Rahu in the 1st House

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49 min read · Drawn from 46 classical and modern works · Updated August 2026 · 2 views

वैदिक ज्योतिष में, छाया ग्रह (Chhaya Graha [Shadow Planet]) Rahu [Rahu] का प्रथम भाव (Lagna [Ascendant] या प्रथम भाव) में स्थित होना एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जटिल प्रभाव उत्पन्न करता है। प्रथम भाव जातक के स्वयं (आत्म), शरीर और स्वभाव को नियंत्रित करता है, जबकि Rahu अपरंपरागत इच्छाओं, भ्रम और अचानक होने वाली घटनाओं का प्रतिनिधित्व करता है। यह संयोजन आमतौर पर एक अद्वितीय, विलक्षण या अत्यधिक महत्वाकांक्षी व्यक्तित्व का निर्माण करता है, जिसका जीवन पथ Rahu के राशि स्वामी (dispositor) की स्थिति से गहराई से प्रभावित होता है। इस स्थिति के अंतिम परिणाम पूरी तरह से राशि स्वामी की गरिमा, युति और दृष्टि (Drishti [Aspect]) पर निर्भर करते हैं। शास्त्रीय ग्रंथ परिणामों को अत्यंत स्पष्ट और पूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करते हैं; हालांकि, किसी भी एकल स्थिति को अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए, और ऐसे गंभीर परिणाम केवल तभी प्रकट होते हैं जब संपूर्ण कुंडली में कई अन्य पीड़ित कारक भी मौजूद हों।

Classical Position

शास्त्रीय ज्योतिष के स्वीकृत सिद्धांतों के अनुसार, प्रथम भाव में Rahu की उपस्थिति शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी मामलों पर गहरा प्रभाव डालती है। Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि Rahu with Mars (Rahu और मंगल) दोनों लग्न में स्थित हों, तो जातक को अंडकोष में वृद्धि (enlarged scrotum) की समस्या होने का योग बनता है। इसके अतिरिक्त, यदि अष्टमेश और Rahu लग्न में एक साथ स्थित हों, तो नवजात शिशु का जन्म गर्भनाल (umbilical cord) में लिपटे होने की स्थिति में होता है। दशा प्रभावों के संदर्भ में, Sarvartha Chintamani और The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems दोनों इस बात पर सहमत हैं कि लग्न में स्थित Rahu की महादशा (Mahadasha [Major Period]) के दौरान यदि किसी पापी ग्रह की अंतर्दशा (Bhukti [Sub-period]) चल रही हो, तो जातक को सरकार से परेशानी और अत्यधिक मानसिक संताप का सामना करना पड़ता है।

Variant Readings

Physical Appearance and Health

प्रथम भाव में Rahu की स्थिति जातक के शारीरिक गठन और स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डालती है। My Experiences in Astrology के अनुसार, इस भाव में Rahu जातक को अपनी वास्तविक आयु से अधिक उम्र का और विलक्षण (eccentric) रूप दे सकता है। Saravali के अनुसार, यदि Rahu लग्न में स्थित हो और पापी ग्रहों से दृष्ट हो, तो जातक की आयु केवल 10 से 16 वर्ष के बीच होने की संभावना होती है। इसके अतिरिक्त, Jataka Parijata के अनुसार, यदि Rahu पर शुक्र की दृष्टि (Rahu aspected by Venus) हो, तो जातक के शरीर के उस हिस्से पर तिल या मस्सा (mole) होता है जो उस राशि के अंग को दर्शाता है। चूंकि Rahu प्रथम भाव में है, इसलिए यह निशान सिर या चेहरे पर होने की संभावना अधिक होती है।

गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के संदर्भ में, शास्त्रीय ग्रंथों में कुछ विशिष्ट योगों का उल्लेख है:

  • अंडकोष और जननांगों के रोग: How to Judge a Horoscope, Vol. 1 और Jataka Parijata के अनुसार, यदि लग्न में Rahu, Mars, and Saturn (Rahu, मंगल और शनि) एक साथ स्थित हों, तो जातक को अंडकोष में वृद्धि या जननांगों में विकार होने की अत्यधिक संभावना होती है।
  • नेत्र विकार और अंधता: K.P. Reader 3 के अनुसार, यदि लग्न में Rahu के साथ Rahu with eclipsed Sun (Rahu और ग्रहण युक्त सूर्य) की स्थिति हो और शनि तथा मंगल पंचम या नवम भाव में स्थित हों, तो जातक जन्म से ही अंधा हो सकता है।
  • श्वास संबंधी समस्याएं: Crux of Vedic Astrology के अनुसार, यदि Rahu लग्न से त्रिकोण भावों में हो और अष्टमेश लग्न या लग्नेश के साथ युति करे, तो जातक को पुरानी ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
  • गर्भनाल का लपेटना: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि लग्न में Rahu और गुलिक (Gulik) एक साथ हों, या लग्नेश और अष्टमेश एक साथ हों और लग्न का द्रेष्काण पापी हो, तो शिशु जन्म के समय गर्भनाल से लिपटा होता है।
  • दशा काल में शारीरिक संकट: The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, लग्न में स्थित Rahu की दशा (Dasha [Planetary Period]) के दौरान जातक को जहर, अग्नि, हथियारों, घावों और भाई के नुकसान का भय रहता है।

Temperament and Mental State

जातक के स्वभाव और मानसिक स्थिति पर लग्न के Rahu का प्रभाव काफी जटिल माना गया है। Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि लग्न में Rahu with Saturn (Rahu और शनि) एक साथ स्थित हों, तो जातक को 'पिशाच बाधा' (नकारात्मक ऊर्जाओं या मृत आत्माओं के कारण होने वाली मानसिक पीड़ा) का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा, यदि लग्न में कई पापी ग्रह हों और गुलिक त्रिकोण में हो, या लग्न में ही Rahu with Gulik (Rahu और गुलिक) की युति हो, तो यह जातक में चोरी करने या दूसरों को धोखा देने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

Jataka Parijata के अनुसार, लग्न का Rahu जातक को शत्रुओं से परेशानी, रिश्तेदारों के साथ विवाद, भटकने वाली जीवनशैली (wandering life), पक्षाघात (palsy) और राजभय (सरकार या अधिकारियों से डर) प्रदान करता है। हालांकि, ये नकारात्मक प्रभाव तब कम हो जाते हैं जब Rahu पर शुभ ग्रहों की दृष्टि होती है।

Wealth, Status and Life Events

लग्न में Rahu जातक के करियर, सामाजिक स्थिति और जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को भी प्रभावित करता है। Phaladeepika के अनुसार, यदि Rahu प्रथम, पंचम या नवम भाव में स्थित हो, तो यह जातक को एक राजयोग कारक (Raja Yoga Karaka [Raja Yoga producing planet]) ग्रह के समान शुभ परिणाम दे सकता है। इसी तरह, classical texts on Rahu and Ketu के अनुसार, यदि लग्न में स्थित Rahu पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि (Rahu aspected by benefic) हो, तो जातक को शाही सुख-सुविधाएं और जीवन का आनंद प्राप्त होता है। हालांकि, Sarvartha Chintamani का मानना है कि केंद्र (Kendra [Angular House]) में स्थित Rahu शुभ ग्रहों की अंतर्दशा में प्रसिद्धि और आराम तो देता है, लेकिन दशा के अंत में धन की हानि कराता है।

करियर और यात्राओं के संबंध में कुछ विशेष योग इस प्रकार हैं:

  • अंतरराष्ट्रीय ख्याति और वैज्ञानिक ज्ञान: How to Judge a Horoscope, Vol. 2 के अनुसार, यदि Rahu की दशा सक्रिय हो और Rahu लग्न में किसी चर राशि (movable sign) में Rahu with Mercury (Rahu और बुध) के साथ स्थित हो, तो जातक को एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक के रूप में महान नाम, प्रसिद्धि और व्यापक विश्व यात्रा का अवसर मिलता है।
  • बौद्धिक और वैज्ञानिक यात्राएं: How to Judge a Horoscope, Vol. 2 के अनुसार, यदि नवम और द्वादश भाव का स्वामी बुध लग्न में Rahu के साथ हो और Rahu का राशि स्वामी शुक्र वृश्चिक राशि में हो, तो जातक वैज्ञानिक ज्ञान से प्रेरित होकर लंबी दूरी की यात्राएं करता है।
  • भूमि और संपत्ति का लाभ: Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि लग्नेश की उच्च राशि में चतुर्थेश और Rahu एक साथ स्थित हों, तो जातक के पास अथाह भूमि और अचल संपत्ति होती है।
  • अपरंपरागत करियर: My Experiences in Astrology के अनुसार, लग्न का Rahu जातक के व्यवसाय में कई अचानक बदलावों को दर्शाता है। यदि लग्नेश और अष्टमेश मंगल द्वादश भाव में हो और Rahu लग्न में हो, तो जातक का मुख्य व्यवसाय चमड़े और खाल के व्यापार या उनके निर्यात से संबंधित हो सकता है।
  • अष्टोत्तरी दशा का अनुप्रयोग: Brihat Parashara Hora Shastra के सिद्धांतों के अनुसार, यदि Rahu लग्नेश से केंद्र या त्रिकोण भाव में स्थित हो, तो जातक की कुंडली पर अष्टोत्तरी दशा (Ashtottari Dasa) लागू होती है।

Aspect and Directional Strength

प्रथम भाव में स्थित होकर Rahu अपनी पूर्ण दृष्टि (Drishti) सप्तम भाव (साझेदारी और विवाह) पर डालता है। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, Rahu और केतु तृतीय, सप्तम और एकादश भावों पर अथवा पंचम, सप्तम और नवम भावों पर अपनी दृष्टि डालते हैं। चूंकि Rahu एक क्रूर (Krura [Fierce]) ग्रह है, इसलिए सप्तम भाव पर इसकी दृष्टि वैवाहिक जीवन और व्यापारिक साझेदारियों में तनाव और अस्थिरता पैदा करती है। उदाहरण के लिए, The Significance Of Birth Number In Horoscopes के अनुसार, यदि केतु सप्तमेश के साथ युति कर रहा हो और Rahu सप्तम भाव को देख रहा हो, तो विवाह में अत्यधिक बाधाएं आती हैं या विवाह का निषेध हो सकता है।

दिशा बल (Digbala [Directional Strength]) के संदर्भ में, Rahu एक छाया ग्रह (Chhaya Graha) होने के कारण शास्त्रीय ज्योतिष में इसे कोई पारंपरिक दिशा बल प्राप्त नहीं है। हालांकि, प्रथम भाव (जो बुध और बृहस्पति के लिए Digbala का स्थान है) में Rahu की स्थिति जातक के व्यक्तित्व को अत्यधिक तीव्र और आत्म-केंद्रित बना देती है। भौतिक शरीर के भाव में होने के कारण, Rahu जातक के विचारों और शारीरिक ऊर्जा पर हावी हो जाता है, जिससे जातक अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है।

The Placement Across the Twelve Rashis

चूंकि Rahu एक छाया ग्रह (Chhaya Graha) है, इसलिए शास्त्रीय ग्रंथों में इसे किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। विभिन्न परंपराओं में इसके उच्च या नीच होने को लेकर मतभेद हैं, इसलिए इस प्रविष्टि में Rahu के लिए किसी विशिष्ट गरिमा (dignity) का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके बजाय, Rahu के प्रभावों को उसके राशि स्वामी (dispositor) की स्थिति और शक्ति के माध्यम से समझा जाना चाहिए। नीचे सभी बारह राशियों में लग्न में स्थित Rahu के प्रभावों का विवरण दिया गया है:

Aries (Mesha)

मेष राशि में Rahu के लिए कोई शास्त्रीय गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी मंगल है। चूंकि यह प्रथम भाव है, इसलिए जातक का लग्न (Lagna) मेष ही होगा। छाया ग्रह होने के कारण Rahu इस लग्न से किसी भी भाव का स्वामी नहीं बनता है। Notable Horoscopes के अनुसार, Rahu in Aries जातक को मंगल, सूर्य और चंद्रमा के संयुक्त परिणाम प्रदान करता है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि मेष लग्न में Rahu with Sun (Rahu और सूर्य) एक साथ हों, तो जातक का करियर मशीनरी और कंप्यूटर से संबंधित होता है। How to Judge a Horoscope, Vol. 2 के अनुसार, यदि मेष लग्न का Rahu शुभ ग्रहों से दृष्ट हो, तो यह जातक की रक्षा करता है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि यह Rahu पीड़ित न हो, तो जातक को प्रचुर वैभव, गौरव और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

derived reading: मेष राशि का स्वामी मंगल होने के कारण, यह स्थिति जातक को अत्यधिक साहसी, ऊर्जावान और महत्वाकांक्षी बनाती है। Rahu की ऊर्जा मंगल के अग्नि तत्व के साथ मिलकर जातक को अपने लक्ष्यों के प्रति आक्रामक और दृढ़ निश्चयी बनाती है, हालांकि इसमें जल्दबाजी और क्रोध की प्रवृत्ति भी हो सकती है।

Taurus (Vrishabha)

वृषभ राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी शुक्र है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) वृषभ होगा। Rasi Characteristics के अनुसार, Rahu in Taurus जातक को अत्यंत शुभ और अनुकूल परिणाम प्रदान करता है। Sanketanidhi के अनुसार, यदि Rahu शयनावस्था (Shayanavastha) में वृषभ राशि में हो, तो जातक अत्यंत धनवान होता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, वृषभ राशि का Rahu अपनी महादशा (Mahadasha) के नकारात्मक प्रभावों को कम करता है और जातक को धन, शिक्षा, पदोन्नति, विवाह और अच्छा स्वास्थ्य प्रदान करता है।

derived reading: शुक्र के स्वामित्व वाली राशि में होने के कारण, Rahu जातक को भौतिक सुख-सुविधाओं, कलात्मक अभिरुचियों और विलासिता के प्रति आकर्षित करता है। यह स्थिति जातक को आकर्षक व्यक्तित्व और वित्तीय मामलों में चतुर बनाती है, जिससे वह समाज में एक प्रतिष्ठित स्थान प्राप्त करता है।

Gemini (Mithuna)

मिथुन राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी बुध है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) मिथुन होगा। K.P. Reader 3 के अनुसार, Rahu in Gemini पूरी तरह से बुध के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मिथुन राशि का Rahu जातक के भीतर परंपरा और आधुनिकता के बीच एक गहरा आंतरिक संघर्ष (internal conflict) पैदा करता है।

derived reading: बुध के बौद्धिक प्रभाव के कारण, जातक की बुद्धि अत्यंत तीव्र, खोजी और बहुमुखी होती है। Rahu जातक को संचार, लेखन या तकनीकी क्षेत्रों में असाधारण सफलता दिला सकता है, लेकिन यह मानसिक अस्थिरता और विचारों में भटकाव भी पैदा कर सकता है।

Cancer (Karka)

कर्क राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी चंद्रमा है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) कर्क होगा। Notable Horoscopes के अनुसार, Rahu in Cancer चंद्रमा के समान परिणाम उत्पन्न करता है। Jataka Parijata के अनुसार, कर्क राशि के Rahu की दशा में जातक को धन, अन्न, शिक्षा, मनोरंजन, सम्मान और सुखी परिवार की प्राप्ति होती है। हालांकि, How to Judge a Horoscope, Vol. 1 के अनुसार, यदि कर्क राशि का Rahu शनि से पीड़ित हो, तो जातक को बाल पक्षाघात (infantile paralysis) जैसी गंभीर शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

derived reading: चंद्रमा के संवेदनशील और जलीय प्रभाव के कारण, लग्न में कर्क का Rahu जातक को अत्यधिक भावुक, कल्पनाशील और अंतर्ज्ञानी बनाता है। जातक के मूड में तेजी से उतार-चढ़ाव आ सकते हैं, और वह दूसरों की भावनाओं को भांपने में माहिर होता है।

Leo (Simha)

सिंह राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी सूर्य है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) सिंह होगा। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यद्यपि सिंह राशि Rahu के लिए एक शत्रु राशि मानी जाती है, फिर भी कई कुंडलियों में Rahu in Leo ने अत्यंत शुभ और कल्याणकारी परिणाम दिए हैं।

derived reading: सूर्य के प्रभाव के कारण, सिंह लग्न का Rahu जातक को एक शक्तिशाली अहंकार, नेतृत्व क्षमता और समाज में प्रभुत्व स्थापित करने की तीव्र इच्छा प्रदान करता है। जातक अत्यंत स्वाभिमानी होता है और वह शासन या प्रबंधन के क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने के लिए लालायित रहता है।

Virgo (Kanya)

कन्या राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी बुध है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) कन्या होगा। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, Rahu in Virgo जातक को परिवार, भूमि और संपत्ति प्रदान करता है, लेकिन दशा के अंत में कुछ नुकसान भी करा सकता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, कन्या राशि का Rahu अपनी दशा में जातक को सम्मान, सुख और वाहन का सुख देता है। यदि यह Rahu शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो, तो जातक को अपार प्रसिद्धि मिलती है।

derived reading: बुध की इस पृथ्वी राशि में Rahu जातक को अत्यधिक विश्लेषणात्मक, व्यावहारिक और विवरणों पर ध्यान देने वाला बनाता है। जातक समस्याओं को सुलझाने में कुशल होता है, लेकिन वह अत्यधिक आलोचनात्मक स्वभाव और मानसिक तनाव से ग्रस्त हो सकता है।

Libra (Tula)

तुला राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी शुक्र है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) तुला होगा। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, Rahu in Libra जातक के शैक्षणिक करियर में कुछ बाधाएं या रुकावटें पैदा कर सकता है। हालांकि, शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, तुला राशि को Rahu के लिए एक अनुकूल और अच्छा स्थान माना गया है जो जातक को सामाजिक रूप से सक्रिय बनाता है।

derived reading: शुक्र के प्रभाव के कारण, तुला लग्न का Rahu जातक को कला, सौंदर्य और जनसंपर्क के प्रति आकर्षित करता है। जातक दूसरों के साथ संबंध बनाने में चतुर होता है, लेकिन वह अपने व्यक्तिगत संबंधों में अत्यधिक अपेक्षाएं रख सकता है, जिससे वैवाहिक जीवन में असंतोष पैदा हो सकता है।

Scorpio (Vrischika)

वृश्चिक राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी मंगल है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) वृश्चिक होगा। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, Rahu in Scorpio यदि शुभ प्रभाव में हो, तो अपनी दशा के दौरान जातक को अत्यधिक अनुकूल परिणाम, धन, समृद्धि और शाही मान्यता प्रदान करता है। इसके विपरीत, Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि यह Rahu पापी या मारक ग्रहों के प्रभाव में हो, तो जातक को पद की हानि और गंभीर मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ता है। Sarvartha Chintamani के अनुसार, यह स्थिति जीवन में अचानक आने वाले खतरों और भय को भी दर्शाती है।

derived reading: मंगल की इस रहस्यमयी और जलीय राशि में Rahu जातक को अत्यंत दृढ़ संकल्पी, गुप्त और खोजी प्रवृत्ति का बनाता है। जातक में संकटों से उबरने की अद्भुत क्षमता होती है, लेकिन वह ईर्ष्या और प्रतिशोध की भावना से भी ग्रस्त हो सकता है।

Sagittarius (Dhanu)

धनु राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी बृहस्पति है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) धनु होगा। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यदि Rahu in Sagittarius पीड़ित या प्रतिकूल भाव में स्थित हो, तो यह जातक के स्वास्थ्य की हानि, खतरनाक व्यवसायों में संलिप्तता, विश्वासघात और घोर दरिद्रता का कारण बनता है। इसके अतिरिक्त, Crux of Vedic Astrology के अनुसार, धनु राशि का Rahu किसी पुजारी, न्यायाधीश या ज्योतिषी के श्राप (curse) के कारण जीवन में आने वाली बाधाओं को भी इंगित करता है।

derived reading: बृहस्पति के प्रभाव के कारण, यह स्थिति जातक को दर्शन, धर्म और उच्च ज्ञान के प्रति एक अपरंपरागत दृष्टिकोण प्रदान करती है। जातक स्थापित मान्यताओं को चुनौती देने वाला हो सकता है, लेकिन पीड़ित होने पर वह कट्टरता या गलत गुरुओं के प्रभाव में आ सकता है।

Capricorn (Makara)

मकर राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी शनि है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) मकर होगा। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, वास्तविक व्यावहारिक अनुभवों में Rahu in Capricorn की स्थिति कुंभ राशि की तुलना में अधिक बेहतर और स्थिर परिणाम प्रदान करती है।

derived reading: शनि के अनुशासित और व्यावहारिक प्रभाव के कारण, मकर लग्न का Rahu जातक को अत्यधिक महत्वाकांक्षी, परिश्रमी और संगठनात्मक कार्यों में निपुण बनाता है। जातक अपने करियर में धीरे-धीरे लेकिन दृढ़ता से ऊंचाइयों को छूता है और समाज में एक ठोस प्रशासनिक पहचान स्थापित करता है।

Aquarius (Kumbha)

कुंभ राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी शनि है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) कुंभ होगा। शास्त्रीय ज्योतिषीय ग्रंथों के अनुसार, Rahu in Aquarius को एक अनुकूल स्थिति माना गया है जो जातक को समाज और बड़े समूहों के साथ जुड़ने में मदद करती है।

derived reading: शनि की इस वायु तत्व राशि में Rahu जातक को वैज्ञानिक दृष्टिकोण, नवीन विचारों और सामाजिक सुधारों के प्रति संवेदनशील बनाता है। जातक लीक से हटकर सोचने वाला होता है और वह तकनीकी या अनुसंधान के क्षेत्रों में बड़ी सफलताएं अर्जित कर सकता है।

Pisces (Meena)

मीन राशि में Rahu के लिए कोई गरिमा निर्दिष्ट नहीं है; इसका राशि स्वामी बृहस्पति है। इस स्थिति में जातक का लग्न (Lagna) मीन होगा। My Experiences in Astrology के अनुसार, Rahu in Pisces पूरी तरह से बृहस्पति के प्रभाव के अनुसार परिणाम देता है। इस राशि में Rahu जातक को जीवन में कई कठिनाइयों, शासकों या सरकार से भय, चोरों का डर, पारिवारिक कलह और सगे-संबंधियों के साथ गलतफहमी प्रदान कर सकता है। हालांकि, यदि यह Rahu शुभ ग्रहों से दृष्ट हो, तो जातक को संतान सुख और समाज में उच्च पद प्राप्त होता है।

derived reading: मीन राशि के आध्यात्मिक और काल्पनिक वातावरण में Rahu जातक को अत्यधिक संवेदनशील, अंतर्ज्ञानी और कभी-कभी भ्रमित मानसिकता वाला बनाता है। जातक आध्यात्मिक खोज या कलात्मक कल्पनाओं में डूबा रह सकता है, लेकिन उसे यथार्थवादी दुनिया में तालमेल बिठाने में कठिनाई हो सकती है।

Conjunctions in This House

प्रथम भाव में Rahu के साथ अन्य ग्रहों की युति जातक के जीवन, स्वभाव और भाग्य को पूरी तरह से बदल देती है। यहाँ विभिन्न ग्रहों के साथ Rahu की युति के शास्त्रीय और व्युत्पन्न प्रभाव दिए गए हैं:

Sun

प्रथम भाव में Rahu with Sun की युति सूर्य ग्रहण (eclipse) का निर्माण करती है। यह युति जातक के आत्मविश्वास और आत्म-अभिव्यक्ति को बाधित करती है, जिससे पहचान का संकट (identity crisis) पैदा हो सकता है। हालांकि, यदि सूर्य बलवान हो, तो यह जातक को राजनीति या सरकारी क्षेत्रों में अचानक और अप्रत्याशित सफलता भी दिला सकती है।

Moon

प्रथम भाव में Rahu with Moon की युति चंद्र ग्रहण योग बनाती है। यह जातक की मानसिक स्थिति को अत्यधिक संवेदनशील और अस्थिर बनाती है। जातक को अत्यधिक चिंता, मतिभ्रम (illusions) और अवसाद का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन यह युति जातक को असाधारण कल्पनाशीलता और कलात्मक अंतर्दृष्टि भी प्रदान करती है।

Mars

प्रथम भाव में Rahu with Mars की युति अंगारक योग का निर्माण करती है। Sarvartha Chintamani के अनुसार, यह युति जातक को शारीरिक चोटों, दुर्घटनाओं और अंडकोष में वृद्धि (enlarged scrotum) जैसी समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाती है। यह जातक को अत्यधिक आक्रामक, साहसी और जिद्दी स्वभाव का भी बनाती है।

Mercury

प्रथम भाव में Rahu with Mercury की युति जातक को अत्यंत कुशाग्र और घोषित बुद्धि प्रदान करती है। How to Judge a Horoscope, Vol. 2 के अनुसार, यह युति जातक को वैज्ञानिक अनुसंधान, व्यापार और संचार के क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिला सकती है। हालांकि, पीड़ित होने पर यह तंत्रिका तंत्र की कमजोरी और चालाकी की प्रवृत्ति भी दे सकती है।

Jupiter

प्रथम भाव में Rahu with Jupiter की युति गुरु चांडाल योग बनाती है। यह युति जातक के पारंपरिक विश्वासों और धार्मिक विचारों को विकृत करती है। जातक स्थापित सामाजिक नियमों को चुनौती देने वाला होता है। यदि बृहस्पति मजबूत हो, तो जातक अपरंपरागत ज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में बहुत ऊंचा स्थान प्राप्त करता है।

Venus

प्रथम भाव में Rahu with Venus की युति जातक के भीतर भौतिक और कामुक इच्छाओं को अत्यधिक बढ़ा देती है। यह युति जातक को कला, सिनेमा या फैशन के क्षेत्रों में बड़ी सफलता दिला सकती है, लेकिन यह प्रेम संबंधों में अत्यधिक जुनून, अपरंपरागत विवाह और कभी-कभी सामाजिक बदनामी का कारण भी बनती है।

Saturn

प्रथम भाव में Rahu with Saturn की युति को श्रापित योग के रूप में जाना जाता है। Sarvartha Chintamani के अनुसार, यह युति जातक को अज्ञात भयों और मानसिक संताप (trouble born of bad dead souls) से पीड़ित कर सकती है। यह जीवन में अत्यधिक संघर्ष और देरी लाती है, लेकिन जातक को गजब की सहनशीलता भी देती है।

Ketu

खगोलीय रूप से, प्रथम भाव में Rahu with Ketu की भौतिक युति असंभव है, क्योंकि केतु हमेशा Rahu से 180 डिग्री की दूरी पर सप्तम भाव में स्थित होता है। यह अक्ष जातक के जीवन को स्वयं (प्रथम भाव) और समाज या जीवनसाथी (सप्तम भाव) के बीच संतुलन बनाने की दिशा में केंद्रित करता है।

जब प्रथम भाव में तीन या अधिक ग्रह एक साथ स्थित होकर एक बहुग्रही युति (stellium) बनाते हैं, तो जातक का पूरा जीवन पूरी तरह से स्वयं के विकास और व्यक्तिगत संघर्षों पर केंद्रित हो जाता है। यदि इस युति पर शनि का प्रभाव हो या राशि स्वामी कमजोर हो, तो यह जातक के भीतर तीव्र वैराग्य की भावना पैदा कर सकती है, जो शास्त्रीय ग्रंथों में वर्णित संन्यास (Sanyasa [Renunciation]) योगों की ओर ले जाती है।

Aspects Received

प्रथम भाव में स्थित Rahu पर जब अन्य ग्रहों की दृष्टि पड़ती है, तो इसके परिणामों में भारी बदलाव आता है। यहाँ विभिन्न ग्रहों की दृष्टि के प्रभाव दिए गए हैं:

Jupiter

बृहस्पति की शुभ दृष्टि प्रथम भाव के Rahu के लिए एक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती है। How to Judge a Horoscope, Vol. 1 के अनुसार, बृहस्पति की दृष्टि Rahu के नकारात्मक और भ्रमित करने वाले प्रभावों को शांत करती है, जातक को बुद्धि और विवेक प्रदान करती है, तथा स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरों से रक्षा करती है।

Saturn

शनि की दृष्टि Rahu की नकारात्मकता और संघर्षों को बढ़ा देती है। यह जातक के जीवन में अत्यधिक देरी, पुरानी बीमारियां (chronic health issues) और मानसिक अवसाद पैदा कर सकती है। हालांकि, यह जातक को अत्यधिक अनुशासित, यथार्थवादी और कठिन परिस्थितियों में टिके रहने की शक्ति भी देती है।

Mars

मंगल की दृष्टि लग्न के Rahu को अत्यधिक उग्र और आक्रामक बना देती है। यह जातक के भीतर अत्यधिक गुस्सा, जल्दबाजी और दुर्घटनाओं या चोटों का खतरा बढ़ाती है। जातक अपनी ऊर्जा का उपयोग साहसिक कार्यों में कर सकता है, लेकिन उसे अपने व्यवहार पर नियंत्रण रखना पड़ता है।

Rahu

चूंकि Rahu स्वयं प्रथम भाव में स्थित है, इसलिए इसकी स्वयं पर दृष्टि का नियम लागू नहीं होता है। हालांकि, Rahu के राशि स्वामी (dispositor) की दृष्टि Rahu की महत्वाकांक्षाओं को एक सही दिशा और बल प्रदान करती है, जिससे जातक अपने जीवन में अधिक केंद्रित हो पाता है।

Ketu

केतु हमेशा सप्तम भाव से प्रथम भाव के Rahu को पूर्ण दृष्टि से देखता है। यह दृष्टि जातक के भीतर एक गहरा आंतरिक द्वंद्व पैदा करती है, जहां वह भौतिक महत्वाकांक्षाओं (Rahu) और आध्यात्मिक वैराग्य (केतु) के बीच झूलता रहता है। यह जातक को रिश्तों के प्रति उदासीन भी बना सकती है।

Strength and Condition

प्रथम भाव में Rahu के वास्तविक प्रभावों को जानने के लिए केवल इसकी स्थिति देखना पर्याप्त नहीं है। जातक को इसके प्रदर्शन का सटीक आकलन करने के लिए निम्नलिखित पांच प्रमुख कारकों की जांच करनी चाहिए:

Baladi Avastha

Rahu की डिग्री (अंश) यह तय करती है कि वह अपने परिणाम देने में कितना सक्षम है। विषम राशियों (Aries, Gemini, Leo, Libra, Sagittarius, Aquarius) में यह क्रम इस प्रकार चलता है:

  • 0-6 डिग्री: शिशु अवस्था (Bala [Infant state]), जहाँ ग्रह बहुत कमजोर होता है।
  • 6-12 डिग्री: कुमार अवस्था, जहाँ मध्यम बल होता है।
  • 12-18 डिग्री: युवा अवस्था (Yuva [Youthful state]), जहाँ ग्रह पूर्ण परिणाम देता है।
  • 18-24 डिग्री: वृद्ध अवस्था, जहाँ बल कम हो जाता है।
  • 24-30 डिग्री: मृत अवस्था (Mrita [Dead state]), जहाँ ग्रह प्रभावहीन हो जाता है।

सम राशियों (Taurus, Cancer, Virgo, Scorpio, Capricorn, Pisces) में यह क्रम पूरी तरह से उलट जाता है, जहाँ 0-6 डिग्री पर मृत (Mrita) और 24-30 डिग्री पर शिशु (Bala) अवस्था होती है।

Ashtakavarga

अष्टकवर्ग (Ashtakavarga [Eight-fold division system]) प्रणाली में प्रथम भाव को मिलने वाले बिंदु (bindus) Rahu की क्षमता को निर्धारित करते हैं। यदि प्रथम भाव में उच्च बिंदु (28 से अधिक) हों, तो Rahu जातक को समाज में उच्च स्थान, अच्छा स्वास्थ्य और सफलता दिलाने में सक्षम होता है। इसके विपरीत, कम बिंदु होने पर Rahu के शुभ परिणाम कम हो जाते हैं और संघर्ष बढ़ जाता है।

Nakshatra

Rahu जिस नक्षत्र और नक्षत्र स्वामी (constellation lord) के प्रभाव में होता है, वह उसके परिणामों को गहराई से प्रभावित करता है। चूंकि Rahu का अपना कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है, इसलिए वह जिस नक्षत्र में बैठता है, उस नक्षत्र के स्वामी के स्वभाव और कुंडली में उसकी स्थिति के अनुसार ही अपने शुभ या अशुभ फल प्रदान करता है।

Navamsa

नवमांश (Navamsha [Nine-fold divisional chart]) कुंडली (D9) जन्म कुंडली के वादों की पुष्टि या उन्हें रद्द करती है। यदि Rahu जन्म कुंडली में अच्छी स्थिति में हो लेकिन नवमांश में पीड़ित या नीच राशि के स्वामी के साथ हो, तो उसके शुभ फल कम हो जाते हैं। यदि Rahu नवमांश में वर्गोत्तम (Vargottama [Same sign in D1 and D9]) हो, तो जातक को असाधारण सफलता और मानसिक दृढ़ता प्राप्त होती.

Condition of the Lord of the 1st House

लग्न के स्वामी (लग्नेश) की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण है। चूंकि Rahu प्रथम भाव में बैठा है, इसलिए यदि लग्नेश स्वयं मजबूत, मित्र राशि में या शुभ भावों में स्थित हो, तो Rahu के सभी सकारात्मक फल जातक को प्राप्त होते हैं। यदि लग्नेश कमजोर या पीड़ित हो, तो लग्न में बैठा Rahu जातक के जीवन में केवल भ्रम, स्वास्थ्य समस्याएं और भटकाव ही पैदा करेगा।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में, Rahu को एक अत्यंत शक्तिशाली कारक माना जाता है। इस प्रणाली के अनुसार, Rahu का फल केवल उसके भाव से नहीं, बल्कि उसके नक्षत्र स्वामी और उप-स्वामी (sub-lord) से तय होता है। केपी पद्धति के प्रमुख नियम निम्नलिखित हैं:

  • प्रतिनिधित्व का नियम: केपी सिद्धांतों के अनुसार, यदि कोई ग्रह Rahu या केतु है, तो भविष्यवाणियां उस ग्रह के आधार पर की जानी चाहिए जिसका प्रतिनिधित्व वह नोड (node) कर रहा है। Rahu अपने अधिष्ठित भाव, नक्षत्र स्वामी और राशि स्वामी के अनुसार परिणाम देता है।
  • स्वास्थ्य और रोग का प्रकटीकरण: यदि प्रथम भाव का कारक ग्रह (significator) छठे भाव का भी कारक बन जाता है, तो जातक के शरीर में रोग प्रकट होता है। यदि प्रथम भाव का कारक छठे, आठवें या बारहवें भाव का भी कारक हो, तो जातक का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित होता है।
  • अस्पताल में भर्ती होना: यदि छठे भाव का कारक ग्रह प्रथम और बारहवें भाव का भी कारक बन जाता है, तो जातक को गंभीर बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती (hospitalization) होना पड़ता है या वह लंबे समय तक बिस्तर पर रहता है।
  • विवाह में बाधा: यदि सप्तम भाव के कस्प (cusp) का उप-स्वामी (sub-lord) प्रथम, छठे, दसवें या बारहवें भाव का कारक बन जाता है, तो जातक का विवाह नहीं हो पाता है या उसमें अत्यधिक देरी होती है।

Practical Significations

व्यावहारिक जीवन में, प्रथम भाव में Rahu की उपस्थिति जातक के दैनिक जीवन और व्यवहार को निम्नलिखित रूपों में प्रभावित करती है:

Career and Ambition

  • अपरंपरागत दृष्टिकोण: जातक पारंपरिक करियर के बजाय आधुनिक तकनीकों, कंप्यूटर, मशीनरी, विदेशी व्यापार या अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में रुचि रखता है।
  • अचानक बदलाव: जातक के करियर में कई अचानक उतार-चढ़ाव और बदलाव आते हैं, जिससे वह एक स्थिर मार्ग पर टिकने के बजाय नए-नए प्रयोग करता है।

Health and Vitality

  • रहस्यमयी बीमारियां: जातक को ऐसी शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जिनका निदान (diagnosis) आसानी से नहीं हो पाता।
  • संवेदनशीलता: जातक का शरीर जहर, रसायनों और दवाओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है, इसलिए उसे इनके सेवन में सावधानी बरतनी चाहिए।

Relationships

  • साझेदारी में तनाव: सप्तम भाव पर Rahu की पूर्ण दृष्टि के कारण, जातक को अपने जीवनसाथी या व्यावसायिक भागीदारों के साथ तालमेल बिठाने में कठिनाई होती है।
  • अपरंपरागत विवाह: जातक का विवाह अक्सर अपनी जाति, संस्कृति या देश से बाहर होने की संभावना रहती है।

Frequently Asked Questions

क्या प्रथम भाव में राहु हमेशा बुरा परिणाम देता है?
नहीं, प्रथम भाव का Rahu हमेशा बुरा नहीं होता। यदि Rahu का राशि स्वामी (dispositor) मजबूत हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो यह जातक को असाधारण सफलता, अंतरराष्ट्रीय ख्याति, वैज्ञानिक बुद्धि और अपार धन प्रदान कर सकता है। इसके अशुभ परिणाम केवल तभी मिलते हैं जब यह पीड़ित हो।
प्रथम भाव में राहु जातक के स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करता है?
लग्न का Rahu जातक को रहस्यमयी बीमारियों, त्वचा रोगों और शारीरिक चोटों के प्रति संवेदनशील बनाता है। यदि यह मंगल या शनि के साथ युति करे, तो अंडकोष में वृद्धि या जननांगों के रोग हो सकते हैं। शुभ ग्रहों का प्रभाव इन स्वास्थ्य समस्याओं को काफी हद तक कम कर देता है।
क्या लग्न का राहु विवाह में बाधा या देरी उत्पन्न करता है?
हाँ, लग्न में स्थित Rahu अपनी पूर्ण दृष्टि सप्तम भाव (विवाह भाव) पर डालता है। इसके कारण वैवाहिक जीवन में गलतफहमियां, वैचारिक मतभेद और देरी हो सकती है। कई मामलों में यह जातक को अपरंपरागत या अंतर्जातीय विवाह की ओर भी ले जाता है।
लग्न में राहु के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, वृषभ, कर्क और कन्या राशियों में लग्न का Rahu अत्यंत शुभ परिणाम देता है। इन राशियों में Rahu की दशा जातक को धन, उच्च शिक्षा, पदोन्नति और भौतिक सुख-सुविधाएं प्रदान करती है, जबकि धनु और मीन जैसी राशियों में यह संघर्ष बढ़ा सकता है।
क्या प्रथम भाव का राहु विदेश यात्रा का योग बनाता है?
हाँ, यदि लग्न का Rahu चर राशि (movable sign) में बुध के साथ स्थित हो, तो यह जातक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध वैज्ञानिक या शोधकर्ता बनाता है और व्यापक विश्व यात्राओं का अवसर प्रदान करता है। यह जातक को जन्मस्थान से दूर सफलता दिलाता है।
लग्न में राहु और मंगल की युति का क्या प्रभाव होता है?
लग्न में Rahu और मंगल की युति (अंगारक योग) जातक को अत्यधिक साहसी और आक्रामक बनाती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यह युति जातक को अंडकोष में सूजन या वृद्धि (enlarged scrotum) और शारीरिक चोटों के प्रति संवेदनशील बनाती है, जिसके लिए सावधानी आवश्यक है।
क्या प्रथम भाव का राहु जातक को अचानक अमीर बना सकता है?
हाँ, यदि Rahu वृषभ या कर्क राशि में हो या उस पर बृहस्पति जैसे शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो यह अपनी महादशा के दौरान जातक को अचानक धन, भूमि, वाहन और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान कर सकता है। हालांकि, दशा के अंत में धन हानि से बचने के लिए सावधानी जरूरी है।

Remedial Measures

शास्त्रीय ग्रंथों में Rahu के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए कुछ विशिष्ट उपायों का उल्लेख किया गया है:

  • देवी दुर्गा की पूजा: Jaimini Sutras के अनुसार, जब Rahu लग्न या कारकांश लग्न (Karkamsa Lagna [Ascendant in D9 of Atmakaraka]) में स्थित हो, तो जातक को देवी चंडी या मां दुर्गा की विशेष पूजा-अर्चन करनी चाहिए।
  • सूर्य-राहु युति का उपाय: Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि लग्न में सूर्य और Rahu की युति हो, तो इसके दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए विशिष्ट शांति पूजा और दान करना अनिवार्य माना गया है।

Standard Remedies for Rahu

Rahu के सामान्य दुष्प्रभावों को शांत करने के लिए निम्नलिखित पारंपरिक उपाय (upayas) अत्यंत प्रभावी माने जाते हैं:

  • आध्यात्मिक उपाय: प्रतिदिन या प्रत्येक शनिवार को Rahu मंत्र "ॐ रां राहवे नमः" का 108 बार जाप करें। मां दुर्गा के 'दुर्गा सप्तशती' का पाठ करना Rahu की नकारात्मक ऊर्जा को शांत करता है।
  • व्यवहारिक उपाय: समाज के वंचित वर्ग, सफाई कर्मचारियों और कुष्ठ रोगियों के प्रति सम्मानजनक व्यवहार करें और उनकी यथासंभव मदद करें। अपने ससुराल पक्ष के लोगों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें और जीवन में किसी भी प्रकार के शॉर्टकट या अनैतिक कार्यों से बचें।
  • दान कार्य: शनिवार या बुधवार के दिन काले तिल, उड़द की दाल, कंबल, नीले कपड़े या लोहे के बर्तनों का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में करें।
  • रत्न चिकित्सा (Gemstone): Rahu का मुख्य रत्न गोमेद (Hessonite) है। विशेष चेतावनी: गोमेद रत्न केवल तभी धारण करना चाहिए जब Rahu जातक की व्यक्तिगत कुंडली के लिए एक कार्यात्मक शुभ (functional benefic) ग्रह हो, जैसे कि वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न (Lagna) के जातकों के लिए। इसे मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न के जातकों को कभी भी धारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि एक अशुभ ग्रह का रत्न पहनने से उसकी नकारात्मकता और पीड़ा और अधिक बढ़ जाती है।

अपनी व्यक्तिगत कुंडली में प्रथम भाव में स्थित Rahu के वास्तविक प्रभावों को समझने के लिए, जातक को सबसे पहले Rahu के राशि स्वामी (dispositor) की स्थिति, उस पर पड़ने वाली ग्रहों की दृष्टि (Drishti) और वर्तमान में चल रही महादशा (Mahadasha) का सूक्ष्मता से विश्लेषण करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र में कोई भी एकल स्थिति पूरे जीवन का निर्धारण नहीं करती है, बल्कि यह उन कर्मिक पाठों (karmic lessons) को दर्शाती है जिन्हें आपकी आत्मा ने इस जीवनकाल में सीखने और मास्टर करने के लिए चुना है। एक योग्य ज्योतिषी के मार्गदर्शन में पूरी कुंडली का समग्र अध्ययन ही आपको सही दिशा प्रदान कर सकता है।

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Sources consulted

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