Moon in the 4th House

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चतुर्थ भाव (Chaturtha Bhava [Fourth House]) में चंद्रमा (Chandra [Moon]) की स्थिति वैदिक ज्योतिष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावशाली योग मानी जाती है। चतुर्थ भाव मुख्य रूप से माता (Matru), गृह (Griha), भूमि, वाहन और आंतरिक सुख या मानसिक शांति (Sukha) का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि चंद्रमा मन (Manas), भावनाओं और माता का नैसर्गिक कारक (Karaka) है। जब मन का कारक अपने ही प्राकृतिक भाव में स्थित होता है, तो यह जातक को गहरी भावनात्मक संवेदनशीलता, मातृभक्ति और घरेलू जीवन के प्रति गहरा लगाव प्रदान करता है। हालांकि, इस स्थिति का अंतिम परिणाम चंद्रमा के बल, उसकी गरिमा (Dignity) और उस पर पड़ने वाले अन्य ग्रहों के दृष्टि (Drishti) प्रभाव पर निर्भर करता है। वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रंथ अक्सर अत्यंत कठोर या पूर्ण शब्दों में परिणाम बताते हैं (जैसे कि माता की शीघ्र मृत्यु या गंभीर रोग), लेकिन पाठकों को यह समझना चाहिए कि कोई भी एकल स्थिति अलगाव में काम नहीं करती है और ऐसे गंभीर परिणाम केवल तभी घटित होते हैं जब संपूर्ण कुंडली में कई अन्य पुष्टिकारक पीड़ित स्थितियां मौजूद हों।

Classical Position

शास्त्रीय ग्रंथों में इस बात पर व्यापक सहमति है कि चतुर्थ भाव में चंद्रमा की स्थिति माता के जीवन और जातक के सुख को गहराई से प्रभावित करती है। Phaladeepika के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव का स्वामी (चतुर्थेश) और चंद्रमा दोनों ही दुस्थान (Dusthana [कष्टप्रद भाव: छठा, आठवां या बारहवां भाव]) में स्थित हों, शुभ ग्रहों के प्रभाव से रहित हों, या पापकर्तरी योग (Hemmed by Malefics) में हों, तो जातक की माता की मृत्यु उसके जन्म के शीघ्र बाद हो जाती है। यह नियम परंपरा में पूरी तरह स्थापित है और विभिन्न शास्त्रीय संस्करणों में समान रूप से दोहराया गया है। इसके विपरीत, यदि चतुर्थ भाव में कोई शुभ ग्रह स्थित हो, चंद्रमा भी किसी शुभ ग्रह के साथ हो और चतुर्थेश कुंडली में बलवान हो, तो जातक की माता दीर्घायु होती है।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय और नाड़ी ग्रंथों में चतुर्थ भाव में चंद्रमा के विशिष्ट प्रभावों को लेकर कई अनूठे और भिन्न दृष्टिकोण मिलते हैं। इन मतों को जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।

Physical Appearance and Health

  • गले के रोग: Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा चतुर्थ भाव में स्थित होकर चतुर्थ भाव के ही नवंश (Navamsha [नौवां विभागीय चार्ट]) में हो और किसी पापी ग्रह से युत हो, तो जातक को गले का रोग होता है।
  • हृदय रोग की संभावना: Predictive Stellar Astrology के अनुसार, यदि सूर्य, चंद्रमा, मंगल, कर्क राशि, चतुर्थ भाव या चतुर्थेश का संबंध छठे भाव, षष्ठेश या कन्या राशि से हो, तो जातक को हृदय रोग होने की आशंका रहती है।
  • स्तन कैंसर का संकेत: एक आधुनिक चिकित्सा ज्योतिषीय ग्रंथ के अनुसार, यदि चंद्रमा, चतुर्थ भाव और शुक्र तीनों ही पीड़ित हों, तो यह स्थिति स्तन कैंसर के खतरे को दर्शाती है।
  • अंधकार में जन्म: Jataka Parijata का मत है कि यदि चंद्रमा शनि के स्वामित्व वाले नवंश में हो, चतुर्थ भाव में हो, शनि से दृष्ट हो, जलीय राशि में हो, या शनि के साथ युत हो, तो जातक का जन्म अंधकार या प्रसव की कठिन परिस्थितियों में होता है।
  • जल के निकट जन्म: Saravali और Jataka Parijata के अनुसार, यदि लग्न (Lagna [उदय लग्न]) एक जलीय राशि हो और पूर्ण चंद्रमा चतुर्थ भाव में स्थित होकर लग्न को देखता हो, तो शिशु का जन्म जल के निकट या जल में होता है।
  • ज्वर का प्रभाव: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि चंद्रमा चतुर्थ भाव में राहु या केतु के साथ स्थित हो, तो जातक चार दिनों के अंतराल पर आने वाले रुक-रुक कर होने वाले बुखार (ज्वर) से पीड़ित हो सकता है।

Temperament and Mental State

  • दशा का प्रभाव: The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, चतुर्थ भाव में स्थित चंद्रमा अपनी महादशा (Mahadasha) के शुभ अंतर्दशा (Bhukti) काल में जातक को पूर्ण मानसिक शांति और भौतिक सुख देता है, जबकि पापी ग्रहों की अंतर्दशा में धन और गृह की हानि कराता है।
  • सुखी जीवन: Brihat Jataka के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में चंद्रमा, बृहस्पति या शुक्र में से कोई भी ग्रह स्थित हो, तो जातक अत्यंत सुखी और संतुष्ट जीवन व्यतीत करता है।
  • जीवन का आनंद: Vrishabha Vijaya Jyothisha Prakaasham का मत है कि यदि चतुर्थ भाव में बलवान शुक्र, चंद्रमा, बुध या बृहस्पति की राशियां हों और वे शुभ ग्रहों से दृष्ट हों, तो जातक जीवन में अत्यधिक सुख-सुविधाओं का आनंद लेता है।

Wealth, Status and Life Events

  • गुप्त धन की प्राप्ति: Satyajatakam (ध्रुव नाड़ी) के अनुसार, यदि चतुर्थेश चतुर्थ भाव में ही स्थित हो और उसे तिर्यकमुख (Tiryagmukha [क्षितिज के समानांतर देखने वाले]) ग्रह जैसे चंद्रमा, बुध, बृहस्पति या शुक्र देखते हों, तो जातक को गुप्त खजाना या भूमिगत संपत्ति प्राप्त होती है।
  • भव्य भवन का योग: एक नाड़ी ग्रंथ के अनुसार, यदि चंद्रमा और बुध चतुर्थ भाव में हों, बृहस्पति लग्न में हो, और शुक्र, लग्नेश या द्वादशेश उच्च के होकर केंद्रों में स्थित हों, तो जातक को महल जैसे भव्य भवनों की प्राप्ति होती है।
  • राजयोग और धन: Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा चतुर्थ भाव में शनि के साथ युत हो, तो जातक राजा के समान शक्तिशाली या अत्यधिक धनवान बनता है।
  • विदेशी जन्म: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव पापी ग्रहों के बीच फंसा हो (पापकर्तरी), चतुर्थेश और चंद्रमा पर कोई शुभ प्रभाव न हो, और नवमेश लग्नेश से कमजोर हो, तो जातक का जन्म विदेश या किसी अन्य स्थान पर होता है।
  • माता के चरित्र पर प्रभाव: Satyajatakam के अनुसार, यदि छठे भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में स्थित हो और राहु चंद्रमा के साथ युत हो, तो जातक की माता बीमार और संदिग्ध आचरण वाली हो सकती है।
  • मातृश्राप से संतान हानि: Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि चंद्रमा पंचमेश होकर नीच का हो या पापी ग्रहों से घिरा हो, और चतुर्थ तथा पंचम भाव में पापी ग्रह स्थित हों, तो जातक को मातृश्राप (माता के श्राप) के कारण संतान की हानि उठानी पड़ती है।
  • अवैध जन्म का संकेत: Jatak Alankaar के अनुसार, यदि छठे और आठवें भाव के स्वामी मंगल और चंद्रमा के साथ चतुर्थ भाव में स्थित हों, तो जातक का जन्म अवैध या संदेहास्पद परिस्थितियों में हो सकता है।

Aspect and Directional Strength

चतुर्थ भाव में स्थित होकर चंद्रमा अपनी पूर्ण सप्तम दृष्टि (Drishti) से दशम भाव (Dashama Bhava [दसवां भाव]) को देखता है। दशम भाव करियर, प्रतिष्ठा, पिता और सार्वजनिक जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। चूंकि चंद्रमा एक सौम्य और संवेदनशील ग्रह है, इसलिए जब एक शुभ या शुक्ल पक्ष का चंद्रमा चतुर्थ भाव से दशम भाव को देखता है, तो यह जातक को सार्वजनिक जीवन में अत्यधिक लोकप्रिय बनाता है। ऐसे जातक अक्सर उन व्यवसायों में सफल होते हैं जिनमें जनता से सीधा संपर्क होता है, जैसे जनसंपर्क, विपणन, या जल और तरल पदार्थों से संबंधित कार्य। हालांकि, यदि चंद्रमा कृष्ण पक्ष का या पीड़ित (Krura) हो, तो यह जातक के करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता पैदा कर सकता है। दिशा बल (Digbala [दिशात्मक शक्ति]) के सिद्धांत के अनुसार, चंद्रमा चतुर्थ भाव में होने पर पूर्ण दिशा बल प्राप्त करता है। यह चंद्रमा की सबसे शक्तिशाली स्थिति मानी जाती है। चतुर्थ भाव में दिशाबली चंद्रमा जातक को अत्यधिक संवेदनशील, दयालु और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। ऐसा जातक अपने परिवार और मातृभूमि के प्रति समर्पित होता है। अन्य भावों की तुलना में, जहां चंद्रमा के पास दिशा बल नहीं होता, चतुर्थ भाव का चंद्रमा जातक को एक मजबूत भावनात्मक आधार और आंतरिक संतोष प्रदान करता है, जो जीवन के सभी संघर्षों का सामना करने में सहायक होता है।

The Placement Across the Twelve Rashis

Aries (Mesha)

चतुर्थ भाव में Moon in Aries होने पर यह अपने तटस्थ मित्र मंगल की राशि में होता है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न मकर (Capricorn) बनता है, जिससे चंद्रमा सप्तम भाव का स्वामी (सप्तमेश) होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह स्थिति जीवनसाथी और साझेदारी के मामलों को सीधे घरेलू सुख से जोड़ती है। Chandra Navamsa Paddathi के अनुसार, यदि चंद्रमा मेष नवंश में हो, तो जातक के जीवन में २८वें वर्ष में महत्वपूर्ण घटनाएं घटित होती हैं। इसके अतिरिक्त, मंगलवार के दिन जब चंद्रमा मेष राशि में हो और मृगशिरा, चित्रा, अनुराधा या धनिष्ठा नक्षत्र चल रहा हो, तो मूंगा रत्न खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस स्थिति के प्रभाव से जातक का घरेलू वातावरण ऊर्जावान और थोड़ा आक्रामक हो सकता है। जातक के भीतर मानसिक शांति पाने की तीव्र इच्छा होती है, लेकिन मंगल के प्रभाव के कारण कभी-कभी पारिवारिक जीवन में वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं।

Taurus (Vrishabha)

चतुर्थ भाव में Moon in Taurus होने पर यह अपनी उच्च गरिमा (Exalted) में होता है, जिसका स्वामी शुक्र है। इस स्थिति में जातक का लग्न कुंभ (Aquarius) बनता है, जिससे चंद्रमा छठे भाव का स्वामी (षष्ठेश) बनता है। Jatak Alankaar के अनुसार, यदि शुभ ग्रह केंद्र में हों, चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च का हो और लग्नेश लग्न में मजबूत हो, तो जातक ६० वर्ष की आयु प्राप्त करता है। Western Astrology के अनुसार, वृषभ का चंद्रमा जातक को अतीत के प्रति संवेदनशील और पुरानी यादों में खोया रहने वाला बनाता है। यदि लग्न या चंद्रमा वृषभ राशि के पहले १० अंशों में हो, तो जातक को वित्तीय अस्थिरता और ऋण का सामना करना पड़ सकता है। Saravali के अनुसार, यदि वृषभ राशि के चंद्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक एक समृद्ध किसान और साहसी व्यक्ति बनता है; मंगल की दृष्टि हो, तो माता के लिए प्रतिकूलता आती है; बुध की दृष्टि जातक को विद्वान बनाती है; बृहस्पति की दृष्टि दीर्घायु पत्नी और संतान देती है; शुक्र की दृष्टि वाहन और वस्त्र सुख देती है; और शनि की दृष्टि धनहीनता लाती है।

Gemini (Mithuna)

चतुर्थ भाव में Moon in Gemini होने पर यह अपने मित्र बुध की राशि में होता है। इसके लिए जातक का लग्न मीन (Pisces) बनता है, जिससे चंद्रमा पंचम भाव का स्वामी (पंचमेश) होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह बुद्धि, शिक्षा और संतान के सुख को सीधे घर से जोड़ता है। Chandra Navamsa Paddathi के अनुसार, यदि चंद्रमा मिथुन नवंश में हो, तो जातक का विवाह ३०वें वर्ष में होता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, मिथुन राशि का चंद्रमा अपनी दशा में सामाजिक संपर्कों और साहित्यिक गतिविधियों को बढ़ावा देता है। Saravali के अनुसार, यदि मिथुन के चंद्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक विद्वान और दानी तो होता है, लेकिन सुखी नहीं रहता; मंगल की दृष्टि इस राशि में अनुकूल परिणाम देती है। नाड़ी ग्रंथ के अनुसार, यदि मिथुन राशि में Moon with Ketu की युति हो, तो जातक सिलाई या वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में काम कर सकता है।

Cancer (Karka)

चतुर्थ भाव में Moon in Cancer होने पर यह अपनी स्वराशि (Own Sign) में होता है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न मेष (Aries) बनता है, जिससे चंद्रमा चतुर्थ भाव का स्वामी होकर चतुर्थ भाव में ही बैठता है। यह एक अत्यंत शक्तिशाली और शुभ स्थिति है। Western Astrology के अनुसार, कर्क राशि का चंद्रमा जातक को अत्यधिक संवेदनशील बनाता है और वह पुरानी भावनात्मक चोटों को आसानी से नहीं भूल पाता। Jataka Parijata के अनुसार, यदि कर्क राशि का चंद्रमा बृहस्पति और शुक्र से दृष्ट हो और पारिजात आदि उत्तम वैशेषिकांश प्राप्त करे, तो जातक को महान प्रसिद्धि और प्रचुर धन प्राप्त होता है। Saravali के अनुसार, यदि कर्क राशि के चंद्रमा पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक बुद्धिमान और मंत्री बनता है; बृहस्पति की दृष्टि जातक को राजा के समान पूज्य बनाती है; शुक्र की दृष्टि जातक को अत्यधिक वैभवशाली बनाती है; और शनि की दृष्टि जातक को दुखी और भटकाव की स्थिति में लाती है।

Leo (Simha)

चतुर्थ भाव में Moon in Leo होने पर यह अपने मित्र सूर्य की राशि में होता है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न वृषभ (Taurus) बनता है, जिससे चंद्रमा तृतीय भाव का स्वामी (तृतीयेश) होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह जातक के साहस और भाई-बहनों के संबंधों को घरेलू सुख से जोड़ता है। Yashodhar Mehta's Research in Astrology के अनुसार, सिंह राशि का चंद्रमा जातक को महत्वाकांक्षी, साहसी और उदार बनाता है। Saravali के अनुसार, यदि सिंह राशि के चंद्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक राजा के समान तेजस्वी और गंभीर आवाज वाला होता है; मंगल की दृष्टि जातक को सेना प्रमुख या नेतृत्वकर्ता बनाती है; बुध की दृष्टि जातक को स्त्री-सुलभ कोमलता और आकर्षण देती है; और बृहस्पति की दृष्टि जातक को समाज में अत्यंत सम्मानित और गुणी बनाती है। सिंह राशि का चंद्रमा जातक के भीतर एक राजसी और स्वाभिमानी स्वभाव विकसित करता है।

Virgo (Kanya)

चतुर्थ भाव में Moon in Virgo होने पर यह अपने मित्र बुध की राशि में होता है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न मिथुन (Gemini) बनता है, जिससे चंद्रमा द्वितीय भाव का स्वामी (द्वितीयेश) होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह धन और पारिवारिक संपत्ति को सीधे घरेलू सुख से जोड़ता है। Western Astrology के अनुसार, कन्या राशि का चंद्रमा जातक को अत्यधिक आत्म-आलोचक, काम में व्यस्त रहने वाला और दोषी महसूस करने की प्रवृत्ति वाला बनाता है। Saravali के अनुसार, यदि कन्या राशि के चंद्रमा पर बुध की दृष्टि हो, तो जातक ज्योतिष और साहित्य का विशेषज्ञ बनता है; बृहस्पति की दृष्टि जातक को सामाजिक प्रतिष्ठा और धन देती है; शुक्र की दृष्टि जातक को विलासी और समृद्ध बनाती है; और शनि की दृष्टि जातक को मानसिक रूप से अशांत कर सकती है। यदि कन्या राशि का चंद्रमा पापी ग्रहों से अत्यधिक पीड़ित हो, तो जातक को अपेंडिसाइटिस जैसी पेट की बीमारियों का खतरा रहता है।

Libra (Tula)

चतुर्थ भाव में Moon in Libra होने पर यह अपने तटस्थ मित्र शुक्र की राशि में होता है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न कर्क (Cancer) बनता है, जिससे चंद्रमा स्वयं लग्नेश होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह जातक के अपने अस्तित्व और शरीर को सीधे घरेलू सुख और माता से जोड़ता है। Western Astrology के अनुसार, तुला राशि का चंद्रमा जातक के भीतर एक सुंदर और कलात्मक वातावरण में रहने की तीव्र इच्छा पैदा करता है। Saravali के अनुसार, यदि तुला राशि के चंद्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक के स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति पर प्रभाव पड़ता है; मंगल की दृष्टि जातक को थोड़ा कठोर और नेत्र रोगी बना सकती है; बुध की दृष्टि जातक को कलात्मक कार्यों में कुशल और प्रसिद्ध बनाती है; और शनि की दृष्टि जातक को मधुरभाषी, समृद्ध और माता के लिए अनुकूल बनाती है। जातक का पूरा जीवन मानसिक शांति और संतुलन की खोज में व्यतीत होता है।

Scorpio (Vrischika)

चतुर्थ भाव में Moon in Scorpio होने पर यह अपनी नीच गरिमा (Debilitated) में होता है, जिसका स्वामी मंगल है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न सिंह (Leo) बनता है, जिससे चंद्रमा द्वादश भाव का स्वामी (द्वादशेश) होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह स्थिति घरेलू सुख में कमी और मानसिक अशांति को दर्शाती है। Western Astrology के अनुसार, वृश्चिक राशि का चंद्रमा जातक को अत्यधिक ईर्ष्यालु और तीव्र भावनाओं वाला बनाता है। जातक अंतर्मुखी और दार्शनिक स्वभाव का होता है। यदि वृश्चिक का चंद्रमा शनि या राहु से पीड़ित हो, तो जातक तंत्र-मंत्र या नकारात्मक ऊर्जाओं की ओर आकर्षित हो सकता है। Saravali के अनुसार, यदि इस चंद्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक का चरित्र प्रभावित होता है; मंगल की दृष्टि जातक को अतुलनीय साहस और धन देती है; बुध की दृष्टि जातक को चालाक और कठोरभाषी बनाती है; बृहस्पति की दृष्टि जातक को सुंदर और कर्तव्यनिष्ठ बनाती है; शुक्र की दृष्टि जातक को बुद्धिमान बनाती है लेकिन स्त्रियों के कारण कमजोरी लाती है; और शनि की दृष्टि जातक को रोगी और दरिद्र बना सकती है।

Sagittarius (Dhanu)

चतुर्थ भाव में Moon in Sagittarius होने पर यह अपने मित्र बृहस्पति की राशि में होता है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न कन्या (Virgo) बनता है, जिससे चंद्रमा एकादश भाव का स्वामी (एकादशेश) होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह जातक की आय और लाभ को सीधे घरेलू सुख और भूमि-भवन से जोड़ता है। Western Astrology के अनुसार, धनु राशि का चंद्रमा जातक को आशावादी, साहसी और बेचैन स्वभाव का बनाता है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि धनु राशि का चंद्रमा बृहस्पति से युत या दृष्ट हो, तो जातक को बहुमूल्य लाल वस्त्र और आभूषण प्राप्त होते हैं। Saravali के अनुसार, यदि धनु के चंद्रमा पर सूर्य की दृष्टि हो, तो जातक राजा के समान सुखी और समृद्ध होता है; मंगल की दृष्टि जातक को पराक्रमी और सेनापति बनाती है; बुध की दृष्टि जातक को एक कुशल नर्तक और ज्योतिषी बनाती है; और बृहस्पति की दृष्टि जातक को आकर्षक शरीर और राजसी सुख प्रदान करती है।

Capricorn (Makara)

चतुर्थ भाव में Moon in Capricorn होने पर यह अपने तटस्थ शत्रु शनि की राशि में होता है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न तुला (Libra) बनता है, जिससे चंद्रमा दशम भाव का स्वामी (दशमेश) होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह जातक के करियर और सामाजिक प्रतिष्ठा को सीधे उसके घर और माता से जोड़ता है। Western Astrology के अनुसार, मकर राशि का चंद्रमा जातक की भावनाओं को नियंत्रित और सीमित करता है, जिससे वह अपनी भावनाएं व्यक्त करने में संकोच करता है। जातक अपनी भावनाओं को ठंडी कार्यकुशलता के साथ प्रदर्शित करता है। Saravali के अनुसार, मकर राशि के चंद्रमा पर शुक्र और शनि की दृष्टि जातक के चरित्र और जीवन के परिणामों को प्रभावित करती है। जातक के भीतर सुरक्षा और स्थिरता की तीव्र भावना होती है, और वह अपने पारिवारिक कर्तव्यों को बहुत गंभीरता से लेता है।

Aquarius (Kumbha)

चतुर्थ भाव में Moon in Aquarius होने पर यह शनि की राशि में होता है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न वृश्चिक (Scorpio) बनता है, जिससे चंद्रमा नवम भाव का स्वामी (नवमेश) होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह जातक के भाग्य, धर्म और पिता के सुख को सीधे चतुर्थ भाव से जोड़ता है। Western Astrology के अनुसार, कुंभ का चंद्रमा जातक को अपनी भावनाओं से अलग कर देता है, जिससे वह एक दर्शक की तरह व्यवहार करता है। Horasara के अनुसार, यदि कुंभ राशि का चंद्रमा हो और उसकी महादशा सक्रिय हो, तो जातक को हृदय रोग होने की आशंका रहती है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि कुंभ राशि में Moon with Rahu की युति हो, तो जातक तरल पदार्थों और जड़ी-बूटियों से दवाएं बनाने के व्यवसाय में संलग्न हो सकता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यदि इस चंद्रमा पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक माता-पिता के सुख से वंचित और दुष्ट स्वभाव का हो सकता है।

Pisces (Meena)

चतुर्थ भाव में Moon in Pisces होने पर यह अपने मित्र बृहस्पति की राशि में होता है। इस स्थिति के लिए जातक का लग्न धनु (Sagittarius) बनता है, जिससे चंद्रमा अष्टम भाव का स्वामी (अष्टमेश) होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। यह स्थिति जातक के जीवन में अचानक आने वाले बदलावों और गुप्त रहस्यों को घरेलू जीवन से जोड़ती है। Western Astrology के अनुसार, मीन राशि का चंद्रमा जातक को अत्यधिक संवेदनशील, सहजज्ञ और पलायनवादी बनाता है। Saravali के अनुसार, यदि मीन के चंद्रमा पर शुक्र की दृष्टि हो, तो जातक कामकला, संगीत और नृत्य में अत्यधिक कुशल होता है; और यदि शनि की दृष्टि हो, तो जातक शारीरिक रूप से विकृत, माता के लिए प्रतिकूल और हीन स्त्रियों की संगति करने वाला हो सकता है। जातक का घरेलू जीवन आध्यात्मिक और कल्पनाशील होता है, लेकिन अष्टमेश होने के कारण कभी-कभी अचानक मानसिक अशांति का सामना करना पड़ता है।

Conjunctions in This House

चतुर्थ भाव में चंद्रमा के साथ अन्य ग्रहों की युति जातक के जीवन और मानसिक स्थिति को पूरी तरह बदल देती है।

Sun

चतुर्थ भाव में Sun with Moon की युति होने पर अमावस्या योग बनता है। यदि ये दोनों ग्रह बहुत निकट हों, तो चंद्रमा अस्त (Astangata) हो जाता है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में सूर्य और चंद्रमा एक साथ हों और शनि सप्तम भाव में स्थित हो, तो यह स्थिति माता की मृत्यु का कारण बनती है। यह युति जातक के भीतर एक मजबूत अहंकार और मानसिक अशांति पैदा करती है, जिससे माता के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं।

Mars

चतुर्थ भाव में Mars with Moon की युति होने पर चंद्र-मंगल योग बनता है। यह एक अत्यंत ऊर्जावान योग है जो जातक को प्रचुर धन और भूमि-भवन का सुख देता है। हालांकि, चतुर्थ भाव में मंगल की उपस्थिति जातक के घरेलू वातावरण में अशांति, क्रोध और विवाद भी पैदा कर सकती है। माता के स्वास्थ्य के लिए भी यह युति कुछ हद तक प्रतिकूल मानी जाती है।

Mercury

चतुर्थ भाव में Mercury with Moon की युति जातक को अत्यधिक बुद्धिमान, कलात्मक और चतुर बनाती है। जातक का घर पुस्तकों और कलाकृतियों से भरा होता है। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि चंद्रमा और बुध चतुर्थ भाव में हों, बृहस्पति लग्न में हो, और शुक्र या लग्नेश उच्च के हों, तो जातक को आलीशान महलों जैसे घरों की प्राप्ति होती है। यह युति जातक को एक उत्कृष्ट लेखक या वक्ता बना सकती है।

Jupiter

चतुर्थ भाव में Jupiter with Moon की युति होने पर सुप्रसिद्ध गजकेसरी योग (Gajakesari Yoga) का निर्माण होता है। यह वैदिक ज्योतिष के सबसे शुभ योगों में से एक है। यह युति जातक को अत्यधिक ज्ञानी, सुखी, दीर्घायु माता का सुख और समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्रदान करती है। जातक का घर एक मंदिर के समान पवित्र और शांतिपूर्ण होता है।

Venus

चतुर्थ भाव में Venus with Moon की युति जातक को अत्यधिक विलासी, कलाप्रेमी और सुंदर वाहनों का स्वामी बनाती है। जातक का घर अत्यंत सुंदर और आधुनिक सुख-सुविधाओं से सुसज्जित होता है। जातक को स्त्रियों से अत्यधिक सहयोग और सुख प्राप्त होता है। हालांकि, यदि यह युति पीड़ित हो, तो जातक अत्यधिक कामुक और विलासी हो सकता है।

Saturn

चतुर्थ भाव में Saturn with Moon की युति होने पर विष योग (Visha Yoga) या पुनर्फू योग (Punarphoo) बनता है। यह युति जातक को अत्यधिक मानसिक तनाव, अवसाद और अकेलापन देती है। जातक की माता का जीवन अत्यंत संघर्षमय होता है या जातक को माता का सुख देर से मिलता है। घर का वातावरण ठंडा और नीरस हो सकता है।

Rahu

चतुर्थ भाव में Rahu with Moon की युति होने पर ग्रहण योग बनता है। यह युति जातक के भीतर अज्ञात भय, मानसिक भ्रम और भ्रम की स्थिति पैदा करती है। जातक अपनी माता के स्वास्थ्य को लेकर हमेशा चिंतित रहता है। घरेलू जीवन में अचानक और अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।

Ketu

चतुर्थ भाव में Ketu with Moon की युति जातक को सांसारिक सुखों से विरक्त कर आध्यात्मिक खोज की ओर ले जाती है। जातक को अपने ही घर में रहते हुए भी अकेलेपन का अहसास होता है। जातक के भीतर गहरी अंतर्दृष्टि और अंतर्ज्ञान का विकास होता है, लेकिन वह घरेलू सुख-सुविधाओं के प्रति उदासीन हो जाता है। जब चतुर्थ भाव में तीन या अधिक ग्रह एक साथ स्थित होते हैं, तो यह जीवन की पूरी ऊर्जा को इसी भाव पर केंद्रित कर देता है। ऐसी स्थिति में जातक का झुकाव संन्यास (Sanyasa [वैराग्य]) की ओर हो सकता है। यदि चंद्रमा मंगल या शनि के अंश में हो और शनि से दृष्ट हो, तो जातक सांसारिक जीवन का त्याग कर संन्यास मार्ग अपना लेता है।

Aspects Received

चतुर्थ भाव में स्थित चंद्रमा पर अन्य ग्रहों की दृष्टि का प्रभाव अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।

Jupiter

बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि चंद्रमा पर अमृत के समान कार्य करती है। यह चंद्रमा के सभी दोषों को दूर कर जातक को परम शांति, उच्च शिक्षा, और माता की दीर्घायु प्रदान करती है। जातक का भाग्य हमेशा उसका साथ देता है।

Saturn

शनि की दृष्टि चंद्रमा को संकुचित और उदास बनाती है। यह जातक को मानसिक रूप से चिंतित रखती है और घरेलू सुखों में देरी या कमी लाती है। माता के साथ संबंधों में दूरी या उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है।

Mars

मंगल की दृष्टि चंद्रमा को अत्यधिक संवेदनशील और आक्रामक बनाती है। जातक छोटी-छोटी बातों पर उत्तेजित हो जाता है। घर में विवाद और अग्नि या दुर्घटना का भय बना रहता है।

Rahu

राहु की दृष्टि चंद्रमा पर पड़ने से जातक के भीतर मानसिक अस्थिरता और भ्रम पैदा होता है। जातक को अनिद्रा या बुरे सपनों की समस्या हो सकती है और वह घरेलू सुख से कभी संतुष्ट नहीं हो पाता।

Ketu

केतु की दृष्टि जातक को घरेलू सुखों से दूर करती है। जातक के भीतर एक अजीब सी तड़प और वैराग्य की भावना बनी रहती है, जिससे वह मानसिक शांति की तलाश में भटकता रहता है।

Strength and Condition

चतुर्थ भाव में चंद्रमा के वास्तविक परिणामों को जानने के लिए उसकी ताकत और अवस्थाओं का विश्लेषण करना अनिवार्य है।

Baladi Avastha

जातक को चंद्रमा के अंशों (डिग्री) की जांच करनी चाहिए ताकि उसकी अवस्था (Avastha) का पता चल सके:
  • विषम राशियां (Aries, Gemini, Leo, Libra, Sagittarius, Aquarius): इन राशियों में 0-6° पर चंद्रमा बाल (Bala) अवस्था में, 6-12° पर कुमार, 12-18° पर युवा (पूर्ण परिणाम देने वाला), 18-24° पर वृद्ध, और 24-30° पर मृत (Mrita) अवस्था में होता है।
  • सम राशियां (Taurus, Cancer, Virgo, Scorpio, Capricorn, Pisces): इन राशियों में यह क्रम बिल्कुल उल्टा हो जाता है। 0-6° पर चंद्रमा मृत अवस्था में और 24-30° पर बाल अवस्था में होता है। चूंकि चंद्रमा की अपनी राशि कर्क और उच्च राशि वृषभ सम राशियां हैं, इसलिए पाठकों को इस उल्टे क्रम का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

Ashtakavarga

अष्टकवर्ग चार्ट में चतुर्थ भाव को मिलने वाले बिंदु (Bindus) यह तय करते हैं कि चंद्रमा अपना शुभ प्रभाव दे पाएगा या नहीं। यदि चतुर्थ भाव में उच्च बिंदु (३० या अधिक) हों, तो चंद्रमा जातक को भूमि, भवन और मानसिक शांति का पूर्ण सुख देता है। इसके विपरीत, यदि बिंदु कम (२० से कम) हों, तो शुभ स्थिति में होने के बावजूद चंद्रमा पूर्ण सुख नहीं दे पाता।

Nakshatra

चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होता है, उसका स्वामी भी परिणाम को प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, यदि चंद्रमा अपने ही नक्षत्र (रोहिणी, हस्त, श्रवण) में हो, तो यह अत्यंत शुभ फल देता है। यदि यह शनि के नक्षत्र (पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद) में हो, तो परिणामों में देरी और संघर्ष की स्थिति बनती है।

Navamsa (D9)

नवंश कुंडली (Navamsha) यह पुष्टि करती है कि जन्म कुंडली का वादा सच होगा या नहीं। यदि चंद्रमा जन्म कुंडली में चतुर्थ भाव में उच्च का हो, लेकिन नवंश में नीच का हो जाए, तो जातक को मिलने वाले शुभ फलों में भारी कमी आ जाती है। इसके विपरीत, यदि वह नवंश में मजबूत हो, तो शुभ फल निश्चित रूप से प्राप्त होते हैं।

Condition of the Lord of the 4th House

चतुर्थ भाव के स्वामी (चतुर्थेश) की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण है। यदि चतुर्थ भाव का चंद्रमा बहुत मजबूत हो, लेकिन चतुर्थेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में पीड़ित होकर बैठा हो, तो जातक को भूमि या मकान का सुख स्थायी रूप से नहीं मिल पाता। चतुर्थेश का चंद्रमा के साथ मित्रवत संबंध होना आवश्यक है।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) के अनुसार, चतुर्थ भाव के परिणामों को सटीक रूप से जानने के लिए चतुर्थ भाव के कस्पल सब-लॉर्ड (Cuspal Sub-Lord) की स्थिति का अध्ययन किया जाता है।
  • सब-लॉर्ड की भूमिका: केपी सिस्टम में कस्पल सब-लॉर्ड को राशि स्वामी से अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। यदि चतुर्थ भाव का सब-लॉर्ड चंद्रमा हो, तो वह जातक के घरेलू जीवन और माता के संबंधों को नियंत्रित करता है।
  • प्रतिकूल स्थितियां: यदि सब-लॉर्ड की स्थिति उस ग्रह द्वारा दिए जाने वाले भावों के सापेक्ष ४, ७, ८ या १२वें भाव में हो, तो परिणाम प्रतिकूल प्राप्त होते हैं।
  • राहु-केतु का प्रतिनिधित्व: यदि कोई ग्रह चंद्रमा के नक्षत्र में हो और चंद्रमा का प्रतिनिधित्व राहु या केतु कर रहे हों, तो वह ग्रह उन कस्पल स्थितियों को प्रभावित नहीं करता जहां राहु या केतु दिखाई देते हैं।

Practical Significations

चतुर्थ भाव में चंद्रमा के व्यावहारिक प्रभावों को निम्नलिखित श्रेणियों में समझा जा सकता है:

Mother and Family Relations

  • मातृभक्ति: जातक अपनी माता से अत्यधिक प्रेम करता है और उनके प्रति समर्पित रहता है।
  • पारिवारिक जुड़ाव: जातक अपने परिवार और पैतृक मूल्यों से गहराई से जुड़ा होता है।

Home and Real Estate

  • सुंदर गृह: जातक को एक सुंदर, स्वच्छ और आरामदायक घर में रहने की तीव्र इच्छा होती है।
  • वाहन सुख: जातक के पास अच्छे और आरामदायक वाहन होते हैं।

Frequently Asked Questions

क्या चतुर्थ भाव में चंद्रमा होना शुभ होता है?
हां, चतुर्थ भाव में चंद्रमा का होना सामान्यतः अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि यहां चंद्रमा को पूर्ण दिशा बल प्राप्त होता है। यह जातक को मानसिक शांति, माता का सुख और भूमि-वाहन की प्राप्ति कराता है, बशर्ते वह पापी ग्रहों से पीड़ित न हो।
क्या चतुर्थ भाव का चंद्रमा माता के जीवन के लिए हानिकारक है?
सामान्यतः नहीं। लेकिन यदि चतुर्थेश और चंद्रमा दोनों ही दुस्थान (६, ८, १२) में हों और शुभ ग्रहों के प्रभाव से रहित हों, तभी शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार माता के जीवन पर संकट आता है। सामान्य स्थिति में यह माता के साथ गहरे प्रेम को दर्शाता है।
चतुर्थ भाव में चंद्रमा होने पर कौन सा रत्न पहनना चाहिए?
चतुर्थ भाव में चंद्रमा के शुभ प्रभावों को बढ़ाने के लिए मोती (Moti) रत्न धारण किया जाता है। हालांकि, इसे केवल तभी पहनना चाहिए जब चंद्रमा आपकी लग्न कुंडली के लिए एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (जैसे मेष, कर्क, वृश्चिक या मीन लग्न) हो। यदि चंद्रमा मारक या बाधक भाव का स्वामी है, तो मोती पहनने से बचना चाहिए।
क्या चतुर्थ भाव का चंद्रमा करियर में अस्थिरता देता है?
चूंकि चतुर्थ भाव का चंद्रमा सीधे दशम भाव (करियर) को देखता है, इसलिए यदि चंद्रमा पीड़ित या कृष्ण पक्ष का हो, तो यह करियर में उतार-चढ़ाव दे सकता है। लेकिन यदि चंद्रमा मजबूत हो, तो यह जनता के बीच अत्यधिक लोकप्रियता और सफलता दिलाता है।
चतुर्थ भाव में चंद्रमा और शनि की युति का क्या प्रभाव होता है?
इसे विष योग कहा जाता है। यह युति जातक को मानसिक रूप से अशांत, चिंतित और अवसादग्रस्त बना सकती है। जातक को घरेलू सुख और माता के स्नेह में कमी महसूस हो सकती है। इसके लिए नियमित रूप से शिव जी की पूजा करनी चाहिए।
चतुर्थ भाव के चंद्रमा के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
चतुर्थ भाव में चंद्रमा के लिए कर्क राशि (स्वराशि) और वृषभ राशि (उच्च राशि) सबसे सर्वोत्तम मानी जाती हैं। इन राशियों में होने पर चंद्रमा जातक को जीवन के सभी भौतिक और मानसिक सुख प्रदान करता है।

Remedial Measures

यदि चतुर्थ भाव में चंद्रमा पीड़ित या कमजोर हो, तो निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं: Rasi Characteristics के अनुसार, यदि चंद्रमा मेष, वृश्चिक या मकर राशि में स्थित हो, तो मंगलवार के दिन सूर्योदय से सुबह ११:०० बजे के बीच मूंगा रत्न खरीदना या धारण करना मंगल के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने के लिए अत्यंत शुभ और प्रभावी उपाय माना जाता है।

Standard Remedies for Moon

  • आध्यात्मिक उपाय: प्रत्येक सोमवार या पूर्णिमा (Purnima) के दिन भगवान शिव का दूध और जल से अभिषेक करें। चंद्रमा के बीज मंत्र "ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः" का नियमित जाप करें। पूर्णिमा की रात को चंद्रमा को अर्घ्य (Arghya) दें।
  • व्यवहारिक उपाय: अपनी माता, मौसी, सास और समाज की बुजुर्ग महिलाओं का हमेशा सम्मान करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। पानी और दूध को कभी भी व्यर्थ न बहाएं।
  • दान कार्य: सोमवार के दिन सफेद वस्तुओं जैसे दूध, चावल, चीनी, चांदी या सफेद कपड़ों का किसी जरूरतमंद या मंदिर में दान करें।
  • रत्न परामर्श: चंद्रमा को बल देने के लिए चांदी की अंगूठी में कनिष्ठिका उंगली में मोती (Moti) धारण करें। चेतावनी: मोती केवल तभी धारण करें जब चंद्रमा आपकी कुंडली में एक कार्यात्मक शुभ ग्रह हो (जैसे मेष, कर्क, वृश्चिक, या मीन लग्न के लिए)। वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न के जातकों को मोती पहनने से बचना चाहिए क्योंकि यह उनके लिए हानिकारक हो सकता है।
अपनी कुंडली में चतुर्थ भाव के चंद्रमा का सटीक विश्लेषण करने के लिए, सबसे पहले उसकी राशि, गरिमा (उच्च, नीच या स्वराशि) और अंशों की जांच करें। इसके बाद, चतुर्थ भाव के स्वामी की स्थिति और चंद्रमा पर पड़ने वाले शुभ व अशुभ ग्रहों के दृष्टि प्रभाव का आकलन करें। इन सभी कारकों को मिलाकर ही आप अपने जीवन में चंद्रमा के वास्तविक प्रभावों को समझ पाएंगे।

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Sources consulted

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