Rahu in the 3rd House

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50 min read · Drawn from 50 classical and modern works · Updated August 2026 · 1 view

राहु (Rahu), जिसे वैदिक ज्योतिष में एक छाया ग्रह (Chhaya Graha) के रूप में जाना जाता है, जब कुंडली के तृतीय भाव (Tritiya Bhava) यानी सहज भाव (Sahaja Bhava) में स्थित होता है, तो यह एक अत्यंत विशिष्ट और शक्तिशाली ऊर्जा का निर्माण करता है। तृतीय भाव मुख्य रूप से जातक के साहस, पराक्रम, छोटे भाई-बहनों, संचार कौशल, लेखन और व्यक्तिगत प्रयासों (Udyama) का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि राहु अतृप्त इच्छाओं, अपरंपरागत दृष्टिकोण, भ्रम, विदेशी तत्वों और अचानक होने वाली घटनाओं का कारक (Karaka) है। जब यह मायावी ग्रह इस उपचय भाव (Upachaya Bhava) में बैठता है, तो यह जातक के भीतर अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक असाधारण और कभी न थकने वाला जुनून पैदा करता है। हालांकि, इस स्थिति से मिलने वाले अंतिम परिणाम पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करते हैं कि राहु किस राशि में है, उसका राशि स्वामी (डिस्पोजिटर) किस स्थिति में है, और उस पर किन ग्रहों की दृष्टि (Drishti) पड़ रही है। शास्त्रीय ग्रंथ परिणामों को पूर्ण और निरपेक्ष शब्दों में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन किसी एक स्थिति को कभी भी अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए; ऐसे परिणाम केवल तभी प्रकट होते हैं जब संपूर्ण कुंडली में कई अन्य सहायक पीड़ित स्थितियां मौजूद हों।

Classical Position

वैदिक ज्योतिष के स्वीकृत सिद्धांतों के अनुसार, तृतीय भाव में राहु की उपस्थिति को सामान्यतः एक सुरक्षात्मक और अनुकूल स्थिति माना जाता है। पाराशरीय और नाड़ी दोनों परंपराएं इस बात पर सहमत हैं कि उपचय भावों (तीसरे, छठे, दसवें और ग्यारहवें भाव) में क्रूर ग्रह (Krura Graha) बहुत अच्छे परिणाम देते हैं क्योंकि ये जातक को जीवन की चुनौतियों से लड़ने का साहस प्रदान करते हैं। केपी पद्धति (KP System) के प्रमुख ग्रंथ जैसे Predictive Stellar Astrology और K.P Reader 3 स्पष्ट रूप से यह स्थापित करते हैं कि जब भी राहु या केतु (Ketu) जैसे छाया ग्रह किसी भाव में सक्रिय होते हैं, तो वे स्वतंत्र रूप से फल देने के बजाय उस ग्रह के समान परिणाम देते हैं जिससे वे जुड़े होते हैं। ज्योतिषियों को हमेशा उस ग्रह की स्थिति, युति और दृष्टि को देखना चाहिए जिसका प्रतिनिधित्व राहु कर रहा है। इसके अतिरिक्त, लेखन और बौद्धिक प्रकाशन के क्षेत्र में इस भाव का विशेष महत्व है। शास्त्रीय केपी ग्रंथों के अनुसार, यदि कुंडली में तृतीय और एकादश भाव (Ekadasha Bhava) के कार्येश (सिग्निफिकेटर) सक्रिय हों और उनका संबंध बुध (Mercury) से बन रहा हो, तो यह जातक द्वारा किसी पुस्तक के लेखन कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करने (Completion of writing a book) का मार्ग प्रशस्त करता है।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय और नाड़ी ग्रंथों में तृतीय भाव में राहु के प्रभाव को लेकर कई अनूठे और विशिष्ट दृष्टिकोण मिलते हैं। ये दृष्टिकोण जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं जैसे स्वास्थ्य, स्वभाव, धन और भाई-बहनों के संबंधों पर गहरा प्रकाश डालते हैं।

Physical Appearance and Health

शारीरिक कष्ट और चोटें: Jataka Tattvam और Sanketanidhi के अनुसार, यदि तृतीय भाव में राहु और शनि (Saturn) की युति हो, तो जातक के दाहिने हाथ के नाखूनों में विकार या रोग होने की संभावना रहती है। इसके अलावा, लकड़ी या किसी अन्य वस्तु से चोट लगने या पीटे जाने के कारण अंगों पर घाव होने और वात रोगों (wind diseases) से पीड़ित होने की आशंका रहती है। सिर की समस्याएं: एक अन्य नाड़ी परंपरा का मानना है कि यदि तृतीयेश (lord of the 3rd house) और लग्न स्वामी (Lagna Lord) जिस नवांश (Navamsha) में बैठे हैं उसका स्वामी केंद्र (Kendra) में हो, अथवा शनि, मंगल (Mars) और राहु एक ही राशि में स्थित हों, तो जातक को सिर से संबंधित शारीरिक कष्ट या पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है। दुर्घटनाओं का योग: केपी ज्योतिष के अनुसार, यदि तृतीय भाव (जो छोटी यात्राओं का है) या नवम भाव (जो लंबी यात्राओं का है) का कार्येश ग्रह छठे और आठवें भाव का भी कार्येश बन जाता है, तो जातक के जीवन में अचानक दुर्घटना होने की संभावना बढ़ जाती है।

Temperament and Mental State

उदार और धार्मिक प्रवृत्ति: Stri Jataka के अनुसार, यदि राहु या केतु लग्न से तीसरे, पांचवें या ग्यारहवें भाव में स्थित हों, तो यह जातक को दयालु हृदय, परोपकारी स्वभाव और ईश्वर तथा संतों के प्रति गहरी श्रद्धा प्रदान करता है। बौद्धिक विस्तार: How to Judge a Horoscope के अनुसार, तृतीय भाव का राहु जातक की मानसिक दृष्टि को व्यापक बनाता है और उसके बौद्धिक दृष्टिकोण को समृद्ध करता है। ऐसा जातक लीक से हटकर सोचने में सक्षम होता है। साहस की कमी: इसके विपरीत, Satyajatakam का एक भिन्न मत है कि यदि राहु तृतीय भाव में पीड़ित हो, तो यह जातक के साहस में कमी लाता है और कानों से संबंधित समस्याओं का कारण बन सकता है।

Wealth, Status and Life Events

अचानक यात्राएं और लाभ: शास्त्रीय स्रोतों के अनुसार, तृतीय भाव में राहु होने से जातक को अचानक यात्राएं करनी पड़ती हैं और उसे अपने भाइयों या करीबियों के माध्यम से अप्रत्याशित लाभ प्राप्त होता है। संपत्ति की बिक्री: केपी पद्धति के ग्रंथ Prashna: A Contemporary Treatise के अनुसार, यदि दशा स्वामी (Dasha Lord) तीसरे, पांचवें और दसवें भाव का संकेत देता है, तो यह जातक के जीवन में किसी संपत्ति की बिक्री का योग बनाता है। लेखन और प्रकाशन: Predictive Stellar Astrology के अनुसार, पुस्तक के लेखन को पूरा करने के लिए बुध का तृतीय/एकादश भाव से जुड़ना आवश्यक है, जबकि उसके सफल प्रकाशन के लिए गुरु (Jupiter) का और उसकी छपाई (printing) के लिए मंगल और बुध का इन भावों से जुड़ना अनिवार्य माना गया है। चोरी की घटनाएं: Prashna Tantra के अनुसार, यदि सप्तमेश तृतीय या द्वादश भाव में स्थित हो, तो यह दर्शाता है कि चोरी करने वाला व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि जातक का अपना सेवक ही है।

Siblings and Co-borns

भाई-बहनों का अभाव या हानि: Learn Successful Predictive Techniques of Hindu Astrology के अनुसार, यदि द्रेष्काण (Drekkana) कुंडली में तृतीय भाव में दो पापी ग्रह बैठे हों और तृतीयेश राहु-केतु अक्ष (axis) के प्रभाव में हो, तो जातक के छोटे भाई-बहन नहीं होते या उनके सुख में कमी आती है। उत्कृष्ट भाई-बहन: इसके विपरीत, एक नाड़ी ग्रंथ का मानना है कि यदि एकादशेश तृतीय भाव में हो और तृतीयेश एकादश भाव में हो (परिवर्तन योग) तथा गुरु इन दोनों को देख रहा हो, तो जातक को अत्यंत श्रेष्ठ और सहायक भाई-बहनों की प्राप्ति होती है।

Aspect and Directional Strength

तृतीय भाव में स्थित होकर राहु अपनी पूर्ण दृष्टि (Drishti) नवम भाव (Navamsha नहीं, बल्कि भाग्य भाव) पर डालता है। चूंकि राहु एक क्रूर और छाया ग्रह है, इसलिए इसकी दृष्टि जिस भाव पर पड़ती है, वहां यह एक प्रकार का असंतोष, तीव्र इच्छा और अपरंपरागत दृष्टिकोण पैदा करता है। नवम भाव पर राहु की यह दृष्टि जातक के धार्मिक विश्वासों को प्रभावित करती है। ऐसा जातक पारंपरिक धार्मिक सीमाओं को तोड़कर विदेशी दर्शन, गुप्त विद्याओं या अपरंपरागत आध्यात्मिक मार्गों की ओर आकर्षित हो सकता है। यह दृष्टि जातक को भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय अपने कठोर पुरुषार्थ और प्रयासों पर विश्वास करने के लिए प्रेरित करती है। दिशा बल (Digbala) की बात करें तो राहु दशम भाव (Karma Bhava) में सबसे मजबूत होता है, जहां इसे पूर्ण दिशा बल प्राप्त होता है। तृतीय भाव में राहु को दिशा बल तो प्राप्त नहीं होता, लेकिन चूंकि यह एक उपचय भाव है, इसलिए यह राहु के लिए सबसे पसंदीदा स्थानों में से एक माना जाता है। यहां बैठा राहु जातक को अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बनाता है, जिससे वह अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने और समाज में अपनी मेहनत से एक ऊंचा मुकाम हासिल करने में सफल होता है।

The Placement Across the Twelve Rashis

चूंकि राहु एक छाया ग्रह है, इसलिए इसका अपना कोई स्वामित्व नहीं है। शास्त्रीय ज्योतिष में राहु की उच्च या नीच राशियों को लेकर मतभेद हैं, इसलिए इस प्रविष्टि में राहु की किसी भी राशि में गरिमा (dignity) को सीधे तौर पर उच्च या नीच नहीं माना गया है। इसके बजाय, हम राहु के फलों को उसके राशि स्वामी (डिस्पोजिटर) की स्थिति के माध्यम से समझेंगे।

Aries (Mesha)

मेष राशि का स्वामी मंगल है, जो इस स्थिति में राहु का डिस्पोजिटर बनता है। यदि मेष राशि का राहु तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न कुंभ (Aquarius) होगा। कुंभ लग्न के लिए राहु का तृतीय भाव में होना जातक को अत्यधिक साहसी और आक्रामक बनाता है। Notable Horoscopes के अनुसार, मेष राशि का राहु मंगल, सूर्य और चंद्रमा के समान परिणाम देने की प्रवृत्ति रखता है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि मेष राशि में सूर्य और राहु की युति हो, तो जातक का पेशा मशीनरी, तकनीकी उपकरणों या कंप्यूटर से संबंधित हो सकता है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि मेष राशि का राहु शुभ ग्रहों से दृष्ट और पीड़ित न हो, तो जातक को प्रचुर धन, ऐश्वर्य और समाज में गौरव प्राप्त होता है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अपने पराक्रम और तकनीकी कौशल के बल पर जीवन में बड़ी सफलताएं अर्जित करेगा, हालांकि भाइयों के साथ कुछ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं।

Taurus (Vrishabha)

वृषभ राशि का स्वामी शुक्र (Venus) है। यदि राहु वृषभ राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न मीन (Pisces) होगा। मीन लग्न के लिए शुक्र तीसरे और आठवें भाव का स्वामी बनता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, वृषभ राशि में राहु की उपस्थिति इसके नकारात्मक दशा प्रभावों को काफी हद तक शांत और नियंत्रित करती है। इस राशि में राहु की स्थिति जातक को अपनी दशा के दौरान प्रचुर धन, उच्च शिक्षा, पदोन्नति और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती है। Sanketanidhi के अनुसार, यदि राहु शयनावस्था (Shayanavastha) में हो और वह वृषभ राशि में स्थित हो, तो जातक अत्यंत धनवान और भौतिक सुखों का उपभोग करने वाला होता है। यह संयोजन यह संकेत देता है कि जातक अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति, मधुर वाणी और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से समाज में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने में सफल रहेगा।

Gemini (Mithuna)

मिथुन राशि का स्वामी बुध है। यदि राहु मिथुन राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न मेष (Aries) होगा। मेष लग्न के लिए बुध तीसरे और छठे भाव का स्वामी होता है, जो संचार और प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। Predictive Stellar Astrology के अनुसार, मिथुन राशि में स्थित राहु पूरी तरह से बुध के प्रतिनिधि या एजेंट के रूप में कार्य करता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, मिथुन राशि का राहु जातक के भीतर पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक विचारों के बीच एक गहरा आंतरिक संघर्ष (internal conflict) पैदा करता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि मिथुन राशि के राहु पर सूर्य और शनि की दृष्टि हो, तो जातक को सरकारी नौकरी या राज्य से लाभ प्राप्त होने की प्रबल संभावना बनती है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक लेखन, पत्रकारिता, विपणन (marketing) या किसी भी ऐसे क्षेत्र में जहां तीक्ष्ण बुद्धि और त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता होती है, वहां असाधारण सफलता प्राप्त करेगा।

Cancer (Karka)

कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा (Moon) है। यदि राहु कर्क राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न वृषभ (Taurus) होगा। वृषभ लग्न के लिए चंद्रमा तीसरे भाव का स्वामी होकर स्वयं अपनी ही राशि में राहु के साथ स्थित होगा। Notable Horoscopes के अनुसार, कर्क राशि में राहु पूरी तरह से चंद्रमा के प्रभाव और गुणों को ग्रहण कर लेता है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, कर्क राशि में राहु का होना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है और यह जातक को जीवन में बड़ी ऊंचाइयों पर ले जाता है। Jataka Parijata के अनुसार, कर्क राशि का राहु अपनी दशा के दौरान जातक को अपार धन, अन्न, सम्मान और एक सुखी परिवार का सुख प्रदान करता है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि कर्क राशि का राहु शनि से पीड़ित हो, तो यह जातक को बचपन में शारीरिक कमजोरी या पक्षाघात (infantile paralysis) जैसी स्वास्थ्य समस्याएं दे सकता है।

Leo (Simha)

सिंह राशि का स्वामी सूर्य है। यदि राहु सिंह राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न मिथुन (Gemini) होगा। मिथुन लग्न के लिए सूर्य तीसरे भाव का स्वामी बनता है, जो जातक के साहस को अत्यधिक बढ़ा देता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, सिंह राशि यद्यपि राहु के लिए एक शत्रु राशि है, फिर भी तृतीय भाव में होने के कारण यह जातक को अत्यंत शुभ और प्रभावशाली परिणाम देती है। Jataka Parijata के अनुसार, सिंह राशि का राहु जातक को राजा के समान दर्जा, सेना या संगठन में नेतृत्व क्षमता, अपार धन और परिवार के प्रति गहरी निष्ठा प्रदान करता है। Marvel of Vedic Astrology के अनुसार, यदि सिंह राशि में शनि और राहु की युति हो, तो जातक या उसकी माता को हृदय रोग या हड्डियों में फ्रैक्चर का सामना करना पड़ सकता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि सिंह राशि में राहु हो और कुंडली में उच्च का गुरु तीसरे भाव में हो तथा मंगल-शुक्र की युति हो, तो जातक बड़े कारखाने या मशीनरी से जुड़े व्यवसाय का स्वामी बनता है।

Virgo (Kanya)

कन्या राशि का स्वामी बुध है। यदि राहु कन्या राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न कर्क (Cancer) होगा। कर्क लग्न के लिए बुध तीसरे और बारहवें भाव का स्वामी होता है, जो यात्राओं और गुप्त प्रयासों को दर्शाता है। Jataka Parijata के अनुसार, कन्या राशि का राहु अपनी दशा के दौरान जातक को सुंदर पत्नी, योग्य संतान, भूमि और वाहन का सुख देता है, लेकिन दशा के अंत में कुछ नुकसान भी करा सकता है। Phaladeepika के अनुसार, कन्या राशि में राहु की स्थिति जातक को समाज में बड़ा सम्मान, मानसिक प्रसन्नता और निरंतर भौतिक लाभ प्रदान करती है। Sarvartha Chintamani का मानना है कि कन्या राशि का राहु जातक को जीवन के शुरुआती दौर में अस्थायी सफलता देता है, जिसके बाद उसे कुछ उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। यह संयोजन दर्शाता है कि जातक अत्यंत विश्लेषणात्मक बुद्धि का स्वामी होगा और वह अपने विरोधियों को अपनी कूटनीति से परास्त करने में सक्षम होगा।

Libra (Tula)

तुला राशि का स्वामी शुक्र है। यदि राहु तुला राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न सिंह (Leo) होगा। सिंह लग्न के लिए शुक्र तीसरे और दसवें भाव का स्वामी होता है, जो करियर और पराक्रम के बीच सीधा संबंध स्थापित करता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, तुला राशि को राहु के लिए एक अत्यंत अनुकूल और फलदायी राशि माना गया है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, तुला राशि में राहु की उपस्थिति जातक की औपचारिक शिक्षा या शैक्षणिक करियर में कुछ बाधाएं या रुकावटें पैदा कर सकती है। इसी ग्रंथ के अनुसार, यदि बुध वृश्चिक राशि में हो और राहु तुला राशि में हो, तो जातक अपने सभी व्यवहारों में अत्यधिक धैर्यवान होता है, भले ही उसकी औपचारिक शिक्षा सामान्य रही हो। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक व्यापार, जनसंपर्क (public relations) और साझेदारी के माध्यम से अपने जीवन में बड़ी प्रगति और सफलता हासिल करेगा।

Scorpio (Vrischika)

वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। यदि राहु वृश्चिक राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न कन्या (Virgo) होगा। कन्या लग्न के लिए मंगल तीसरे और आठवें भाव का स्वामी होता है, जो जीवन में अचानक आने वाले बदलावों को दर्शाता है। Sarvartha Chintamani के अनुसार, वृश्चिक राशि में राहु की स्थिति जातक के भीतर एक अज्ञात भय, असुरक्षा की भावना और जीवन में अचानक आने वाले संकटों को जन्म दे सकती है। Nadi Astrological Researches Group के अनुसार, यदि वृश्चिक राशि में चंद्रमा और राहु की युति हो, तो जातक को अनिद्रा (insomnia), अवसाद, कमजोर पाचन तंत्र का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन साथ ही वह अत्यधिक कलात्मक और यात्राओं का शौकीन होता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि बुध और राहु दोनों वृश्चिक राशि में हों, तो जातक बेहद धैर्यवान होता है, लेकिन उसे अपनी शिक्षा पूरी करने में संघर्ष करना पड़ता है।

Sagittarius (Dhanu)

धनु राशि का स्वामी गुरु है। यदि राहु धनु राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न तुला (Libra) होगा। तुला लग्न के लिए गुरु तीसरे और छठे भाव का स्वामी होता है, जो संघर्ष और प्रयासों को दर्शाता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, धनु राशि में राहु की स्थिति मीन राशि की तुलना में अधिक अनुकूल परिणाम देती है क्योंकि यह धनु के साहसी स्वभाव से मेल खाती है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यदि धनु राशि का राहु पीड़ित या कमजोर हो, तो यह जातक के स्वास्थ्य की हानि, खतरनाक व्यवसायों में संलिप्तता और धोखे का कारण बन सकता है। Timing of Events: Crux of Vedic Astrology के अनुसार, धनु राशि का राहु जातक के जीवन में किसी पुजारी, न्यायाधीश या ज्योतिषी के प्रभाव या उनके कारण उत्पन्न होने वाले किसी वैचारिक मतभेद को दर्शा सकता है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अपने जीवन में उच्च ज्ञान, दर्शन और लंबी यात्राओं के माध्यम से अपने भाग्य का निर्माण स्वयं अपने प्रयासों से करेगा।

Capricorn (Makara)

मकर राशि का स्वामी शनि है। यदि राहु मकर राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न वृश्चिक (Scorpio) होगा। वृश्चिक लग्न के लिए शनि तीसरे और चौथे भाव का स्वामी होता है, जो घरेलू सुख और पराक्रम को जोड़ता है। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, मकर राशि में राहु का होना एक अपवाद है जहां यह ग्रह अपनी सामान्य अशुभता को छोड़कर जातक के लिए अत्यंत कल्याणकारी बन जाता है। वास्तविक अनुभवों के आधार पर, कुंभ राशि की तुलना में मकर राशि में राहु की स्थिति को अधिक व्यावहारिक और स्थिरता देने वाली माना गया है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि मकर राशि में शनि और राहु की युति हो, तो जातक को किसी बहुत बड़े संस्थान, सरकारी उपक्रम या प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट घराने में उच्च पद प्राप्त होता है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक अत्यंत अनुशासित, व्यावहारिक और अपने लक्ष्यों के प्रति समर्पित होगा, जिससे वह धीरे-धीरे ही सही, लेकिन एक स्थायी साम्राज्य खड़ा करेगा।

Aquarius (Kumbha)

कुंभ राशि का स्वामी शनि है। यदि राहु कुंभ राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न धनु (Sagittarius) होगा। धनु लग्न के लिए शनि दूसरे और तीसरे भाव का स्वामी होता है, जो संचित धन और भाई-बहनों को दर्शाता है। Prasna Arudhaphala के अनुसार, प्रश्न कुंडली में यदि कुंभ राशि का राहु सक्रिय हो, तो यह भैंस (buffalo) जैसे भारी और मजबूत पशुओं या कृषि संपत्तियों का प्रतिनिधित्व करता है। Core of Nadi Astrology के अनुसार, यदि मंगल मकर राशि में हो और राहु कुंभ राशि में स्थित हो, तो जातक को अपने जीवन में कुछ बड़े जोखिमों और शारीरिक खतरों का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक के भीतर एक अनूठा और लीक से हटकर सोचने वाला दिमाग होगा, जो उसे सामाजिक सुधारों, तकनीकी नवाचारों या बड़े जनसमूहों से जुड़कर काम करने के लिए प्रेरित करेगा।

Pisces (Meena)

मीन राशि का स्वामी गुरु है। यदि राहु मीन राशि में तृतीय भाव में हो, तो जातक का लग्न मकर (Capricorn) होगा। मकर लग्न के लिए गुरु तीसरे और बारहवें भाव का स्वामी होता है, जो विदेशी संपर्कों और आध्यात्मिक यात्राओं का संकेत देता है। My Experiences in Astrology के अनुसार, मीन राशि में स्थित राहु पूरी तरह से अपने डिस्पोजिटर गुरु के समान शुभ और दार्शनिक परिणाम देने का प्रयास करता है। हालांकि, यदि यह पीड़ित हो, तो जातक को जीवन में कुछ व्यावहारिक कठिनाइयों, चोरों या शासकों के भय और अपने सगे-संबंधियों के साथ गलतफहमियों का सामना करना पड़ सकता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यदि मीन राशि का राहु शुभ ग्रहों से दृष्ट और अच्छी स्थिति में हो, तो यह जातक को योग्य संतान (विशेषकर पुत्र) और करियर में बड़ी सफलता प्रदान करता है।

Conjunctions in This House

तृतीय भाव में राहु के साथ अन्य ग्रहों की युति जातक के जीवन की दिशा को पूरी तरह से बदल सकती है। चूंकि राहु एक प्रवर्धक (amplifier) है, यह अपने साथ बैठने वाले ग्रह की ऊर्जा को अत्यधिक बढ़ा देता है।

Sun with Rahu

तृतीय भाव में सूर्य के साथ राहु की युति होने से ग्रहण योग का निर्माण होता है। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि सप्तमेश तृतीय भाव में सूर्य के साथ युति कर रहा हो, तो यह जीवनसाथी के स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं माना जाता। यह युति जातक के भीतर एक अत्यधिक आक्रामक और कभी-कभी अहंकारी साहस पैदा करती है, जिससे उसे अपने पिता या उच्च अधिकारियों के साथ वैचारिक मतभेदों का सामना करना पड़ सकता है।

Moon with Rahu

तृतीय भाव में चंद्रमा के साथ राहु की युति होने से ग्रहण योग बनता है, जो जातक के मन को अत्यधिक अशांत और संवेदनशील बनाता है। Nadi Astrological Researches Group के अनुसार, यदि यह युति वृश्चिक राशि में हो, तो जातक को अनिद्रा, मानसिक तनाव और पाचन तंत्र की कमजोरी का सामना करना पड़ता है। हालांकि, यह युति जातक को एक असाधारण कल्पनाशीलता और कलात्मक प्रतिभा भी प्रदान करती है।

Mars with Rahu

तृतीय भाव में मंगल के साथ राहु की युति को अंगारक योग कहा जाता है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, यदि तृतीयेश कमजोर या नीच का हो और मंगल की राहु के साथ युति हो, तो जातक को अपने छोटे भाई-बहनों के सुख में बड़ी कमी या हानि का सामना करना पड़ता है। यह युति जातक को अत्यधिक आक्रामक, निडर और जोखिम लेने वाला बनाती है, जिससे वह सेना, पुलिस या तकनीकी क्षेत्रों में सफल हो सकता है।

Mercury with Rahu

तृतीय भाव में बुध के साथ राहु की युति जातक को एक अत्यंत कुशाग्र, कूटनीतिक और खोजी बुद्धि प्रदान करती है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि यह युति तुला राशि में हो, तो जातक अपनी बातचीत में बेहद धैर्यवान होता है, भले ही उसकी पारंपरिक शिक्षा में कुछ बाधाएं आई हों। यह युति जातक को आधुनिक संचार साधनों, लेखन और विपणन में असाधारण सफलता दिलाती है।

Jupiter with Rahu

तृतीय भाव में गुरु के साथ राहु की युति को गुरु चांडाल योग कहा जाता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, मकर लग्न के जातकों के लिए यदि गुरु और राहु की युति तीसरे भाव में हो और उस पर मंगल की दृष्टि पड़ रही हो, तो यह छोटे भाई के लिए अत्यंत कष्टकारी या उसकी हानि करने वाली मानी जाती है। यह युति जातक के पारंपरिक विश्वासों को हिला देती है और उसे धर्म के प्रति एक खोजी दृष्टिकोण देती है।

Venus with Rahu

तृतीय भाव में शुक्र के साथ राहु की युति जातक के भीतर कला, सौंदर्य और भौतिक सुखों के प्रति एक तीव्र और अपरंपरागत लालसा पैदा करती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि शुक्र अपनी ही राशि में राहु के साथ बैठा हो और उस पर गुरु की दृष्टि हो, तो यह जातक के भीतर कुछ अनोखी इच्छाओं, जुनून या लीक से हटकर संबंधों (unconventional relationships) को जन्म दे सकती है।

Saturn with Rahu

तृतीय भाव में शनि के साथ राहु की युति को श्रापित योग के रूप में देखा जाता है। Jataka Tattvam और Sanketanidhi के अनुसार, यह युति जातक को शारीरिक कष्ट, अंगों पर चोट के निशान, नाखूनों के रोग और वात जनित बीमारियां दे सकती है। हालांकि, व्यावसायिक रूप से यह युति जातक को किसी बहुत बड़े तकनीकी या औद्योगिक संस्थान में एक मजबूत और स्थायी करियर बनाने में मदद करती है।

Ketu with Rahu

चूंकि राहु और केतु हमेशा एक-दूसरे से 180 डिग्री की दूरी पर होते हैं, इसलिए तृतीय भाव में राहु होने पर केतु हमेशा नवम भाव में होगा। इन दोनों की प्रत्यक्ष युति एक ही भाव में असंभव है, लेकिन इनका अक्ष (axis) जातक के जीवन में पुरुषार्थ और भाग्य के बीच एक गहरा संतुलन स्थापित करने का कार्य करता है। तीन या अधिक ग्रहों की युति (Stellium) यदि तृतीय भाव में हो, तो यह जातक के संपूर्ण जीवन की ऊर्जा को इसी भाव पर केंद्रित कर देती है। ऐसा जातक अपने परिवार और समाज से हटकर एक बिल्कुल नया और स्वतंत्र मार्ग चुनता है। भारी ग्रहों का यह जमावड़ा जातक के भीतर सांसारिक इच्छाओं के प्रति एक गहरी विरक्ति भी पैदा कर सकता है, जो अंततः उसे संन्यास (Sanyasa) या गहन आध्यात्मिक साधना की ओर ले जा सकता है।

Aspects Received

तृतीय भाव में बैठे राहु पर अन्य ग्रहों की पड़ने वाली दृष्टि इस प्लेसमेंट के परिणामों को पूरी तरह से संशोधित कर देती है।

Jupiter's Aspect

तृतीय भाव में राहु पर जब देवगुरु बृहस्पति की शुभ दृष्टि पड़ती है, तो यह राहु की नकारात्मकता और अनियंत्रित इच्छाओं को पूरी तरह से शांत कर देती है। गुरु की यह दृष्टि जातक के साहस को एक सही और धर्मसम्मत दिशा प्रदान करती है। ऐसा जातक अपने संचार कौशल का उपयोग समाज के कल्याण और ज्ञान के प्रसार के लिए करता है। यह दृष्टि भाई-बहनों के साथ संबंधों को भी सुधारती है।

Saturn's Aspect

तृतीय भाव के राहु पर शनि की दृष्टि जातक के जीवन में कड़े संघर्ष और देरी को दर्शाती है। My Experiences in Astrology के अनुसार, यदि शनि की दृष्टि राहु पर हो और इसका संबंध तीसरे और बारहवें भाव से बन रहा हो, तो जातक को अपने जीवन में कई निरर्थक और थका देने वाली यात्राएं करनी पड़ती हैं, और समय-समय पर उसके स्वास्थ्य पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

Mars's Aspect

तृतीय भाव के राहु पर मंगल की दृष्टि जातक के भीतर एक अत्यंत उग्र और विस्फोटक ऊर्जा का संचार करती है। यह दृष्टि जातक को बिना सोचे-समझे निर्णय लेने और अत्यधिक आक्रामक व्यवहार करने के लिए प्रेरित कर सकती है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि मकर लग्न में गुरु और राहु तीसरे भाव में हों और उन पर मंगल की दृष्टि हो, तो यह छोटे भाई के जीवन के लिए एक बड़ा संकट पैदा करती है।

Rahu and Ketu's Aspect

चूंकि राहु स्वयं तृतीय भाव में स्थित है, इसलिए नवम भाव में बैठा केतु अपनी सातवीं दृष्टि से राहु को प्रभावित करता है। यह अक्ष जातक को भौतिक प्रयासों (राहु) और आध्यात्मिक विरक्ति (केतु) के बीच लगातार झूला झुलाता रहता है, जिससे जातक अंततः जीवन के वास्तविक सत्यों को समझने में सफल होता है।

Strength and Condition

तृतीय भाव में राहु कितना प्रभावी होगा, यह केवल उसकी स्थिति से नहीं, बल्कि उसकी अवस्था, अष्टकवर्ग में बिंदुओं की संख्या, नक्षत्र और उसके राशि स्वामी की स्थिति से तय होता है।

Baladi Avastha

विषम राशियों में (Odd Signs): मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ राशि में राहु की डिग्री के अनुसार अवस्था इस प्रकार चलती है:
  • 0° से 6°: बाल अवस्था (Bala) - यहां राहु का प्रभाव अत्यंत कमजोर और नवजात शिशु के समान होता है।
  • 6° से 12°: कुमार अवस्था - राहु आंशिक रूप से परिणाम देने में सक्षम होता है।
  • 12° से 18°: युवा अवस्था (Yuva) - यहां राहु पूर्ण रूप से शक्तिशाली होता है और अपने सभी अच्छे-बुरे परिणाम पूरी तीव्रता से देता है।
  • 18° से 24°: वृद्ध अवस्था - राहु का प्रभाव काफी धीमा और कमजोर हो जाता है।
  • 24° से 30°: मृत अवस्था (Mrita) - यहां राहु पूरी तरह से शक्तिहीन हो जाता है और कोई परिणाम नहीं दे पाता।
सम राशियों में (Even Signs): वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन राशि में यह क्रम पूरी तरह से उलट (reversed) जाता है, जहां 0° से 6° मृत अवस्था होती है और 24° से 30° बाल अवस्था होती है।

Ashtakavarga

अष्टकवर्ग (Ashtakavarga) में तृतीय भाव को मिलने वाले बिंदु (bindus) इस प्लेसमेंट की वास्तविक ताकत को दर्शाते हैं। यदि तृतीय भाव में 28 से अधिक बिंदु हैं, तो राहु जातक को अपने प्रयासों में भारी सफलता, शत्रुओं पर विजय और समाज में उच्च पद दिलाएगा। इसके विपरीत, यदि इस भाव में बिंदुओं की संख्या 20 से कम है, तो जातक को अत्यधिक मेहनत करने के बाद भी बहुत कम परिणाम प्राप्त होंगे और उसके प्रयास अक्सर निष्फल जाएंगे।

Nakshatra

राहु जिस नक्षत्र में बैठा है, उसका स्वामी (नक्षत्र पति) राहु के परिणामों को बहुत गहराई से प्रभावित करता है। उदाहरण के लिए, यदि राहु बुध के नक्षत्र (आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती) में हो, तो यह जातक को लेखन, व्यापार और कूटनीति में असाधारण सफलता देगा। यदि यह मंगल के नक्षत्र (मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा) में हो, तो यह जातक को अत्यधिक साहसी और तकनीकी रूप से कुशल बनाएगा।

Navamsa (D9)

नवांश कुंडली (Navamsha) यह पुष्टि करती है कि जन्म कुंडली (D1) का राहु वास्तव में कितना मजबूत है। यदि राहु जन्म कुंडली में तृतीय भाव में शुभ दिख रहा है, लेकिन नवांश कुंडली में वह अपने शत्रु की राशि में या पीड़ित होकर बैठा है, तो उसके शुभ फलों में भारी कमी आ जाएगी। इसके विपरीत, यदि वह नवांश में मजबूत स्थिति में है, तो वह अपने वादों को पूरी तरह से निभाएगा।

Condition of the Lord of the Third House

तृतीय भाव के स्वामी (तृतीयेश) की स्थिति ही इस संपूर्ण प्लेसमेंट की रीढ़ की हड्डी है। यदि राहु तृतीय भाव में बैठा है, लेकिन इस भाव का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव में कमजोर या पीड़ित होकर बैठा है, तो राहु अपने शुभ परिणाम देने में पूरी तरह असमर्थ रहेगा। राहु तभी शुभ फल दे सकता है जब उसका डिस्पोजिटर कुंडली में मजबूत, केंद्र या त्रिकोण में स्थित हो और राहु के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध रखता हो।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में राहु को एक अत्यंत महत्वपूर्ण ग्रह माना गया है क्योंकि यह जिस भाव के उप-स्वामी (sub-lord) के रूप में कार्य करता है, उस भाव के परिणामों को पूरी तरह से अपने हाथ में ले लेता है। प्रतिनिधित्व का सिद्धांत: केपी ज्योतिष के अनुसार, राहु हमेशा उस ग्रह के समान परिणाम देता है जिसके नक्षत्र में वह बैठा है, जिसके साथ वह युति कर रहा है, या जो उसकी राशि का स्वामी है। तृतीय भाव का उप-स्वामी: यदि राहु तृतीय भाव के कस्प (cusp) का उप-स्वामी (sub-lord) बनता है, तो यह जातक के संचार, लेखन, यात्राओं और समझौतों को नियंत्रित करता है। बल का निर्धारण: केपी पद्धति में ग्रहों की शक्ति का आकलन इस क्रम में किया जाता है: नक्षत्र में स्थित ग्रह > भाव में स्थित ग्रह > नक्षत्र स्वामी > भाव स्वामी > युति या दृष्टि में शामिल ग्रह। इस नियम के अनुसार, तृतीय भाव में बैठा राहु इस भाव के स्वामी से भी अधिक शक्तिशाली होकर परिणाम देता है।

Practical Significations

व्यावहारिक जीवन में, तृतीय भाव में राहु की उपस्थिति जातक के दैनिक व्यवहार, करियर और सामाजिक जीवन को निम्नलिखित रूपों में प्रभावित करती है: अपरंपरागत संचार: ऐसा जातक बातचीत करने, लिखने या खुद को अभिव्यक्त करने के लिए आधुनिक तकनीकों, सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म और विदेशी भाषाओं का अत्यधिक उपयोग करता है। जोखिम लेने की प्रवृत्ति: जातक के भीतर एक जन्मजात साहस होता है जो उसे ऐसे क्षेत्रों में निवेश करने या काम करने के लिए प्रेरित करता है जहां भारी जोखिम शामिल हो, जैसे शेयर बाजार, स्टार्टअप या नए तकनीकी आविष्कार। भाइयों के साथ जटिल संबंध: जातक के अपने भाई-बहनों के साथ संबंध या तो अत्यधिक घनिष्ठ और लाभप्रद होते हैं, या फिर उनमें एक गहरी वैचारिक दूरी और अविश्वास की भावना बनी रहती है।

Frequently Asked Questions

क्या तृतीय भाव में राहु हमेशा शुभ फल देता है?
हां, सामान्यतः तृतीय भाव में राहु को बहुत अनुकूल माना जाता है क्योंकि यह एक उपचय भाव है। यहां बैठकर यह जातक को अत्यधिक साहसी, प्रतिस्पर्धी और अपने प्रयासों में सफल बनाता है। हालांकि, यदि राहु पर पापी ग्रहों की दृष्टि हो या उसका राशि स्वामी कमजोर हो, तो यह भाई-बहनों से विवाद और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी दे सकता है।
क्या तृतीय भाव का राहु भाई-बहनों के लिए हानिकारक है?
शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि तृतीय भाव में राहु पीड़ित हो या द्रेष्काण कुंडली में इस भाव में दो पापी ग्रह बैठे हों, तो यह छोटे भाई-बहनों के सुख में कमी या उनके साथ अलगाव का कारण बन सकता है। लेकिन यदि तृतीयेश मजबूत हो और उस पर गुरु की दृष्टि हो, तो भाई-बहनों से लाभ भी प्राप्त होता है।
क्या इस प्लेसमेंट से जातक लेखक बन सकता है?
हां, बिल्कुल। यदि तृतीय भाव के राहु का संबंध बुध और एकादश भाव से बन रहा हो, तो जातक के भीतर एक असाधारण लेखन प्रतिभा विकसित होती है। केपी ज्योतिष के अनुसार, बुध का संबंध पुस्तक लेखन को पूरा करने में और गुरु का संबंध उसके सफल प्रकाशन में बड़ी भूमिका निभाता है।
तृतीय भाव में राहु होने पर कौन सी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं?
यदि तृतीय भाव में राहु शनि या मंगल से पीड़ित हो, तो जातक को कानों में तकलीफ, हाथों या नाखूनों के रोग, वात जनित बीमारियां और दुर्घटनाओं के कारण अंगों पर चोट लगने की आशंका रहती है। अत्यंत पीड़ित स्थितियों में यह सिर की समस्याओं का भी कारण बन सकता है।
क्या तृतीय भाव का राहु सरकारी नौकरी दिला सकता है?
हां, नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यदि राहु मिथुन राशि में तृतीय भाव में स्थित हो और उस पर सूर्य तथा शनि की अनुकूल दृष्टि पड़ रही हो, तो जातक को सरकारी नौकरी या राज्य प्रशासन में एक प्रतिष्ठित पद प्राप्त होने की प्रबल संभावना बनती है।
इस भाव में राहु के लिए सबसे अच्छी राशि कौन सी मानी जाती है?
यद्यपि राहु की अपनी कोई राशि नहीं है, फिर भी व्यावहारिक अनुभवों और ग्रंथों के अनुसार, वृषभ, कर्क, कन्या, तुला और मकर राशियों में राहु तृतीय भाव में होने पर अत्यंत शानदार और सकारात्मक परिणाम प्रदान करता है।

Remedial Measures

यदि कुंडली में तृतीय भाव का राहु पीड़ित होकर नकारात्मक परिणाम दे रहा हो, तो शास्त्रीय और पारंपरिक उपायों के माध्यम से इसकी अशुभता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। दान और सेवा: Rasi Characteristics के अनुसार, राहु के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए नियमित रूप से दान करना, विशेषकर काले तिल और तेल का दान करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। हनुमान जी की आराधना: इसी ग्रंथ के अनुसार, भगवान हनुमान की नियमित पूजा-अर्चना और हनुमान चालीसा का पाठ करने से राहु जनित सभी प्रकार के अनिष्ट और भय का तत्काल निवारण होता है। पक्षियों को दाना डालना: प्रतिदिन सुबह पक्षियों को बाजरा या सात प्रकार के अनाज (सतनाजा) खिलाने से राहु की नकारात्मक ऊर्जा शांत होती है।

Standard Remedies for Rahu

आध्यात्मिक उपाय: देवी दुर्गा की आराधना करें। नियमित रूप से "ॐ रां राहवे नमः" मंत्र का 108 बार जाप करें। मां दुर्गा को नीले फूल अर्पित करना राहु को शांत करने का एक अचूक उपाय है। व्यवहारिक उपाय: अपने ससुर, दादा और परिवार के बुजुर्गों का हमेशा सम्मान करें। कभी भी किसी के साथ विश्वासघात न करें और अपनी वाणी में विनम्रता बनाए रखें। दान: शनिवार के दिन कुष्ठ रोगियों या जरूरतमंदों को कंबल, नीले कपड़े, उड़द की दाल या लोहे के बर्तनों का दान करें। रत्न धारण करने की चेतावनी: राहु का मुख्य रत्न गोमेद (Hessonite) है। चेतावनी: गोमेद रत्न केवल तभी धारण किया जाना चाहिए जब राहु जातक की व्यक्तिगत कुंडली के अनुसार एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (functional benefic) हो, जैसे वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर या कुंभ लग्न के जातकों के लिए। यदि मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु या मीन लग्न के जातक बिना उचित परामर्श के गोमेद धारण करते हैं, तो यह राहु की नकारात्मक और विनाशकारी ऊर्जा को अत्यधिक बढ़ा सकता है, जिससे जीवन में अचानक बड़ी मुसीबतें आ सकती हैं। अपनी कुंडली में इस प्लेसमेंट का वास्तविक और सटीक प्रभाव जानने के लिए, जातक को सबसे पहले राहु की डिग्री, उसके नक्षत्र स्वामी की स्थिति, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से उसके राशि स्वामी (डिस्पोजिटर) के बल का सूक्ष्मता से अध्ययन करना चाहिए। केवल एक समग्र विश्लेषण ही इस मायावी ग्रह के वास्तविक रहस्यों को उजागर कर सकता है।

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Sources consulted

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