Rahu in the 5th House

Read in English

50 min read · Drawn from 51 classical and modern works · Updated August 2026 · 1 view

वैदिक ज्योतिष में, छाया ग्रह (Chhaya Graha [shadow planet]) राहु (Rahu) जब कुंडली के पंचम भाव (Panchama Bhava [fifth house]), जिसे बुद्धि और सुत भाव (Putra Bhava [house of children]) भी कहा जाता है, में स्थित होता है, तो यह जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को गहराई से प्रभावित करता है। पंचम भाव मुख्य रूप से जातक की बुद्धि (Buddhi [intelligence]), संतान (Santana [progeny]), पूर्व जन्म के संचित पुण्य (Purva Punya [past life merit]), सट्टा, और रचनात्मकता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि राहु भ्रम, विस्तार, और अपरंपरागत दृष्टिकोण का कारक (Karaka [significator]) माना जाता है। इस भाव में राहु की उपस्थिति जातक के जीवन में अत्यधिक उतार-चढ़ाव, मानसिक तीव्रता और संतान संबंधी मामलों में विशिष्ट परिस्थितियों का निर्माण करती है। इस संयोजन का अंतिम और सटीक परिणाम पूरी तरह से राहु के डिस्पोजिटर (राशि स्वामी) की स्थिति, उस पर पड़ने वाली दृष्टि (Drishti [aspect]), और संबंधित ग्रहों की गरिमा पर निर्भर करता है। वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रंथ अक्सर अत्यंत कठोर और निरपेक्ष शब्दों में फलादेश प्रस्तुत करते हैं, जैसे कि पूर्ण संतानहीनता, सर्प का शाप, या मानसिक अस्थिरता। पाठकों और ज्योतिष के विद्यार्थियों को यह स्पष्ट रूप से समझना चाहिए कि किसी भी कुंडली में केवल एक ग्रह की स्थिति को स्वतंत्र रूप से देखकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए। ऐसे गंभीर और नकारात्मक परिणाम तभी घटित होते हैं जब कुंडली में कई अन्य सहायक, मारक और पुष्टिकारक पीड़ित स्थितियां एक साथ मौजूद हों।

Classical Position

शास्त्रीय और आधुनिक ज्योतिषीय परंपराओं में पंचम भाव में राहु की स्थिति को लेकर कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर व्यापक सहमति है। विशेष रूप से कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) और पराशरीय सिद्धांतों के अंतर्गत इस स्थिति के प्रभाव को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है:
  • निर्णायक मतदान और समर्थन: कृष्णमूर्ति पद्धति के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के शासक ग्रह (रूलिंग प्लैनेट्स) कुंडली के छठे या ग्यारहवें भाव के कार्येश (सिग्निफिकेटर) होते हैं, तो लोग आपके पक्ष में मतदान करेंगे या आपका समर्थन करेंगे। इसके विपरीत, यदि वे पंचम या बारहवें भाव के कार्येश होते हैं, तो वे आपके विरुद्ध मतदान करेंगे। यह सिद्धांत राजनीतिक और सामाजिक चुनावों में जीत-हार के निर्धारण में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
  • छाया ग्रहों का फलादेश सिद्धांत: KP System के अंतर्गत यह सर्वसम्मत नियम है कि यदि फलादेश में राहु (Rahu) या केतु (Ketu) शामिल हों, तो सीधे तौर पर कोई भविष्यवाणी करने के बजाय, उस ग्रह की स्थिति और प्रभाव को देखना चाहिए जो उस नोड (नोड द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले ग्रह) से जुड़ा हुआ है। नोड जिस राशि में स्थित है या जिससे युति कर रहा है, उसी के आधार पर परिणाम घोषित किए जाने चाहिए।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय ग्रंथों और नाड़ी परंपराओं में पंचम भाव के राहु को लेकर कई विशिष्ट और भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण मिलते हैं। इन फलादेशों को जातक के जीवन के विभिन्न आयामों के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है:

Physical Appearance and Health

  • मानसिक और पाचन संबंधी विकार: My Experiences in Astrology के अनुसार, यदि पंचम भाव में चन्द्रमा और राहु की युति हो, तो जातक अत्यधिक आवेगी, अस्थिर और बेचैन स्वभाव का होता है। ऐसे जातक को गंभीर पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जो अंततः मानसिक अशांति और अत्यधिक व्यवहारिक उतार-चढ़ाव का कारण बनती हैं।
  • अपेंडिसाइटिस का जोखिम: एक अन्य शास्त्रीय सिद्धांत के अनुसार, यदि राहु वृश्चिक राशि में पंचम भाव में स्थित हो, तो जातक को अपेंडिसाइटिस (आंत की सूजन) जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
  • शारीरिक कमजोरी और बालारिष्ट: यदि बृहस्पति पीड़ित और कमजोर होकर चन्द्रमा और राहु के साथ युति कर रहा हो, और चन्द्रमा पर शुक्र की दृष्टि हो, तो यह जातक के बचपन में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं या बालारिष्ट (Balarishtha [infant ill-health]) को जन्म दे सकता है।

Temperament and Mental State

  • अपरंपरागत आराधना: Jataka Tattvam (कडालंगुडी संस्करण) के अनुसार, पंचम भाव में राहु जातक को उग्र या हानिकारक देवताओं (जैसे तामसिक या तांत्रिक शक्तियों) का आराधक बनाता है, जबकि इसी भाव में बुध सभी देवताओं के प्रति भक्ति और शनि प्रेतासिनी की पूजा की ओर प्रवृत्त करता है।
  • दयालु और परोपकारी हृदय: STRIJATAKA के अनुसार, यदि राहु या केतु लग्न (Lagna [ascendant]) से तीसरे, पांचवें या ग्यारहवें भाव में स्थित हों, तो जातक दयालु हृदय, परोपकारी स्वभाव वाला और ईश्वर तथा संतों के प्रति गहरी श्रद्धा रखने वाला होता है।
  • मानसिक भ्रम और भय: नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, जब गोचर का राहु कर्क राशि में हो और मंगल उसी दिशा में सक्रिय हो, तथा बुध चन्द्रमा के साथ स्थित हो, तो जातक को अत्यधिक भ्रम, अज्ञात भय और मानसिक थकावट का अनुभव होता है।

Wealth, Status and Life Events

  • दशा काल के मिश्रित परिणाम: Sarvartha Chintamani के अनुसार, पंचम भाव में स्थित राहु की महादशा (Mahadasha [major planetary period]) के दौरान, यदि अशुभ ग्रहों की अंतर्दशा (Antardasha [sub-planetary period]) या भुक्ति (Bhukti) चल रही हो, तो जातक को मानसिक संताप, दुःख और सरकारी तंत्र से परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके विपरीत, शुभ ग्रहों की अंतर्दशा में जातक को भूमि, प्रचुर धन और संपत्ति की प्राप्ति होती है।
  • राजनीतिक सफलता और सामाजिक सुधार: How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि पंचम भाव में राहु पूर्ण बल के साथ स्थित हो और पंचम तथा दशम भाव के स्वामियों के साथ शुभ दृष्टि संबंध बना रहा हो, तो जातक उच्च राजनीतिक पद पर आसीन होता है। ऐसा जातक समाज में लोकप्रिय होता है और लोक कल्याणकारी सुधारों की शुरुआत करता है।
  • कंप्यूटर विज्ञान और तकनीकी शिक्षा: Planets and Education के अनुसार, यदि पंचम और दशम भाव के स्वामियों का संबंध बुध, राहु और केतु से हो, तो जातक कंप्यूटर विज्ञान या सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त करता है।
  • भाषाओं का ज्ञान: यदि कुंडली में राहु-केतु का अक्ष पंचम और ग्यारहवें भाव में हो और जातक को शुभ बृहस्पति की Dasha प्राप्त हो, तो वह कई भाषाओं का ज्ञाता और विद्वान बनता है।

Progeny and Children

  • सर्प शाप और संतानहीनता: Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, पंचम भाव में राहु की उपस्थिति और उस पर मंगल की दृष्टि होने से जातक को सर्प शाप (Sarpa Shapa [serpent's curse]) के कारण संतान सुख में बाधा आती है। इसी प्रकार, यदि पंचमेश राहु के साथ हो और चन्द्रमा पंचम भाव में शनि से दृष्ट हो, तो भी संतानहीनता का योग बनता है।
  • पुत्रकारक की कमजोरी: यदि संतान का नैसर्गिक कारक (Karaka) बृहस्पति राहु के साथ युति में हो, पंचमेश कमजोर हो और लग्नेश मंगल के साथ स्थित हो, तो जातक को संतान प्राप्ति में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
  • अल्पायु और दीर्घायु संतान: Jataka Parijata के अनुसार, यदि पंचमेश राहु के साथ स्थित हो, तो पंचमेश की Bhukti में जन्म लेने वाली संतान अल्पायु होती है, जबकि राहु की Bhukti में जन्म लेने वाली संतान दीर्घायु होती है।
  • सप्तमांश की स्थिति: Learn Successful Predictive Techniques of Hindu Astrology के अनुसार, यदि सप्तमांश (Saptamsha [D7 divisional chart]) कुंडली में पंचमेश छठे भाव में हो या सप्तमांश का पंचम भाव मंगल, राहु या केतु जैसे क्रूर (Krura [fierce]) ग्रहों से पीड़ित हो, तो संतानहीनता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

Aspect and Directional Strength

पंचम भाव में स्थित होकर, राहु अपनी पूर्ण दृष्टि (Drishti) ग्यारहवें भाव (Ekadasha Bhava [eleventh house]) पर डालता है, जो लाभ, आय, इच्छाओं की पूर्ति और बड़े भाई-बहनों का भाव है। चूंकि राहु एक क्रूर और छाया ग्रह है, इसलिए इसकी दृष्टि ग्यारहवें भाव पर पड़ने से जातक के भीतर धन कमाने की अत्यधिक और अपरंपरागत इच्छाएं जाग्रत होती हैं। जातक विदेशी स्रोतों, सट्टेबाजी, या तकनीकी क्षेत्रों से अचानक और अप्रत्याशित लाभ प्राप्त कर सकता है, हालांकि आय में निरंतर उतार-चढ़ाव बना रहता है। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, राहु और केतु कुंडली में तीसरे, सातवें और ग्यारहवें भावों पर या पांचवें, सातवें और नौवें भावों पर अपनी दृष्टि डालते हैं। पंचम भाव में राहु को कोई दिशात्मक बल या दिग्बल (Digbala [directional strength]) प्राप्त नहीं होता है। राहु मुख्य रूप से दशम भाव में सबसे मजबूत (दिग्बली) माना जाता है। पंचम भाव में होने के कारण, इसकी शक्ति और परिणाम पूरी तरह से इसके राशि स्वामी (डिस्पोजिटर) के बल और उस पर पड़ने वाले शुभ या अशुभ ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर करते हैं।

The Placement Across the Twelve Rashis

चूंकि राहु एक छाया ग्रह (Chhaya Graha) है, इसलिए इसका अपना कोई भौतिक अस्तित्व या स्वामित्व वाली राशि नहीं होती है। शास्त्रीय ग्रंथों में राहु के उच्च या नीच होने को लेकर मतभेद हैं, इसलिए इस प्रविष्टि में राहु के लिए किसी भी राशि में कोई निश्चित गरिमा (जैसे उच्च, नीच या स्वराशि) नहीं मानी गई है। हम राहु के प्रभावों का अध्ययन उसके डिस्पोजिटर (राशि स्वामी) की स्थिति और संबंधित राशि के तत्वों के आधार पर करेंगे।

Aries (Mesha)

पंचम भाव में मेष राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर मंगल बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न धनु (Dhanu) होता है।
  • Notable Horoscopes के अनुसार, मेष राशि में राहु मंगल, सूर्य और चन्द्रमा के संयुक्त प्रभाव जैसे परिणाम देता है।
  • Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मेष राशि राहु को विशेष शक्ति प्रदान करती है और यहाँ राहु अनुकूल परिणाम देने में सक्षम होता है।
  • Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि मेष राशि का राहु शुभ ग्रहों से दृष्ट और सुरक्षित हो, तो जातक को प्रचुर धन, ऐश्वर्य और समाज में उच्च सम्मान प्राप्त होता है।
  • Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि सूर्य मेष राशि में राहु के साथ युति कर रहा हो, तो जातक मशीनरी, इंजीनियरिंग या कंप्यूटर से जुड़े क्षेत्रों में अपना करियर बनाता है।
  • medical astrology horoscop of sthethoscop के अनुसार, यदि राहु मेष राशि में पंचम भाव में स्थित हो और उस पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक को संतान प्राप्ति में बाधा या Sarpa Shapa का सामना करना पड़ सकता है।
यह स्थिति जातक को अत्यधिक साहसी, तीक्ष्ण बुद्धि वाला और तकनीकी मामलों में निपुण बनाती है, लेकिन संतान के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं।

Taurus (Vrishabha)

पंचम भाव में वृषभ राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर शुक्र बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न मकर (Makara) होता है।
  • यद्यपि Uttara Kalamrita जैसे ग्रंथ राहु को वृषभ राशि में अत्यंत शुभ मानते हैं, लेकिन शास्त्रीय मतभेदों के कारण हम इसे बिना किसी निश्चित गरिमा के केवल शुक्र के प्रभाव में देखेंगे।
  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, वृषभ राशि में राहु की उपस्थिति इसके नकारात्मक प्रभावों को शांत करती है और इसकी Dasha के दौरान जातक को धन, शिक्षा, पदोन्नति और उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है।
  • Sanketanidhi के अनुसार, यदि राहु शयनावस्था में वृषभ राशि में स्थित हो, तो जातक अत्यंत धनवान और सुखी जीवन व्यतीत करता है।
यह स्थिति जातक को कलात्मक बुद्धि, वित्तीय प्रबंधन में निपुणता और रचनात्मक कार्यों के माध्यम से सफलता प्रदान करती है। शुक्र का शुभ प्रभाव जातक को भौतिक सुखों की ओर आकर्षित करता है।

Gemini (Mithuna)

पंचम भाव में मिथुन राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर बुध बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न कुंभ (Kumbha) होता है।
  • Gopalaratnakara के अनुसार, मिथुन राशि में राहु को बल प्राप्त होता है, और K.P. Reader 3 के अनुसार, यहाँ राहु पूरी तरह से बुध के एजेंट के रूप में कार्य करता है।
  • Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मिथुन राशि का राहु जातक के भीतर पारंपरिक और आधुनिक विचारों के बीच एक आंतरिक द्वंद्व या संघर्ष पैदा करता है।
  • Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि वक्री राहु मिथुन राशि में मंगल, सूर्य और शुक्र के साथ स्थित हो, तो यह संतान प्राप्ति में गंभीर बाधा उत्पन्न करता है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि राहु पर सूर्य और शनि की दृष्टि हो, तो जातक को सरकारी सेवा या उच्च प्रशासनिक पद प्राप्त होता है।
यह स्थिति जातक को असाधारण संचार कौशल, विश्लेषणात्मक क्षमता और त्वरित निर्णय लेने की शक्ति देती है, लेकिन मानसिक रूप से जातक हमेशा विचारों के जाल में उलझा रहता है।

Cancer (Karka)

पंचम भाव में कर्क राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर चन्द्रमा बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न मीन (Meena) होता है।
  • Notable Horoscopes के अनुसार, कर्क राशि में राहु पूरी तरह से चन्द्रमा के समान संवेदनशील और भावनात्मक परिणाम उत्पन्न करता है।
  • Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, कर्क राशि में राहु अत्यंत शुभ और कल्याणकारी परिणाम देने में सक्षम होता है।
  • Jataka Parijata के अनुसार, कर्क राशि के राहु की महादशा जातक को प्रचुर धन, अनाज, मानसिक संतोष, आमोद-प्रमोद और पारिवारिक सुख प्रदान करती है।
  • How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि कर्क राशि का राहु शनि से अत्यधिक पीड़ित हो, तो यह जातक को शारीरिक कमजोरी या स्वास्थ्य संबंधी विकार दे सकता है।
यह स्थिति जातक को अत्यधिक कल्पनाशील, संवेदनशील और पूर्वाभास की शक्ति से युक्त बनाती है, लेकिन चन्द्रमा के उतार-चढ़ाव के कारण मानसिक शांति प्रभावित हो सकती है।

Leo (Simha)

पंचम भाव में सिंह राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर सूर्य बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न मेष (Mesha) होता है।
  • Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यद्यपि सिंह राशि राहु के लिए शत्रु राशि मानी जाती है, फिर भी व्यावहारिक अनुभवों में सिंह राशि का राहु जातक को अत्यधिक शुभ और प्रभावशाली परिणाम देता है।
  • Jataka Parijata के अनुसार, सिंह राशि में राहु की Dasha जातक को राजा के समान अधिकार, नेतृत्व क्षमता, सेना या संगठन का नेतृत्व और समाज में उच्च प्रतिष्ठा प्रदान करती है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि सिंह राशि में राहु हो, और कुंडली में उच्च का बृहस्पति तीसरे भाव में तथा मंगल-शुक्र की युति हो, तो जातक बड़ी फैक्ट्रियों या औद्योगिक इकाइयों का स्वामी बनता है।
यह स्थिति जातक को अत्यधिक महत्वाकांक्षी, नेतृत्व गुणों से युक्त और समाज पर प्रभाव डालने वाली तीक्ष्ण बुद्धि प्रदान करती है।

Virgo (Kanya)

पंचम भाव में कन्या राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर बुध बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न वृषभ (Vrishabha) होता है।
  • Phaladeepika के अनुसार, कन्या राशि का राहु जातक को समाज में सम्मान, सुख और भूमि तथा वाहनों का सुख प्रदान करता है।
  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, कन्या राशि में राहु अपनी Dasha के दौरान जातक को भौतिक समृद्धि देता है, लेकिन दशा के अंत में कुछ नुकसान भी करवा सकता है।
  • Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि राहु कन्या राशि में हो, बृहस्पति धनु में और शुक्र मीन में हो, तो जातक को न्यायपालिका या कानून के क्षेत्र में उच्च पद और प्रसिद्धि मिलती है।
यह स्थिति जातक को अत्यधिक व्यावहारिक, तार्किक और जटिल समस्याओं को आसानी से सुलझाने वाली बुद्धि प्रदान करती है।

Libra (Tula)

पंचम भाव में तुला राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर शुक्र बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न मिथुन (Mithuna) होता है।
  • Scientific Hindu Astrology के अनुसार, तुला राशि राहु के लिए एक अत्यंत अनुकूल और आरामदायक राशि मानी जाती है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, तुला राशि का राहु कभी-कभी जातक की औपचारिक शिक्षा में कुछ रुकावटें या बाधाएं उत्पन्न कर सकता है।
  • How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि शुक्र बलवान हो और तुला राशि में राहु और चन्द्रमा की युति हो, तो जातक एक सफल कलाकार, मूर्तिकार, मॉडल या सिनेमा जगत से जुड़ा हुआ व्यक्ति बनता है।
यह स्थिति जातक को कला, सौंदर्य और जनसंपर्क के क्षेत्रों में असाधारण सफलता देती है, हालांकि शिक्षा के क्षेत्र में कुछ उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।

Scorpio (Vrischika)

पंचम भाव में वृश्चिक राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर मंगल बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न कर्क (Karka) होता है।
  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, वृश्चिक राशि का राहु अपनी Dasha के दौरान जातक को अप्रत्याशित धन, शाही सम्मान और बड़ी सफलताएं दे सकता है।
  • इसके विपरीत, Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि वृश्चिक राशि का राहु अत्यधिक पीड़ित हो, तो जातक को पदहानि और गंभीर मानसिक संताप का सामना करना पड़ता है।
  • Sarvartha Chintamani के अनुसार, वृश्चिक राशि में राहु जातक के भीतर अज्ञात भय और संकट की स्थिति उत्पन्न करता है।
  • How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि राहु वृश्चिक राशि में पंचम भाव में हो, तो जातक को पेट के निचले हिस्से या अपेंडिक्स से संबंधित स्वास्थ्य समस्याएं होने की संभावना रहती है।
यह स्थिति जातक को रहस्यमयी विद्याओं, शोध और गुप्त ज्ञान की ओर आकर्षित करती है, लेकिन मानसिक रूप से जातक को अशांत भी रख सकती है।

Sagittarius (Dhanu)

पंचम भाव में धनु राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर बृहस्पति बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न सिंह (Simha) होता है।
  • Scientific Hindu Astrology के अनुसार, धनु राशि का राहु मीन राशि की तुलना में अधिक अनुकूल परिणाम देता है क्योंकि यह धनु के दार्शनिक स्वभाव के साथ तालमेल बिठा लेता है।
  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यदि धनु राशि का राहु शुभ ग्रहों से दृष्ट और बलवान हो, तो जातक को सुयोग्य संतान और जीवन में उच्च पद की प्राप्ति होती है। इसके विपरीत, यदि यह पीड़ित हो, तो स्वास्थ्य हानि और गरीबी का सामना करना पड़ता है।
  • Crux of Vedic Astrology के अनुसार, धनु राशि का राहु कभी-कभी किसी पुजारी, न्यायाधीश या ज्योतिषी के कारण मिलने वाले पारिवारिक दोष या शाप को दर्शाता है।
यह स्थिति जातक को धर्म, दर्शन और उच्च ज्ञान की ओर ले जाती है, लेकिन जातक के विचार अपने गुरुओं या शिक्षकों से भिन्न हो सकते हैं।

Capricorn (Makara)

पंचम भाव में मकर राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर शनि बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न कन्या (Kanya) होता है।
  • Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मकर राशि का राहु जातक को व्यावहारिक जीवन में अत्यधिक मजबूत और कर्मठ बनाता है, और यह राहु के अशुभ प्रभावों को दूर करने का एक अपवाद है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि मकर राशि में शनि और राहु की युति हो, तो जातक को किसी बहुत बड़े संस्थान या कॉर्पोरेट घराने में उच्च पद पर नौकरी मिलती है।
  • Core of Nadi Astrology के अनुसार, यदि मकर राशि में बृहस्पति, चन्द्रमा और राहु की युति हो, तो यह जातक के भीतर मानसिक अवसाद और निराशावादी विचारों को जन्म दे सकती है।
यह स्थिति जातक को अत्यधिक अनुशासित, संगठित और व्यावसायिक रूप से सफल बनाती है, हालांकि जातक का स्वभाव थोड़ा रूखा हो सकता है।

Aquarius (Kumbha)

पंचम भाव में कुंभ राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर शनि बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न तुला (Tula) होता है।
  • Scientific Hindu Astrology के अनुसार, कुंभ राशि को राहु के लिए एक जटिल राशि माना जाता है, जहाँ यह जातक को अत्यधिक बौद्धिक और लीक से हटकर सोचने वाला बनाता है।
  • Core of Nadi Astrology के अनुसार, यदि मंगल मकर राशि में हो और राहु कुंभ राशि में स्थित हो, तो जातक को जीवन में अचानक आने वाले खतरों के प्रति सचेत रहना चाहिए।
  • Prasna Arudhaphala (जैमिनी परंपरा) के अनुसार, प्रश्न कुंडली में कुंभ राशि का राहु भैंस या भारी पशुओं से संबंधित मामलों को दर्शाता है।
यह स्थिति जातक को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी नवाचार और सामाजिक सुधारों के प्रति गहरी रुचि प्रदान करती है।

Pisces (Meena)

पंचम भाव में मीन राशि का राहु होने पर इसका डिस्पोजिटर बृहस्पति बनता है। इस स्थिति में जातक का लग्न वृश्चिक (Vrischika) होता है।
  • My Experiences in Astrology के अनुसार, मीन राशि में राहु पूरी तरह से बृहस्पति के समान आध्यात्मिक परिणाम देता है, हालांकि जातक को कभी-कभी सरकारी अधिकारियों या चोरों से भय का सामना करना पड़ सकता है।
  • Phaladeepika के अनुसार, मीन राशि का राहु जातक को समाज में सम्मान, सुख और भौतिक समृद्धि प्रदान करता है।
  • Sarvartha Chintamani के अनुसार, मीन राशि में राहु कभी-कभी जातक को जीवन में अस्थायी सफलता देता है, जिसके बाद अचानक नुकसान की स्थिति बन सकती है।
  • How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि मीन राशि का राहु वर्गोत्तम (Vargottama) हो और उस पर शनि की दृष्टि हो, तो जातक का जीवन अत्यंत प्रभावशाली और असाधारण होता है।
यह स्थिति जातक को अत्यधिक संवेदनशील, आध्यात्मिक और अंतर्ज्ञान से युक्त बनाती है, जिससे जातक जीवन के गूढ़ रहस्यों को समझने में सक्षम होता है।

Conjunctions in This House

पंचम भाव में राहु के साथ अन्य ग्रहों की युति जातक के जीवन में विशिष्ट ऊर्जा पैटर्नों का निर्माण करती है:

Sun with Rahu (सूर्य और राहु)

सूर्य और राहु की युति को ग्रहण योग के रूप में देखा जाता है। Notable Horoscopes के अनुसार, यदि पंचम भाव में सूर्य और राहु की युति हो और उस पर दशमेश की दृष्टि पड़ रही हो, तो यह जातक के भीतर तीव्र वैराग्य की भावना पैदा करती है, जिससे संन्यास (Sanyasa [renunciation]) योग का निर्माण होता है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, मेष राशि में यह युति जातक को कंप्यूटर और मशीनरी के क्षेत्र में बड़ी सफलता दिलाती है।

Moon with Rahu (चन्द्र और राहु)

यह युति मानसिक संवेदनशीलता और भ्रम को दर्शाती है। My Experiences in Astrology के अनुसार, पंचम भाव में चन्द्रमा और राहु की युति जातक को अत्यधिक आवेगी, अस्थिर और बेचैन बनाती है। जातक को गंभीर पाचन विकार हो सकते हैं जो मानसिक तनाव को बढ़ाते हैं। Jataka Parijata के अनुसार, यदि चन्द्रमा किसी पापी ग्रह और राहु के साथ पंचम, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो यह गंभीर मानसिक उन्माद या अवसाद को जन्म दे सकता है।

Mars with Rahu (मंगल और राहु)

यह एक अत्यंत विस्फोटक और अंगारक युति है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि पंचम भाव में मंगल और राहु का संबंध बन रहा हो, तो जातक को पूर्व जन्म के किसी सर्प शाप (Sarpa Shapa) के कारण संतान प्राप्ति में अत्यधिक बाधा या संतान हानि का सामना करना पड़ता है। यह युति जातक को अत्यधिक आक्रामक और साहसी बुद्धि प्रदान करती है।

Mercury with Rahu (बुध और राहु)

बुध और राहु की युति जातक को असाधारण रूप से चतुर और कूटनीतिक बनाती है। Planets and Education के अनुसार, यदि पंचम या दशमेश का संबंध बुध और राहु से हो, तो जातक कंप्यूटर विज्ञान, सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग या सूचना प्रौद्योगिकी में उच्च शिक्षा प्राप्त करता है। जातक का दिमाग तकनीकी गणनाओं में बहुत तेजी से काम करता है।

Jupiter with Rahu (गुरु और राहु)

यह युति गुरु चांडाल योग का निर्माण करती है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि पंचम भाव में बृहस्पति और राहु की युति हो, पंचमेश कमजोर हो और लग्नेश मंगल के साथ हो, तो संतान प्राप्ति में भारी रुकावटें आती हैं। Core of Nadi Astrology के अनुसार, मकर राशि में यह युति जातक के भीतर निराशावादी और नकारात्मक विचारों को जन्म दे सकती है।

Venus with Rahu (शुक्र और राहु)

यह युति जातक को कलात्मक, रचनात्मक और भौतिकवादी बनाती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि शुक्र और राहु की युति तुला राशि में हो, तो जातक कला, अभिनय या मॉडलिंग के क्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त करता है। हालांकि, यदि यह युति पीड़ित हो, तो जातक का झुकाव अत्यधिक विलासिता और अनैतिक सुखों की ओर हो सकता है।

Saturn with Rahu (शनि और राहु)

यह युति श्रापित योग या अनपत्य योग का निर्माण करती है। 300 Important Combinations के अनुसार, यदि पंचमेश राहु के साथ हो और शनि और राहु का प्रभाव पंचम भाव पर हो, तो अनपत्य योग (Anapathya Yoga [childlessness]) बनता है। जातक को जीवन में कड़े संघर्षों के बाद ही सफलता मिलती है।

Rahu with Ketu (राहु और केतु)

चूंकि राहु और केतु हमेशा एक-दूसरे से 180 डिग्री की दूरी पर होते हैं, इसलिए वे कभी भी एक ही भाव में युति नहीं कर सकते। हालांकि, उनका अक्ष (5/11 अक्ष) अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। Planets and Education के अनुसार, इस अक्ष पर शुभ बृहस्पति की दृष्टि होने से जातक भाषाओं का महान विद्वान बनता है।

Stellium in the 5th House (पंचम भाव में बहुग्रही युति)

पंचम भाव में तीन या अधिक ग्रहों की युति जातक के संपूर्ण जीवन की ऊर्जा को इसी भाव पर केंद्रित कर देती है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि मिथुन राशि में राहु के साथ मंगल, सूर्य और शुक्र की युति हो, तो यह जातक की संतान उत्पत्ति की क्षमता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इसके विपरीत, यदि शुभ ग्रहों की युति हो, तो जातक असाधारण रूप से बुद्धिमान और बहुमुखी प्रतिभा का धनी होता है।

Aspects Received

पंचम भाव में स्थित राहु पर अन्य ग्रहों की दृष्टि इसके फलादेश को पूरी तरह से बदल देती है:

Jupiter's Aspect (बृहस्पति की दृष्टि)

बृहस्पति की शुभ दृष्टि राहु के नकारात्मक और उग्र प्रभावों को शांत करती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि पंचम भाव के राहु पर बृहस्पति की दृष्टि हो, तो यह संतान की रक्षा करती है और जातक को उच्च बौद्धिक क्षमता तथा समाज में सम्मान प्रदान करती है। हालांकि, यदि राहु स्वयं बृहस्पति को प्रभावित कर रहा हो, तो जातक के भीतर गुरुओं के प्रति कृतघ्नता की भावना आ सकती है।

Saturn's Aspect (शनि की दृष्टि)

शनि की दृष्टि राहु की तीव्रता को धीमा करती है और जीवन में कड़ा संघर्ष लाती है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि पंचम भाव के राहु या पंचमेश पर शनि की दृष्टि हो, तो संतान प्राप्ति में अत्यधिक देरी होती है या सर्प शाप के कारण बाधाएं आती हैं। जातक का दिमाग अत्यधिक व्यावहारिक लेकिन थोड़ा उदास रहता है।

Mars' Aspect (मंगल की दृष्टि)

मंगल की दृष्टि राहु को अत्यधिक उग्र और आक्रामक बनाती है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, पंचम भाव के राहु पर मंगल की दृष्टि होने से जातक को संतान सुख से वंचित होना पड़ सकता है। यह दृष्टि जातक को साहसी और जोखिम लेने वाला बनाती है, लेकिन पेट से संबंधित बीमारियों का खतरा भी बढ़ाती है।

Strength and Condition

पंचम भाव में राहु के वास्तविक प्रदर्शन को समझने के लिए निम्नलिखित ज्योतिषीय घटकों का विश्लेषण करना अनिवार्य है:

Baladi Avastha (बालादि अवस्था)

जातक को कुंडली में राहु की डिग्री और उसकी अवस्था की जांच करनी चाहिए:
  • विषम राशियां (Aries, Gemini, Leo, Libra, Sagittarius, Aquarius): इन राशियों में 0-6 डिग्री पर ग्रह बाल (Bala [infant]) अवस्था में, 6-12 पर कुमार, 12-18 पर युवा (Yuva [youthful]), 18-24 पर वृद्ध, और 24-30 डिग्री पर मृत (Mrita [dead]) अवस्था में होता है।
  • सम राशियां (Taurus, Cancer, Virgo, Scorpio, Capricorn, Pisces): इन राशियों में यह क्रम पूरी तरह से उलट जाता है। यहाँ 0-6 डिग्री पर ग्रह मृत (Mrita) अवस्था में और 24-30 डिग्री पर बाल (Bala) अवस्था में होता है।
एक युवा (Yuva) राहु अपने परिणामों को पूरी तीव्रता के साथ प्रकट करता है, जबकि बाल या मृत अवस्था का राहु कमजोर पड़ जाता है।

Ashtakavarga (अष्टकवर्ग)

अष्टकवर्ग (Ashtakavarga) चार्ट में पंचम भाव को मिलने वाले बिंदु (Bindu) अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यदि पंचम भाव को 28 से अधिक बिंदु प्राप्त हो रहे हैं, तो राहु के अशुभ प्रभाव कम हो जाते हैं और जातक को अपनी बुद्धि तथा सट्टे से लाभ प्राप्त होता है। कम बिंदु होने पर राहु के नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाते हैं।

Nakshatra (नक्षत्र)

राहु जिस नक्षत्र में स्थित है, उसका स्वामी राहु के परिणामों को नियंत्रित करता है। Predictive Stellar Astrology के अनुसार, यदि राहु अपने ही नक्षत्र (जैसे शतभिषा) में स्थित हो और शनि की भुक्ति चल रही हो, तो जातक के जीवन में अप्रत्याशित और बड़े बदलाव घटित होते हैं।

Navamsa (D9) (नवांश)

नवांश कुंडली मुख्य कुंडली के वादों की पुष्टि या खंडन करती है। 300 Important Combinations के अनुसार, यदि पंचम भाव का राहु नवांश कुंडली में शनि के नवांश को छोड़कर किसी अन्य नवांश में स्थित हो, तो यह जातक को संतान संबंधी मामलों में कुछ अजीब या कष्टदायक अनुभव दे सकता है, जो पूर्वजों या मृत आत्माओं के दोष को दर्शाते हैं।

Condition of the Dispositor (डिस्पोजिटर की स्थिति)

चूंकि राहु का अपना कोई अस्तित्व नहीं है, इसलिए पंचम भाव के स्वामी (डिस्पोजिटर) की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण है। यदि पंचमेश बलवान होकर केंद्र या त्रिकोण में स्थित है, तो राहु शुभ परिणाम देगा। यदि पंचमेश कमजोर होकर छठे, आठवें या बारहवें भाव (Dusthana [bad houses]) में चला गया है, तो राहु पंचम भाव के सभी सुखों को नष्ट कर सकता है।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में ग्रहों के नक्षत्र स्वामियों और उप-स्वामियों (सब-लॉर्ड) को फलादेश का मुख्य आधार माना जाता है:
  • संतान प्राप्ति का वादा: KP System के अनुसार, यदि पंचम भाव के कस्प (भाव प्रारंभ) का उप-उप स्वामी (सब-सब लॉर्ड) कुंडली के दूसरे और ग्यारहवें भावों से जुड़ा हो (विशेष रूप से शनि, बुध या राहु के माध्यम से), तो जातक को निश्चित रूप से संतान सुख प्राप्त होता है।
  • गर्भपात या संतान हानि: यदि पंचम भाव का सब-सब लॉर्ड चौथे (पंचम से बारहवां) या बारहवें (पंचम से आठवां) भाव के कार्येश ग्रहों के नक्षत्र में स्थित हो, तो जातक को गर्भपात या संतान हानि का सामना करना पड़ता है।
  • विकलांग या अस्वस्थ संतान: Predictive Stellar Astrology के अनुसार, यदि बृहस्पति, केतु और मंगल की युति हो, और मंगल पंचम भाव का सब-लॉर्ड हो तथा वह पांचवें और बारहवें भाव का स्वामी भी हो, तो जातक को अस्वस्थ या शारीरिक रूप से अक्षम संतान होने की संभावना रहती है।

Practical Significations

व्यावहारिक जीवन में पंचम भाव का राहु निम्नलिखित रूपों में प्रकट होता है:

Intelligence and Speculation (बुद्धि और सट्टा)

  • अपरंपरागत बुद्धि: जातक की बुद्धि बहुत तेज, खोजी और लीक से हटकर सोचने वाली होती है। जातक उन समस्याओं को आसानी से सुलझा लेता है जहाँ अन्य लोग असफल हो जाते हैं।
  • सट्टेबाजी से लाभ: जातक का झुकाव शेयर बाजार, सट्टा, लॉटरी या क्रिप्टोकरेंसी की ओर होता है। यदि डिस्पोजिटर मजबूत हो, तो जातक अचानक भारी धन कमाता है, अन्यथा भारी नुकसान उठाता है।

Progeny Challenges (संतान संबंधी चुनौतियाँ)

  • संतान प्राप्ति में देरी: राहु इस भाव में संतान के जन्म में देरी या तकनीकी चिकित्सा (जैसे आईवीएफ) के माध्यम से संतान प्राप्ति के योग बनाता है।
  • संतान का विद्रोही स्वभाव: जातक की संतान अत्यधिक स्वतंत्र विचारों वाली, विद्रोही या जातक की परंपराओं से बिल्कुल अलग चलने वाली हो सकती है।

Frequently Asked Questions

क्या पंचम भाव में राहु हमेशा संतानहीनता देता है?
नहीं, पंचम भाव का राहु हमेशा संतानहीनता नहीं देता। शास्त्रीय ग्रंथों में वर्णित संतानहीनता या सर्प शाप के योग तभी घटित होते हैं जब राहु पर मंगल या शनि की क्रूर दृष्टि हो, पंचमेश और बृहस्पति अत्यंत कमजोर हों, और सप्तमांश कुंडली भी पीड़ित हो। यदि राहु पर शुभ बृहस्पति की दृष्टि हो, तो जातक को सुयोग्य संतान प्राप्त होती है।
पंचम भाव में राहु के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
व्यावहारिक ज्योतिष और शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, वृषभ, मिथुन, कन्या और तुला राशियों में राहु के परिणाम अत्यंत अनुकूल होते हैं। इन राशियों में राहु जातक को तीव्र बुद्धि, कलात्मक क्षमता, तकनीकी शिक्षा में सफलता और भौतिक समृद्धि प्रदान करता है।
क्या पंचम भाव का राहु शेयर बाजार या सट्टे से अमीर बना सकता है?
हाँ, पंचम भाव का राहु जातक को सट्टेबाजी, शेयर बाजार या अचानक मिलने वाले धन के प्रति अत्यधिक आकर्षित करता है। यदि राहु का राशि स्वामी (डिस्पोजिटर) कुंडली में अत्यंत मजबूत और शुभ स्थिति में हो, तो जातक को अचानक भारी वित्तीय लाभ प्राप्त होता है। हालांकि, डिस्पोजिटर कमजोर होने पर यह भारी कर्ज और कंगाली का कारण भी बन सकता है।
राहु के पंचम भाव में होने पर सर्प शाप योग क्या है?
Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि पंचम भाव में राहु स्थित हो और उस पर मंगल की दृष्टि हो, या पंचमेश राहु के साथ युति में हो और चन्द्रमा पंचम भाव में शनि से दृष्ट हो, तो सर्प शाप योग का निर्माण होता है। इसका अर्थ है कि पूर्व जन्म के किसी कर्म दोष के कारण जातक को इस जन्म में संतान प्राप्ति में बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
क्या पंचम भाव का राहु शिक्षा में रुकावटें पैदा करता है?
राहु जातक को अत्यधिक तीव्र और खोजी बुद्धि देता है, लेकिन यह औपचारिक शिक्षा में ध्यान भटकने या रुकावटों का कारण बन सकता है। विशेष रूप से तुला या मेष राशि में होने पर जातक का मन पढ़ाई से हटकर अन्य अपरंपरागत चीजों में लग सकता है। हालांकि, यह कंप्यूटर विज्ञान और तकनीकी शिक्षा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
राहु की महादशा में पंचम भाव के राहु का क्या प्रभाव होता है?
राहु की महादशा के दौरान, यदि शुभ ग्रहों की अंतर्दशा चल रही हो, तो जातक को अचानक धन, भूमि, पदोन्नति और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। इसके विपरीत, यदि पापी ग्रहों की अंतर्दशा चल रही हो, तो जातक को मानसिक तनाव, सरकारी अधिकारियों से परेशानी और संतान को लेकर गंभीर चिंताओं का सामना करना पड़ता है।

Remedial Measures

यदि कुंडली में पंचम भाव का राहु पीड़ित होकर नकारात्मक परिणाम दे रहा हो, तो निम्नलिखित उपायों के माध्यम से इसके अशुभ प्रभावों को कम किया जा सकता है: Rasi Characteristics के अनुसार, यदि राहु अशुभ फल दे रहा हो, तो दान करना, तिल या सरसों के तेल का दान करना, और भगवान हनुमान की नियमित पूजा-आराधना करना इसके नकारात्मक प्रभावों को न्यूनतम करने में अत्यंत सहायक होता है।

Standard Remedies for Rahu

  • आध्यात्मिक उपाय: नियमित रूप से राहु के बीज मंत्र “ॐ रां राहवे नमः” का जप करें। शनिवार के दिन राहु स्तोत्र का पाठ करना भी अत्यंत कल्याणकारी माना जाता है।
  • व्यवहारिक उपाय: अपने ननिहाल के लोगों (नाना-नानी) का सम्मान करें। सफाई कर्मचारियों, कुष्ठ रोगियों और समाज के वंचित वर्ग के लोगों की यथासंभव मदद करें और उनके साथ विनम्र व्यवहार रखें।
  • दान कार्य: शनिवार के दिन काले तिल, सरसों का तेल, नीले कपड़े, या उड़द की दाल का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में करें। बहते पानी में कोयला या नारियल प्रवाहित करना भी राहु की शांति के लिए एक पारंपरिक उपाय है।
  • रत्न चिकित्सा (गोमेद): राहु का मुख्य रत्न गोमेद (हेसोनाइट) है। विशेष चेतावनी: गोमेद रत्न केवल तभी धारण किया जाना चाहिए जब राहु जातक की कुंडली के लग्न के अनुसार एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (Functional Benefic) हो, जैसे कि वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर या कुंभ लग्न। यदि राहु कुंडली में कार्यात्मक अशुभ ग्रह (Functional Malefic) है, जैसे कि मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु या मीन लग्न, तो गोमेद कभी भी धारण नहीं करना चाहिए; अन्यथा यह राहु के अशुभ प्रभावों और कष्टों को कई गुना बढ़ा सकता है।
जातक को अपनी कुंडली में पंचम भाव के राहु का सटीक विश्लेषण करने के लिए सबसे पहले राहु की डिग्री (बालादि अवस्था), उसके नक्षत्र स्वामी, उसके राशि स्वामी (डिस्पोजिटर) की स्थिति, और नवांश कुंडली में राहु की स्थिति की गहन जांच करनी चाहिए। इन सभी कारकों के संयुक्त और संतुलित अध्ययन के बाद ही किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना चाहिए।

See this in your own chart

Rajvidya calculates this placement from your birth details and reads it alongside the rest of your chart.

Create your free kundli

Free to start — no card required.

Sources consulted

The 51 classical and modern works consulted while compiling this entry. Statements held by a single text are attributed to that text in the body above.

These works are listed as sources consulted, not as material reproduced. Positions are summarised in our own words; no passage is quoted from a work still in copyright, and no translation is reproduced. Titles name the work a position is drawn from and imply no endorsement by its author or publisher. Where a reading rests on one text alone, treat it as that text's position rather than settled doctrine.

  1. (I)Timing of Events Crux of Vedic Astrology 1
  2. 300 Important Combinations
  3. 4 Step Theory
  4. Arudha Pada
  5. Astrology KP System
  6. Bhavartha Chandrika
  7. Bhrigu Nadi Jyotisham
  8. Bhrigu Saral Paddhati (BSP) RULES
  9. Book. Encyclopedia of vedic astro dasha systems
  10. Book. Prasana A Contemporary Treatise
  11. book1 for CD
  12. Brihat Parashara Hora Shastra
  13. BV Raman Notable Horoscopes
  14. Cancellation of Manglik Dosh
  15. Debilitated Neecha Planets Lifes Interesting Challenge
  16. Dhanu Vijaya- Jyothisha Prakaasham
  17. Doctrines of Suka Nadi(1)
  18. Essence of Nadi Astrology
  19. General Parashara
  20. How to Judge a Horoscope
  21. How to judge horoscope 1
  22. Jaimini Astrology
  23. Jaimini Sutras
  24. Jatak Alankaar (Sanskrit)
  25. Jataka Parijata
  26. Jataka tattvam Kadalangudi
  27. Jyotisharnava Piyusha
  28. K.P reader 3
  29. Kalamsa and Cuspal Interlinks
  30. Kanad Rishi Bhatnagar AMemoir By KNRao(1)
  31. Karma and Rebirth in Astro
  32. Key to Learn K.P. cuspal system S.P. Khullar
  33. Learn Successful Predictive Techniques of Hindu Astrology
  34. Lessons In Chara Dasha- Part 1
  35. medical astrology horoscop of sthethoscop
  36. My Experiences in Astrology
  37. Notable Horoscopes
  38. Phaladeepika
  39. Planets and Education vol1 Singh KN.Rao
  40. Prashna Tantra
  41. Predicting with KP Horary
  42. Predictive Stellar Astrology
  43. raj bhanga
  44. Rare Yogas Of Jyotish Sangraha 1
  45. Rasi Characteristics
  46. Roots of Nadi
  47. Saravali
  48. Sarvartha Chintamani
  49. Satyajatakam Dhruva Nadi
  50. Scientific Hindu Astrology
  51. Sukar Nadi 6

Community

No community activity yet. Be the first to leave a comment, review, or question!

Sign in to leave a comment, review, question, or suggestion.

Sign In to Contribute

Related entries

पूरा विश्वकोश देखें