Moon in the 2nd House

54 min read · Drawn from 49 classical and modern works · Updated August 2026 · 1 view

वैदिक ज्योतिष में, चंद्रमा को मन, भावनाओं और माता का Karaka (कारक) माना जाता है। जब यह संवेदनशील Graha (ग्रह) कुंडली के द्वितीय भाव में स्थित होता है, जिसे Dwitiya Bhava (द्वितीय भाव) या Dhana Bhava (धन भाव) कहा जाता है, तो यह जातक के जीवन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह भाव मुख्य रूप से धन, वाणी, परिवार, भोजन और दाहिनी आंख का प्रतिनिधित्व करता है। द्वितीय भाव में चंद्रमा की उपस्थिति जातक की मानसिक शांति को उसके परिवार, वित्तीय स्थिति और अभिव्यक्ति की क्षमता से गहराई से जोड़ती है। इस स्थिति का अंतिम परिणाम चंद्रमा की गरिमा, पक्ष बल, और उस पर पड़ने वाले शुभ या अशुभ Drishti (दृष्टि) प्रभावों पर निर्भर करता है। शास्त्रीय ग्रंथों में कुछ अत्यंत गंभीर और पूर्ण परिणाम (जैसे अंधापन या गंभीर शारीरिक कष्ट) बताए गए हैं; पाठकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ये परिणाम केवल एक ग्रह की स्थिति से नहीं, बल्कि संपूर्ण कुंडली में कई प्रतिकूल योगों के होने पर ही घटित होते हैं।

Classical Position

वैदिक ज्योतिष के प्रामाणिक और स्वीकृत ग्रंथों में द्वितीय भाव में चंद्रमा की स्थिति को लेकर कुछ महत्वपूर्ण और सर्वसम्मत सिद्धांत दिए गए हैं। Phaladeepika (फलदीपिका) और Mantreswara's Phaladeepika (मंत्रेश्वर कृत फलदीपिका) के अनुसार, यदि सूर्य या चंद्रमा द्वितीय या द्वादश भाव में स्थित हों और उन पर Mars (मंगल) या Saturn (शनि) की दृष्टि हो या वे इनसे युति कर रहे हों, तो जातक को गंभीर नेत्र रोगों का सामना करना पड़ता है। यह नियम परंपरा में पूरी तरह स्थापित है कि क्रूर ग्रहों का प्रभाव जब द्वितीय भाव (जो दाहिनी आंख का कारक है) या द्वादश भाव (जो बाईं आंख का कारक है) पर पड़ता है, तो दृष्टि बाधित होती है। इसके अतिरिक्त, शास्त्रीय परंपरा में एक और विशिष्ट और कड़ा कथन मिलता है। Scientific Hindu Astrology (साइंटिफिक हिंदू एस्ट्रोलॉजी) और अन्य प्राचीन स्रोतों के अनुसार, द्वितीय भाव में चंद्रमा की उपस्थिति जातक को उसके पूर्व जन्म के कर्मों या विधि कर्म के कारण चोरी की प्रवृत्ति या दूसरों के धन को हड़पने की इच्छा दे सकती है। यह दर्शाता है कि द्वितीय भाव का चंद्रमा यदि पीड़ित हो, तो जातक की वित्तीय नैतिकता में उतार-चढ़ाव आ सकता है।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय ग्रंथों और नाड़ी परंपराओं में द्वितीय भाव के चंद्रमा को लेकर कई विशिष्ट और भिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं। इन मतों को समझने के लिए इन्हें अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।

Physical Appearance and Health

शारीरिक स्वास्थ्य और विशेष रूप से नेत्र ज्योति को लेकर विभिन्न ग्रंथों में कई गहन योग बताए गए हैं:
  • नेत्रहीनता और रतौंधी: Sarvartha Chintamani (सर्वार्थ चिंतामणि) और Jataka Parijata (जातक पारिजात) के अनुसार, यदि द्वितीय भाव का स्वामी शुक्र और चंद्रमा के साथ प्रथम भाव यानी Lagna (लग्न) में स्थित हो, तो जातक रतौंधी (रात में न देख पाना) का शिकार होता है, बशर्ते यह संयोजन किसी शुभ ग्रह से युक्त न हो या उच्च राशि में न हो।
  • पूर्ण अंधापन: Jatak Alankaar (जातक अलंकार) के अनुसार, यदि द्वितीयेश और द्वादशेश, शुक्र और लग्नेश के साथ Trik (त्रिक - छठे, आठवें या बारहवें) भाव में हों, या चंद्रमा किसी पापी ग्रह और शुक्र के साथ द्वितीय भाव में स्थित हो, तो जातक जन्म से अंधा हो सकता है।
  • सूर्य-चंद्रमा की युति: How to Judge a Horoscope (हाउ टू जज ए होरोस्कोप) के अनुसार, यदि सूर्य और चंद्रमा दोनों द्वितीय भाव में हों, तो जातक रतौंधी से पीड़ित होता है। इसी प्रकार, यदि द्वितीयेश शुक्र के साथ हो, तो भी आंखों को नुकसान पहुंचता है।
  • त्वचा रोग: How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि चंद्रमा और मंगल द्वितीय भाव में स्थित हों और शनि उन पर दृष्टि डालता हो, तो जातक को एक विशिष्ट या अजीब त्वचा रोग का सामना करना पड़ता है।
  • अल्पायु का भय: Brihat Parashara Hora Shastra (बृहत पराशर होरा शास्त्र) के अनुसार, यदि चंद्रमा द्वितीय, सप्तम या नवम भाव का स्वामी होकर केतु से छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो अकाल मृत्यु का भय रहता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems (द एनसाइक्लोपीडिया ऑफ वैदिक एस्ट्रोलॉजिकल दशा सिस्टम्स) भी पुष्टि करता है कि जब चंद्रमा द्वितीय या द्वादश भाव का स्वामी होता है, तो असमय मृत्यु की संभावना बनती है क्योंकि ये मारक स्थान हैं।
  • जल स्तर में गिरावट: Predictive Stellar Astrology (प्रेडिक्टिव स्टेलर एस्ट्रोलॉजी) के अनुसार, यदि चंद्रमा का संबंध शनि से हो, तो जातक के जीवन में जल के स्रोतों या मानसिक ऊर्जा के स्तर में तेजी से गिरावट आती है।

Temperament and Mental State

जातक के स्वभाव और मानसिक स्थिति पर चंद्रमा का प्रभाव इस प्रकार वर्णित है:
  • आकर्षक और विद्वान स्वभाव: Jataka Parijata के अनुसार, द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को स्त्रियों का प्रिय, अत्यंत प्रिय व्यक्तित्व वाला, मधुर भाषी, चतुर, अध्ययनशील और धनवान बनाता है।
  • दशा का प्रभाव: The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, द्वितीय भाव में चंद्रमा होने पर यदि पापी ग्रहों की Bhukti (भुक्ति - अंतर्दशा) चल रही हो, तो परिवार, पत्नी, पुत्र और रिश्तेदारों को कष्ट होता है तथा सरकार से भय रहता है। इसके विपरीत, शुभ ग्रहों की अंतर्दशा में जातक को सुख और उत्तम भोजन की प्राप्ति होती है।

Wealth, Status and Life Events

धन, सामाजिक स्थिति और जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं के विषय में ग्रंथों के मत निम्नलिखित हैं:
  • तत्काल धन लाभ: Prashna Tantra (प्रश्न तंत्र) के अनुसार, यदि चंद्रमा, लग्नेश और द्वितीयेश एक साथ युति में हों या एक-दूसरे को देख रहे हों और वे द्वितीय भाव, Kendra (केंद्र) या Trikona (त्रिकोण) में स्थित हों, तो प्रश्नकर्ता को तत्काल वित्तीय लाभ होता है।
  • पत्नी के माध्यम से धन: Jataka Tattvam (जातक तत्वम) के अनुसार, यदि द्वितीय भाव का स्वामी मजबूत हो और वह सप्तमेश व डिस्पोजिटर के रूप में चंद्रमा से युक्त या दृष्ट हो, तो जातक को अपनी पत्नी के माध्यम से प्रचुर धन की प्राप्ति होती है।
  • अनेक लोगों का भरण-पोषण: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि द्वितीयेश शुभ ग्रहों के साथ हो और चंद्रमा द्वितीय भाव में Paravataamsha (परावतांश) में स्थित हो, तो जातक अपने जीवन में कम से कम 20 लोगों का आर्थिक रूप से समर्थन और भरण-पोषण करता है।
  • असत्य से आजीविका: Doctrines of Suka Nadi (डॉक्ट्रीन्स ऑफ शुक नाड़ी) के अनुसार, यदि चंद्रमा द्वितीय भाव में पंचमेश और षष्ठेश के साथ हो, और छठा भाव द्वितीयेश और सप्तमेश द्वारा अधिष्ठित हो, तो जातक झूठ बोलकर या अनैतिक तरीकों से अपनी आजीविका कमाता है।
  • प्रचुर धन योग: Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, जब भी चंद्रमा और शुक्र एक साथ लग्न, द्वितीय भाव या किसी Upachaya (उपचय - 3, 6, 10, 11) भाव में होते हैं, तो वे जातक को प्रचुर मात्रा में धन और समृद्धि प्रदान करते हैं।
  • संबंधों से लाभ: Yashodhar Mehta’s Research in Astrology (यशोधर मेहताज रिसर्च इन एस्ट्रोलॉजी) के अनुसार, यदि किसी अन्य व्यक्ति का चंद्रमा जातक के अपने चंद्रमा से द्वितीय भाव में हो या उस पर दृष्टि डालता हो, तो जातक को उस संबंध या साझेदारी से अत्यधिक लाभ होता है।
  • वैशेषिक अंश का प्रभाव: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि द्वितीयेश, बृहस्पति, चंद्रमा और सूर्य वैशेषिक विभाजन में हों और एकादशेश मजबूत हो, तो जातक अत्यंत धनवान बनता है।
  • वैवाहिक अलगाव: Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि द्वितीय भाव का स्वामी द्वादश भाव में चंद्रमा के साथ स्थित हो, तो यह विवाह में असंगति या शीघ्र अलगाव का संकेत देता है।
  • गणितज्ञ योग: Sarvartha Chintamani और How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि मंगल द्वितीय भाव में चंद्रमा के साथ हो और उस पर बुध की दृष्टि हो, या मंगल बुध के साथ केंद्र में हो, तो जातक एक कुशल गणितज्ञ बनता है।
  • अचानक धन लाभ: K.N. Rao's Astrology Lessons (के.एन. राव्स एस्ट्रोलॉजी लेसन्स) के अनुसार, यदि लग्नेश द्वितीय भाव में हो और अष्टम भाव से बृहस्पति और चंद्रमा उस पर दृष्टि डाल रहे हों, तो जातक को अचानक अप्रत्याशित धन लाभ या वसीयत की प्राप्ति होती है।
  • वित्तीय पतन: Yashodhar Mehta’s Research in Astrology के अनुसार, यदि चंद्रमा से द्वितीय भाव का स्वामी नीच का हो या शत्रु राशि में हो, तो जातक को अपने जीवन में गंभीर वित्तीय गिरावट का सामना करना पड़ता है।
  • चंद्र दशा का फल: Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि चंद्रमा द्वितीय भाव में स्थित हो, तो उसकी Dasha (दशा) के दौरान जातक को असाधारण धन, विलासिता और समृद्धि प्राप्त होती है।
  • केमद्रुम योग: Predictive Jyotish (प्रेडिक्टिव ज्योतिष) और Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा के द्वितीय और द्वादश भाव में कोई ग्रह (सूर्य को छोड़कर) न हो, और लग्न से केंद्र में भी कोई ग्रह न हो, तो Kemdruma Yoga (केमद्रुम योग) का निर्माण होता है, जो जातक को मानसिक अशांति और निर्धनता देता है।
  • सुनफा, अनफा और धुरधरा योग: Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा से द्वितीय भाव में सूर्य के अलावा कोई अन्य ग्रह हो, तो Sunapha Yoga (सुनफा योग) बनता है। यदि द्वादश में हो, तो Anapha Yoga (अनफा योग) और यदि दोनों ओर हो, तो Dhuradhara Yoga (धुरधरा योग) बनता है, जो जातक को धनी और सुखी बनाते हैं।

Aspect and Directional Strength

वैदिक ज्योतिष के नियमों के अनुसार, द्वितीय भाव में स्थित चंद्रमा अपनी पूर्ण सातवीं Drishti (दृष्टि) से अष्टम भाव यानी Ashtama Bhava (अष्टम भाव) को देखता है। अष्टम भाव मुख्य रूप से दीर्घायु, गुप्त विद्याओं, अचानक होने वाली घटनाओं, पैतृक संपत्ति और मानसिक संकट का प्रतिनिधित्व करता है। चूंकि चंद्रमा एक सौम्य और संवेदनशील ग्रह है (यदि वह पक्ष बल में बली हो), इसलिए अष्टम भाव पर उसकी दृष्टि जातक को अत्यधिक संवेदनशील और सहज बनाती है। जातक का झुकाव रहस्यमयी विषयों, ज्योतिष और मनोविज्ञान की ओर हो सकता है। हालांकि, यदि चंद्रमा पीड़ित या कमजोर हो, तो अष्टम भाव पर उसकी दृष्टि जातक को मानसिक रूप से अस्थिर, भयभीत या अवसादग्रस्त बना सकती है। यह दृष्टि संयुक्त वित्त या विरासत में भी उतार-चढ़ाव लाती है। दिशात्मक बल यानी Digbala (दिग्बल) के संदर्भ में, चंद्रमा चतुर्थ भाव में सबसे मजबूत होता है, जहां उसे पूर्ण दिग्बल प्राप्त होता है। द्वितीय भाव में होने के कारण चंद्रमा के पास दिग्बल नहीं होता है। इसलिए, इस भाव में उसकी कार्यक्षमता पूरी तरह से उसके पक्ष बल (शुक्ल पक्ष का चंद्रमा बली होता है और कृष्ण पक्ष का कमजोर), उसकी राशि स्थिति, और द्वितीयेश की ताकत पर निर्भर करती है।

The Placement Across the Twelve Rashis

द्वितीय भाव में चंद्रमा का प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस राशि में स्थित है। प्रत्येक राशि के स्वामी, गरिमा और उससे बनने वाले लग्न के आधार पर परिणाम पूरी तरह बदल जाते हैं।

Aries (Mesha)

मेष राशि में चंद्रमा की गरिमा तटस्थ होती है और इस राशि का स्वामी मंगल है। जब चंद्रमा मेष राशि के द्वितीय भाव में होता है, तो यह मीन लग्न की कुंडली को दर्शाता है। मीन लग्न के लिए चंद्रमा पंचम भाव (संतान, बुद्धि, पूर्व पुण्य) का स्वामी होता है। पंचमेश का द्वितीय भाव में बैठना बुद्धि और धन का एक सुंदर संबंध बनाता है। जातक अपनी बुद्धि और रचनात्मकता के बल पर धन अर्जित करता है। नाड़ी ग्रंथों जैसे ChandraKala Nadi (चंद्रकला नाड़ी) के अनुसार, यदि चंद्रमा मेष के Navamsha (नवांश) में हो, तो जातक के जीवन का 28वां वर्ष अत्यधिक सक्रिय और महत्वपूर्ण होता है। Rasi Characteristics (राशि कैरेक्टर्स) के अनुसार, यदि मंगलवार के दिन मेष का चंद्रमा मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा या धनिष्ठा नक्षत्र में हो, तो मूंगा धारण करना या खरीदना अत्यंत शुभ होता है। Karmic Astrology (कर्मिक एस्ट्रोलॉजी) के अनुसार, मेष राशि का चंद्रमा जातक के भीतर आक्रामकता बनाम मुखरता के बीच आंतरिक द्वंद्व पैदा करता है।

Taurus (Vrishabha)

वृषभ राशि में चंद्रमा उच्च का होता है, और इस राशि का स्वामी शुक्र है। यह स्थिति मेष लग्न की कुंडली का निर्माण करती है, जहां चंद्रमा चतुर्थ भाव (माता, सुख, वाहन) का स्वामी होकर द्वितीय भाव में उच्च का होता है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली धन योग है। जातक को अपनी माता, भूमि और पारिवारिक संपत्ति से अत्यधिक सुख और वित्तीय लाभ प्राप्त होता है। Jatak Alankaar के अनुसार, यदि शुभ ग्रह केंद्र में हों, चंद्रमा वृषभ में हो और लग्नेश मजबूत हो, तो जातक की आयु 60 वर्ष होती है। Saravali (सारावली) के अनुसार, यदि वृषभ के चंद्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक एक मेहनती किसान या भूमि से लाभ कमाने वाला और धनी होता है। यदि मंगल की दृष्टि हो, तो जातक कामुक होता है और माता के लिए यह स्थिति प्रतिकूल हो सकती है। बुध की दृष्टि जातक को अत्यधिक विद्वान और प्रियभाषिणी वाणी देती है। बृहस्पति की दृष्टि दीर्घायु पत्नी, संतान और स्थायी धन प्रदान करती है। शुक्र की दृष्टि जातक को वाहनों, वस्त्रों और विलासिता के साधनों से सुसज्जित करती है। हालांकि, यदि शनि की दृष्टि हो, तो जातक धनहीन हो सकता है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि चंद्रमा वृषभ राशि के पहले 10 अंशों में हो, तो वित्तीय अस्थिरता और कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है।

Gemini (Mithuna)

मिथुन राशि में चंद्रमा मित्र राशि में होता है, और इसका स्वामी बुध है। यह स्थिति वृषभ लग्न की कुंडली को दर्शाती है, जहां चंद्रमा तृतीय भाव (साहस, संचार, छोटे भाई-बहन) का स्वामी होकर द्वितीय भाव में बैठता है। जातक अपनी संचार क्षमता, लेखन, या कलात्मक कौशल के माध्यम से धन कमाता है। Birth Time Rectification (बर्थ टाइम रेक्टिफिकेशन) के अनुसार, यदि चंद्रमा मिथुन नवांश में हो, तो जातक का विवाह 30वें वर्ष में होने की संभावना रहती है। Saravali के अनुसार, मिथुन के चंद्रमा पर यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक विद्वान और परोपकारी होता है, लेकिन मानसिक रूप से दुखी रह सकता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मिथुन राशि में चंद्रमा पर मंगल की दृष्टि अनुकूल परिणाम देती है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, मिथुन राशि में चंद्रमा की दशा सामाजिक संपर्कों, संचार और साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है। यदि लग्न या चंद्रमा मिथुन के 1 से 10 अंशों के बीच हो, तो वित्तीय उतार-चढ़ाव बना रहता है।

Cancer (Karka)

कर्क राशि में चंद्रमा अपनी स्वराशि में होता है। यह स्थिति मिथुन लग्न की कुंडली बनाती है, जहां चंद्रमा स्वयं द्वितीय भाव का स्वामी होकर वहीं स्थित होता है। यह जातक को अत्यधिक भावुक, परिवार के प्रति समर्पित और संचय करने में कुशल बनाता है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि कर्क राशि का चंद्रमा बृहस्पति और शुक्र से दृष्ट हो और वह परावत या उच्च वैशेषिकांश प्राप्त करे, तो जातक को समाज में महान प्रतिष्ठा और प्रचुर धन प्राप्त होता है। Saravali के अनुसार, यदि कर्क के चंद्रमा पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक बुद्धिमान, धनी और मंत्री के समान पद प्राप्त करता है। बृहस्पति की दृष्टि जातक को राजा के समान सुखी,Modest और वीर बनाती है। शुक्र की दृष्टि जातक को अत्यधिक समृद्ध बनाती है, जबकि शनि की दृष्टि जातक को भटकाव, गरीबी और मानसिक कष्ट दे सकती है। Western Astrology (वेस्टर्न एस्ट्रोलॉजी) के अनुसार, कर्क राशि का चंद्रमा जातक को पुरानी यादों में जीने वाला और भावनात्मक चोटों को आसानी से न भूलने वाला बनाता है।

Leo (Simha)

सिंह राशि में चंद्रमा मित्र राशि में होता है, और इसका स्वामी सूर्य है। यह स्थिति कर्क लग्न की कुंडली को दर्शाती है, जहां चंद्रमा प्रथम भाव यानी लग्नेश होकर द्वितीय भाव में बैठता है। यह दर्शाता है कि जातक का पूरा व्यक्तित्व और जीवन का ध्यान अपने परिवार, वाणी और धन संचय पर केंद्रित रहेगा। Birth Time Rectification के अनुसार, सिंह नवांश में चंद्रमा होने पर जीवन का 20वां, 32वां और 44वां वर्ष अत्यधिक सक्रिय रहता है। Saravali के अनुसार, सिंह राशि के चंद्रमा पर यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक राजा के समान, गंभीर आवाज वाला और साहसी होता है। मंगल की दृष्टि जातक को सेना प्रमुख या नेतृत्व करने वाला बनाती है, जिसे उत्तम पत्नी और धन प्राप्त होता है। बुध की दृष्टि जातक को स्त्रियों की सेवा करने वाला और उनके माध्यम से धन कमाने वाला बनाती है। बृहस्पति की दृष्टि जातक को अपने कुल में श्रेष्ठ और गुणी बनाती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, सिंह राशि में चंद्रमा और बृहस्पति की युति पर यदि शनि की दृष्टि हो, तो यह गजकेसरी योग का निर्माण करती है जो जातक को समाज में उच्च स्थान दिलाता है।

Virgo (Kanya)

कन्या राशि में चंद्रमा मित्र राशि में होता है, और इसका स्वामी बुध है। यह स्थिति सिंह लग्न की कुंडली बनाती है, जहां चंद्रमा द्वादश भाव (व्यय, विदेश, मोक्ष) का स्वामी होकर द्वितीय भाव में बैठता है। यह दर्शाता है कि जातक का धन बाहरी स्रोतों, अस्पतालों, या विदेशी संबंधों के माध्यम से आ सकता है, लेकिन पारिवारिक खर्चों में भी वृद्धि होती है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि शुक्र सप्तम भाव में हो और चंद्रमा कन्या राशि में हो, तो जातक परम सुख प्राप्त करता है। Saravali के अनुसार, कन्या के चंद्रमा पर बुध की दृष्टि जातक को ज्योतिष, साहित्य और वाद-विवाद में कुशल बनाती है। बृहस्पति की दृष्टि सामाजिक स्थिति और धन देती है। शुक्र की दृष्टि जातक को सौंदर्य प्रसाधनों, विलासिता और कई स्त्रियों का सुख प्रदान करती है। हालांकि, शनि की दृष्टि मानसिक अशांति और गरीबी दे सकती है। Bhrigu Nandi Nadi (भृगु नंदी नाड़ी) के अनुसार, कन्या राशि में चंद्रमा होने पर जातक के जीवन में दोहरे विवाह की संभावना बन सकती है।

Libra (Tula)

तुला राशि में चंद्रमा की गरिमा तटस्थ होती है, और इसका स्वामी शुक्र है। यह स्थिति कन्या लग्न की कुंडली को दर्शाती है, जहां चंद्रमा एकादश भाव (लाभ, इच्छाएं) का स्वामी होकर द्वितीय भाव में बैठता है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली Dhana Yoga (धन योग) है, क्योंकि लाभेश स्वयं धन भाव में स्थित है। जातक को अपने सामाजिक दायरे और बड़े भाई-बहनों के माध्यम से निरंतर वित्तीय लाभ प्राप्त होता है। Saravali के अनुसार, तुला के चंद्रमा पर यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक को अच्छा स्वास्थ्य और सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। मंगल की दृष्टि जातक को चतुर लेकिन नेत्र रोगों से पीड़ित बना सकती है। बुध की दृष्टि कला में निपुणता और मधुर वाणी देती है। शनि की दृष्टि जातक को समृद्ध, मीठी वाणी वाला और कामुक बनाती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि तुला राशि का चंद्रमा शुक्र के साथ राशि परिवर्तन (परिवर्तन योग) करता है, तो यह एक उत्कृष्ट राजयोग का निर्माण करता है।

Scorpio (Vrischika)

वृश्चिक राशि में चंद्रमा नीच का होता है, और इसका स्वामी मंगल है। यह स्थिति तुला लग्न की कुंडली बनाती है, जहां चंद्रमा दशम भाव (करियर, प्रतिष्ठा) का स्वामी होकर द्वितीय भाव में नीच का होता है। यह जातक के करियर और वित्तीय स्थिति में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है। जातक की वाणी में तीखापन हो सकता है। Saravali के अनुसार, यदि वृश्चिक के चंद्रमा पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक को अतुलनीय साहस और धन प्राप्त होता है। बुध की दृष्टि जातक को चालाक और कठोर भाषी बनाती है। बृहस्पति की दृष्टि जातक को सुंदर, कर्तव्यनिष्ठ और धनी बनाती है। शुक्र की दृष्टि जातक को बुद्धिमान बनाती है, लेकिन स्त्रियों के कारण उसका बल कम हो सकता है। शनि की दृष्टि जातक को रोगी और गरीब बना सकती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि वृश्चिक का चंद्रमा शनि या राहु से पीड़ित हो, तो जातक तंत्र-मंत्र या गुप्त विद्याओं की ओर आकर्षित होता है। यदि लग्न या चंद्रमा वृश्चिक के पहले 10 अंशों में हो, तो वित्तीय अस्थिरता और ऋण की समस्या बनी रहती है।

Sagittarius (Dhanu)

धनु राशि में चंद्रमा की गरिमा तटस्थ होती है, और इसका स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति वृश्चिक लग्न की कुंडली बनाती है, जहां चंद्रमा नवम भाव (भाग्य, धर्म, पिता) का स्वामी होकर द्वितीय भाव में बैठता है। यह एक अत्यंत शुभ भाग्य योग है। जातक को अपने पिता, धर्म और भाग्य के सहयोग से प्रचुर धन की प्राप्ति होती है। उसकी वाणी धार्मिक और ज्ञानवर्धक होती है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा धनु राशि में हो और बृहस्पति उस पर दृष्टि डालता हो या उसके साथ युति करता हो, तो जातक को मूल्यवान वस्त्रों और आभूषणों की प्राप्ति होती है। Saravali के अनुसार, धनु के चंद्रमा पर सूर्य की दृष्टि जातक को राजा के समान सुखी और प्रसिद्ध बनाती है। मंगल की दृष्टि जातक को सेना प्रमुख के समान धनी और वीर बनाती है। बुध की दृष्टि जातक को एक कुशल ज्योतिषी, नर्तक या कलाकार बनाती है। बृहस्पति की दृष्टि जातक को आकर्षक शरीर, धन और मंत्री का पद प्रदान करती है।

Capricorn (Makara)

मकर राशि में चंद्रमा की गरिमा तटस्थ होती है, और इसका स्वामी शनि है। यह स्थिति धनु लग्न की कुंडली को दर्शाती है, जहां चंद्रमा अष्टम भाव (रहस्य, अचानक परिवर्तन) का स्वामी होकर द्वितीय भाव में बैठता है। यह स्थिति जातक के जीवन में अचानक धन हानि या अचानक धन लाभ के चक्र बनाती है। जातक की वाणी गंभीर और कभी-कभी रूखी हो सकती है। Saravali के अनुसार, मकर के चंद्रमा पर यदि शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक का चरित्र और जीवन अनुकूल रहता है, जबकि शनि की दृष्टि जातक को गंभीर और अनुशासित बनाती है। Karmic Astrology के अनुसार, मकर का चंद्रमा जातक के भीतर भावनात्मक संकुचन और अपनी भावनाओं को साझा करने का डर पैदा करता है। Kalamsa and Cuspal Interlinks (कलामसा एंड कस्पल इंटरलिंक्स) के अनुसार, यदि छठे भाव का उप-उप स्वामी मकर राशि का चंद्रमा हो, तो मस्तिष्क से संबंधित रोगों की संभावना रहती है।

Aquarius (Kumbha)

कुंभ राशि में चंद्रमा की गरिमा तटस्थ होती है, और इसका स्वामी शनि है। यह स्थिति मकर लग्न की कुंडली बनाती है, जहां चंद्रमा सप्तम भाव (पति/पत्नी, साझेदारी) का स्वामी होकर द्वितीय भाव में बैठता है। जातक को अपने जीवनसाथी या व्यावसायिक साझेदारों के माध्यम से धन की प्राप्ति होती है। Horasara (होरासार) के अनुसार, यदि कुंभ राशि में चंद्रमा हो और उसकी दशा सक्रिय हो, तो जातक को हृदय संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। Essence of Nadi Astrology (एसेन्स ऑफ नाड़ी एस्ट्रोलॉजी) के अनुसार, यदि राहु कुंभ राशि में चंद्रमा के साथ युति करता है, तो जातक तरल पदार्थों और जड़ी-बूटियों से बनी दवाओं का व्यवसाय करता है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि कुंभ के चंद्रमा पर मंगल और बृहस्पति की दृष्टि हो, और बृहस्पति नवांश में नीच का हो, तो जातक घरेलू स्वभाव का और परिवार से अत्यधिक जुड़ा होता है। यदि इस चंद्रमा पर केवल शनि की दृष्टि हो और कोई शुभ प्रभाव न हो, तो चंद्रमा अत्यधिक पीड़ित माना जाता है।

Pisces (Meena)

मीन राशि में चंद्रमा की गरिमा तटस्थ होती है, और इसका स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति कुंभ लग्न की कुंडली को दर्शाती है, जहां चंद्रमा छठे भाव (शत्रु, ऋण, रोग) का स्वामी होकर द्वितीय भाव में बैठता है। यह दर्शाता है कि जातक को ऋण या अदालती मामलों के कारण वित्तीय चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन वह सेवा क्षेत्र या चिकित्सा के माध्यम से भी धन कमा सकता है। Saravali के अनुसार, मीन के चंद्रमा पर यदि सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक को सामाजिक प्रतिष्ठा मिलती है। मंगल की दृष्टि जातक के चरित्र को मजबूत बनाती है। बुध की दृष्टि जातक को समाज में सम्मान दिलाती है। बृहस्पति की दृष्टि जातक को सुंदर शरीर, धन और सुखी सामाजिक जीवन प्रदान करती है। यदि शुक्र की दृष्टि मीन के चंद्रमा पर हो, तो जातक नृत्य, संगीत और कलाओं में अत्यधिक निपुण होता है और स्त्रियों को आकर्षित करता है। इसके विपरीत, यदि शनि की दृष्टि हो, तो जातक शारीरिक रूप से कमजोर और मानसिक रूप से व्यथित हो सकता है।

Conjunctions in This House

द्वितीय भाव में चंद्रमा के साथ अन्य ग्रहों की युति जातक के जीवन में विशिष्ट योगों का निर्माण करती है, जो धन, वाणी और परिवार को प्रभावित करते हैं।

Sun

द्वितीय भाव में Moon with Sun (चंद्रमा के साथ सूर्य) की युति होने पर जातक के नेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, इस युति के कारण जातक रतौंधी या नेत्र रोगों से पीड़ित हो सकता है। यदि सूर्य चंद्रमा के अत्यंत निकट हो, तो चंद्रमा Astangata (अस्त) हो जाता है, जिससे जातक की मानसिक स्थिरता और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर होती है।

Mars

द्वितीय भाव में Moon with Mars (चंद्रमा के साथ मंगल) की युति जातक को अत्यधिक साहसी और आक्रामक बनाती है। यदि इस युति पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक को त्वचा रोग हो सकते हैं। हालांकि, यदि इस युति पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक गणित और गणनात्मक विषयों में अत्यधिक निपुण होता है।

Mercury

द्वितीय भाव में Moon with Mercury (चंद्रमा के साथ बुध) की युति जातक को अत्यंत कुशाग्र बुद्धि और कलात्मक वाणी प्रदान करती है। जातक अपनी हाजिरजवाबी और लेखन क्षमता से धन कमाता है। हालांकि, यदि यह युति पापी ग्रहों से पीड़ित हो, तो यह नेत्र ज्योति को कमजोर कर सकती है।

Jupiter

द्वितीय भाव में Moon with Jupiter (चंद्रमा के साथ बृहस्पति) की युति अत्यंत शुभ Gajakesari Yoga (गजकेसरी योग) का निर्माण करती है। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि द्वितीय भाव में बृहस्पति पीड़ित होकर हकलाहट पैदा कर रहा हो, तो चंद्रमा की उपस्थिति उस दोष को पूरी तरह से समाप्त कर देती है और जातक की वाणी को मधुर बनाती है।

Venus

द्वितीय भाव में Moon with Venus (चंद्रमा के साथ शुक्र) की युति जातक को अत्यंत आकर्षक, कलाप्रेमी और धनी बनाती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, इस युति के प्रभाव से जातक की वाणी अत्यंत दयालु, सहानुभूतिपूर्ण और सुव्यवस्थित होती है। यह युति जीवन में प्रचुर धन और भौतिक सुख प्रदान करती है।

Saturn

द्वितीय भाव में Moon with Saturn (चंद्रमा के साथ शनि) की युति जातक को मानसिक रूप से अस्थिर या वैरागी प्रवृत्ति का बना सकती है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, ऐसा जातक चंचल मन वाला, यात्राओं का शौकीन और विलासिता या वित्तीय व्यवसायों में अत्यधिक सफल होता है।

Rahu

द्वितीय भाव में Moon with Rahu (चंद्रमा के साथ राहु) की युति जातक के भीतर धन कमाने की अत्यधिक और अपरंपरागत इच्छाएं पैदा करती है। जातक की वाणी कभी-कभी भ्रमित करने वाली हो सकती है। यह युति पारिवारिक जीवन में अचानक उतार-चढ़ाव और मानसिक तनाव का कारण बनती है।

Ketu

द्वितीय भाव में Moon with Ketu (चंद्रमा के साथ केतु) की युति जातक को पैतृक संपत्ति या पारिवारिक धन के प्रति उदासीन बना सकती है। जातक की वाणी में आध्यात्मिक या दार्शनिक पुट होता है। यह युति जातक को भौतिक संचय से दूर कर आध्यात्मिक शांति की ओर ले जाती है। तीन या अधिक ग्रहों की युति (Stellium) जब द्वितीय भाव में होती है, तो जातक का संपूर्ण जीवन पूरी तरह से धन संचय, परिवार और वाणी के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाता है। यदि इस युति में शनि, केतु या द्वादशेश शामिल हों, तो जातक में Sanyasa (संन्यास) या वैराग्य की भावनाएं जाग्रत हो सकती हैं, जिससे वह सांसारिक धन को छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपना लेता है।

Aspects Received

द्वितीय भाव में स्थित चंद्रमा पर जब अन्य ग्रहों की दृष्टि पड़ती है, तो उसके परिणामों में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं।

Jupiter

बृहस्पति की दृष्टि जब द्वितीय भाव के चंद्रमा पर पड़ती है, तो यह जातक को गहन आध्यात्मिकता, उच्च नैतिक मूल्य और अत्यंत ज्ञानवर्धक वाणी प्रदान करती है। जातक को समाज में अत्यधिक सम्मान मिलता है और उसका पारिवारिक जीवन सुखी रहता है।

Saturn

शनि की दृष्टि जब चंद्रमा पर पड़ती है, तो यह जातक के जीवन में माता के सुख में कमी या माता से दूरी लाती है। यह दृष्टि जातक को मानसिक रूप से गंभीर, अनुशासित और वित्तीय मामलों में अत्यधिक सतर्क बनाती है, लेकिन धन संचय में देरी भी कराती है।

Mars

मंगल की दृष्टि जब चंद्रमा पर पड़ती है, तो यह जातक के स्वभाव में भावनात्मक उग्रता और वाणी में कठोरता लाती है। जातक वित्तीय मामलों में अत्यधिक आक्रामक और जोखिम लेने वाला होता है, जिससे कभी-कभी अचानक नुकसान भी हो सकता है।

Rahu

राहु की दृष्टि चंद्रमा पर पड़ने से जातक के मन में निरंतर भय, असुरक्षा और भ्रम की स्थिति बनी रहती है। जातक की वाणी में चालाकी आ सकती है और वह धन कमाने के लिए शॉर्टकट अपनाने की कोशिश कर सकता है।

Ketu

केतु की दृष्टि जब चंद्रमा पर पड़ती है, तो यह जातक को मानसिक रूप से वैरागी बनाती है। जातक अपने परिवार और संचित धन से भावनात्मक रूप से कट जाता है और उसका झुकाव मोक्ष व अध्यात्म की ओर होने लगता है।

Strength and Condition

द्वितीय भाव में चंद्रमा के वास्तविक परिणामों को जानने के लिए उसकी ताकत और कुंडली के अन्य घटकों का विश्लेषण करना अनिवार्य है।

Baladi Avastha

ग्रहों की अवस्था उनके अंशों के आधार पर तय होती है, जो निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित है:
  • Bala (बाल): 0-6° (विषम राशियों में) - ग्रह शिशु के समान कमजोर होता है।
  • Kumara (कुमार): 6-12° (विषम राशियों में) - ग्रह आंशिक परिणाम देता है।
  • Yuva (युवा): 12-18° (विषम राशियों में) - ग्रह पूर्ण और मजबूत परिणाम देता है।
  • Vriddha (वृद्ध): 18-24° (विषम राशियों में) - ग्रह के परिणाम अत्यंत कमजोर होते हैं।
  • Mrita (मृत): 24-30° (विषम राशियों में) - ग्रह परिणाम देने में असमर्थ होता है।
यह क्रम मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ जैसी विषम राशियों में लागू होता है। वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन जैसी सम राशियों में यह क्रम पूरी तरह से उलट जाता है (यानी 0-6° मृत और 24-30° बाल अवस्था होती है)। चंद्रमा की अपनी राशि कर्क एक सम राशि है, इसलिए वहां अंशों का उल्टा क्रम लागू होगा।

Ashtakavarga

Ashtakavarga (अष्टकवर्ग) चार्ट में द्वितीय भाव को मिलने वाले बिंदु अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि द्वितीय भाव को 30 या उससे अधिक बिंदु प्राप्त होते हैं, तो चंद्रमा जातक को स्थिर धन, सुखी पारिवारिक जीवन और उत्कृष्ट वाणी प्रदान करेगा। इसके विपरीत, यदि बिंदु 25 से कम हैं, तो शुभ स्थिति में होने पर भी चंद्रमा पूर्ण परिणाम नहीं दे पाएगा।

Nakshatra

चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, उस नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा के परिणामों को रंग देता है। उदाहरण के लिए, यदि चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र (जिसका स्वामी स्वयं चंद्रमा है) में हो, तो परिणाम अत्यंत शुभ होंगे। यदि वह राहु के आद्रा नक्षत्र में हो, तो मानसिक अशांति और वाणी में भ्रम रहेगा।

Navamsa (D9)

Navamsha (नवांश) कुंडली मुख्य रूप से ग्रह की आंतरिक शक्ति को दर्शाती है। Saravali के अनुसार, यदि नवांश कुंडली का स्वामी राशि कुंडली के स्वामी से अधिक मजबूत हो, तो नवांश स्वामी के प्रभाव जातक के जीवन में अधिक स्पष्ट रूप से प्रकट होते हैं। इसलिए, द्वितीय भाव के चंद्रमा का नवांश में शुभ होना आवश्यक है।

Condition of the 2nd House Lord

द्वितीय भाव में स्थित चंद्रमा चाहे कितना भी बली क्यों न हो, यदि द्वितीय भाव का स्वामी (द्वितीयेश) कुंडली के त्रिक भावों (6, 8, 12) में पीड़ित या नीच का होकर बैठा है, तो चंद्रमा अपने शुभ परिणाम नहीं दे पाएगा। एक मजबूत किरायेदार (चंद्रमा) भी तब तक सुरक्षित नहीं रह सकता जब तक कि मकान मालिक (द्वितीयेश) मजबूत न हो।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) के अनुसार, किसी भी भाव के परिणामों का सटीक निर्णय उस भाव के कस्पल सब-लॉर्ड (Cuspal Sub-Lord) द्वारा किया जाता है। केपी प्रणाली में राशि स्वामी की तुलना में सब-लॉर्ड को अधिक महत्व दिया जाता है क्योंकि यह घटना के घटित होने या न होने की पुष्टि करता है। Predictive Stellar Astrology के अनुसार, भविष्यवाणियों के लिए हमेशा लग्न और उसके 12 कस्पों की सटीक स्थिति का उपयोग किया जाना चाहिए, न कि केवल चंद्र राशि का। यदि कोई ग्रह द्वितीय भाव का कार्येश (Significator) है और वह छठे भाव के सब-लॉर्ड में स्थित है, तो जातक धन उधार लेता है। यदि वह आठवें या बारहवें भाव के सब-लॉर्ड में हो, तो जातक धन उधार देता है या ऋण चुकाता है। इसके अतिरिक्त, यदि 11वें कस्प का सब-लॉर्ड या उसका नक्षत्र स्वामी किसी जल तत्व की राशि में हो, तो जातक को भूमि से जल की प्राप्ति होती है।

Practical Significations

व्यावहारिक जीवन में द्वितीय भाव के चंद्रमा के प्रभावों को निम्नलिखित श्रेणियों में देखा जा सकता है:

Speech and Communication

जातक की वाणी में एक स्वाभाविक आकर्षण और संवेदनशीलता होती है। वह दूसरों की भावनाओं को समझकर बात करता है। यदि चंद्रमा पर शुक्र या बृहस्पति का प्रभाव हो, तो जातक की वाणी अत्यंत सुव्यवस्थित, दयालु और प्रभावशाली होती है। लोग उसकी बातें सुनना पसंद करते हैं।

Financial Accumulation

जातक का धन संचय सीधे तौर पर उसकी मानसिक स्थिति और चंद्रमा के पक्षों से जुड़ा होता है। जैसे चंद्रमा घटता और बढ़ता है, वैसे ही जातक की वित्तीय स्थिति में भी उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। जातक को तरल पदार्थों, डेयरी उत्पादों, चांदी, या जनसंपर्क के माध्यम से धन लाभ हो सकता है।

Family and Food

जातक अपने परिवार से भावनात्मक रूप से अत्यधिक जुड़ा होता है। परिवार की सुख-शांति उसके लिए सर्वोपरि होती है। भोजन के मामले में, शुभ प्रभाव होने पर जातक को स्वादिष्ट और उच्च श्रेणी के व्यंजनों का आनंद मिलता है, क्योंकि चंद्रमा भोजन का भी कारक है।

Frequently Asked Questions

क्या द्वितीय भाव में चंद्रमा होना धन के लिए अच्छा है?
हां, सामान्य तौर पर द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को धनवान और समृद्ध बनाता है। हालांकि, चूंकि चंद्रमा एक गतिशील ग्रह है, इसलिए जातक के संचित धन में उतार-चढ़ाव बना रहता है। यदि चंद्रमा उच्च का या स्वराशि का हो, तो यह असाधारण धन लाभ कराता है।
क्या द्वितीय भाव का चंद्रमा आंखों की कमजोरी देता है?
हां, शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार यदि द्वितीय भाव में चंद्रमा सूर्य के साथ हो, या उस पर मंगल और शनि जैसे क्रूर ग्रहों की दृष्टि हो, तो जातक को नेत्र रोग या रतौंधी का सामना करना पड़ सकता है।
द्वितीय भाव में चंद्रमा होने पर जातक की वाणी कैसी होती है?
द्वितीय भाव में चंद्रमा जातक को मधुर, सहानुभूतिपूर्ण और आकर्षक वाणी प्रदान करता है। जातक दूसरों की भावनाओं का सम्मान करते हुए बात करता है। यदि इस पर शुक्र का प्रभाव हो, तो वाणी अत्यंत सुव्यवस्थित हो जाती है।
क्या द्वितीय भाव में चंद्रमा और शनि की युति खराब होती है?
यह युति जातक को मानसिक रूप से थोड़ा चंचल या वैरागी बना सकती है। हालांकि, नाड़ी ग्रंथों के अनुसार ऐसा जातक यात्राओं का शौकीन होता है और विलासिता या वित्तीय क्षेत्र से जुड़े व्यवसायों में अत्यधिक सफल हो सकता है।
चंद्रमा के लिए द्वितीय भाव में कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
वृषभ राशि चंद्रमा के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि यहां वह उच्च का होता है। इसके अलावा कर्क राशि भी अत्यंत शुभ परिणाम देती है क्योंकि यह चंद्रमा की अपनी राशि है। इन राशियों में चंद्रमा प्रचुर धन और पारिवारिक सुख देता है।
क्या द्वितीय भाव में चंद्रमा अकाल मृत्यु का कारण बन सकता है?
शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि चंद्रमा द्वितीय या द्वादश भाव का स्वामी होकर केतु से छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो मारक स्थान का स्वामी होने के कारण असमय मृत्यु का भय रहता है। लेकिन यह केवल तभी होता है जब कुंडली में अन्य गंभीर अरिष्ट योग भी मौजूद हों।

Remedial Measures

द्वितीय भाव के चंद्रमा के अशुभ प्रभावों को शांत करने और उसकी शुभता को बढ़ाने के लिए शास्त्रों में कई उपाय बताए गए हैं। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यदि चंद्रमा द्वितीय या सप्तम भाव का स्वामी होकर अशुभ फल दे रहा हो, तो जातक को देवी दुर्गा और देवी लक्ष्मी के मंत्रों का नियमित जाप करना चाहिए।

Standard Remedies for Moon

चंद्रमा की शांति और मजबूती के लिए निम्नलिखित पारंपरिक उपाय किए जा सकते हैं:
  • आध्यात्मिक उपाय: भगवान शिव की नियमित पूजा करें, क्योंकि शिव जी ने चंद्रमा को अपने मस्तक पर धारण किया है। सोमवार के दिन शिव चालीसा या "ॐ सोम सोमाय नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • व्यवहारिक उपाय: अपनी माता, मौसी और समाज की बुजुर्ग महिलाओं का सम्मान करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। घर में पानी की बर्बादी को रोकें।
  • दान कार्य: सोमवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी, चांदी या सफेद वस्त्रों का किसी जरूरतमंद या मंदिर में दान करें।
  • रत्न चिकित्सा: चंद्रमा को बल देने के लिए मोती (Moti) धारण किया जाता है। चेतावनी: मोती केवल तभी धारण करना चाहिए जब चंद्रमा जातक की कुंडली में एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (जैसे मेष, वृषभ, कर्क, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न) हो। यदि चंद्रमा मिथुन, कन्या, तुला, मकर या कुंभ लग्न के लिए कार्यात्मक पापी ग्रह है, तो मोती धारण करने से बचना चाहिए क्योंकि यह नकारात्मक प्रभावों को बढ़ा सकता है।
अपनी कुंडली में द्वितीय भाव के चंद्रमा का सटीक विश्लेषण करने के लिए जातक को सबसे पहले चंद्रमा के पक्ष बल, उसकी राशि स्थिति, द्वितीयेश की स्थिति, और उस पर पड़ने वाले शुभ व अशुभ ग्रहों के दृष्टि प्रभाव की जांच करनी चाहिए। इन सभी कारकों के संयुक्त अध्ययन से ही जीवन में मिलने वाले वास्तविक परिणामों का सही आकलन किया जा सकता है।

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Sources consulted

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