Moon in the 10th House

38 min read · Drawn from 50 classical and modern works · Updated August 2026 · 1 view

वैदिक ज्योतिष में, मन और भावनाओं के कारक ग्रह चन्द्रमा (Chandra) का दशम भाव (Dashama Bhava) यानी कर्म स्थान (Karma Sthana) में स्थित होना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली स्थिति है। दशम भाव हमारे करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा, सार्वजनिक जीवन, अधिकार और संसार में किए जाने वाले कर्मों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि चन्द्रमा हमारे मन, संवेदनशीलता, माता, मानसिक शांति और जनता का प्रतिनिधित्व करता है। जब यह संवेदनशील ग्रह कर्म के सर्वोच्च भाव में बैठता है, तो यह जातक के व्यावसायिक जीवन और सार्वजनिक छवि में गहरी संवेदनशीलता और उतार-चढ़ाव लेकर आता है। यह संयोजन आमतौर पर एक ऐसा करियर निर्मित करता है जो सीधे तौर पर जनता से जुड़ा होता है, जहाँ जातक की मानसिक स्थिति उसके काम के माहौल से अत्यधिक प्रभावित होती है। हालांकि, इस स्थिति का अंतिम परिणाम और जातक को मिलने वाली सफलता पूरी तरह से चन्द्रमा की गरिमा (Dignity), पक्ष बल और उस पर पड़ने वाले अन्य ग्रहों के दृष्टि संबंध पर निर्भर करती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि शास्त्रीय ग्रंथ अक्सर ज्योतिषीय परिणामों को अत्यंत स्पष्ट और पूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करते हैं; कुंडली में किसी भी एक स्थिति को अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए, और गंभीर भविष्यवाणियों के लिए संपूर्ण चार्ट में कई पुष्टिकारक प्रतिकूलताओं का होना आवश्यक है।

Classical Position

वैदिक ज्योतिष के प्रामाणिक और स्वीकृत ग्रंथों में दशम भाव में चन्द्रमा (Chandra) की स्थिति को लेकर व्यापक सहमति पाई जाती है। शास्त्रीय परंपरा स्पष्ट रूप से मानती है कि यह स्थिति जातक के करियर और उसकी मानसिक स्थिति (Mental State) को गहराई से प्रभावित करती है। Sarvartha-Chintamani और Sarvartha Chintamani JN Bhasin जैसे प्रतिष्ठित ग्रंथों के अनुसार, दशम भाव का चन्द्रमा जातक के व्यावसायिक जीवन और मानसिक संतुलन के बीच एक सीधा संबंध स्थापित करता है। जब जातक के जीवन में इस चन्द्रमा की महादशा (Mahadasha) सक्रिय होती है, तो उसके परिणाम काफी हद तक अंतर्दशा (Antardasha) के ग्रहों पर निर्भर करते हैं। शास्त्रीय परंपरा में यह सर्वसम्मति है कि यदि दशम भाव में चन्द्रमा स्थित हो और उस समय किसी पापी ग्रह (Malefic) की अंतर्दशा चल रही हो, तो जातक को अपने कार्यों में अत्यधिक निराशा, असफलता और अज्ञात भय का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत, शुभ ग्रहों की अंतर्दशा के दौरान जातक अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहता है और उसे अपने कर्मक्षेत्र में सकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय ग्रंथों और नाड़ी परंपराओं में दशम भाव के चन्द्रमा को लेकर कई विशिष्ट और भिन्न दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किए गए हैं। ये दृष्टिकोण जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे शारीरिक बनावट, स्वास्थ्य, स्वभाव, धन और जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं पर प्रकाश डालते हैं।

Physical Appearance and Health

  • सुंदर शरीर और राजसी आभा: Saravali के अनुसार, यदि दशम भाव में चन्द्रमा (Chandra) और सूर्य (Sun) की युति हो, तो जातक का शरीर अत्यंत सुंदर और आकर्षक होता है, और उसमें राजसी या क्षत्रिय गुण (राजस) विद्यमान होते हैं।
  • शारीरिक रोग और संवेदनशीलता: यदि चन्द्रमा से दशम भाव में शनि स्थित हो, तो Saravali के अनुसार जातक शारीरिक रोगों से पीड़ित हो सकता है और वह अत्यधिक भावुक स्वभाव का होता है।
  • अपेंडिसाइटिस की प्रवृत्ति: How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि चन्द्रमा कन्या, वृश्चिक या कुंभ राशि में हो और उस पर पापी ग्रहों का प्रभाव हो, तो जातक में अपेंडिसाइटिस (Appendicitis) जैसी स्वास्थ्य समस्याओं की प्रवृत्ति हो सकती है।

Temperament and Mental State

  • कर्तव्यनिष्ठा और परोपकार: Sarvartha-Chintamani के अनुसार, शुभ ग्रहों की अंतर्दशा के प्रभाव से जातक में अपने कर्तव्यों के प्रति गहरी निष्ठा और दान-पुण्य करने की प्रवृत्ति जागृत होती है।
  • क्रूरता और साहस: यदि चन्द्रमा से दशम भाव में मंगल स्थित हो, तो जातक क्रूर स्वभाव का हो सकता है, लेकिन साथ ही वह अत्यंत साहसी और वीरतापूर्ण कार्यों में रुचि रखने वाला होता है।
  • अस्थिरता और निराशा: पापी ग्रहों की अंतर्दशा के दौरान जातक का मन अशांत रहता है, और उसे अपने प्रयासों में लगातार बाधाओं के कारण मानसिक कुंठा का अनुभव होता है।

Wealth, Status and Life Events

  • विदेश यात्रा और आजीविका: Crux of Vedic Astrology Timing of Events के अनुसार, दशम भाव में चन्द्रमा की उपस्थिति या चन्द्रमा का दशमेश (Dashamesha) होना जातक को अपनी आजीविका के लिए सुदूर देशों या विदेशी भूमि की यात्रा करने के लिए प्रेरित करता है।
  • वंश की समाप्ति का योग: Saravali और Jataka-Parijata में एक अत्यंत विशिष्ट और गंभीर योग का उल्लेख मिलता है। इसके अनुसार, यदि चन्द्रमा दशम भाव में हो, शुक्र सप्तम भाव में हो और चतुर्थ भाव में पापी ग्रह स्थित हों, तो जातक का वंश आगे नहीं बढ़ता है।
  • साम्राज्य और राजयोग: Jataka Parijata Vol 2 के अनुसार, यदि पूर्ण चन्द्रमा (Full Moon) शुभ ग्रहों से दृष्ट होकर दशम भाव में स्थित हो, तो जातक पृथ्वी का शासक या अत्यंत प्रभावशाली राजा बनता है।
  • चिकित्सा और धार्मिक व्यवसाय: Saravali के अनुसार, यदि चन्द्रमा से दशम भाव में पापी ग्रह स्थित हों और वे शुभ ग्रहों से दृष्ट हों, तो जातक चिकित्सक, पुरोहित, ज्योतिषी बनता है, या फिर वह दूसरों को ठगने की प्रवृत्ति रख सकता है।

Aspect and Directional Strength

दशम भाव में स्थित होकर चन्द्रमा (Chandra) अपनी पूर्ण सप्तम दृष्टि (Drishti) चतुर्थ भाव (Chaturtha Bhava) पर डालता है। चतुर्थ भाव माता, गृह जीवन, वाहन, भूमि और आंतरिक सुख का कारक है। चूंकि चन्द्रमा स्वयं चतुर्थ भाव का प्राकृतिक कारक (Karaka) है, इसलिए दशम भाव से उसकी यह दृष्टि चतुर्थ भाव को अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण बना देती है। यदि चन्द्रमा शुभ और बली (जैसे शुक्ल पक्ष का पूर्ण चन्द्रमा) हो, तो उसकी चतुर्थ भाव पर पड़ने वाली दृष्टि जातक को उत्तम पारिवारिक सुख, माता का स्नेह, वाहन सुख और मानसिक शांति प्रदान करती है। इसके विपरीत, यदि चन्द्रमा कृष्ण पक्ष का या पीड़ित हो, तो यह दृष्टि घरेलू वातावरण में अशांति और माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं उत्पन्न कर सकती है। दिशा बल (Digbala) के सिद्धांतों के अनुसार, चन्द्रमा चतुर्थ भाव में सबसे मजबूत होता है, जहाँ उसे पूर्ण दिशा बल प्राप्त होता है। दशम भाव में स्थित होने के कारण चन्द्रमा अपने दिशा बल के स्थान से ठीक विपरीत दिशा में होता है, जिससे वह दिशा बल से शून्य हो जाता है। दिशा बल की इस कमी के कारण जातक को अपने करियर में स्थिरता प्राप्त करने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ सकता है, और उसका मन अपने काम को लेकर बार-बार बदल सकता है।

The Placement Across the Twelve Rashis

Aries (Mesha)

मेष राशि में चन्द्रमा (Chandra) एक तटस्थ या सम (Neutral) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी मंगल (Mars) है। मेष राशि लग्न होने पर यह स्थिति जातक के लिए प्रथम भाव (लग्न) के स्वामी के रूप में कार्य करती है, जिससे जातक का स्वयं का अस्तित्व और उसका करियर सीधे तौर पर जुड़ जाते हैं। Moon in Aries के कारण जातक के भीतर अपने करियर को लेकर एक अद्वितीय उत्साह और पहल करने की क्षमता होती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, मेष राशि का चन्द्रमा जातक के भीतर आक्रामकता बनाम मुखरता के कर्मिक मुद्दों को जन्म देता है। जातक अपने काम में बहुत अधिक स्वतंत्र होना चाहता है, लेकिन कभी-कभी जल्दबाजी में लिए गए निर्णय उसके करियर में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।

Taurus (Vrishabha)

वृषभ राशि में चन्द्रमा (Chandra) अपनी उच्च (Exalted) गरिमा प्राप्त करता है, और इस राशि का स्वामी शुक्र (Venus) है। वृषभ राशि के दशम भाव में होने पर सिंह लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा द्वादश भाव (Dvadasha Bhava) का स्वामी होता है। Moon in Taurus की यह स्थिति जातक को अत्यधिक समृद्ध, कलात्मक और व्यावसायिक रूप से सफल बनाती है। Saravali के अनुसार, यदि इस उच्च के चन्द्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक एक समृद्ध किसान या उद्यमी बनता है जो दूसरों को ऋण देता है। यदि बुध की दृष्टि हो, तो वह अत्यंत विद्वान और प्रियभाषी होता है। बृहस्पति की दृष्टि होने पर जातक दीर्घायु पत्नी और बच्चों से युक्त, अत्यंत सम्मानित और गुणी होता है। शुक्र की दृष्टि जातक को सभी प्रकार के भौतिक सुख, वाहन और आभूषण प्रदान करती है।

Gemini (Mithuna)

मिथुन राशि में चन्द्रमा (Chandra) अपने मित्र ग्रह बुध (Mercury) की राशि में होने के कारण मित्र (Friendly) गरिमा में होता है। मिथुन राशि के दशम भाव में होने पर कन्या लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा एकादश भाव (Ekadasha Bhava) का स्वामी होता है। Moon in Gemini जातक को उत्कृष्ट संचार कौशल, लेखन क्षमता और बौद्धिक चातुर्य प्रदान करता है। Saravali के अनुसार, यदि इस चन्द्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक विद्वान और परोपकारी होता है, लेकिन मानसिक रूप से कुछ परेशान रह सकता है। नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, मिथुन राशि का चन्द्रमा जातक को सामाजिक संपर्कों और साहित्यिक गतिविधियों में अत्यधिक सक्रिय बनाता है। हालांकि, यदि इस राशि में चन्द्रमा पहले १० अंशों में हो, तो जातक को वित्तीय उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।

Cancer (Karka)

कर्क राशि में चन्द्रमा (Chandra) अपनी स्वराशि (Own Sign) में अत्यंत बली होता है। कर्क राशि के दशम भाव में होने पर तुला लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा स्वयं दशम भाव का स्वामी होता है। Moon in Cancer की यह स्थिति जातक को जनता के बीच अत्यधिक लोकप्रिय और सम्मानित बनाती है। Phaladeepika के अनुसार, यदि रात्रि का जन्म हो और चन्द्रमा कर्क राशि के दशम भाव में स्थित हो, तथा शुभ ग्रह केंद्र या त्रिकोण में हों, तो जातक एक महान राजा या अत्यंत प्रभावशाली नेता बनता है। जातक का मन अपने काम में पूरी तरह से रमता है, लेकिन वह अपने कार्यस्थल की भावनात्मक परिस्थितियों से बहुत जल्दी प्रभावित हो जाता है।

Leo (Simha)

सिंह राशि में चन्द्रमा (Chandra) अपने परम मित्र सूर्य (Sun) की राशि में मित्र (Friendly) गरिमा में होता है। सिंह राशि के दशम भाव में होने पर वृश्चिक लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा नवम भाव (Navama Bhava) का स्वामी होकर भाग्येश बनता है। Moon in Leo जातक को महत्वाकांक्षी, साहसी और उदार बनाता है। Saravali के अनुसार, यदि इस चन्द्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक राजा के समान तेजस्वी, गंभीर आवाज वाला और प्रसिद्ध होता है। यदि मंगल की दृष्टि हो, तो वह सेनापति या उच्च प्रशासनिक अधिकारी बनता है। बृहस्पति की दृष्टि जातक को समाज में सर्वोच्च स्थान और सदाचारी चरित्र प्रदान करती है। यह स्थिति जातक के करियर को भाग्य और धर्म के साथ जोड़ती है।

Virgo (Kanya)

कन्या राशि में चन्द्रमा (Chandra) बुध की राशि में मित्र (Friendly) गरिमा में होता है। कन्या राशि के दशम भाव में होने पर धनु लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा अष्टम भाव (Ashtama Bhava) का स्वामी होता है। Moon in Virgo जातक को अत्यधिक विश्लेषणात्मक, कर्तव्यनिष्ठ और सेवाभावी बनाता है। Saravali के अनुसार, यदि इस चन्द्रमा पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक ज्योतिष, साहित्य और विवादों में सफलता प्राप्त करता है। बृहस्पति की दृष्टि होने पर जातक को सामाजिक प्रतिष्ठा और प्रचुर धन प्राप्त होता है। हालांकि, अष्टमेश होने के कारण यह चन्द्रमा कभी-कभी जातक को अत्यधिक आत्म-आलोचनात्मक और मानसिक रूप से चिंतित भी बना सकता है।

Libra (Tula)

तुला राशि में चन्द्रमा (Chandra) शुक्र की राशि में तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है। तुला राशि के दशम भाव में होने पर मकर लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा सप्तम भाव (Saptama Bhava) का स्वामी होता है। Moon in Libra जातक को कलात्मक, न्यायप्रिय और सार्वजनिक संबंधों में कुशल बनाता है। Saravali के अनुसार, यदि इस चन्द्रमा पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक कलाओं में निपुण और प्रसिद्ध वक्ता बनता है। बृहस्पति की दृष्टि जातक को उच्च सामाजिक दर्जा प्रदान करती है। हालांकि, कुछ शोध ग्रंथों के अनुसार, तुला राशि का चन्द्रमा जातक को कभी-कभी अत्यधिक विलासी या विपरीत लिंग के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बना सकता है।

Scorpio (Vrischika)

वृश्चिक राशि में चन्द्रमा (Chandra) अपनी नीच (Debilitated) गरिमा में होता है, और इस राशि का स्वामी मंगल है। वृश्चिक राशि के दशम भाव में होने पर कुंभ लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा षष्ठ भाव (Shashta Bhava) का स्वामी होता है। Moon in Scorpio जातक के जीवन में अत्यधिक भावनात्मक उतार-चढ़ाव और संघर्ष लेकर आता है। Saravali के अनुसार, यदि इस नीच के चन्द्रमा पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक को अतुलनीय साहस और विजय प्राप्त होती है। बृहस्पति की दृष्टि होने पर जातक अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित और सुंदर होता है। हालांकि, यदि यह चन्द्रमा शनि या राहु से पीड़ित हो, तो जातक को मानसिक तनाव और गुप्त शत्रुओं का सामना करना पड़ सकता है।

Sagittarius (Dhanu)

धनु राशि में चन्द्रमा (Chandra) बृहस्पति की राशि में तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है। धनु राशि के दशम भाव में होने पर मीन लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा पंचम भाव (Panchama Bhava) का स्वामी होता है। Moon in Sagittarius जातक को आशावादी, ज्ञान पिपासु और धर्मपरायण बनाता है। Saravali के अनुसार, यदि इस चन्द्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक राजा के समान समृद्ध और सुखी होता है। मंगल की दृष्टि होने पर वह सेना या पुलिस में उच्च पद प्राप्त करता है। बुध की दृष्टि जातक को एक कुशल ज्योतिषी, लेखक या नर्तक बनाती है। यह स्थिति जातक की बुद्धि और रचनात्मकता को उसके करियर से जोड़ती है।

Capricorn (Makara)

मकर राशि में चन्द्रमा (Chandra) शनि की राशि में तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है। मकर राशि के दशम भाव में होने पर मेष लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा चतुर्थ भाव (Chaturtha Bhava) का स्वामी होता है। Moon in Capricorn जातक को व्यावहारिक, अनुशासित और अपने काम के प्रति बेहद गंभीर बनाता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, मकर राशि का चन्द्रमा जातक को अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में संकोची बनाता है। जातक अपने काम को बहुत अधिक महत्व देता है, जिससे उसका पारिवारिक जीवन कभी-कभी प्रभावित हो सकता है। शुक्र की दृष्टि होने पर जातक को कलात्मक क्षेत्रों में सफलता और सुख प्राप्त होता है।

Aquarius (Kumbha)

कुंभ राशि में चन्द्रमा (Chandra) शनि की राशि में तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है। कुंभ राशि के दशम भाव में होने पर वृषभ लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा तृतीय भाव (Tritiya Bhava) का स्वामी होता है। Moon in Aquarius जातक को लीक से हटकर सोचने वाला, परोपकारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाला बनाता है। नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यदि इस राशि में चन्द्रमा राहु के साथ हो, तो जातक तरल पदार्थों या जड़ी-बूटियों से दवाएं बनाने के व्यवसाय में हो सकता है। Horasara के अनुसार, यदि कुंभ राशि का चन्द्रमा पीड़ित हो, तो जातक को हृदय संबंधी समस्याओं के प्रति सचेत रहना चाहिए।

Pisces (Meena)

मीन राशि में चन्द्रमा (Chandra) बृहस्पति की राशि में तटस्थ (Neutral) गरिमा में होता है। मीन राशि के दशम भाव में होने पर मिथुन लग्न बनता है, जहाँ चन्द्रमा द्वितीय भाव (Dvitiya Bhava) का स्वामी होता है। Moon in Pisces जातक को अत्यधिक संवेदनशील, सहज ज्ञान युक्त (Intuitive) और कल्पनाशील बनाता है। Saravali के अनुसार, यदि इस चन्द्रमा पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक संगीत, नृत्य और कलाओं में अत्यधिक निपुण होता है। बृहस्पति की दृष्टि होने पर जातक को प्रचुर धन, सुंदर शरीर और उच्च सामाजिक दर्जा प्राप्त होता है। यह स्थिति जातक की वाणी और संचित धन को उसके कर्मक्षेत्र से जोड़ती है।

Conjunctions in This House

Sun

दशम भाव में Sun with Moon की युति होने पर अमावस्या योग का निर्माण होता है। Saravali के अनुसार, यह युति जातक को एक सुंदर शरीर, सैन्य नेतृत्व की क्षमता और अत्यधिक पराक्रम प्रदान करती है। हालांकि, जातक स्वभाव से थोड़ा कठोर और शत्रुओं का नाश करने वाला हो सकता है। यदि इस युति पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो, तो जातक को सरकारी क्षेत्रों में उच्च पद प्राप्त होता है।

Mars

दशम भाव में Mars with Moon की युति से प्रसिद्ध चंद्र-मंगल योग या लक्ष्मी योग का निर्माण होता है। Saravali के अनुसार, यह युति जातक को अत्यधिक साहसी, वीर और सेना, पुलिस या भूमि से संबंधित कार्यों में अपार सफलता प्रदान करती है। जातक के पास प्रचुर मात्रा में संपत्ति और वाहन होते हैं।

Mercury

दशम भाव में Mercury with Moon की युति जातक को उत्कृष्ट बौद्धिक क्षमता, लेखन कौशल और व्यापारिक सूझबूझ प्रदान करती है। हालांकि, Sarvartha-Chintamani के अनुसार, यदि यह युति पापी ग्रहों से पीड़ित हो और नीच के नवंश में हो, तो जातक के भीतर अनैतिक प्रवृत्तियां आ सकती हैं।

Jupiter

दशम भाव में Jupiter with Moon की युति से अत्यंत शुभ गजकेसरी योग (Gajakesari Yoga) का निर्माण होता है। यह युति जातक को समाज में सर्वोच्च सम्मान, धार्मिक प्रवृत्ति, अपार धन और ज्ञान प्रदान करती है। जातक एक कुशल सलाहकार, मंत्री या शिक्षक के रूप में ख्याति प्राप्त करता है।

Venus

दशम भाव में Venus with Moon की युति जातक को कला, संगीत, सौंदर्य और विलासिता के साधनों के प्रति गहरी रुचि प्रदान करती है। जातक का व्यक्तित्व अत्यंत आकर्षक होता है और वह फैशन, सिनेमा या जनसंपर्क के क्षेत्रों में बड़ी सफलता प्राप्त करता है।

Saturn

दशम भाव में Saturn with Moon की युति से विष योग का निर्माण होता है। Prasna Arudhaphala के अनुसार, यह युति जातक के जीवन में मानसिक तनाव, अकेलापन और करियर में देरी लेकर आती है। हालांकि, यदि यह युति अनुकूल हो, तो जातक को जीवन में वास्तविक और स्थायी सफलता प्राप्त होती है।

Rahu

दशम भाव में Rahu with Moon की युति जातक के भीतर करियर को लेकर एक अजीब सा जुनून पैदा करती है। जातक लीक से हटकर काम करना चाहता है। नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यह युति जातक को चिकित्सा, रसायन या विदेशी व्यापार में सफलता दिला सकती है, लेकिन यह मानसिक अशांति भी देती है।

Ketu

दशम भाव में Ketu with Moon की युति जातक को अपने करियर के प्रति उदासीन या आध्यात्मिक बना सकती है। जातक को बार-बार नौकरी बदलने की इच्छा हो सकती है। नाड़ी ज्योतिष के अनुसार, विशिष्ट राशियों में यह युति सिलाई या हस्तशिल्प जैसे तकनीकी कार्यों से भी जोड़ सकती है। दशम भाव में तीन या अधिक ग्रहों की युति (Stellium) जातक के पूरे जीवन का ध्यान पूरी तरह से उसके करियर और सामाजिक छवि पर केंद्रित कर देती है। यदि इस युति में शनि का प्रभाव हो और चन्द्रमा मंगल या शनि के अंश में होकर शनि से दृष्ट हो, तो जातक में सन्यास (Sanyasa) या वैराग्य की भावना प्रबल हो सकती है।

Aspects Received

Jupiter

बृहस्पति (Jupiter) की चन्द्रमा पर दृष्टि अत्यंत शुभ मानी जाती है। Notable Horoscopes के अनुसार, बृहस्पति की दृष्टि चन्द्रमा को गहन आध्यात्मिकता, मानसिक शांति और समाज में उच्च नैतिक दर्जा प्रदान करती है। यह जातक के सभी मानसिक तनावों को दूर करने में सहायक होती है।

Saturn

शनि (Saturn) की दृष्टि चन्द्रमा पर पड़ने से जातक को बचपन में माता के स्नेह की कमी या कड़े अनुशासन का सामना करना पड़ सकता है। Notable Horoscopes के अनुसार, यह दृष्टि जातक को गंभीर, अंतर्मुखी और अपने कर्तव्यों के प्रति अत्यधिक जिम्मेदार बनाती है, लेकिन यह मानसिक अवसाद भी दे सकती है।

Mars

मंगल (Mars) की दृष्टि चन्द्रमा पर होने से जातक का स्वभाव थोड़ा उग्र और भावुक (Emotional Temperament) हो जाता है। जातक के भीतर काम करने की तीव्र ऊर्जा होती है, लेकिन उसे अपने गुस्से और जल्दबाजी पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता होती है।

Rahu

राहु (Rahu) की दृष्टि चन्द्रमा पर पड़ने से जातक के मन में भ्रम, अज्ञात भय और अत्यधिक महत्वाकांक्षा पैदा होती है। जातक कभी-कभी अपनी वास्तविक स्थिति से असंतुष्ट रहता है और शॉर्टकट अपनाने की कोशिश कर सकता है।

Ketu

केतु (Ketu) की दृष्टि चन्द्रमा को सांसारिक चीजों से दूर ले जाने का प्रयास करती है। यह जातक के भीतर वैराग्य, गहन शोध की प्रवृत्ति और मानसिक अलगाव की स्थिति उत्पन्न कर सकती है।

Strength and Condition

दशम भाव में चन्द्रमा (Chandra) के वास्तविक परिणामों को समझने के लिए उसकी विभिन्न अवस्थाओं और बल का विश्लेषण करना अनिवार्य है।

Baladi Avastha

जातक को चन्द्रमा के पूर्ण परिणाम तभी प्राप्त होते हैं जब वह डिग्री के अनुसार युवा अवस्था में हो।
  • विषम राशियों में (Aries, Gemini, Leo, Libra, Sagittarius, Aquarius): डिग्री के अनुसार अवस्थाएं इस प्रकार चलती हैं:
    • ०-६ डिग्री: बाल (Bala) - कमजोर परिणाम
    • ६-१२ डिग्री: कुमार (Kumara) - मध्यम परिणाम
    • १२-१८ डिग्री: युवा (Yuva) - पूर्ण परिणाम
    • १८-२४ डिग्री: वृद्ध (Vridha) - अत्यंत कमजोर परिणाम
    • २४-३० डिग्री: मृत (Mrita) - नगण्य परिणाम
  • सम राशियों में (Taurus, Cancer, Virgo, Scorpio, Capricorn, Pisces): यह क्रम पूरी तरह से उलट जाता है, जहाँ २४-३० डिग्री बाल अवस्था होती है और ०-६ डिग्री मृत अवस्था होती है।

Ashtakavarga

अष्टकवर्ग (Ashtakavarga) में दशम भाव को मिलने वाले बिंदु (Bindu) चन्द्रमा की फल देने की क्षमता को निर्धारित करते हैं। यदि दशम भाव में २८ से अधिक बिंदु हों, तो चन्द्रमा अपने शुभ प्रभावों को पूर्ण रूप से प्रकट करने में सक्षम होता है। कम बिंदु होने पर जातक को करियर में लगातार बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

Nakshatra

चन्द्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, उस नक्षत्र का स्वामी ग्रह चन्द्रमा के परिणामों को गहराई से प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, यदि चन्द्रमा अपने मित्र ग्रह के नक्षत्र में हो, तो परिणाम अधिक अनुकूल होते हैं।

Navamsha

नवांश कुंडली (Navamsha) चन्द्रमा के सूक्ष्म बल को दर्शाती है। Saravali के अनुसार, यदि नवांश का स्वामी राशि के स्वामी से अधिक बली हो, तो नवांश स्वामी के प्रभाव जातक के जीवन में अधिक स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं। यदि चन्द्रमा नवांश में वर्गोत्तम या उच्च का हो, तो वह अत्यंत शुभ फल देता है।

Condition of the 10th Lord

दशम भाव के स्वामी (दशमेश) की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण है। Saravali के अनुसार, यदि दशम भाव का स्वामी बली होकर केंद्र या त्रिकोण में स्थित हो, तो जातक का करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा अत्यंत सुदृढ़ होती है। एक कमजोर दशमेश बली चन्द्रमा के शुभ फलों को भी सीमित कर सकता है।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में, किसी भी भाव के परिणामों को सटीक रूप से जानने के लिए केवल राशि स्वामी को नहीं, बल्कि उस भाव के कस्पल सब-लॉर्ड (Cuspal Sub-Lord) को देखा जाता है। Predictive Stellar Astrology के अनुसार, भविष्यवाणियों के लिए हमेशा लग्न और कस्प की सटीक स्थिति का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि केवल चन्द्र राशि का। दशम भाव का सब-लॉर्ड यह निर्धारित करता है कि जातक का करियर किस दिशा में जाएगा। यदि दशम भाव का सब-लॉर्ड चन्द्रमा के नक्षत्र में हो और चन्द्रमा राहु या केतु द्वारा दर्शाया गया हो, तो वह उन कस्पल स्थितियों को प्रभावित नहीं करता जहाँ राहु या केतु दिखाई देते हैं। इसके अलावा, यदि सप्तम भाव का सब-लॉर्ड १, ६, १० या १२वें भाव का कार्येश (Significator) बनता है, तो विवाह में अत्यधिक विलंब या बाधाएं आती हैं।

Practical Significations

Career Paths

  • जनसंपर्क और विपणन: चूंकि चन्द्रमा जनता का कारक है, इसलिए जातक पीआर, मार्केटिंग और जनसंचार में सफल होता है।
  • जल और तरल पदार्थ: जल-उत्पाद, नौसेना, डेयरी उत्पाद, पेय पदार्थ और कोल्ड ड्रिंक्स का व्यवसाय।
  • सेवा और चिकित्सा: नर्सिंग, चिकित्सा, परामर्श और होटल या आतिथ्य उद्योग।

Mental State

  • भावनात्मक जुड़ाव: जातक अपने काम से भावनात्मक रूप से बहुत गहराई से जुड़ा होता है।
  • सार्वजनिक राय का प्रभाव: दूसरों की राय और आलोचना जातक की मानसिक शांति को तुरंत प्रभावित करती है।

Frequently Asked Questions

क्या दशम भाव में चन्द्रमा करियर के लिए अच्छा है?
हाँ, दशम भाव में चन्द्रमा सामान्यतः करियर के लिए बहुत अच्छा माना जाता है, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ जनता से सीधा जुड़ाव होता है। हालांकि, चन्द्रमा के पक्ष बल और उस पर पड़ने वाले शुभ ग्रहों के प्रभाव से ही अंतिम सफलता सुनिश्चित होती है।
क्या दशम भाव का चन्द्रमा नौकरी में बार-बार बदलाव देता है?
चूंकि चन्द्रमा एक तीव्र गति से चलने वाला और परिवर्तनशील ग्रह है, इसलिए दशम भाव में होने पर यह जातक के करियर में कुछ अस्थिरता या बार-बार बदलाव की प्रवृत्ति दे सकता है, विशेषकर यदि वह पीड़ित हो।
दशम भाव में चन्द्रमा के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी है?
चन्द्रमा के लिए वृषभ राशि (जहाँ वह उच्च का होता है) और कर्क राशि (जो उसकी अपनी राशि है) दशम भाव में सबसे उत्तम परिणाम प्रदान करती हैं।
क्या दशम भाव में चन्द्रमा माता के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है?
चन्द्रमा माता का कारक है और दशम भाव से वह चतुर्थ भाव (माता का भाव) को देखता है। यदि चन्द्रमा पीड़ित हो, तो माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।
दशम भाव में चन्द्रमा और शनि की युति का क्या प्रभाव होता है?
इसे विष योग कहा जाता है। यह करियर में शुरुआती संघर्ष, देरी और मानसिक तनाव देता है, लेकिन जातक को अत्यधिक अनुशासित और व्यावहारिक भी बनाता है।
क्या इस स्थिति से विदेश यात्रा का योग बनता है?
हाँ, शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, दशम भाव में चन्द्रमा की उपस्थिति जातक को अपनी आजीविका के लिए सुदूर देशों या विदेशी भूमि की यात्रा करने के लिए प्रेरित करती है।

Remedial Measures

Rasi Characteristics के अनुसार, यदि चन्द्रमा मेष या वृश्चिक राशि में हो, तो मंगलवार के दिन मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा या धनिष्ठा नक्षत्र में सूर्योदय से सुबह ११:०० बजे के बीच मूंगा (Coral) धारण करना या खरीदना मंगल ग्रह की शांति के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावी उपाय है।

Standard Remedies for Moon

  • आध्यात्मिक उपाय: प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर जल या दूध से अभिषेक करें। चन्द्रमा के बीज मंत्र "ॐ सों सोमाय नमः" का नियमित जाप करें। पूर्णिमा के दिन चन्द्रमा को अर्घ्य (Arghya) दें।
  • व्यवहारिक उपाय: अपनी माता और माता समान महिलाओं का सदैव सम्मान करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। अपने घर में पानी की बर्बादी को रोकें।
  • दान कार्य: सोमवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी, चांदी या सफेद वस्त्रों का जरूरतमंदों को दान करें।
  • रत्न उपाय: चन्द्रमा की मजबूती के लिए उत्तम गुणवत्ता का मोती (Pearl) चांदी की अंगूठी में कनिष्ठिका उंगली में धारण करें। विशेष चेतावनी: मोती केवल तभी धारण करना चाहिए जब चन्द्रमा आपकी कुंडली के लिए एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (Functional Benefic) हो (जैसे मेष, वृषभ, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मीन लग्न)। यदि चन्द्रमा आपकी कुंडली में कार्यात्मक पापी ग्रह (Functional Malefic) है (जैसे मिथुन, कन्या, तुला, मकर, कुंभ लग्न), तो मोती धारण करने से बचें, क्योंकि यह कष्टों को बढ़ा सकता है।
अपने चार्ट में इस स्थिति का सटीक विश्लेषण करने के लिए, जातक को सबसे पहले चन्द्रमा की राशि, उसके अंश (डिग्री), नवांश कुंडली में उसकी स्थिति और दशम भाव के स्वामी के बल की जांच करनी चाहिए। इसके साथ ही, वर्तमान में चल रही महादशा और अंतर्दशा का अध्ययन करके ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

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Sources consulted

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