Mercury in the 4th House

42 min read · Drawn from 60 classical and modern works · Updated August 2026

वैदिक ज्योतिष में, बुध (Budha) को बुद्धि, संचार और तार्किक क्षमता का कारक माना जाता है, जबकि चतुर्थ भाव (Chaturtha Bhava), जिसे सुख भाव (Sukha Bhava) भी कहा जाता है, जातक की माता, गृह वातावरण, भूमि, वाहन और आंतरिक मानसिक शांति का प्रतिनिधित्व करता है। जब बुद्धि का यह कारक ग्रह चतुर्थ भाव में स्थित होता है, तो यह जातक के घरेलू जीवन और मानसिक चेतना पर गहरा प्रभाव डालता है। सामान्य तौर पर, यह संयोजन एक अत्यंत बौद्धिक, जिज्ञासु और विचारशील व्यक्तित्व का निर्माण करता है, जो अपने घर और पारिवारिक परिवेश में मानसिक संतुष्टि की खोज करता है। हालांकि, इस स्थिति के अंतिम परिणाम कुंडली में बुध की राशिगत गरिमा, युति और उस पर पड़ने वाले शुभ या अशुभ प्रभावों द्वारा निर्धारित होते हैं। वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रंथ अक्सर अत्यधिक और पूर्ण शब्दों में भविष्यवाणियां प्रस्तुत करते हैं; हालांकि, किसी भी कुंडली में एक अकेले ग्रह की स्थिति को अलगाव में नहीं पढ़ा जाना चाहिए, और ऐसे गंभीर परिणाम केवल तभी प्रकट होते हैं जब संपूर्ण कुंडली में कई अन्य पीड़ित करने वाले योग मौजूद हों।

Classical Position

शास्त्रीय ग्रंथों में चतुर्थ भाव में बुध की स्थिति को लेकर व्यापक रूप से सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाया गया है। Phaladeepika के अनुसार, चतुर्थ भाव में स्थित बुध जातक को उत्कृष्ट विद्या, तीक्ष्ण बुद्धि, अच्छे मित्र, प्रचुर धन और जीवन के सभी भौतिक सुख प्रदान करता है। एक अन्य शास्त्रीय स्रोत Scientific Hindu Astrology इस बात की पुष्टि करता है कि इस भाव में बुध जातक को अत्यंत विद्वान, सदाचारी, भाग्यशाली और दयालु बनाता है, साथ ही ऐसा जातक अपने ज्ञान और बुद्धि से दुष्टों का नाश करने में सक्षम होता है। चतुर्थ भाव में बुध की उपस्थिति जातक के विचारों में स्पष्टता और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, ऐसा जातक अपने परिवार और समाज में अपनी बौद्धिक क्षमताओं के कारण आदर प्राप्त करता है। हालांकि, ये सभी शुभ परिणाम तब और अधिक सुदृढ़ हो जाते हैं जब बुध पर किसी शुभ ग्रह का प्रभाव हो या वह अपनी अनुकूल राशि में स्थित हो।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय और नाड़ी ग्रंथों में चतुर्थ भाव में बुध की स्थिति के आधार पर कई विशिष्ट और भिन्न भविष्यवाणियां मिलती हैं, जिन्हें जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के अनुसार वर्गीकृत किया जा सकता है।

Physical Appearance and Health

  • शारीरिक रोग और दोष: एक शास्त्रीय चिकित्सा ज्योतिष ग्रंथ के अनुसार, यदि लग्न का स्वामी, मंगल और बुध एक साथ चतुर्थ भाव में स्थित हों और वे छठे भाव को प्रभावित कर रहे हों, तो यह जातक के मलाशय के निकट रोग होने का संकेत देता है।
  • पांडु रोग और कुष्ठ रोग: उसी चिकित्सा ज्योतिष परंपरा के अनुसार, यदि लग्न का स्वामी मंगल हो और वह बुध के साथ चतुर्थ भाव में युति करता है, तो जातक को पांडु रोग (एनीमिया) और कुष्ठ रोग जैसी गंभीर शारीरिक व्याधियों का सामना करना पड़ सकता है।
  • मानसिक और शारीरिक शिथिलता: यदि चतुर्थ भाव में बुध अत्यंत पीड़ित या अशुभ ग्रहों के प्रभाव में हो, तो यह जातक में मानसिक बेचैनी, फेफड़ों के रोग, अस्थमा और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याओं को जन्म दे सकता है।

Temperament and Mental State

  • सदाचारी और दयालु स्वभाव: शास्त्रीय स्रोतों के अनुसार, चतुर्थ भाव का बुध जातक को स्वभाव से अत्यंत दयालु, परोपकारी और धार्मिक कार्यों में रुचि रखने वाला बनाता है।
  • बौद्धिक चतुरता: ऐसा जातक अपनी वाकपटुता और हाजिरजवाबी के लिए जाना जाता है। वह कठिन परिस्थितियों में भी अपनी बुद्धि के बल पर मार्ग खोजने में सक्षम होता है।
  • वैवाहिक जीवन पर प्रभाव: My Experiences in Astrology नामक ग्रंथ में एक अनूठा विचार मिलता है कि यदि बुध वक्री हो और वह तीसरे, दसवें, चौथे और नौवें भाव के स्वामियों के साथ संबंध बना रहा हो, तो जातक के दादा और पिता के दो विवाह हो सकते हैं, लेकिन जातक का केवल एक ही विवाह होगा।

Wealth, Status and Life Events

  • गुप्त खजाना और भूमि लाभ: Satyajatakam Dhruva Nadi के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में ही स्थित हो और उसे तिर्यगमुख (तिरछा देखने वाले) ग्रहों (चंद्रमा, बुध, बृहस्पति और शुक्र) द्वारा देखा जा रहा हो, तो जातक को गुप्त खजाना या भूमिगत धन प्राप्त हो सकता है।
  • कृषि से आय: यदि चतुर्थ भाव का स्वामी चतुर्थ भाव में हो और उसे ऊर्ध्वमुख (ऊपर देखने वाले) ग्रहों (सूर्य और मंगल) द्वारा देखा जाए, तो जातक कृषि और फसलों के माध्यम से प्रचुर धन अर्जित करता है।
  • वाहन सुख: Jataka-Parijata के अनुसार, जब चतुर्थ भाव का स्वामी एक शुभ Navamsha में होकर बुध के साथ युति करता है और चतुर्थ भाव पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि होती है, तो जातक को उत्तम वाहनों का सुख प्राप्त होता है।
  • भवन निर्माण: Suka Nadi के अनुसार, यदि चंद्रमा और बुध चतुर्थ भाव में हों, बृहस्पति लग्न में हो, और शुक्र या लग्नेश उच्च राशि या केंद्रों में स्थित हों, तो जातक विशाल और महलनुमा भवनों का स्वामी बनता है।
  • दशा काल के नकारात्मक प्रभाव: इसके विपरीत, The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems में यह चेतावनी दी गई है कि चतुर्थ भाव में स्थित बुध की Dasha (महादशा) के दौरान जातक को अपने घरों और अनाजों के नुकसान, मानसिक अशांति, मातृ पक्ष के संबंधियों की मृत्यु, नौकरी छूटने और स्थान परिवर्तन का सामना करना पड़ सकता है।

Aspect and Directional Strength

चतुर्थ भाव में स्थित होकर, बुध अपनी पूर्ण Drishti (दृष्टि) दशम भाव (Dashama Bhava) पर डालता है, जो करियर, व्यवसाय, सामाजिक प्रतिष्ठा और पिता का प्रतिनिधित्व करता है। चूंकि बुध एक प्राकृतिक शुभ ग्रह है (जब तक कि वह पाप ग्रहों से युक्त न हो), दशम भाव पर इसकी दृष्टि जातक के व्यावसायिक जीवन को अत्यधिक प्रभावित करती है। यह दृष्टि जातक को अपने करियर में उत्कृष्ट संचार कौशल, लेखन क्षमता, संपादन, लेखांकन या परामर्श जैसे क्षेत्रों में सफलता प्रदान करती है। ऐसा जातक अपने कार्यक्षेत्र में अपनी बौद्धिक क्षमता और तार्किक कौशल के लिए जाना जाता है। दिशात्मक बल या Digbala (दिशा बल) के संदर्भ में, बुध प्रथम भाव (Lagna) में सबसे मजबूत होता है, जहां उसे पूर्ण दिशा बल प्राप्त होता है। चतुर्थ भाव में बुध को Digbala प्राप्त नहीं होता है, लेकिन चूंकि यह एक Kendra (केंद्र) भाव है, इसलिए बुध यहां अत्यंत शक्तिशाली और प्रभावी बना रहता है। प्रथम भाव में बुध जहां जातक के व्यक्तित्व को सीधे तौर पर निखारता है, वहीं चतुर्थ भाव में यह जातक की मानसिक शांति, शिक्षा और पारिवारिक सुख को सुदृढ़ करने में अपनी ऊर्जा केंद्रित करता है।

The Placement Across the Twelve Rashis

Aries (Mesha)

चतुर्थ भाव में Mercury in Aries होने पर यह मंगल की राशि में एक तटस्थ (neutral) स्थिति में होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna मकर (Capricorn) बनता है, जिससे बुध छठे (6th) और नौवें (9th) भाव का स्वामी होकर चतुर्थ भाव में बैठता है। Essence of Nadi Astrology के अनुसार, मेष राशि में बुध तकनीकी ज्ञान की खोज को दर्शाता है। हालांकि, पश्चिमी ज्योतिष के सिद्धांतों के अनुसार, मेष राशि का बुध जातक के मन को विषयों का गहराई से अध्ययन करने के बजाय उन पर त्वरित आक्रमण करने की प्रवृत्ति देता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, बुध की दशा के दौरान जातक का जीवन अस्थिर और गैर-जिम्मेदाराना हो सकता है, जिसमें बार-बार निवास स्थान और कार्य में परिवर्तन होता है। यह स्थिति दर्शाती है कि जातक को अपने भाग्य और ऋणों के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है।

Taurus (Vrishabha)

चतुर्थ भाव में Mercury in Taurus होने पर यह शुक्र की मित्र राशि में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna कुंभ (Aquarius) बनता है, जिससे बुध पांचवें (5th) और आठवें (8th) भाव का स्वामी बनता है। पश्चिमी ज्योतिष के अनुसार, वृषभ राशि में बुध जातक को भौतिक सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने और निरंतर संचार की आदतें प्रदान करता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि शुक्र और बुध दोनों वृषभ राशि में हों, तो जातक अत्यंत बौद्धिक प्रकार का होता है। हालांकि, The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, वृषभ राशि में बुध की दशा जातक को अनियंत्रित व्यवहार और वित्तीय फिजूलखर्ची की ओर ले जा सकती है। यह संयोजन दर्शाता है कि जातक की बुद्धि गहरी होगी, लेकिन उसे अपने गुप्त खर्चों और सट्टेबाजी की प्रवृत्तियों पर नियंत्रण रखना होगा।

Gemini (Mithuna)

चतुर्थ भाव में Mercury in Gemini होने पर यह अपनी स्वयं की राशि (own sign) में स्थित होता है, जिससे जातक का Lagna मीन (Pisces) बनता है। यहां बुध चतुर्थ (4th) और सातवें (7th) भाव का स्वामी होता है। Roots of Naadi Astrology के अनुसार, यदि मिथुन राशि में बुध पीड़ित न हो, तो जातक एक अत्यंत सभ्य, उदार और समाज में मान-सम्मान पाने वाला व्यक्ति होता है। Brihat Parashara Hora Shastra के अनुसार, मिथुन राशि में बुध जातक को पुत्र सुख, धन लाभ, पत्नी से सुख और भाग्य का उदय प्रदान करता है। हालांकि, The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इस अवधि में माता के साथ धन को लेकर कुछ मामूली विवाद या गलतफहमियां हो सकती हैं। यह स्थिति एक शक्तिशाली Bhadra Yoga का निर्माण करती है, जो जातक को संगीत, कला और लेखन में निपुण बनाती है।

Cancer (Karka)

चतुर्थ भाव में Mercury in Cancer होने पर यह चंद्रमा की शत्रु राशि (inimical sign) में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna मेष (Aries) बनता है, जिससे बुध तीसरे (3rd) और छठे (6th) भाव का स्वामी होता है। पश्चिमी ज्योतिष के अनुसार, कर्क राशि में बुध जातक को भावनात्मक छापों के आधार पर यादें संजोने की प्रवृत्ति देता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, चंद्रमा के घर में बुध का होना एक उज्ज्वल और तीक्ष्ण बुद्धि का संकेत है। Predictive Jyotish के अनुसार, ऐसा जातक मजाकिया, संगीत का शौकीन, कूटनीतिज्ञ और लचीला होता है। हालांकि, The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इसकी दशा के दौरान निवास स्थान और करियर में बार-बार बदलाव की संभावना बनी रहती है।

Leo (Simha)

चतुर्थ भाव में Mercury in Leo होने पर यह सूर्य की मित्र राशि में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna वृषभ (Taurus) बनता है, जिससे बुध दूसरे (2nd) और पांचवें (5th) भाव का स्वामी होता है। Predictive Jyotish के अनुसार, सिंह राशि में बुध जातक को थोड़ा घमंडी और घूमने-फिरने का शौकीन बना सकता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि सिंह राशि में सूर्य और बुध एक साथ हों, तो यह जातक के पिता के व्यावसायिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। यदि बुध सिंह राशि में हो और अगला भाव कन्या (उच्च राशि) हो, तो जातक दो शास्त्रों या विज्ञानों का ज्ञाता बनता है। यह स्थिति जातक को अपनी बुद्धि और वाणी के माध्यम से धन अर्जित करने में सक्षम बनाती है।

Virgo (Kanya)

चतुर्थ भाव में Mercury in Virgo होने पर यह अपनी उच्च राशि (exalted sign) में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna मिथुन (Gemini) बनता है, जिससे बुध प्रथम (1st) और चतुर्थ (4th) भाव का स्वामी होता है। Predictive Jyotish के अनुसार, बुध कन्या राशि में सबसे मजबूत होता है और अपने सभी सकारात्मक गुणों को प्रदर्शित करता है। जातक अत्यंत विद्वान, सदाचारी, वक्ता और उत्कृष्ट स्मृति शक्ति वाला होता है। शास्त्रीय योगों के अनुसार, यदि बुध केंद्र में और कन्या राशि में हो, तो यह जातक को मजबूत शारीरिक गठन, प्रसिद्धि, प्राचीन विद्याओं में निपुणता और दीर्घायु प्रदान करता है। यह स्थिति एक अत्यंत शुभ Bhadra Yoga का निर्माण करती है, जो जातक को जीवन के सभी सुख और वाहन प्रदान करती है।

Libra (Tula)

चतुर्थ भाव में Mercury in Libra होने पर यह शुक्र की मित्र राशि में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna कर्क (Cancer) बनता है, जिससे बुध बारहवें (12th) और तीसरे (3rd) भाव का स्वामी होता है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, तुला राशि में चतुर्थ भाव का बुध अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। हालांकि, इसकी दशा के परिणामों को लेकर ग्रंथों में मतभेद हैं। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के एक पाठ के अनुसार, तुला राशि में बुध की दशा उत्कृष्ट धन, आभूषणों की खरीद और वित्तीय सफलता लाती है; जबकि उसी ग्रंथ के दूसरे पाठ के अनुसार, यह खराब स्वास्थ्य, वजन घटने और करियर के प्रयासों में असफलता का कारण बन सकती है। यह विरोधाभास दर्शाता है कि जातक को स्वास्थ्य और करियर दोनों में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है।

Scorpio (Vrischika)

चतुर्थ भाव में Mercury in Scorpio होने पर यह मंगल की तटस्थ राशि में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna सिंह (Leo) बनता है, जिससे बुध ग्यारहवें (11th) और दूसरे (2nd) भाव का स्वामी होता है। पश्चिमी ज्योतिष के अनुसार, वृश्चिक राशि में बुध जातक को एक सूक्ष्म, खोजी मस्तिष्क और तीखी वाणी प्रदान करता है, जो जातक को एक अच्छा जासूस या लेखक बना सकती है। इसके विपरीत, Predictive Jyotish के अनुसार, यह स्थिति शारीरिक कमजोरी, कंजूसी, आलस्य और अनैतिक प्रवृत्तियों को भी जन्म दे सकती है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि वृश्चिक राशि में बुध के साथ राहु स्थित हो, तो जातक अपने व्यवहार में अत्यधिक धैर्यवान होता है, लेकिन उसकी औपचारिक शिक्षा में बाधाएं आ सकती हैं।

Sagittarius (Dhanu)

चतुर्थ भाव में Mercury in Sagittarius होने पर यह बृहस्पति की तटस्थ राशि में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna कन्या (Virgo) बनता है, जिससे बुध दसवें (10th) और प्रथम (1st) भाव का स्वामी होता है। पश्चिमी ज्योतिष के अनुसार, धनु राशि का बुध जातक को बड़ी तस्वीर (big picture) पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता देता है। Predictive Jyotish के अनुसार, यह स्थिति जातक को वेदों और शास्त्रों के ज्ञान के लिए प्रसिद्ध बनाती है और वह एक धार्मिक उपदेशक बन सकता है। हालांकि, Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि धनु राशि में चंद्रमा और बुध की युति हो, तो यह जातक की शैक्षणिक यात्रा में रुकावटें पैदा कर सकती है।

Capricorn (Makara)

चतुर्थ भाव में Mercury in Capricorn होने पर यह शनि की तटस्थ राशि में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna तुला (Libra) बनता है, जिससे बुध नौवें (9th) और बारहवें (12th) भाव का स्वामी होता है। Predictive Jyotish के अनुसार, मकर राशि में बुध जातक को एक व्यावहारिक व्यवसायी, मितव्ययी, चतुर और थोड़ा बेचैन स्वभाव का बनाता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि कन्या राशि में स्थित शनि मकर राशि के बुध से संपर्क बनाता है, तो यह जातक के शिक्षा और व्यापार से जुड़े करियर का संकेत देता है। यह स्थिति जातक को अपने घरेलू जीवन में अत्यधिक अनुशासित और व्यावहारिक बनाती है।

Aquarius (Kumbha)

चतुर्थ भाव में Mercury in Aquarius होने पर यह शनि की तटस्थ राशि में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna वृश्चिक (Scorpio) बनता है, जिससे बुध आठवें (8th) और ग्यारहवें (11th) भाव का स्वामी होता है। पश्चिमी ज्योतिष के अनुसार, कुंभ राशि का बुध जातक को अत्यधिक तीव्र गति से सूचनाओं को संसाधित करने की क्षमता देता है। हालांकि, Predictive Jyotish के अनुसार, शनि की राशि में होने के कारण बुध यहां पीड़ित हो सकता है, जिससे जातक में डरपोकपन या संकोची स्वभाव आ सकता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इसकी दशा के दौरान जातक को धन, पद और संपत्ति के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

Pisces (Meena)

चतुर्थ भाव में Mercury in Pisces होने पर यह अपनी नीच राशि (debilitated sign) में स्थित होता है। इस स्थिति में जातक का Lagna धनु (Sagittarius) बनता है, जिससे बुध सातवें (7th) और दसवें (10th) भाव का स्वामी होता है। Predictive Jyotish के अनुसार, मीन राशि में बुध जातक को चिड़चिड़ा, दूसरों पर निर्भर रहने वाला और कमजोर बुद्धि के कारण निम्न स्तर के कार्य करने की ओर प्रवृत्त कर सकता है, हालांकि उसमें देवताओं और ब्राह्मणों के प्रति सम्मान बना रहता है। The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, इसकी दशा शारीरिक बीमारी और चिकित्सा खर्चों के कारण वित्तीय नुकसान ला सकती है। हालांकि, नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, यदि इस नीच बुध का संबंध शुक्र या राहु जैसे मित्र ग्रहों से हो, तो इसकी नीचता का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।

Conjunctions in This House

Sun

चतुर्थ भाव में Mercury with Sun की युति होने पर प्रसिद्ध Budha-Aditya Yoga का निर्माण होता है। यह योग जातक को तीक्ष्ण बुद्धि, उत्कृष्ट तार्किक क्षमता और समाज में उच्च सम्मान प्रदान करता है। Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, सिंह या अन्य अनुकूल राशियों में यह युति जातक के पिता को व्यावसायिक रूप से अत्यधिक सफल और कूटनीतिज्ञ बनाती है।

Moon

चतुर्थ भाव में Mercury with Moon की युति होने पर जातक का मन और बुद्धि एक साथ काम करते हैं। Suka Nadi के अनुसार, यदि यह युति चतुर्थ भाव में हो और लग्न में बृहस्पति स्थित हो, तो जातक आलीशान महलों का स्वामी बनता है। हालांकि, Bhrigu Nandi Nadi के अनुसार, यदि यह युति धनु राशि में हो, तो जातक की शिक्षा में कुछ बाधाएं आ सकती हैं।

Mars

चतुर्थ भाव में Mercury with Mars की युति होने पर जातक का स्वभाव थोड़ा आक्रामक और तर्कप्रिय हो सकता है। चिकित्सा ज्योतिष के ग्रंथों के अनुसार, यदि लग्नेश मंगल हो और वह बुध के साथ चतुर्थ भाव में युति करे, तो जातक को त्वचा रोग या रक्त संबंधी विकारों का सामना करना पड़ सकता है। यह युति शिक्षा में अचानक रुकावटों का कारण भी बन सकती है।

Jupiter

चतुर्थ भाव में Mercury with Jupiter की युति को अत्यंत शुभ माना जाता है। Jataka Parijata के अनुसार, यदि चतुर्थेश, बृहस्पति और बुध केंद्र या त्रिकोण में स्थित हों, तो जातक भाग्य, विद्या और उच्च शिक्षा में पूर्णता प्राप्त करता है। यह युति जातक को एक महान शिक्षक, लेखक या सलाहकार बनाती है।

Venus

चतुर्थ भाव में Mercury with Venus की युति जातक को कला, संगीत और विलासिता के प्रति गहरा लगाव देती है। Vrishabha Vijaya Jyothisha Prakaasham के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव में शुक्र और बुध जैसे शुभ ग्रह स्थित हों और उन पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो जातक जीवन में सभी प्रकार के भौतिक सुखों और वाहनों का आनंद लेता है।

Saturn

चतुर्थ भाव में Mercury with Saturn की युति होने पर जातक के विचारों में गंभीरता और गहराई आती है। शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यह युति जातक को धैर्य, बौद्धिक दृढ़ता, प्राचीन इतिहास या पुरातत्व के प्रति प्रेम और वैराग्य की ओर झुकाव प्रदान करती है।

Rahu

चतुर्थ भाव में Mercury with Rahu की युति होने पर जातक की बुद्धि लीक से हटकर सोचने वाली होती है। नाड़ी ग्रंथों के अनुसार, वृश्चिक राशि में यह युति जातक को व्यवहार में अत्यधिक धैर्यवान बनाती है, लेकिन यह औपचारिक शिक्षा में कुछ व्यवधान या तकनीकी शिक्षा की ओर झुकाव पैदा कर सकती है।

Ketu

चतुर्थ भाव में Mercury with Ketu की युति जातक को मानसिक रूप से अंतर्मुखी और आध्यात्मिक बनाती है। ऐसा जातक सांसारिक सुखों के बजाय आंतरिक शांति और गूढ़ ज्ञान की खोज में अधिक रुचि रखता है। हालांकि, यह युति कभी-कभी माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं पैदा कर सकती है। यदि चतुर्थ भाव में तीन या अधिक ग्रहों की युति (Stellium) हो, तो जातक का संपूर्ण जीवन घरेलू मामलों, भूमि और आंतरिक मानसिक शांति के इर्द-गिर्द केंद्रित हो जाता है। हालांकि, Saravali के अनुसार, यदि पांच या छह ग्रह एक साथ चतुर्थ भाव में युति करते हैं, तो जातक को अत्यधिक दुखों, धन की कमी और मानसिक जड़ता का सामना करना पड़ सकता है।

Aspects Received

Jupiter

बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि जब चतुर्थ भाव में स्थित बुध पर पड़ती है, तो यह बुध के शुभ गुणों को अत्यधिक बढ़ा देती है। यह दृष्टि जातक को उच्च कोटि का विद्वान, न्यायप्रिय और समाज में सम्मानित बनाती है। यदि बुध पर बृहस्पति की शुभ दृष्टि हो, तो जातक की शिक्षा बिना किसी बाधा के पूर्ण होती है और उसे अपनी माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होता है।

Saturn

शनि की दृष्टि जब चतुर्थ भाव के बुध पर पड़ती है, तो यह जातक के विचारों में अनुशासन और गंभीरता लाती है। हालांकि, इसके नकारात्मक प्रभाव स्वरूप जातक को अपनी प्रारंभिक शिक्षा में देरी, मानसिक तनाव और माता के साथ वैचारिक मतभेदों का सामना करना पड़ सकता है। जातक का घरेलू वातावरण थोड़ा नीरस या अनुशासित हो सकता है।

Mars

मंगल की दृष्टि जब चतुर्थ भाव में स्थित बुध पर पड़ती है, तो यह जातक को अत्यधिक तर्कशील और कभी-कभी विवादप्रिय बनाती है। यह दृष्टि जातक के घरेलू जीवन में अशांति और भाई-बहनों के साथ मतभेद पैदा कर सकती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी अचानक से बड़े बदलाव या तकनीकी विषयों की ओर झुकाव देखा जा सकता है।

Rahu

राहु की दृष्टि बुध पर पड़ने से जातक की बुद्धि अत्यधिक कूटनीतिक और भ्रमित हो सकती है। जातक को इंटरनेट, कंप्यूटर विज्ञान या विदेशी भाषाओं के अध्ययन में विशेष सफलता मिल सकती है, लेकिन यह दृष्टि जातक के मन में एक अनजाना भय और घरेलू जीवन में असंतोष की भावना भी पैदा करती है।

Ketu

केतु की दृष्टि जब चतुर्थ भाव के बुध पर पड़ती है, तो यह जातक को सांसारिक सुखों से विरक्त करने का प्रयास करती है। जातक का झुकाव अध्यात्म, योग और ध्यान की ओर अधिक होता है। यह दृष्टि जातक को अपने परिवार और घर से दूर जाकर एकांत में रहने की प्रेरणा दे सकती है।

Strength and Condition

Baladi Avastha

बुध की अंशगत स्थिति जातक को मिलने वाले परिणामों की तीव्रता को निर्धारित करती है। इसके नियम विषम और सम राशियों में भिन्न होते हैं:
  • विषम राशियां (Aries, Gemini, Leo, Libra, Sagittarius, Aquarius): इन राशियों में बुध की अवस्था इस प्रकार होती है: 0-6 अंश पर बाल (Bala), 6-12 अंश पर कुमार (Kumara), 12-18 अंश पर युवा (Yuva), 18-24 अंश पर वृद्ध (Vridha), और 24-30 अंश पर मृत (Mrita)।
  • सम राशियां (Taurus, Cancer, Virgo, Scorpio, Capricorn, Pisces): इन राशियों में यह क्रम पूरी तरह से उलट जाता है: 0-6 अंश पर मृत (Mrita), 6-12 अंश पर वृद्ध (Vridha), 12-18 अंश पर युवा (Yuva), 18-24 अंश पर कुमार (Kumara), और 24-30 अंश पर बाल (Bala)।
युवा और कुमार अवस्था में बुध अपने पूर्ण परिणाम देने में सक्षम होता है, जबकि मृत और वृद्ध अवस्था में इसके शुभ प्रभावों में भारी कमी आती है।

Ashtakavarga

Ashtakavarga चार्ट में चतुर्थ भाव को मिलने वाले बिंदु बुध के शुभ प्रभावों को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि चतुर्थ भाव में 30 या उससे अधिक बिंदु हों, तो बुध जातक को उत्तम भूमि, आलीशान मकान, वाहन और माता का पूर्ण सुख प्रदान करता है। इसके विपरीत, यदि इस भाव में 25 से कम बिंदु हों, तो बुध के अनुकूल स्थिति में होने के बावजूद जातक को इन सुखों को प्राप्त करने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।

Nakshatra

बुध जिस नक्षत्र में स्थित होता है, उस नक्षत्र के स्वामी का प्रभाव भी बुध के परिणामों पर पड़ता है। यदि बुध अपने स्वयं के नक्षत्रों (Aslesha, Jyeshtha, Revati) में स्थित हो, तो यह जातक को अत्यधिक तीक्ष्ण बुद्धि और व्यापारिक सूझबूझ प्रदान करता है। नक्षत्र स्वामी की कुंडली में स्थिति यह तय करती है कि बुध की दशा जातक के लिए कितनी फलदायी होगी।

Navamsa (D9)

Navamsha कुंडली को मुख्य जन्म कुंडली के वादों की पुष्टि करने वाला माना जाता है। यदि बुध जन्म कुंडली (D1) में चतुर्थ भाव में बहुत अच्छी स्थिति में हो, लेकिन Navamsha (D9) में वह नीच का या शत्रु राशि में चला जाए, तो जातक को मिलने वाले शुभ परिणामों में कमी आ जाती है। इसके विपरीत, यदि बुध D1 में कमजोर हो लेकिन D9 में उच्च का हो जाए, तो जातक को जीवन के उत्तरार्ध में अप्रत्याशित सफलता प्राप्त होती है।

Condition of the 4th Lord

चतुर्थ भाव के स्वामी (चतुर्थेश) की स्थिति बुध के परिणामों को पूरी तरह से प्रभावित करती है। यदि चतुर्थेश स्वयं मजबूत होकर केंद्र या त्रिकोण में स्थित हो, तो बुध का चतुर्थ भाव में बैठना जातक के लिए वरदान साबित होता है। लेकिन यदि चतुर्थेश छठे, आठवें या बारहवें भाव में पीड़ित हो, तो बुध जातक को पूर्ण सुख प्रदान करने में असमर्थ रहता है।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में, किसी भी भाव के परिणामों को समझने के लिए उस भाव के उप-स्वामी (Sub-lord) की स्थिति को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। चतुर्थ भाव का उप-स्वामी ही यह तय करता है कि जातक को शिक्षा, संपत्ति और माता का सुख मिलेगा या नहीं। केपी सिद्धांतों के अनुसार, यदि लग्न का उप-उप स्वामी (Sub-sub lord) चतुर्थ भाव के उप-उप स्वामी के नक्षत्र में स्थित हो, तो जातक की शैक्षणिक योग्यता अत्यंत उच्च स्तर की होती है। इसके विपरीत, यदि चतुर्थ भाव का उप-स्वामी 12वें और 7वें भाव का कार्येश (significator) बन जाए, तो जातक अपनी संपत्तियों या निवेशों को बेचने में असमर्थ रहता है। यदि चतुर्थ भाव का उप-स्वामी तीसरे भाव के उप-स्वामी के नक्षत्र में गोचर करता है, तो यह जातक के व्यावसायिक समझौतों के रद्द होने का संकेत देता है।

Practical Significations

Education and Learning

  • नियमित अध्ययन: चतुर्थ और ग्यारहवें भाव का संबंध जातक को नियमित और सफल स्कूली शिक्षा प्रदान करता है।
  • कंप्यूटर विज्ञान: यदि बुध और कन्या राशि का प्रभाव चतुर्थांश (D-24) कुंडली में चतुर्थ भाव पर हो, तो जातक कंप्यूटर विज्ञान या सूचना प्रौद्योगिकी में शिक्षा प्राप्त करता है।
  • सिविल इंजीनियरिंग: यदि मंगल, शनि और बुध का प्रभाव पांचवें भाव और उसके स्वामी पर हो, और चतुर्थ, पांचवें तथा दसवें भाव का आपस में संबंध बन रहा हो, तो जातक सिविल इंजीनियरिंग में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करता है।

Home and Property

  • कलात्मक घर: चतुर्थ भाव में बुध की उपस्थिति जातक के घर को कलात्मक, सुंदर और पुस्तकों से सुसज्जित बनाती है।
  • ईंटों का भंडारण या कार्यालय: शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, चतुर्थ भाव का बुध जातक के घर के निकट ईंटों के भंडारण या घर के भीतर ही कार्यालय होने का संकेत देता है।

Frequently Asked Questions

क्या चतुर्थ भाव में बुध शुभ होता है?
हां, चतुर्थ भाव में बुध को सामान्यतः अत्यंत शुभ माना जाता है। यह जातक को तीक्ष्ण बुद्धि, अच्छी शिक्षा, वाहन सुख और समाज में मान-सम्मान प्रदान करता है। हालांकि, इसके पूर्ण परिणाम बुध की राशि और उस पर पड़ने वाले ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर करते हैं।
क्या चतुर्थ भाव का बुध माता के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है?
यदि बुध चतुर्थ भाव में अपनी मित्र या उच्च राशि में हो, तो यह माता के साथ अच्छे संबंधों और उनके अच्छे स्वास्थ्य को दर्शाता है। लेकिन यदि बुध यहां नीच का हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो इसकी दशा के दौरान माता के स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है।
चतुर्थ भाव में बुध शिक्षा के लिए कैसा परिणाम देता है?
यह स्थिति शिक्षा के लिए सर्वोत्तम मानी जाती है। बुध बुद्धि का कारक है और चतुर्थ भाव प्रारंभिक शिक्षा का है। यह संयोजन जातक को पढ़ाई में तेज, खोजी प्रवृत्ति वाला और गणित या कंप्यूटर विज्ञान जैसे विषयों में निपुण बनाता है।
क्या चतुर्थ भाव में बुध संपत्ति और वाहन का सुख देता है?
हां, शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यदि चतुर्थ भाव का स्वामी शुभ स्थिति में हो और बुध के साथ संबंध बनाए, तो जातक को आलीशान मकान और उत्तम वाहनों का सुख प्राप्त होता है।
चतुर्थ भाव में बुध के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
बुध के लिए कन्या राशि सबसे अच्छी मानी जाती है, क्योंकि यहां वह उच्च का होता है। इसके अलावा मिथुन राशि में भी वह अपनी स्वराशि में होने के कारण अत्यंत शुभ परिणाम देता है और Bhadra Yoga का निर्माण करता है।
क्या चतुर्थ भाव का बुध करियर में सफलता दिलाता है?
चतुर्थ भाव में स्थित बुध अपनी सातवीं पूर्ण दृष्टि से दशम भाव (करियर) को देखता है। इसके प्रभाव से जातक लेखन, संपादन, वकालत, शिक्षण, या व्यापारिक परामर्श जैसे क्षेत्रों में बड़ी सफलता प्राप्त करता है।
बुध की महादशा का चतुर्थ भाव में क्या प्रभाव होता है?
यदि बुध शुभ स्थिति में हो, तो इसकी महादशा में जातक को भूमि, वाहन और उच्च शिक्षा का लाभ मिलता है। लेकिन यदि बुध पीड़ित हो, तो इसकी दशा में घरेलू अशांति, नौकरी में नुकसान और स्थान परिवर्तन का सामना करना पड़ सकता है।

Remedial Measures

यदि कुंडली में चतुर्थ भाव का बुध पीड़ित हो, नीच राशि में हो या अशुभ भावों के स्वामियों के प्रभाव में हो, तो इसके नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

Standard Remedies for Mercury

  • आध्यात्मिक उपाय: भगवान विष्णु की आराधना करें। प्रतिदिन 'विष्णु सहस्रनाम' का पाठ करें या बुधवार के दिन बुध मंत्र का जाप करें।
  • व्यवहारिक उपाय: अपनी बहन, मौसी, बुआ और बेटियों का सम्मान करें और उनके साथ मधुर संबंध बनाए रखें।
  • दान कार्य: बुधवार के दिन हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र, या गरीब छात्रों को पुस्तकें और लेखन सामग्री दान करें।
  • रत्न धारण: बुध के शुभ प्रभावों को बढ़ाने के लिए पन्ना (Panna) रत्न धारण किया जा सकता है। विशेष चेतावनी: पन्ना केवल तभी धारण करना चाहिए जब बुध जातक की कुंडली में एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (functional benefic) हो (जैसे वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न के लिए)। यदि बुध कुंडली में कार्यात्मक अशुभ ग्रह (functional malefic) हो (जैसे मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न के लिए), तो पन्ना पहनने से बचना चाहिए, क्योंकि यह अशुभ प्रभावों को और अधिक बढ़ा सकता है।
चतुर्थ भाव में बुध की स्थिति को पूरी तरह समझने के लिए जातक को अपनी जन्म कुंडली में बुध की राशिगत गरिमा, चतुर्थेश की स्थिति, और Navamsha (D9) तथा Ashtakavarga में मिलने वाले बिंदुओं का समग्र विश्लेषण करना चाहिए। केवल एक ग्रह की स्थिति के आधार पर अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय, पूरी कुंडली के विभिन्न पहलुओं का मिलान करना ही ज्योतिष का सही मार्ग है।

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Sources consulted

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