक को बड़ी उम्र की महिलाओं के प्रति आकर्षण हो सकता है। केपी पद्धति के अनुसार, यदि छठे भाव का उप-उप-स्वामी चंद्रमा (Chandra) मकर राशि में हो, तो मस्तिष्क संबंधी रोग की आशंका रहती है।

Aquarius (Kumbha)

कुंभ राशि में चंद्रमा (Chandra) तटस्थ (neutral) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी शनि (Saturn) है। कुंभ राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न कर्क (Cancer) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) स्वयं लग्न का स्वामी (लग्नेश) बनता है। लग्नेश का अष्टम में जाना जातक को अत्यधिक संवेदनशील, अंतर्मुखी और स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील बनाता है। Horasara के अनुसार, कुंभ राशि में चंद्रमा (Chandra) की Dasha के दौरान जातक को हृदय रोग होने की संभावना रहती है। जातक स्वयं को अपनी भावनाओं से अलग महसूस करता है और एक दर्शक की तरह व्यवहार करता है। यदि राहु के साथ युति हो, तो जातक तरल पदार्थों या जड़ी-बूटियों से दवाएं बनाने के व्यवसाय में हो सकता है। मंगल की दृष्टि जातक को माता से रहित या गरीब बना सकती है, जबकि बृहस्पति की दृष्टि जातक को घरेलू और परिवार से जुड़ा हुआ बनाती है।

Pisces (Meena)

मीन राशि में चंद्रमा (Chandra) तटस्थ (neutral) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी बृहस्पति (Jupiter) है। मीन राशि में अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) होने पर जातक का लग्न सिंह (Leo) होता है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) द्वादश भाव (व्यय और मोक्ष) का स्वामी बनता है। द्वादशेश का अष्टम में जाना एक उत्कृष्ट विपरीत राजयोग बना सकता है, जो जातक को आध्यात्मिक और विदेश यात्राओं से लाभ दिलाने वाला होता है। जातक अत्यधिक सहज, संवेदनशील और पलायनवादी (escapist) प्रवृत्ति का हो सकता है। Saravali के अनुसार, यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक को सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। मंगल की दृष्टि जातक के चरित्र को मजबूत करती है, जबकि बुध की दृष्टि बुद्धि और मान-सम्मान देती है। बृहस्पति की दृष्टि जातक को सुंदर, धनवान और सुखी बनाती है। शुक्र (Venus) की दृष्टि जातक को कामकला, नृत्य और संगीत में निपुण बनाती है, जबकि शनि की दृष्टि जातक को विकृत शरीर, माता के लिए कष्ट और बुद्धिहीनता दे सकती है।

Conjunctions in This House

Sun

अष्टम भाव में सूर्य के साथ चंद्रमा की युति अमावश्या योग का निर्माण करती है। चूंकि सूर्य और चंद्रमा दोनों ही इस भाव में अपनी ऊर्जा खो देते हैं, इसलिए यह युति जातक के आत्मबल और मानसिक शांति को कमजोर करती है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि अष्टम भाव कर्क या सिंह राशि का हो और उसमें सूर्य और चंद्रमा दोनों स्थित हों, तो महिला जातक के बांझ (barren) होने की संभावना रहती है। यह युति जीवन में गंभीर पहचान संकट और माता-पिता दोनों के स्वास्थ्य के लिए प्रतिकूल हो सकती है।

Mars

अष्टम भाव में मंगल के साथ चंद्रमा की युति चंद्र-मंगल योग बनाती है, लेकिन अष्टम भाव में होने के कारण यह योग अत्यधिक आक्रामक और दुर्घटनाप्रवण हो जाता है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) राहु के साथ जुड़ा हो और मंगल अष्टम भाव में स्थित हो, तो माता और शिशु दोनों के लिए यह जानलेवा हो सकता है। यह युति जातक को अत्यधिक क्रोधी, साहसी और गुप्त गतिविधियों में शामिल होने वाला बनाती है। जातक को रक्त संबंधी विकार या चोट लगने का भय रहता है।

Mercury

अष्टम भाव में बुध के साथ चंद्रमा की युति जातक को एक अत्यंत गहरी और खोजी बुद्धि प्रदान करती है। हालांकि, नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) और बुध दोनों ही छठे या आठवें भाव में पापी प्रभाव में हों, तो यह जहर या विषाक्तता (poisoning) के माध्यम से स्वास्थ्य हानि का संकेत देता है। यह युति जातक को त्वचा रोग या तंत्रिका तंत्र की कमजोरी दे सकती है, लेकिन जातक अनुसंधान, लेखन और गुप्त विद्याओं में असाधारण सफलता प्राप्त कर सकता है।

Jupiter

अष्टम भाव में बृहस्पति के साथ चंद्रमा की युति गजकेसरी योग का निर्माण करती है। यद्यपि अष्टम भाव में यह योग पूर्ण रूप से फलित नहीं होता, फिर भी यह जातक को गंभीर संकटों से बचाने का कार्य करता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि सिंह राशि में बृहस्पति (नवमेश) और चंद्रमा (Chandra) की युति हो और उस पर शनि (सप्तमेश) की दृष्टि हो, तो यह जातक को आध्यात्मिक गहराई और अचानक धन लाभ प्रदान करता है। जातक को विरासत में बड़ी संपत्ति मिल सकती है।

Venus

अष्टम भाव में शुक्र के साथ चंद्रमा की युति जातक को कलात्मक और कामुक स्वभाव प्रदान करती है। केपी पद्धति के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव का स्वामी हो और शुक्र (Venus) के साथ युति या संबंध बनाए, तो जातक को मधुमेह (diabetes) या मूत्र संबंधी रोग होने की प्रबल संभावना रहती है। यह युति जातक को गुप्त संबंधों की ओर आकर्षित कर सकती है, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है।

Saturn

अष्टम भाव में शनि के साथ चंद्रमा की युति को ज्योतिष में 'विष योग' के रूप में जाना जाता है। Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) का शनि के साथ घनिष्ठ संबंध हो और सूर्य अष्टम भाव में स्थित हो, तो जातक की आयु के 29वें वर्ष में गंभीर संकट आ सकता है। यह युति जातक को अत्यधिक निराशावादी, उदास और मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कराती है। जातक को जीवन भर कड़ा संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन यह युति जातक को गंभीर वैराग्य और आध्यात्मिक साधना की ओर भी ले जा सकती है।

Rahu

अष्टम भाव में राहु के साथ चंद्रमा की युति ग्रहण योग का निर्माण करती है। यह युति मानसिक स्वास्थ्य के लिए सबसे अधिक हानिकारक मानी गई है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) राहु के साथ अष्टम भाव में हो और उस पर मंगल की दृष्टि हो, तो यह जातक के जीवन और मानसिक संतुलन के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। जातक को मतिभ्रम, भूत-प्रेत का भय या तंत्र-मंत्र का शिकार होने की आशंका रहती है।

Ketu

अष्टम भाव में केतु के साथ चंद्रमा की युति जातक को संसार से विरक्त करने वाली होती है। नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यदि केतु अष्टम भाव में चंद्रमा (Chandra) पर दृष्टि डालता है या उसके साथ युति करता है, तो यह जातक के करियर में अचानक रुकावट, इस्तीफे या संन्यास (renunciation) की प्रवृत्ति को जन्म देता है। जातक की अंतर्ज्ञान शक्ति (intuition) अत्यंत तीव्र होती है, लेकिन वह गहरे मानसिक अलगाव और अकेलेपन का अनुभव करता है। अष्टम भाव में तीन या अधिक ग्रहों की युति (Stellium) जातक के पूरे जीवन की ऊर्जा को इसी भाव पर केंद्रित कर देती है। ऐसा जातक सांसारिक जीवन से पूरी तरह विमुख होकर संन्यास (Sanyasa) या गहन आध्यात्मिक अनुसंधान की ओर बढ़ सकता है। भारी ग्रहों का यह जमावड़ा जीवन में अत्यधिक उथल-पुथल और अचानक आने वाले संकटों को दर्शाता है, लेकिन साथ ही यह जातक को असाधारण गुप्त शक्तियां और आध्यात्मिक ऊंचाइयां भी प्रदान कर सकता है।

Aspects Received

Jupiter

जब अष्टम भाव में स्थित चंद्रमा (Chandra) पर बृहस्पति (Jupiter) की पूर्ण शुभ दृष्टि पड़ती है, तो यह जातक के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह काम करती है। Notable Horoscopes के अनुसार, बृहस्पति की दृष्टि जातक को गहन आध्यात्मिकता और धार्मिकता प्रदान करती है। यह दृष्टि चंद्रमा (Chandra) के सभी पापी और नकारात्मक प्रभावों को निष्प्रभावी कर देती है, जिससे जातक गंभीर मानसिक अवसाद से बच जाता है और उसमें विपरीत परिस्थितियों में भी समझौता करने और आगे बढ़ने की अद्भुत क्षमता विकसित होती है।

Saturn

अष्टम भाव के चंद्रमा (Chandra) पर शनि की दृष्टि जातक के जीवन में वैराग्य और संघर्ष को बढ़ाती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि शनि चंद्रमा (Chandra) और चतुर्थेश दोनों पर दृष्टि डालता है, तो जातक को बचपन में माता के स्नेह और उचित देखरेख की कमी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, यह दृष्टि जातक को जीवन में वास्तविक उपलब्धियां हासिल करने के लिए अनुशासित बनाती है। यदि चंद्रमा (Chandra) मंगल के द्रेष्काण में हो और शनि उसे देख रहा हो, तो जातक पूर्ण संन्यासी बन जाता है।

Mars

मंगल की दृष्टि अष्टम भाव के चंद्रमा (Chandra) पर पड़ने से जातक का स्वभाव अत्यंत भावुक, क्रोधी और अस्थिर हो जाता है। यह दृष्टि जातक को मानसिक रूप से अशांत रखती है और उसे अवसाद (depression) की ओर धकेल सकती है। जातक बिना सोचे-समझे निर्णय लेता है, जिससे उसे शारीरिक चोट या वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, यदि कुंडली में बृहस्पति का भी प्रभाव हो, तो यह नकारात्मक प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित हो जाता है।

Rahu

राहु की दृष्टि अष्टम भाव के चंद्रमा (Chandra) पर पड़ने से जातक के मन में लगातार अज्ञात भय, भ्रम और असुरक्षा की भावना बनी रहती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो और राहु उस पर दृष्टि डाल रहा हो, तो यह जातक के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए अत्यंत हानिकारक होता है। जातक को अनिद्रा, बुरे सपने और मानसिक तनाव की गंभीर समस्या हो सकती है।

Ketu

केतु की दृष्टि अष्टम भाव के चंद्रमा (Chandra) पर पड़ने से जातक में तीव्र वैराग्य और अलगाव की भावना पैदा होती है। यह दृष्टि जातक को अपने परिवार और समाज से दूर ले जाने का प्रयास करती है। जातक का झुकाव रहस्यमयी विद्याओं, ध्यान और मोक्ष की ओर होता है। हालांकि, यह दृष्टि जातक के सांसारिक करियर और सामाजिक जीवन में अचानक रुकावटें और निराशा भी पैदा करती है।

Strength and Condition

अष्टम भाव में चंद्रमा (Chandra) के वास्तविक प्रभावों को समझने के लिए उसकी अवस्था, शक्ति और कुंडली के अन्य घटकों का सूक्ष्म विश्लेषण करना आवश्यक है।

Baladi Avastha

चंद्रमा (Chandra) की डिग्री के आधार पर उसकी अवस्था (Avastha) का निर्धारण होता है, जो उसके परिणाम देने की क्षमता को तय करती है:
  • विषम राशियों (Aries, Gemini, Leo, Libra, Sagittarius, Aquarius) में:
    • 0 से 6 डिग्री: बाल (Bala) अवस्था (कमजोर परिणाम)
    • 6 से 12 डिग्री: कुमार अवस्था (आंशिक परिणाम)
    • 12 से 18 डिग्री: युवा (Yuva) अवस्था (पूर्ण और शक्तिशाली परिणाम)
    • 18 से 24 डिग्री: वृद्ध अवस्था (न्यूनतम परिणाम)
    • 24 से 30 डिग्री: मृत (Mrita) अवस्था (निष्क्रिय परिणाम)
  • सम राशियों (Taurus, Cancer, Virgo, Scorpio, Capricorn, Pisces) में: यह क्रम पूरी तरह से उलट जाता है, जहाँ 0 से 6 डिग्री मृत (Mrita) और 24 से 30 डिग्री बाल (Bala) अवस्था होती है।
यदि चंद्रमा (Chandra) अपनी स्वराशि कर्क या उच्च राशि वृषभ में युवा अवस्था में हो, तो वह अष्टम भाव के नकारात्मक प्रभावों को शुभता में बदलने की पूरी शक्ति रखता है।

Ashtakavarga

अष्टकवर्ग (Ashtakavarga) में अष्टम भाव को मिलने वाले बिंदु (Bindu) इस placement के परिणाम को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं। यदि अष्टम भाव में चंद्रमा (Chandra) को 28 से अधिक बिंदु प्राप्त हो रहे हैं, तो यह जातक को अचानक धन लाभ, अच्छी वसीयत और संकटों से लड़ने की आंतरिक शक्ति प्रदान करता है। इसके विपरीत, यदि बिंदु संख्या 20 से कम है, तो चंद्रमा (Chandra) जातक को गंभीर मानसिक अशांति, लगातार बीमारियां और जीवन में अत्यधिक अस्थिरता देता है।

Nakshatra

चंद्रमा (Chandra) जिस नक्षत्र (Nakshatra) में स्थित होता है, उसका स्वामी ग्रह चंद्रमा (Chandra) के परिणामों को अपना रंग प्रदान करता है। उदाहरण के लिए, यदि चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव में होकर राहु के नक्षत्र (आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा) में हो, तो मानसिक अशांति और भ्रम की स्थिति बहुत अधिक बढ़ जाती है। वहीं यदि वह बृहस्पति के नक्षत्र (पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद) में हो, तो जातक को गंभीर आध्यात्मिक ज्ञान, अंतर्ज्ञान और संकटों से उबरने की क्षमता प्राप्त होती है।

Navamsa (D9)

नवांश कुंडली (Navamsha) जन्म कुंडली के वादों की पुष्टि या उन्हें रद्द करने का कार्य करती है। यदि जन्म कुंडली में चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव में पीड़ित दिख रहा हो, लेकिन नवांश कुंडली (D9) में वह अपनी उच्च राशि वृषभ या स्वराशि कर्क में शुभ ग्रहों से दृष्ट होकर मजबूत स्थिति में बैठा हो, तो जातक के जीवन के उत्तरार्ध में सभी मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके विपरीत, यदि वह नवांश में भी शनि या मंगल के अशुभ अंश में चला जाए, तो कष्ट स्थायी हो जाते हैं।

Lord of the House

अष्टम भाव के स्वामी (अष्टमेश) की स्थिति इस placement की सफलता की कुंजी है। यदि अष्टमेश कुंडली के शुभ भावों (केंद्र या त्रिकोण) में मजबूत होकर बैठा है और वह चंद्रमा (Chandra) का मित्र है, तो अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) जातक को नुकसान पहुंचाने के बजाय अचानक बड़ी सफलताएं और दीर्घायु प्रदान करेगा। लेकिन यदि अष्टमेश स्वयं छठे या बारहवें भाव में पीड़ित होकर बैठा है, तो चंद्रमा (Chandra) जातक को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं और मानसिक तनाव देगा।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP) में, किसी भी भाव के परिणामों का सटीक निर्णय उस भाव के कस्पल सब-लॉर्ड (Cuspal Sub-Lord) द्वारा किया जाता है। अष्टम भाव के संदर्भ में, यदि चंद्रमा (Chandra) अष्टम भाव का सब-लॉर्ड बनता है, तो यह जातक के जीवन में अचानक होने वाली घटनाओं, गुप्त धन, और मानसिक परिवर्तनों को नियंत्रित करता है। केपी सिद्धांतों के अनुसार, यदि अष्टम भाव का सब-लॉर्ड चंद्रमा (Chandra) हो और वह कुंडली के शुभ भावों (जैसे 2, 10, 11) के स्वामियों के नक्षत्र में स्थित हो, तो जातक को विरासत, बीमा दावों या लॉटरी के माध्यम से अचानक भारी वित्तीय लाभ प्राप्त होता है। इसके विपरीत, यदि वह 6, 8, 12 भावों के स्वामियों के नक्षत्र में हो, तो जातक को अचानक दुर्घटनाओं, सर्जरी और गंभीर मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। केपी प्रणाली में सब-लॉर्ड की स्थिति ही यह तय करती है कि अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) जातक के लिए वरदान साबित होगा या अभिशाप।

Practical Significations

Psychological and Intuitive Traits

तीव्र अंतर्ज्ञान शक्ति: अष्टम भाव का चंद्रमा (Chandra) जातक को एक असाधारण छठी इंद्रिय (sixth sense) और अंतर्ज्ञान प्रदान करता है। ऐसा जातक दूसरों के मन की बात और आने वाली घटनाओं को पहले ही भांप लेता है। रहस्यमयी विद्याओं में रुचि: जातक का झुकाव स्वाभाविक रूप से ज्योतिष, तंत्र-मंत्र, मनोविज्ञान और छिपे हुए रहस्यों की खोज की ओर होता है। भावनात्मक गहराई: जातक अपनी भावनाओं को बहुत गहराई से महसूस करता है, हालांकि वह उन्हें दुनिया के सामने प्रकट नहीं होने देता।

Financial and Legacy Matters

विरासत से अचानक लाभ: जातक को अपने पूर्वजों की संपत्ति, वसीयत या बीमा के माध्यम से अचानक बड़ा धन प्राप्त होने के योग बनते हैं। साझेदारी से धन लाभ: विवाह के पश्चात जातक को अपने जीवनसाथी के माध्यम से या व्यावसायिक साझेदारों के सहयोग से वित्तीय लाभ प्राप्त होता है। शोध और अनुसंधान से करियर: जातक जासूसी, अनुसंधान, वैज्ञानिक खोजों या गुप्त सूचनाओं से जुड़े क्षेत्रों में अपना सफल करियर बना सकता है।

Frequently Asked Questions

क्या अष्टम भाव में चंद्रमा हमेशा खराब परिणाम देता है?
नहीं, अष्टम भाव में चंद्रमा हमेशा खराब परिणाम नहीं देता। यदि चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ या स्वराशि कर्क में हो, या उस पर बृहस्पति जैसे शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो यह जातक को तीव्र अंतर्ज्ञान, अचानक धन लाभ और गहरी आध्यात्मिक समझ प्रदान करता है। केवल पीड़ित होने पर ही यह मानसिक तनाव देता है।
क्या अष्टम भाव का चंद्रमा माता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है?
हाँ, शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार अष्टम भाव में चंद्रमा माता के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए अनुकूल नहीं माना गया है। विशेष रूप से यदि चंद्रमा कृष्ण पक्ष का हो या उस पर शनि, मंगल या राहु का पापी प्रभाव हो, तो जातक को बाल्यावस्था में ही माता के वियोग या उनके खराब स्वास्थ्य का सामना करना पड़ सकता है।
अष्टम भाव में चंद्रमा होने पर मृत्यु का क्या कारण हो सकता है?
शास्त्रीय ग्रंथ Saravali के अनुसार, अष्टम भाव में स्थित ग्रह मृत्यु के माध्यम को दर्शाता है। चूंकि चंद्रमा एक जलीय ग्रह है, इसलिए अष्टम भाव में चंद्रमा होने पर मृत्यु का कारण जल, डूबना या जल से संबंधित बीमारियां हो सकती हैं। हालांकि, इसके लिए अन्य पापी ग्रहों का प्रभाव होना भी आवश्यक है।
क्या अष्टम भाव का चंद्रमा मानसिक बीमारी या डिप्रेशन देता है?
हाँ, अष्टम भाव मन के कारक चंद्रमा के लिए एक संवेदनशील स्थान है। यदि यहाँ चंद्रमा राहु, केतु या मंगल से पीड़ित हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि न हो, तो जातक गंभीर मानसिक अवसाद (depression), अज्ञात भय, और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से पीड़ित हो सकता है।
अष्टम भाव के चंद्रमा के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
अष्टम भाव के चंद्रमा के लिए वृषभ राशि (जहाँ वह उच्च का होता है) और कर्क राशि (जहाँ वह अपनी स्वराशि में होता है) सबसे अच्छी मानी जाती हैं। इन राशियों में चंद्रमा अष्टम भाव के नकारात्मक प्रभावों को कम करके जातक को मानसिक मजबूती और वित्तीय समृद्धि प्रदान करता है।
क्या अष्टम भाव का चंद्रमा अचानक धन लाभ करा सकता है?
हाँ, अष्टम भाव गुप्त धन और विरासत का स्थान है। यदि अष्टम भाव के चंद्रमा पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो या लग्नेश द्वितीय भाव में होकर अष्टम के चंद्रमा से दृष्ट हो, तो जातक को जीवन में अचानक वसीयत, बीमा या गुप्त स्रोतों से भारी धन लाभ प्राप्त होता है।

Remedial Measures

शास्त्रीय ग्रंथों में अष्टम भाव के पीड़ित चंद्रमा (Chandra) के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और उसकी शुभता को बढ़ाने के लिए कई विशिष्ट उपाय बताए गए हैं। Jataka Parijata और अन्य ग्रंथों के अनुसार, यदि चंद्रमा (Chandra) के कारण बालारिष्ट या स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं आ रही हों, तो जातक को भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।

Standard Remedies for Moon

चंद्रमा (Chandra) की शांति और उसे मजबूत करने के लिए निम्नलिखित पारंपरिक उपाय (Upay) अत्यंत प्रभावी माने गए हैं:
  • आध्यात्मिक उपाय: प्रतिदिन या प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव का जलाभिषेक या दुग्धाभिषेक करें। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का नियमित रूप से 108 बार जप करें। सोमवार के दिन शिव चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ होता है।
  • व्यवहारगत उपाय: अपनी माता और माता समान महिलाओं का सदैव सम्मान करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। अपने मन को शांत रखने के लिए नियमित रूप से ध्यान (meditation) और प्राणायाम करें। पानी या दूध को कभी भी बर्बाद न करें।
  • दान कार्य: सोमवार के दिन सफेद वस्तुओं का दान करें, जैसे चावल, दूध, चीनी, सफेद वस्त्र, या चांदी। यह दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर के पुजारी को सोमवार की शाम को दिया जाना चाहिए।
  • रत्न चिकित्सा (Gemstone): चंद्रमा (Chandra) का मुख्य रत्न मोती (Pearl) है। चेतावनी: मोती केवल तभी धारण करना चाहिए जब चंद्रमा (Chandra) आपकी कुंडली के लिए एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (functional benefic) हो, जैसे मेष, कर्क, वृश्चिक या मीन लग्न में। यदि आपका लग्न वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर या कुंभ है, जहाँ चंद्रमा (Chandra) एक कार्यात्मक पापी ग्रह (functional malefic) बनता है, तो मोती पहनने से बचें, क्योंकि यह अष्टम भाव के कष्टों और मानसिक तनाव को और अधिक बढ़ा सकता है।
अष्टम भाव में चंद्रमा (Chandra) की स्थिति का अपनी कुंडली में विश्लेषण करते समय, जातक को सबसे पहले चंद्रमा (Chandra) के पक्ष बल (कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष), उसकी डिग्री (अवस्था), अष्टकवर्ग में प्राप्त बिंदुओं, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से अष्टमेश की स्थिति का सावधानीपूर्वक अध्ययन करना चाहिए। इन सभी कारकों के संयुक्त और संतुलित विश्लेषण के बाद ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

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Sources consulted

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