Saturn in the 7th House
33 min read · Drawn from 57 classical and modern works · Updated August 2026
Classical Position
शास्त्रीय परंपराओं में सप्तम भाव में शनि की स्थिति को लेकर व्यापक सहमति है। Saravali और अन्य प्रामाणिक ग्रंथों के अनुसार, यदि सप्तम भाव में Mars in 7th House (सप्तम भाव में मंगल) स्थित हो और उस पर शनि की `Drishti` पड़े, तो जीवनसाथी की मृत्यु की संभावना बनती है। इसके अतिरिक्त, परंपरा में यह सर्वसम्मति है कि शनि जिस भाव में बैठता है, वहां से वह तीसरे, सातवें और दसवें भाव पर अपनी पूर्ण `Drishti` डालता है। सप्तम भाव में स्थित होने के कारण, शनि प्रथम भाव `Lagna` [ascendant] पर अपनी पूर्ण सातवीं `Drishti` डालता है, जो जातक के व्यक्तित्व, स्वास्थ्य और आत्म-अभिव्यक्ति को प्रभावित करती है।Variant Readings
Physical Appearance and Health
- जीवनसाथी का स्वरूप: Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि चंद्रमा छठे भाव में हो, सप्तमेश शनि या बुध की राशि में हो, और शुक्र पर पुरुष राशि से सूर्य की `Drishti` हो, तो जातक की पत्नी का स्वरूप पुरुष के समान हो सकता है।
- शारीरिक बाधाएं: एक नाड़ी ग्रंथ के अनुसार, यदि सप्तम भाव में राहु, शनि, पंचमेश और अष्टमेश एक साथ स्थित हों, तो कन्या का समय पर रजस्वला होना बाधित हो सकता है।
- चोर की पहचान: Prashna Tantra के अनुसार, यदि प्रश्न कुंडली में सप्तम भाव का स्वामी `Neecha` [debilitated] हो, तो चोरी की घटना में चोर की पहचान शनि के `Karaka` तत्वों के आधार पर 'पुत्र' के रूप में की जा सकती है।
Temperament and Mental State
- वृद्ध जीवनसाथी: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि शनि सप्तम भाव का स्वामी होकर किसी पाप ग्रह के साथ स्थित हो, अपने नीच `Navamsha` [harmonic ninth division] में हो, या पाप ग्रहों से दृष्ट हो, तो जातक का जीवनसाथी उम्र में बड़ा (वृद्ध) दिखाई देता है और उसका चरित्र संदेहास्पद हो सकता है।
- उदासीनता और ठंडापन: How to Judge a Horoscope के अनुसार, सप्तम भाव में शनि विवाह को स्थिरता तो प्रदान करता है, लेकिन वैवाहिक जीवन में गर्मजोशी की कमी और ठंडापन (उदासीनता) ला सकता है।
- मंदबुद्धि जीवनसाथी: Jataka Parijata के अनुसार, यदि शनि सप्तम भाव में अपनी ही राशि या अपने ही `Navamsha` में स्थित हो, तो जातक का विवाह किसी वृद्ध और अत्यंत सुस्त व्यक्ति से होने की संभावना रहती है।
Wealth, Status and Life Events
- कर्म और संपत्ति का नुकसान: Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि सप्तम भाव में शनि, मंगल और केतु का प्रभाव (7-3-9 संबंध) हो, तो जातक मशीनरी और भूमि संपत्तियों में उत्कृष्ट कार्य करता है, लेकिन उसे शिक्षा में रुकावट, व्यावसायिक परिवर्तन और पारिवारिक शत्रुता का सामना करना पड़ सकता है।
- विलंबित जन्म: Jataka Parijata के अनुसार, यदि गर्भाधान के समय उदित होने वाला `Navamsha` शनि का हो और शनि सप्तम भाव में स्थित हो, तो शिशु के जन्म में तीन वर्ष का समय लग सकता है।
- पिता को कष्ट: Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि सप्तम भाव में वक्री शनि स्थित हो और वह सूर्य को देखता हो, तो जातक के पिता की मृत्यु उसके शैशवकाल (बचपन) में ही हो सकती है।
- व्यापार में बदलाव: यदि सप्तम भाव में वक्री शनि हो, तो यह भाई की हानि और व्यापार में बड़े बदलावों का संकेत देता है।
Aspect and Directional Strength
सप्तम भाव में स्थित होकर शनि अपनी पूर्ण `Drishti` प्रथम भाव (`Lagna`) पर डालता है। चूंकि शनि एक `Krura` [fierce] ग्रह है, इसलिए इसकी `Drishti` लग्न पर दबाव और अनुशासन पैदा करती है। Notable Horoscopes के अनुसार, लग्न पर शनि की `Drishti` जातक को अत्यधिक एकांतप्रिय बना सकती है, जिससे वह समाज से कटकर रहने लगता है। हालांकि, यही प्रभाव जातक को सार्वजनिक राय और सामाजिक नियमों के प्रति अत्यंत जागरूक और सम्मानजनक भी बनाता है। दिशात्मक बल या `Digbala` [directional strength] के संदर्भ में, शनि को सप्तम भाव (पश्चिम दिशा) में पूर्ण `Digbala` प्राप्त होता है। यह शनि की सबसे मजबूत स्थिति मानी जाती है। यद्यपि सप्तम भाव में शनि वैवाहिक संबंधों में कुछ नीरसता या विलंब ला सकता है, लेकिन पूर्ण `Digbala` प्राप्त होने के कारण यह जातक को असाधारण संगठनात्मक क्षमता, न्यायप्रियता, धैर्य और दीर्घायु प्रदान करता है।The Placement Across the Twelve Rashis
Aries (Mesha)
मेष राशि में शनि debilitated (नीच का) होता है और इस राशि का स्वामी मंगल है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` तुला बनता है, जिसके लिए शनि चतुर्थ और पंचम भाव का स्वामी होकर एक अत्यंत शुभ योगकारक ग्रह बनता है। मेष राशि में नीच का होने के कारण, My Experiences in Astrology के अनुसार यह विवाह में अत्यधिक देरी का कारण बनता है। पाश्चात्य सिद्धांतों के अनुसार, जातक को सिरदर्द और दंत समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, नाड़ी ग्रंथों के अनुसार यह स्थिति मशीनरी, इंजीनियरिंग, सेना या पुलिस विभाग में करियर के लिए अनुकूल मानी जाती है।Taurus (Vrishabha)
वृषभ राशि में शनि friendly (मित्र राशि) में होता है और इसका स्वामी शुक्र है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` वृश्चिक बनता है, जिससे शनि तृतीय और चतुर्थ भाव का स्वामी होता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, वृषभ राशि का शनि जातक को उच्च बौद्धिक क्षमता और समस्या-समाधान की योग्यता प्रदान करता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, अपनी `Dasha` [planetary period] में यह जातक को भूमि और संपत्ति से जुड़े कानूनी विवादों में सफलता दिलाता है। जातक को मानसिक सुरक्षा के लिए भौतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है।Gemini (Mithuna)
मिथुन राशि में शनि friendly (मित्र राशि) में होता है और इसका स्वामी बुध है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` धनु बनता है, जिससे शनि द्वितीय और तृतीय भाव का स्वामी होता है। मिथुन राशि में सप्तम भाव के शनि के लिए शास्त्रीय ग्रंथों में विशिष्ट फल बहुत सीमित हैं। चूंकि शनि यहां मित्र राशि में है और धन भाव (द्वितीय) का स्वामी होकर सप्तम में बैठा है, यह जातक को व्यावहारिक और व्यापारिक बुद्धि प्रदान करता है।Cancer (Karka)
कर्क राशि में शनि inimical (शत्रु राशि) में होता है और इसका स्वामी चंद्रमा है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` मकर बनता है, जिससे शनि प्रथम और द्वितीय भाव का स्वामी होता है। नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, कर्क राशि का शनि ललित कलाओं, तरल पदार्थों या जल से संबंधित व्यवसायों की ओर झुकाव देता है, लेकिन इसमें धोखे की संभावना भी रहती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि कर्क राशि का शनि सूर्य और शुक्र के साथ पीड़ित हो, तो जातक की आंखें कमजोर हो सकती हैं और उनसे पानी बहने की समस्या हो सकती है।Leo (Simha)
सिंह राशि में शनि inimical (शत्रु राशि) में होता है और इसका स्वामी सूर्य है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` कुंभ बनता है, जिससे शनि द्वादश और प्रथम भाव का स्वामी होता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, सिंह राशि में शनि की `Dasha` जातक के वैवाहिक जीवन में कलह, जीवनसाथी या बच्चों से अलगाव और तीव्र सिरदर्द का कारण बन सकती है। नाड़ी ज्योतिष के अनुसार, यदि यहां बुध और शनि की युति हो, तो शिक्षा में देरी होती है, लेकिन यह सरकारी सेवा या प्रबंधन में करियर के लिए उपयुक्त है।Virgo (Kanya)
कन्या राशि में शनि friendly (मित्र राशि) में होता है और इसका स्वामी बुध है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` मीन बनता है, जिससे शनि एकादश और द्वादश भाव का स्वामी होता है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, कन्या राशि का शनि जातक को वित्तीय और बैंकिंग क्षेत्रों में सफलता प्रदान करता है। जातक अपनी व्यावसायिक गतिविधियों में अत्यधिक व्यवस्थित होता है। अपनी `Dasha` के दौरान, यह जातक को शेयर बाजार, रियल एस्टेट या कृषि उद्योगों में करियर की ओर अग्रसर करता है।Libra (Tula)
तुला राशि में शनि exalted (उच्च का) होता है और इसका स्वामी शुक्र है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` मेष बनता है, जिससे शनि दशम और एकादश भाव का स्वामी होता है। उच्च का शनि सप्तम भाव में अत्यंत शक्तिशाली और शुभ परिणाम देता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, तुला राशि का शनि अपनी `Dasha` में जातक को अत्यधिक धन, आभूषण और रत्न व्यापार में बड़ी सफलता प्रदान करता है। हालांकि, मनोवैज्ञानिक रूप से जातक को अपने जीवनसाथी को खोने का अनजाना भय सता सकता है।Scorpio (Vrischika)
वृश्चिक राशि में शनि inimical (शत्रु राशि) में होता है और इसका स्वामी मंगल है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` वृषभ बनता है, जिससे शनि नवम और दशम भाव का स्वामी होता है। वृश्चिक राशि का शनि जातक को मशीनरी, इंजीनियरिंग, भूमि प्रबंधन या गुप्त खोजों से संबंधित कार्यों में सफलता देता है। पाश्चात्य सिद्धांतों के अनुसार, जातक दूसरों से दूरी बनाए रखने के लिए विवादों का सहारा ले सकता है। यदि पंचम भाव पर चंद्रमा और मंगल का प्रभाव हो, तो जातक रसायन शास्त्र (Chemistry) में विशेषज्ञता प्राप्त करता है।Sagittarius (Dhanu)
धनु राशि में शनि neutral (सम राशि) में होता है और इसका स्वामी बृहस्पति है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` मिथुन बनता है, जिससे शनि अष्टम और नवम भाव का स्वामी होता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, धनु राशि में स्थित शनि अपनी `Dasha` के दौरान जातक को उद्यमों में बड़ी सफलता, एक सक्रिय जीवन और लड़ने की अद्भुत क्षमता प्रदान करता है। यह जातक को कानून, बैंकिंग, शिक्षण या प्रबंधन के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित करियर की ओर ले जाता है।Capricorn (Makara)
मकर राशि में शनि own sign (स्वराशि) में होता है और इसका स्वामी स्वयं शनि है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` कर्क बनता है, जिससे शनि सप्तम और अष्टम भाव का स्वामी होता है। मकर राशि का शनि जातक को अत्यंत मृदुभाषी (soft-spoken) बनाता है। नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यह उर्वरक, तेल, खनन, खाद्य उद्योग या जल प्रबंधन के कार्यों में सफलता देता है। हालांकि, Scientific Hindu Astrology के अनुसार, इस राशि के नक्षत्र स्वामी शनि के शत्रु होने के कारण शनि यहां कुछ कमजोर भी हो सकता है।Aquarius (Kumbha)
कुंभ राशि में शनि moolatrikona (मूलत्रिकोण राशि) में होता है और इसका स्वामी स्वयं शनि है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` सिंह बनता है, जिससे शनि षष्ठ और सप्तम भाव का स्वामी होता है। कुंभ राशि का शनि जातक को अपनी `Dasha` के दौरान गृह स्वामित्व (नया घर) और पारिवारिक सुख-शांति प्रदान करता है। यह स्थिति जातक को ज्योतिष, अध्यात्म, शिक्षण, मनोविज्ञान, अनुसंधान या वैज्ञानिक क्षेत्रों में एक सफल करियर प्रदान करती है।Pisces (Meena)
मीन राशि में शनि neutral (सम राशि) में होता है और इसका स्वामी बृहस्पति है। इस स्थिति में जातक का `Lagna` कन्या बनता है, जिससे शनि पंचम और षष्ठ भाव का स्वामी होता है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, मीन राशि में सप्तम भाव का शनि शुभ नहीं माना जाता और यह वैवाहिक जीवन को गंभीर रूप से पीड़ित करता है। Jataka Parijata के अनुसार, यह स्थिति जीवनसाथी की हानि का कारण बन सकती है। हालांकि, यह कानून, चिकित्सा, इतिहास, धर्म या दर्शनशास्त्र के क्षेत्रों में करियर के लिए अनुकूल है।Conjunctions in This House
Sun with Saturn
सप्तम भाव में Sun with Saturn (सूर्य और शनि) की युति वैवाहिक जीवन के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। Jatak Alankaar के अनुसार, यदि सप्तम भाव में सूर्य और शनि एक साथ हों और दशम भाव पर बृहस्पति की `Drishti` न हो, तो जातक की पत्नी को गर्भधारण में अत्यधिक कठिनाई होती है। यह युति अहंकार के टकराव और वैवाहिक जीवन में असंतोष को जन्म देती है।Moon with Saturn
सप्तम भाव में Moon with Saturn (चंद्रमा और शनि) की युति जातक को मानसिक रूप से अशांत और वैवाहिक जीवन में उदासीन बना सकती है। Phaladeepika के अनुसार, इस युति के प्रभाव से जातक जीवनसाथी या संतान के सुख से वंचित रह सकता है। यह युति जातक के मन में वैराग्य की भावना भी उत्पन्न कर सकती है।Mars with Saturn
सप्तम भाव में Mars with Saturn (मंगल और शनि) की युति एक अत्यंत विस्फोटक स्थिति का निर्माण करती है। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि इस युति पर किसी शुभ ग्रह की `Drishti` न हो, तो जातक को संतान गोद लेनी पड़ सकती है। यह युति वैवाहिक जीवन में गंभीर संघर्ष, दुर्घटनाओं और अचानक आने वाले संकटों को दर्शाती है।Mercury with Saturn
सप्तम भाव में Mercury with Saturn (बुध और शनि) की युति जातक को अत्यधिक व्यावहारिक और गणनात्मक बनाती है। Saravali के अनुसार, यदि सप्तम भाव में बुध या शनि अत्यंत पीड़ित अवस्था में हों, तो यह जीवनसाथी की शारीरिक अक्षमता या नपुंसकता का संकेत दे सकता है। हालांकि, यह युति व्यापार और साझेदारी के लिए अनुकूल मानी जाती है।Jupiter with Saturn
सप्तम भाव में Jupiter with Saturn (बृहस्पति और शनि) की युति धर्म और कर्म का एक सुंदर संतुलन बनाती है। यद्यपि इस युति का सीधा विवरण इस भाव के लिए सीमित है, लेकिन शास्त्रीय सिद्धांतों के अनुसार, जब शनि लग्न में हो और बृहस्पति सप्तम में हो, तो जातक एक अत्यंत साधारण परिवार में जन्म लेकर भी राजा के समान सम्मान प्राप्त करता है।Venus with Saturn
सप्तम भाव में Venus with Saturn (शुक्र और शनि) की युति वैवाहिक संबंधों में अत्यधिक व्यावहारिक दृष्टिकोण और कभी-कभी ठंडापन लाती है। Saravali के अनुसार, यदि शनि लग्न में हो और शुक्र सप्तम भाव में गंड राशि में स्थित हो, और पंचम भाव पर कोई शुभ प्रभाव न हो, तो जातक की पत्नी को संतानोत्पत्ति में बाधा का सामना करना पड़ता है।Rahu with Saturn
सप्तम भाव में Rahu with Saturn (राहु और शनि) की युति वैवाहिक जीवन में अप्रत्याशित और असाधारण चुनौतियां खड़ी करती है। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि सप्तम भाव में राहु, शनि, पंचमेश और अष्टमेश एक साथ स्थित हों, तो यह गंभीर शारीरिक और वैवाहिक बाधाओं को जन्म देता है। यह युति जातक के जीवनसाथी के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।Ketu with Saturn
सप्तम भाव में Ketu with Saturn (केतु और शनि) की युति जातक को वैवाहिक जीवन के प्रति पूरी तरह से उदासीन बना सकती है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि सप्तम भाव में शनि, मंगल और केतु का प्रभाव हो, तो जातक को अपनी अर्जित संपत्ति खोनी पड़ सकती है और वैवाहिक जीवन में भारी असंतोष का सामना करना पड़ता है।Stellium (Three or more Grahas)
सप्तम भाव में तीन या अधिक ग्रहों की युति जातक के संपूर्ण जीवन का ध्यान साझेदारी, जनसंपर्क और वैवाहिक जीवन पर केंद्रित कर देती है। जब इस भाव में भारी ग्रहों का जमावड़ा होता है, तो यह जातक के भीतर तीव्र वैराग्य और संन्यास `Sanyasa` [renunciation] की प्रवृत्ति को जन्म दे सकता है। ऐसी स्थिति में जातक सांसारिक सुखों को छोड़कर आध्यात्मिक मार्ग अपना सकता है।Aspects Received
Jupiter's Aspect
सप्तम भाव पर बृहस्पति की `Drishti` शनि के नकारात्मक प्रभावों को शांत करती है। यह जातक को वैवाहिक जीवन में सुरक्षा, समझदारी और धार्मिकता प्रदान करती है। बृहस्पति की अमृतमयी `Drishti` शनि के कारण होने वाले विलंब को दूर कर वैवाहिक जीवन में सुख और समृद्धि लाती है।Mars's Aspect
सप्तम भाव पर मंगल की `Drishti` शनि की ठंडी प्रकृति को अत्यधिक उत्तेजित और आक्रामक बनाती है। Saravali के अनुसार, यदि सप्तम भाव में स्थित शनि पर केवल मंगल की `Drishti` हो, तो यह जीवनसाथी के स्वास्थ्य और जीवन के लिए गंभीर संकट उत्पन्न कर सकती है। यह प्रभाव वैवाहिक जीवन में अत्यधिक कलह और हिंसा को जन्म दे सकता है।Rahu's Aspect
सप्तम भाव पर राहु की `Drishti` जातक के वैवाहिक जीवन में भ्रम, अविश्वास और अनैतिक प्रवृत्तियों को जन्म दे सकती है। यह शनि के अनुशासित प्रभाव को बिगाड़कर जातक को अपरंपरागत संबंधों की ओर धकेल सकती है, जिससे सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंच सकती है।Ketu's Aspect
सप्तम भाव पर केतु की `Drishti` जातक को वैवाहिक सुख से पूरी तरह विमुख कर सकती है। यह जातक के भीतर अपने जीवनसाथी के प्रति अत्यधिक असंतोष और अलगाव की भावना पैदा करती है, जिससे अंततः संबंध विच्छेद या मानसिक संन्यास की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।Strength and Condition
Baladi Avastha
- Bala Avastha (0-6 डिग्री): विषम राशियों में कमजोर, सम राशियों में मजबूत।
- Yuva Avastha (12-18 डिग्री): पूर्ण फल प्रदान करने वाली अवस्था।
- Mrita Avastha (24-30 डिग्री): विषम राशियों में मृतप्राय, सम राशियों में अत्यंत सक्रिय।
Ashtakavarga
- उच्च बिंदु (High Bindus): सप्तम भाव में शनि के नकारात्मक प्रभावों को कम करते हैं और वैवाहिक स्थिरता प्रदान करते हैं।
- निम्न बिंदु (Low Bindus): शनि के क्रूर प्रभावों को बढ़ाते हैं, जिससे विवाह में अत्यधिक देरी और व्यापार में हानि होती है।
Nakshatra
- नक्षत्र स्वामी की स्थिति: यदि शनि का नक्षत्र स्वामी कुंडली में मजबूत हो, तो शनि शुभ फल देता है।
- नक्षत्र की प्रकृति: नक्षत्र की प्रकृति शनि के व्यवहार और जातक के वैवाहिक जीवन की दिशा तय करती है।
Navamsha (D9)
- वर्गोत्तम स्थिति (Vargottama): यदि शनि `Navamsha` में भी मजबूत हो, तो वैवाहिक जीवन में स्थिरता बनी रहती है।
- नीच का नवमांश (Debilitated Navamsha): यदि शनि `Navamsha` में नीच का हो, तो जीवनसाथी के चरित्र और स्वास्थ्य में गिरावट आती है।
Condition of the 7th Lord
- सप्तमेश का बल: यदि सप्तमेश मजबूत हो, तो शनि के बुरे प्रभाव निष्प्रभावी हो जाते हैं।
- सप्तमेश की कमजोरी: यदि सप्तमेश निर्बल या पीड़ित हो, तो शनि वैवाहिक जीवन को पूरी तरह से नष्ट कर सकता है।
In the KP System
कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) के अनुसार, सप्तम भाव के फल मुख्य रूप से सप्तम भाव के उप-स्वामी (Sub-Lord) द्वारा निर्धारित होते हैं। यदि सप्तम भाव का उप-स्वामी शनि हो और वह कुंडली के दूसरे, सातवें और ग्यारहवें भावों का कार्येश (Significator) बन रहा हो, तो जातक का विवाह निश्चित रूप से संपन्न होता है, भले ही उसमें कुछ देरी हो। केपी पद्धति में उप-स्वामी को राशि स्वामी से अधिक महत्व दिया जाता है क्योंकि यह घटना की सूक्ष्म और सटीक पुष्टि करता है। यदि शनि इन शुभ भावों से जुड़ता है, तो यह जातक को एक वफादार, अनुशासित और दीर्घायु जीवनसाथी प्रदान करता है।Practical Significations
Marriage and Partnerships
- विवाह में विलंब: शनि की उपस्थिति आमतौर पर 28 से 36 वर्ष की आयु के बीच विवाह संपन्न कराती है।
- स्थिरता: यह संबंधों को एक मजबूत और व्यावहारिक आधार प्रदान करता है, जिससे तलाक की संभावना कम होती है।
Business and Trade
- धीमी प्रगति: व्यापार में शुरुआत में धीमी प्रगति होती है, लेकिन दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित होती है।
- लोहा और मशीनरी: जातक को लोहे, तेल, कोयले या भारी मशीनरी के व्यापार में बड़ी सफलता मिलती है।
Frequently Asked Questions
क्या सप्तम भाव में शनि हमेशा वैवाहिक जीवन को बर्बाद करता है?
सप्तम भाव में शनि होने पर विवाह में कितनी देरी होती है?
क्या सप्तम भाव का शनि जीवनसाथी की मृत्यु का कारण बन सकता है?
सप्तम भाव में शनि के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
क्या सप्तम भाव का शनि व्यापार के लिए अच्छा है?
सप्तम भाव में शनि होने पर जीवनसाथी कैसा मिलता है?
Remedial Measures
Standard Remedies for Saturn
- आध्यात्मिक उपाय: प्रत्येक शनिवार को शनि देव के बीज मंत्र "ॐ शं शनैश्चराय नमः" का 108 बार जाप करें। शनिवार की शाम को पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
- व्यवहारिक उपाय: अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों, मजदूरों और समाज के गरीब वर्ग के लोगों का हमेशा सम्मान करें और उन्हें समय पर उनकी मजदूरी दें। कभी भी किसी असहाय व्यक्ति को न सताएं।
- दान कार्य: शनिवार के दिन काली उड़द की दाल, काला तिल, सरसों का तेल, लोहे के बर्तन या काले कपड़ों का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को करें।
- रत्न चिकित्सा: शनि का मुख्य रत्न नीलम (Blue Sapphire) है। इसे केवल तभी धारण करना चाहिए जब शनि आपकी कुंडली में वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर या कुंभ Lagna के लिए एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (functional benefic) हो। यदि शनि मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु या मीन Lagna के लिए कार्यात्मक अशुभ ग्रह (functional malefic) है, तो नीलम पहनने से बचें, क्योंकि यह पीड़ा को और अधिक बढ़ा सकता है।
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Sources consulted
The 57 classical and modern works consulted while compiling this entry. Statements held by a single text are attributed to that text in the body above.
These works are listed as sources consulted, not as material reproduced. Positions are summarised in our own words; no passage is quoted from a work still in copyright, and no translation is reproduced. Titles name the work a position is drawn from and imply no endorsement by its author or publisher. Where a reading rests on one text alone, treat it as that text's position rather than settled doctrine.
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