Saturn in the 4th House

50 min read · Drawn from 62 classical and modern works · Updated August 2026

वैदिक ज्योतिष में, शनि ग्रह जिसे संस्कृत में Shani (Graha) कहा जाता है, जब चतुर्थ भाव यानी Chaturtha Bhava में स्थित होता है, तो यह जातक के जीवन पर एक अत्यंत गहरा और स्थायी प्रभाव डालता है। चतुर्थ भाव मुख्य रूप से माता, घर, भूमि, वाहन, पारिवारिक सुख और आंतरिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है, जो कि मोक्ष (Moksh) का आधार भी माना जाता है। दूसरी ओर, शनि अनुशासन, विलंब, संरचना, कड़ी मेहनत और कर्म का कारक (Karaka) है। चतुर्थ भाव में शनि की यह स्थिति जीवन में सुरक्षा की गहरी आवश्यकता, पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण और आंतरिक शांति के लिए निरंतर संघर्ष या साधना को जन्म देती है। यह संयोजन जातक के जीवन में क्या परिणाम उत्पन्न करेगा, यह पूरी तरह से इस Graha की गरिमा, राशि स्थिति और इस पर पड़ने वाले शुभ या अशुभ पहलुओं (Drishti) पर निर्भर करता है। शास्त्रीय ग्रंथ इन परिणामों को बहुत ही स्पष्ट और कभी-कभी कठोर शब्दों में वर्णित करते हैं, लेकिन हमें यह याद रखना चाहिए कि कोई भी एकल स्थिति पूरी कुंडली के संदर्भ के बिना पूर्ण परिणाम नहीं दर्शाती है; गंभीर परिणाम केवल तभी प्रकट होते हैं जब कुंडली में कई अन्य पुष्टिकारक पीड़ित स्थितियां मौजूद हों।

Classical Position

चूंकि इस विशिष्ट स्थिति के लिए उपलब्ध शास्त्रीय साक्ष्यों में पूर्ण सर्वसम्मति (दो या अधिक स्वतंत्र ग्रंथों द्वारा प्रमाणित तथ्य) का अभाव है, इसलिए ज्योतिषीय परंपरा में इस स्थान को लेकर विभिन्न और कभी-कभी विरोधाभासी दृष्टिकोण पाए जाते हैं। सामान्य तौर पर, शास्त्रीय ग्रंथ चतुर्थ भाव में शनि (Shani) की उपस्थिति को मिश्रित दृष्टिकोण से देखते हैं। Phaladeepika के अनुसार, चतुर्थ भाव में शनि की स्थिति जातक के घर, सम्मान, माता के सुख में कमी ला सकती है और बचपन में बीमारी का कारण बन सकती है। यह ग्रंथ इस स्थिति को जीवन के प्रारंभिक भाग में संघर्ष का सूचक मानता है। इसके विपरीत, Scientific Hindu Astrology जैसे आधुनिक और कुछ शास्त्रीय दृष्टिकोणों में यह माना गया है कि चतुर्थ भाव में शनि जातक को भगवान शिव का भक्त, अच्छे गुणों से युक्त, बुद्धिमान, क्षमाशील स्वभाव वाला, सुखी और संत प्रवृत्ति का बनाता है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि चतुर्थ भाव में शनि का प्रभाव पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस राशि में है और उस पर किन ग्रहों का प्रभाव है। परंपरा में यह माना जाता है कि यदि शनि शुभ स्थिति में हो, तो वह जातक को गंभीर और अनुशासित बनाता है, जबकि पीड़ित होने पर वह मानसिक अशांति और पारिवारिक अलगाव का कारण बनता है।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय और नाड़ी ग्रंथों में चतुर्थ भाव में शनि की स्थिति को लेकर कई विशिष्ट और भिन्न भविष्यवाणियां दी गई हैं। इन विभिन्न दृष्टिकोणों को नीचे दी गई श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

Physical Appearance and Health

  • क्रोनिक बीमारियां: Kalamsa and Cuspal Interlinks के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में रोग उत्पन्न करने वाले ग्रह का संबंध शनि (Shani) से हो, तो वह बीमारी दीर्घकालिक या क्रोनिक (Chronic) हो जाती है, जिससे जातक को लंबे समय तक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ता है।
  • हृदय रोग और अल्सर: Jatak Alankaar के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में मंगल (Kuja), शनि (Shani) और बृहस्पति (Guru) एक साथ स्थित हों, तो जातक को हृदय रोग और गंभीर अल्सर का सामना करना पड़ सकता है।
  • दांतों की समस्या: K.P. Reader 3: Predictive Stellar Astrology के अनुसार, यदि द्वितीय भाव का उप-स्वामी (Sub Lord) शनि से जुड़ा हो, तो जातक को दांतों के दर्द या मसूड़ों की समस्या हो सकती है।
  • हड्डियों के विकार: Arudha Pada के अनुसार, यदि शनि, राहु (Rahu) और सूर्य (Surya) उपपद (Upapada) से दूसरे भाव को प्रभावित करते हैं, तो जातक को हड्डियों से संबंधित विकारों का सामना करना पड़ सकता है।

Temperament and Mental State

  • भावनाओं को छिपाना: 300 Important Combinations के अनुसार, चतुर्थ भाव में शनि, मंगल या राहु जैसे क्रूर ग्रहों की उपस्थिति जातक को अपनी भावनाओं को छिपाने वाला और अशुद्ध हृदय वाला बना सकती है।
  • परंपराओं की उपेक्षा: Scientific Hindu Astrology के अनुसार, चतुर्थ भाव में शनि जातक को अपनी जाति या कुल की परंपराओं का पालन न करने वाला, माता को कष्ट देने वाला और चालाक या धूर्त स्वभाव का बना सकता है।
  • मानसिक अशांति और अलगाव: Western Astrology - Planets in Signs and Houses के अनुसार, चतुर्थ भाव में शनि होने से जातक माता-पिता से अलगाव, अस्थिरता का भय और सेवानिवृत्ति के बाद भी काम करने की आवश्यकता महसूस करता है।

Wealth, Status and Life Events

  • अवैध धन संचय: Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में अष्टमेश और नवमेश की युति हो और उसके साथ शनि भी बहुत निकटता से जुड़ा हो, तो जातक अवैध तरीकों से भारी मात्रा में धन संचय करता है।
  • पुराना और जर्जर घर: Phaladeepika के अनुसार, यदि चतुर्थेश चतुर्थ भाव में ही राहु और शनि के साथ स्थित हो, तो जातक का घर बहुत पुराना और जर्जर स्थिति में होता है।
  • संपत्ति और वाहन की प्राप्ति: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि दशमेश और शनि केंद्र में किसी शुभ ग्रह के साथ हों, और लग्नेश चतुर्थ भाव में स्थित हो, तो जातक संगीत वाद्ययंत्रों से सुसज्जित वाहन का स्वामी बनता है। Satyajatakam Dhruva Nadi के अनुसार, यदि लग्नेश चतुर्थ भाव में चतुर्थेश के साथ युति करता है, तो जातक को भूमि, भवन और वाहनों की प्राप्ति होती है।
  • माता को कष्ट या हानि: Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में नीच का शनि हो, वह अष्टमेश पर दृष्टि डालता हो और चतुर्थेश दशम भाव में हो, तो माता जातक का परित्याग कर देती है। इसके अतिरिक्त, यदि कृष्ण पक्ष का जन्म हो और दशम भाव में राहु, मंगल और शनि हों, जबकि चतुर्थ और सप्तम भाव में पापी ग्रह हों, तो जन्म के दो वर्ष के भीतर माता की मृत्यु हो सकती है।

Aspect and Directional Strength

चतुर्थ भाव में स्थित होकर, शनि (Shani) अपनी पूर्ण दृष्टि (Drishti) दशम भाव (10th House) पर डालता है। इसके अलावा, शनि की तीसरी दृष्टि छठे भाव (6th House) पर और दसवीं दृष्टि लग्न (1st House) पर भी पड़ती है। चूंकि शनि एक क्रूर (Krura) ग्रह है, इसलिए इसकी दृष्टि जिस भाव पर पड़ती है, वहां यह दबाव, अनुशासन और संघर्ष की स्थिति उत्पन्न करता है। दशम भाव पर शनि की पूर्ण दृष्टि जातक के करियर, सामाजिक प्रतिष्ठा और सार्वजनिक जीवन में अत्यधिक कड़ी मेहनत और जिम्मेदारी लाती है। Notable Horoscopes के अनुसार, दशम भाव पर शनि की दृष्टि जातक को एक महान दार्शनिक या वैज्ञानिक रहस्यवादी बना सकती है। यह दृष्टि जातक को अपने कार्यक्षेत्र में अत्यधिक अनुशासित और समर्पित रहने के लिए प्रेरित करती है, जिससे वह जीवन के उत्तरार्ध में बड़ी सफलता प्राप्त करता है। दिशात्मक बल यानी Digbala की बात करें, तो शनि प्रथम भाव (1st House) में सबसे मजबूत होता है, जहां उसे पूर्ण Digbala प्राप्त होता है। चतुर्थ भाव में शनि दिशात्मक बल से रहित होता है। चतुर्थ भाव में होने के कारण शनि जातक को घरेलू जीवन में संघर्ष दे सकता है, लेकिन यदि वह शुभ स्थिति में हो, तो जातक को संपत्ति का सुख और गहरा आध्यात्मिक दृष्टिकोण भी प्रदान करता है।

The Placement Across the Twelve Rashis

चतुर्थ भाव में शनि की स्थिति बारह राशियों में अलग-अलग परिणाम देती है। प्रत्येक राशि में शनि की गरिमा और उसके स्वामित्व वाले भावों के आधार पर इसके प्रभावों का विश्लेषण नीचे दिया गया है:

Aries (Mesha)

चतुर्थ भाव में Saturn in Aries (मेष राशि) होने पर शनि अपनी नीच (Debilitated) अवस्था में होता है। इस राशि का स्वामी मंगल (Kuja) है। यह स्थिति मकर (Capricorn) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि प्रथम और द्वितीय भाव का स्वामी होता है। जब प्रथम और द्वितीय भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में नीच का होकर बैठता है, तो यह जातक के स्वास्थ्य, संचित धन और पारिवारिक सुख में बाधा उत्पन्न करता है।

  • Chandra Kala Nadi के अनुसार, यदि जातक की आयु 27 या 33 वर्ष हो और शनि मेष राशि में स्थित हो, तो पिता के लिए गंभीर संकट या मृत्यु का भय होता है।
  • Western Astrology - Planets in Signs and Houses के अनुसार, मेष राशि का शनि जातक को सिरदर्द और दांतों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील बनाता है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, मेष राशि में शनि होने पर जातक का व्यावसायिक झुकाव मशीनरी, इंजीनियरिंग, सैन्य या पुलिस विभागों की ओर होता है।

इस प्रकार, मेष राशि में नीच का शनि चतुर्थ भाव में होने से जातक को मानसिक शांति की कमी, माता के स्वास्थ्य की चिंता और घरेलू जीवन में अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। हालांकि, तकनीकी क्षेत्रों में करियर के लिए यह स्थिति सहायक हो सकती है।

Taurus (Vrishabha)

चतुर्थ भाव में Saturn in Taurus (वृषभ राशि) होने पर शनि अपने मित्र शुक्र (Shukra) की राशि में अनुकूल (Friendly) स्थिति में होता है। यह स्थिति कुंभ (Aquarius) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि द्वादश और प्रथम भाव का स्वामी होता है।

  • Western Astrology - Planets in Signs and Houses के अनुसार, वृषभ राशि का शनि जातक को सुरक्षित महसूस करने के लिए बुनियादी भौतिक और वित्तीय सुरक्षा की आवश्यकता देता है; यदि इस सुरक्षा को खतरा हो, तो जातक अत्यधिक चिंतित हो जाता है।
  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, वृषभ राशि में शनि जातक को अत्यधिक बुद्धिमान, समस्याओं को सुलझाने में कुशल और अपनी Dasha के दौरान भूमि, संपत्ति और वित्त से संबंधित कानूनी विवादों में सफलता कराने वाला बनाता है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यह स्थिति बैंकिंग, वित्त या सॉफ्टवेयर क्षेत्र में करियर की ओर संकेत करती है।

चूंकि शुक्र शनि का परम मित्र है, इसलिए यह स्थिति जातक को एक मजबूत और सुरक्षित घर बनाने की प्रेरणा देती है। जातक अपने जीवन के उत्तरार्ध में संपत्ति और वित्तीय स्थिरता प्राप्त करने में सफल रहता है।

Gemini (Mithuna)

चतुर्थ भाव में Saturn in Gemini (मिथुन राशि) होने पर शनि अपने मित्र बुध (Budha) की राशि में अनुकूल (Friendly) स्थिति में होता है। यह स्थिति मीन (Pisces) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि एकादश और द्वादश भाव का स्वामी होता है।

  • Bhrighu Nadi Jyotisham के अनुसार, यदि जन्म कुंडली में शनि मिथुन राशि में हो और गोचर का शनि वृषभ राशि के अंतिम भाग से गुजर रहा हो, और उस समय चतुर्थ भाव के स्वामी की महादशा में केतु की भुक्ति (Bhukti) चल रही हो, तो जातक की माता को गंभीर संकट या मृत्यु तुल्य कष्ट का सामना करना पड़ता है।

चूंकि मिथुन एक वायु तत्व और बौद्धिक राशि है, इसलिए यहाँ शनि जातक को एक गंभीर और विचारशील मन देता है। हालांकि, एकादश और द्वादश भाव का स्वामी होने के कारण, चतुर्थ भाव में शनि जातक के घरेलू वातावरण में कुछ अलगाव या खर्चों की अधिकता ला सकता है।

Cancer (Karka)

चतुर्थ भाव में Saturn in Cancer (कर्क राशि) होने पर शनि अपने शत्रु चंद्रमा (Chandra) की राशि में प्रतिकूल (Inimical) स्थिति में होता है। यह स्थिति मेष (Aries) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि दशम और एकादश भाव का स्वामी होता है।

  • K.P. Reader 3 के अनुसार, कर्क राशि में शनि की स्थिति माता के स्वास्थ्य और दीर्घायु को सीधे प्रभावित करती है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, कर्क राशि में शनि जातक को नर्सिंग, मानव सेवा, कृषि, ललित कला या तरल पदार्थों से संबंधित व्यवसायों की ओर ले जाता है, लेकिन इसमें धोखे की संभावना भी बनी रहती है।

चूंकि कर्क राशि हृदय और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए यहाँ शनि की शत्रुवत स्थिति जातक को भावनात्मक रूप से शुष्क या असुरक्षित महसूस करा सकती है। जातक को अपनी माता के साथ संबंधों में दूरी या शीतलता का अनुभव हो सकता है।

Leo (Simha)

चतुर्थ भाव में Saturn in Leo (सिंह राशि) होने पर शनि अपने परम शत्रु सूर्य (Surya) की राशि में प्रतिकूल (Inimical) स्थिति में होता है। यह स्थिति वृषभ (Taurus) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि नवम और दशम भाव का स्वामी होता है।

  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, सिंह राशि में शनि की उपस्थिति जातक की Dasha के दौरान गंभीर घरेलू कलह, जीवनसाथी और बच्चों से संभावित अलगाव और पुराने सिरदर्द का कारण बन सकती है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, जातक का करियर सरकारी सेवा, प्रबंधन, चिकित्सा या इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में हो सकता है।

सूर्य की राशि में शनि का होना जातक के अहंकार और घरेलू शांति के बीच टकराव पैदा करता है। नवमेश और दशमेश होने के बावजूद, चतुर्थ भाव में इसकी शत्रुवत स्थिति जातक को पारिवारिक सुख से वंचित कर सकती है और उसे घर से दूर रहने पर मजबूर कर सकती है।

Virgo (Kanya)

चतुर्थ भाव में Saturn in Virgo (कन्या राशि) होने पर शनि अपने मित्र बुध (Budha) की राशि में अनुकूल (Friendly) स्थिति में होता है। यह स्थिति मिथुन (Gemini) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि अष्टम और नवम भाव का स्वामी होता है।

  • Western Astrology - Planets in Signs and Houses के अनुसार, कन्या राशि में शनि जातक को मनोवैज्ञानिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए व्यवस्थित और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण देता है।
  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, कन्या राशि में शनि की Dasha जातक को वित्तीय, बैंकिंग या ब्रोकरेज के मामलों में शामिल करती है और करियर में स्थिरता प्रदान करती है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यह स्थिति रियल एस्टेट, शेयर बाजार या कृषि-उद्योग में करियर की ओर ले जाती है।

चूंकि कन्या एक व्यावहारिक राशि है, इसलिए चतुर्थ भाव में शनि जातक को भूमि और संपत्ति के प्रबंधन में अत्यधिक कुशल बनाता है। अष्टमेश और नवमेश होने के कारण, यह जातक को पैतृक संपत्ति से लाभ भी दिला सकता है, हालांकि इसके लिए अत्यधिक प्रयास करने पड़ते हैं।

Libra (Tula)

चतुर्थ भाव में Saturn in Libra (तुला राशि) होने पर शनि अपनी उच्च (Exalted) अवस्था में होता है। इस राशि का स्वामी शुक्र (Shukra) है। यह स्थिति कर्क (Cancer) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि सप्तम और अष्टम भाव का स्वामी होता है।

  • Western Astrology - Planets in Signs and Houses के अनुसार, तुला राशि में शनि होने पर जातक को सुरक्षा के लिए एक साथी की आवश्यकता होती है, लेकिन साथ ही उसे अपने साथी को खोने का गहरा डर भी सताता है।
  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, तुला राशि में उच्च का शनि जातक को उसकी Dasha के दौरान अत्यधिक वित्तीय भाग्य, आभूषणों और रत्नों के व्यापार में सफलता और महान समृद्धि प्रदान करता है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यह कानून, फैशन, इंजीनियरिंग या ऑटोमोटिव क्षेत्रों में करियर का संकेत देता है।

चतुर्थ भाव में उच्च का शनि जातक को एक मजबूत, सुंदर और स्थायी घर प्रदान करता है। जातक समाज में उच्च प्रतिष्ठा और सम्मान प्राप्त करता है, और उसका पारिवारिक जीवन अनुशासित लेकिन समृद्ध होता है।

Scorpio (Vrischika)

चतुर्थ भाव में Saturn in Scorpio (वृश्चिक राशि) होने पर शनि अपने शत्रु मंगल (Kuja) की राशि में प्रतिकूल (Inimical) स्थिति में होता है। यह स्थिति सिंह (Leo) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि छठे और सातवें भाव का स्वामी होता है।

  • Western Astrology - Planets in Signs and Houses के अनुसार, वृश्चिक राशि का शनि जातक में दूसरों से दूरी बनाए रखने के लिए झगड़ा करने की प्रवृत्ति पैदा करता है।
  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यह स्थिति जातक के चरित्र और सामाजिक स्थिति को गहराई से प्रभावित करती है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, वृश्चिक राशि में शनि होने पर जातक का करियर मशीनरी, इंजीनियरिंग, भूमि प्रबंधन या गुप्त अन्वेषण (जैसे गुप्त पुलिस या भूमिगत कार्य) से जुड़ा हो सकता है।

चूंकि वृश्चिक एक रहस्यमयी और परिवर्तनकारी राशि है, इसलिए चतुर्थ भाव में शनि जातक के मन में गहरे डर और असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है। जातक को अपने घरेलू जीवन में अचानक आने वाले उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है।

Sagittarius (Dhanu)

चतुर्थ भाव में Saturn in Sagittarius (धनु राशि) होने पर शनि अपने तटस्थ (Neutral) मित्र बृहस्पति (Guru) की राशि में स्थित होता है। यह स्थिति कन्या (Virgo) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि पंचम और छठे भाव का स्वामी होता है।

  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, धनु राशि में शनि की उपस्थिति जातक को उसकी Dasha के दौरान उद्यमों में सफलता, एक जुझारू भावना और एक सक्रिय व सुखी जीवन प्रदान करती है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यह स्थिति कानून, बैंकिंग, शिक्षण या प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में करियर की ओर ले जाती है।

धनु राशि में शनि जातक को एक दार्शनिक और अनुशासित दृष्टिकोण देता है। चतुर्थ भाव में होने के कारण, यह जातक को धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में रुचि प्रदान करता है, जिससे जातक को आंतरिक शांति प्राप्त करने में मदद मिलती है।

Capricorn (Makara)

चतुर्थ भाव में Saturn in Capricorn (मकर राशि) होने पर शनि अपनी स्वराशि (Own Sign) में स्थित होता है। यह स्थिति तुला (Libra) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि चतुर्थ और पंचम भाव का स्वामी होता है।

  • Jatak Alankaar के अनुसार, मकर राशि में शनि होने पर जातक बहुत ही मृदुभाषी (Soft-spoken) होता है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, मकर राशि का शनि उर्वरक, तेल, खनन, रेस्तरां, खाद्य सामग्री, मशीनरी, कृषि या जल प्रबंधन से जुड़े व्यवसायों की ओर संकेत करता है।
  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यह स्थिति जातक को वित्तीय और व्यावसायिक मामलों में अत्यधिक सफल बनाती है।

चूंकि शनि यहाँ अपनी ही राशि में चतुर्थ भाव में स्थित है, इसलिए यह एक मजबूत नींव का निर्माण करता है। जातक को अपनी माता से गहरा लगाव होता है और वह अपने जीवन में भूमि, भवन और वाहनों का पूर्ण सुख प्राप्त करता है।

Aquarius (Kumbha)

चतुर्थ भाव में Saturn in Aquarius (कुंभ राशि) होने पर शनि अपनी मूलत्रिकोण (Moolatrikona) राशि में स्थित होता है। यह स्थिति वृश्चिक (Scorpio) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि तृतीय और चतुर्थ भाव का स्वामी होता है।

  • The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, कुंभ राशि में शनि का होना जातक को गृह स्वामित्व और घरेलू शांति प्रदान करता है।
  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, कुंभ राशि में शनि जातक को ज्योतिष, अध्यात्म, शिक्षण, मनोविज्ञान, अनुसंधान या विज्ञान के क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करता है।

मूलत्रिकोण राशि में होने के कारण, चतुर्थ भाव में शनि का प्रभाव अत्यंत शुभ और शक्तिशाली हो जाता है। जातक समाज में एक बुद्धिमान और सम्मानित व्यक्ति के रूप में स्थापित होता है, और उसे अपने प्रयासों से भूमि और संपत्ति का प्रचुर लाभ मिलता है।

Pisces (Meena)

चतुर्थ भाव में Saturn in Pisces (मीन राशि) होने पर शनि अपने तटस्थ (Neutral) मित्र बृहस्पति (Guru) की राशि में स्थित होता है। यह स्थिति धनु (Sagittarius) लग्न को दर्शाती है, जहां शनि द्वितीय और तृतीय भाव का स्वामी होता है।

  • Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, मीन राशि में शनि होने पर जातक का करियर कानून, चिकित्सा, इतिहास, धर्म, बैंकिंग या दर्शनशास्त्र से जुड़ा हो सकता है।
  • My Experiences in Astrology के अनुसार, यदि गोचर का शनि मीन राशि में हो और वह कुंडली के चंद्रमा और बुध को प्रभावित कर रहा हो, तो जातक को मनोदैहिक (Psycho-somatic) समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

चूंकि मीन राशि के लिए शास्त्रीय साक्ष्य अपेक्षाकृत सीमित हैं, इसलिए हम कह सकते हैं कि यहाँ का परिणाम मुख्य रूप से बृहस्पति की स्थिति पर निर्भर करता है। मीन राशि में शनि जातक को एक शांत, एकांतप्रिय और आध्यात्मिक स्वभाव देता है, जिससे जातक भौतिक संसार की तुलना में मानसिक और आध्यात्मिक शांति को अधिक महत्व देता है।

Conjunctions in This House

जब चतुर्थ भाव में शनि (Shani) के साथ अन्य ग्रह युति करते हैं, तो जीवन के विभिन्न क्षेत्रों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। नीचे विभिन्न ग्रहों के साथ शनि की युति के शास्त्रीय और व्युत्पन्न परिणाम दिए गए हैं:

Sun with Saturn

चतुर्थ भाव में Sun with Saturn (सूर्य और शनि की युति) को ज्योतिष में एक कठिन युति माना जाता है, क्योंकि ये दोनों आपस में शत्रु हैं। Scientific Hindu Astrology के अनुसार, यदि सूर्य और शनि चतुर्थ भाव में अस्त (Combust) न हों, तो यह युति जातक में दार्शनिक और धार्मिक प्रवृत्तियों का विकास करती है, जो तपस्वियों और योगियों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती है। हालांकि, यदि यह युति पीड़ित हो, तो यह पिता और माता दोनों के स्वास्थ्य के लिए कष्टकारी हो सकती है।

Moon with Saturn

चतुर्थ भाव में Moon with Saturn (चंद्रमा और शनि की युति) माता के सुख और मानसिक शांति को प्रभावित करती है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि चंद्रमा और शनि चतुर्थ भाव में एक साथ स्थित हों, तो जातक अत्यधिक धनी या राजा के समान जीवन जीने वाला बन सकता है। हालांकि, Saravali के अनुसार, यदि चंद्रमा पर शुभ ग्रहों की दृष्टि न हो और वह शनि या मंगल के साथ युति करे, तो यह माता के लिए अत्यंत अशुभ सिद्ध होता है।

Mars with Saturn

चतुर्थ भाव में Mars with Saturn (मंगल और शनि की युति) एक विस्फोटक और तनावपूर्ण स्थिति का निर्माण करती है। Mundane Astrology: Mediniya Jyotish के अनुसार, चतुर्थ भाव में मंगल और शनि की युति दुर्घटनाओं, विस्फोटों और सार्वजनिक आपदाओं का संकेत देती है। व्यक्तिगत स्तर पर, यह युति जातक के घरेलू जीवन में अत्यधिक कलह, क्रोध और माता के स्वास्थ्य में गंभीर गिरावट ला सकती है।

Mercury with Saturn

चतुर्थ भाव में Mercury with Saturn (बुध और शनि की युति) जातक के बौद्धिक विकास के लिए बहुत अनुकूल मानी जाती है। Notable Horoscopes के अनुसार, बुध और शनि की युति जातक को धैर्य, बुद्धि की स्थिरता, प्राचीन या पुरातत्व अध्ययनों के प्रति प्रेम और वैराग्य की ओर झुकाव प्रदान करती है। यह जातक को एक गंभीर विचारक और लेखक बना सकती है।

Jupiter with Saturn

चतुर्थ भाव में Jupiter with Saturn (बृहस्पति और शनि की युति) एक अत्यंत शुभ और संतुलित संयोजन है। Jatak Alankaar के अनुसार, यदि बृहस्पति और शनि चतुर्थ भाव में किसी पापी ग्रह के प्रभाव में हों, तो यह जातक को कुछ स्वास्थ्य समस्याएं दे सकता है, लेकिन सामान्य तौर पर यह युति जातक को धार्मिक, ज्ञानी, समाज में सम्मानित और अचल संपत्ति का स्वामी बनाती है।

Venus with Saturn

चतुर्थ भाव में Venus with Saturn (शुक्र और शनि की युति) जातक के वैवाहिक और भौतिक जीवन को प्रभावित करती है। Predictive Stellar Astrology के अनुसार, भवन निर्माण के संदर्भ में शुक्र और शनि की युति सीमेंट जैसे आधुनिक निर्माण सामग्रियों का प्रतिनिधित्व करती है। यदि यह युति शुभ हो, तो जातक को सुंदर और मजबूत मकान का सुख मिलता है, लेकिन पीड़ित होने पर यह वैवाहिक जीवन में नीरसता ला सकती है।

Rahu with Saturn

चतुर्थ भाव में Rahu with Saturn (राहु और शनि की युति) को 'शापित योग' या अत्यधिक तनावपूर्ण स्थिति माना जाता है। Phaladeepika के अनुसार, यदि चतुर्थेश चतुर्थ भाव में ही राहु और शनि के साथ स्थित हो, तो जातक का घर बहुत पुराना, टूटा-फूटा या जर्जर होता है। यह युति जातक के मन में गहरा भय, असुरक्षा और मानसिक अशांति पैदा करती है।

Ketu with Saturn

चतुर्थ भाव में Ketu with Saturn (केतु और शनि की युति) जातक को अत्यधिक वैराग्य और आध्यात्मिक खोज की ओर ले जाती है। केतु मोक्ष का कारक है और शनि अनुशासन का, इसलिए चतुर्थ भाव में इनकी युति जातक को सांसारिक सुखों से दूर कर सकती है। जातक अपने घर और परिवार से दूर रहकर एकांत में साधना करना पसंद कर सकता है।

Stellium (Three or More Planets)

चतुर्थ भाव में तीन या अधिक ग्रहों की युति (Stellium) जातक के पूरे जीवन का ध्यान घरेलू मामलों, संपत्ति या आंतरिक शांति पर केंद्रित कर देती है। Saravali के अनुसार, तीन पापी ग्रहों की युति जातक को अभागा, दरिद्र और दुखों से पीड़ित बना सकती है। हालांकि, यदि इसमें शुभ ग्रह शामिल हों, तो यह जातक को सन्यास (Sanyasa) या गहरे आध्यात्मिक मार्ग की ओर अग्रसर करती है।

Aspects Received

चतुर्थ भाव में स्थित शनि (Shani) पर जब अन्य ग्रहों की दृष्टि पड़ती है, तो इसके परिणामों में महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं:

Jupiter's Aspect

बृहस्पति (Guru) की शुभ दृष्टि शनि पर पड़ने से शनि के नकारात्मक प्रभावों में भारी कमी आती है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि बृहस्पति की दृष्टि सूर्य-शनि के संयोजन पर पड़ती है, तो जातक के स्वास्थ्य संबंधी विकार और संतान को लेकर होने वाली चिंताएं पूरी तरह से दूर हो जाती हैं। यह दृष्टि जातक को समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाती है।

Saturn's Aspect

चूंकि शनि चतुर्थ भाव में स्थित है, इसलिए वह स्वयं को दृष्टि नहीं दे सकता। हालांकि, यदि चतुर्थ भाव का स्वामी (जो कि शनि की राशि का स्वामी हो) शनि पर दृष्टि डालता है, तो यह शनि की स्थिति को अत्यधिक मजबूत और स्थिर बनाता है।

Mars's Aspect

मंगल (Kuja) की दृष्टि शनि पर पड़ने से जातक के जीवन में अत्यधिक तनाव और दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। Medical Astrology: Horoscope of the Stethoscope के अनुसार, चतुर्थ भाव में स्थित मंगल पर यदि शनि की दृष्टि हो या मंगल की दृष्टि चतुर्थ भाव के शनि पर हो, तो जातक को हृदय रोग होने का खतरा रहता है। यह दृष्टि जातक के स्वभाव में उग्रता और घर में अशांति पैदा करती है।

Rahu's Aspect

राहु (Rahu) की दृष्टि चतुर्थ भाव के शनि पर होना अत्यंत प्रतिकूल माना जाता है। Notable Horoscopes के अनुसार, राहु और शनि का आपसी संबंध या दृष्टि संबंध जातक के जीवन में अचानक आने वाले संकटों, मानसिक भ्रम और अज्ञात भयों को जन्म देता है। यह जातक को अपने घर और मातृभूमि से दूर रहने के लिए मजबूर कर सकता है।

Ketu's Aspect

केतु (Ketu) की दृष्टि चतुर्थ भाव के शनि पर पड़ने से जातक में वैराग्य की भावना अत्यधिक तीव्र हो जाती है। यह दृष्टि जातक को भौतिक सुख-सुविधाओं, जैसे कि अच्छे मकान या वाहन के प्रति उदासीन बना देती है। जातक का झुकाव रहस्यमयी विद्याओं, ध्यान और आध्यात्मिक साधना की ओर बढ़ जाता है।

Strength and Condition

चतुर्थ भाव में शनि (Shani) के वास्तविक प्रभावों को समझने के लिए इसकी ताकत और स्थिति का आकलन करना अनिवार्य है। इसके लिए निम्नलिखित कारकों की जांच की जानी चाहिए:

Baladi Avastha

  • Odd Signs (विषम राशियां): मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ राशि में शनि की डिग्री के अनुसार अवस्था इस प्रकार होती है:
    • 0-6 डिग्री: बाल (Bala) अवस्था (कमजोर परिणाम)
    • 6-12 डिग्री: कुमार अवस्था
    • 12-18 डिग्री: युवा (Yuva) अवस्था (पूर्ण और मजबूत परिणाम)
    • 18-24 डिग्री: वृद्ध अवस्था
    • 24-30 डिग्री: मृत (Mrita) अवस्था (नगण्य परिणाम)
  • Even Signs (सम राशियां): वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन राशि में यह क्रम बिल्कुल विपरीत हो जाता है:
    • 0-6 डिग्री: मृत (Mrita) अवस्था
    • 6-12 डिग्री: वृद्ध अवस्था
    • 12-18 डिग्री: युवा (Yuva) अवस्था
    • 18-24 डिग्री: कुमार अवस्था
    • 24-30 डिग्री: बाल (Bala) अवस्था

Ashtakavarga

अष्टकवर्ग (Ashtakavarga) में चतुर्थ भाव को मिलने वाले बिंदु (bindu) यह तय करते हैं कि शनि यहाँ शुभ परिणाम देगा या अशुभ। यदि चतुर्थ भाव में शनि को उच्च बिंदु (28 या उससे अधिक) प्राप्त होते हैं, तो शनि के नकारात्मक प्रभावों में कमी आती है और जातक को भूमि व संपत्ति का सुख मिलता है। इसके विपरीत, कम बिंदु होने पर जातक को घरेलू अशांति और संपत्ति के नुकसान का सामना करना पड़ता है।

Nakshatra

शनि जिस नक्षत्र (Nakshatra) और उसके स्वामी के प्रभाव में होता है, वह परिणाम के रंग को बदल देता है। उदाहरण के लिए, यदि शनि राहु के नक्षत्र शतभिषा (Sathabhisha) में स्थित हो, तो परिणाम राहु की स्थिति के अनुसार बदलेंगे। नक्षत्र स्वामी की शुभता या अशुभता ही शनि के अंतिम परिणाम को निर्धारित करती है।

Navamsa (D9)

नवांश (Navamsha) कुंडली जन्म कुंडली के वादों की पुष्टि या उन्हें रद्द करती है। Notable Horoscopes के अनुसार, यदि कोई ग्रह जन्म कुंडली में नीच का हो, लेकिन नवांश में उसे लग्नेश की दृष्टि प्राप्त हो, तो उसका नीच भंग (Neecha Bhanga) हो जाता है। इसलिए, चतुर्थ भाव के शनि की वास्तविक शक्ति को जानने के लिए नवांश में उसकी स्थिति की जांच करना अत्यंत आवश्यक है।

Condition of the 4th Lord

चतुर्थ भाव के स्वामी (चतुर्थेश) की स्थिति यह तय करती है कि चतुर्थ भाव में बैठा शनि अपने परिणाम दे पाएगा या नहीं। यदि चतुर्थेश मजबूत, शुभ ग्रहों से युक्त और केंद्र या त्रिकोण में स्थित हो, तो शनि के पापी प्रभाव नियंत्रित रहते हैं। लेकिन यदि चतुर्थेश स्वयं पीड़ित, अस्त या शत्रु राशि में हो, तो चतुर्थ भाव के शनि के अशुभ परिणाम अत्यंत तीव्र हो जाते हैं।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में, चतुर्थ भाव के परिणाम केवल राशि स्वामी द्वारा तय नहीं होते, बल्कि चतुर्थ भाव के उप-स्वामी (Sub Lord) द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। Key to Learn K.P. Cuspal System के अनुसार, यदि उप-स्वामी की स्थिति अपने द्वारा दर्शाए गए भावों की तुलना में चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तो परिणाम प्रतिकूल प्राप्त होते हैं। यदि चतुर्थ भाव का उप-स्वामी शनि से जुड़ा हो, तो यह जातक के जीवन में संपत्ति की खरीद, शिक्षा और माता के सुख में विलंब या बाधा को दर्शाता है। हालांकि, यदि दशा स्वामी चतुर्थ और एकादश भाव का कार्येश (Significator) हो, तो शनि की दशा में जातक को संपत्ति का लाभ अवश्य होता है।

Practical Significations

व्यावहारिक रूप से, चतुर्थ भाव में शनि (Shani) की स्थिति को निम्नलिखित क्षेत्रों में देखा जा सकता है:

Home and Real Estate

  • संपत्ति की खरीद: Prasana A Contemporary Treatise के अनुसार, जब दशा, भुक्ति और अंतरा (Antara) के स्वामी चतुर्थ, एकादश और द्वादश भाव को दर्शाते हैं, और उसमें मंगल या शनि का प्रभाव होता है, तब जातक संपत्ति या भूमि की खरीद करता है।
  • निर्माण सामग्री: Predictive Stellar Astrology के अनुसार, घर के निर्माण में शनि और शुक्र का संबंध सीमेंट के उपयोग को दर्शाता है, जबकि मंगल और केतु ईंटों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

Education and Career

  • सिविल इंजीनियरिंग: Planets and Education Vol. 1 के अनुसार, चतुर्थ, पंचम और दशम भाव का संबंध यदि मंगल, शनि और बुध से हो, तो जातक सिविल इंजीनियरिंग या तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है।
  • धीमी प्रगति: चतुर्थ भाव में शनि जातक की प्रारंभिक शिक्षा में कुछ रुकावटें या विलंब दे सकता है, लेकिन यह जातक को तकनीकी और व्यावहारिक विषयों में गहरी समझ प्रदान करता है।

Frequently Asked Questions

क्या चतुर्थ भाव में शनि हमेशा अशुभ परिणाम देता है?
नहीं, चतुर्थ भाव में शनि हमेशा अशुभ नहीं होता। यदि शनि अपनी उच्च राशि (तुला) या स्वराशि (मकर/कुंभ) में हो, तो यह जातक को अपार संपत्ति, वाहन सुख और समाज में उच्च पद दिलाता है। अशुभ परिणाम केवल तभी मिलते हैं जब शनि नीच का हो या अत्यधिक पीड़ित हो।
क्या चतुर्थ भाव का शनि माता के जीवन को प्रभावित करता है?
हाँ, चतुर्थ भाव माता का भाव है और शनि यहाँ होने से माता के सुख में कमी या उनके स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि शनि के साथ चंद्रमा या चतुर्थेश भी पीड़ित हों, तो माता को गंभीर कष्ट या अलगाव का सामना करना पड़ता है।
क्या चतुर्थ भाव में शनि होने से जातक को अपना घर मिलता है?
हाँ, चतुर्थ भाव में शनि जातक को घर का सुख देता है, लेकिन यह सुख जीवन के उत्तरार्ध में या कड़ी मेहनत के बाद मिलता है। यदि शनि पीड़ित हो, तो जातक का घर पुराना या जर्जर हो सकता है, जबकि शुभ शनि होने पर जातक को मजबूत और स्थायी संपत्ति मिलती है।
चतुर्थ भाव में शनि होने पर करियर पर क्या प्रभाव पड़ता है?
चतुर्थ भाव का शनि दशम भाव पर पूर्ण दृष्टि डालता है, जिससे जातक को अपने करियर में अत्यधिक मेहनत करनी पड़ती है। यह स्थिति जातक को सिविल इंजीनियरिंग, रियल एस्टेट, कानून, कृषि या सरकारी विभागों में उच्च और स्थायी पद दिलाने में मदद करती है।
क्या चतुर्थ भाव में शनि मानसिक शांति को नष्ट करता है?
चतुर्थ भाव मन और आंतरिक शांति का है। यहाँ शनि की उपस्थिति जातक को गंभीर, विचारशील और कभी-कभी अकेलापन पसंद करने वाला बनाती है। यदि शनि पीड़ित हो, तो जातक को मानसिक तनाव या असुरक्षा की भावना हो सकती है, लेकिन शुभ होने पर यह गहरी आध्यात्मिक शांति देता है।
चतुर्थ भाव में शनि के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
चतुर्थ भाव में शनि के लिए तुला राशि सबसे अच्छी मानी जाती है, क्योंकि यहाँ शनि उच्च का होता है। इसके अलावा मकर और कुंभ राशियां भी अत्यंत शुभ परिणाम देती हैं, क्योंकि ये शनि की अपनी राशियां हैं और यहाँ शनि जातक को प्रचुर धन और संपत्ति प्रदान करता है।
क्या चतुर्थ भाव का शनि वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है?
हाँ, चतुर्थ भाव का शनि अपनी सातवीं दृष्टि से दशम भाव को देखता है और सप्तमेश या सप्तम भाव से संबंध होने पर विवाह में विलंब या जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद का कारण बन सकता है। हालांकि, यह वैवाहिक जीवन को स्थिरता भी प्रदान करता है।

Remedial Measures

चतुर्थ भाव में शनि (Shani) के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और इसके शुभ फलों को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित उपाय (Upaya) किए जा सकते हैं:
  • New Techniques of Prediction के अनुसार, यदि शनि के कारण कोई पुरानी या गंभीर बीमारी उत्पन्न हो रही हो, तो शनि से संबंधित धातु (जैसे लोहा या सीसा) के रासायनिक संयोजन वाली दवाओं का उपयोग करना चाहिए।
  • Essence of Nadi Astrology के अनुसार, यदि सूर्य-शनि की युति के कारण मान-प्रतिष्ठा में कमी आ रही हो, तो भगवान शिव की आराधना और बृहस्पति के मंत्रों का जाप करने से राहत मिलती है।

Standard Remedies for Saturn

  • आध्यात्मिक उपाय: प्रत्येक शनिवार को शनि देव को सरसों का तेल और काले तिल अर्पित करें। शनि स्तोत्र का पाठ करें और "ॐ शं शनैश्चराय नमः" मंत्र का नियमित रूप से 108 बार जाप करें। भगवान शिव को जल अर्पित करते हुए Arghya दें।
  • व्यवहारिक उपाय: अपने अधीन काम करने वाले कर्मचारियों, मजदूरों, वृद्धों और समाज के गरीब वर्ग के लोगों का सम्मान करें। उन्हें कभी भी प्रताड़ित न करें, क्योंकि शनि न्याय के देवता हैं और वे कमजोर लोगों की सेवा से अत्यंत प्रसन्न होते हैं।
  • दान कार्य: शनिवार के दिन काली उड़द की दाल, काले कपड़े, लोहे के बर्तन, सरसों का तेल या चप्पल का दान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को करें। शनिवार के दिन कौवों और काले कुत्तों को भोजन कराना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
  • रत्न चिकित्सा: शनि का मुख्य रत्न नीलम (Blue Sapphire) है। चेतावनी: नीलम रत्न केवल तभी धारण करना चाहिए जब शनि आपकी कुंडली में एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (Functional Benefic) हो, जैसे कि वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर या कुंभ लग्न के जातकों के लिए। मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु या मीन लग्न के जातकों के लिए, जहाँ शनि एक कार्यात्मक पापी ग्रह (Functional Malefic) होता है, नीलम धारण करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह कष्टों और बाधाओं को अत्यधिक बढ़ा सकता है।

चतुर्थ भाव में शनि की स्थिति जातक के जीवन को गहराई से प्रभावित करने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थिति है। जातक को अपनी कुंडली का विश्लेषण करते समय केवल इस एकल स्थिति को देखकर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए। इसके बजाय, जातक को शनि की राशि स्थिति, उसकी डिग्री, अष्टकवर्ग में प्राप्त बिंदु, नवांश कुंडली में उसकी स्थिति और चतुर्थ भाव के स्वामी की ताकत की पूरी जांच करनी चाहिए। इन सभी कारकों का समग्र रूप से अध्ययन करने के बाद ही जातक अपने जीवन में शनि के वास्तविक प्रभावों को समझ सकता है और उसके अनुसार सही दिशा में कदम उठा सकता है।

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Sources consulted

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