Mercury in the 12th House

52 min read · Drawn from 49 classical and modern works · Updated August 2026

बुध (Budha), जो बुद्धि, संचार, व्यापार और वाणी का कारक ग्रह है, जब कुंडली के द्वादश भाव (Dvadasha Bhava या व्यय भाव) में स्थित होता है, तो यह एक अत्यंत विशिष्ट और जटिल ज्योतिषीय विन्यास का निर्माण करता है। द्वादश भाव मुख्य रूप से हानि, व्यय, एकांत, विदेश यात्रा, अस्पताल, कारावास और आध्यात्मिक मोक्ष (Moksha) का प्रतिनिधित्व करता है। इस भाव में बुद्धि के कारक ग्रह बुध की उपस्थिति जातक के मानसिक प्रतिरूप, वित्तीय निर्णयों और आध्यात्मिक झुकाव को गहराई से प्रभावित करती है। यह स्थिति जातक को एक गहरा विचारक, एकांतप्रिय विश्लेषक या फिर वित्तीय उतार-चढ़ाव का सामना करने वाला व्यक्ति बना सकती है। इस स्थिति का अंतिम परिणाम पूरी तरह से बुध की राशि गरिमा, युति और उस पर पड़ने वाले शुभ या अशुभ प्रभावों पर निर्भर करता है। वैदिक ज्योतिष के शास्त्रीय ग्रंथ अक्सर अत्यंत कठोर या पूर्ण शब्दों में परिणाम घोषित करते हैं; हालांकि, किसी भी एकल स्थिति को अलगाव में नहीं देखा जाना चाहिए, और ऐसे गंभीर परिणाम केवल तभी घटित होते हैं जब संपूर्ण कुंडली में कई अन्य पुष्टिकारक पीड़ित अवस्थाएं मौजूद हों।

Classical Position

शास्त्रीय ज्योतिषीय परंपराओं में द्वादश भाव में बुध की स्थिति को लेकर व्यापक सहमति पाई जाती है। विभिन्न ग्रंथों के अनुसार, इस भाव में ग्रहों का विशिष्ट विन्यास जातक के जीवन में निम्नलिखित महत्वपूर्ण परिणामों को दर्शाता है:
  • वाणी और व्यवहार में दोष: यदि द्वितीय भाव (वाणी और धन का भाव) का स्वामी कुंडली के छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो जातक सार्वजनिक रूप से मूर्खतापूर्ण व्यवहार करता है। ऐसे जातक की वाणी में कठोरता आ सकती है, उसे नेत्र रोग का सामना करना पड़ सकता है, और वह अत्यधिक व्यर्थ व्यय करने की प्रवृत्ति रखता है।
  • ऋण की स्थिति: यदि छठे भाव के आरंभिक बिंदु (कस्प) का उप-स्वामी (सब-लॉर्ड) द्वादश भाव का संकेतक हो और वह छठे, आठवें या बारहवें भाव से जुड़ा हो, तो जातक के जीवन में ऋण या कर्ज की स्थिति उत्पन्न होती है।
  • शारीरिक अंगों की शल्य चिकित्सा: यदि कोई राशि किसी विशिष्ट शारीरिक अंग का प्रतिनिधित्व करती है और उसका उप-स्वामी द्वादशेश (बारहवें भाव का स्वामी) होकर मंगल के प्रभाव में हो, तो उस शारीरिक अंग को शल्य चिकित्सा (सर्जरी) द्वारा हटाना पड़ सकता है। विशेष रूप से, यदि वह राशि गर्भाशय का प्रतिनिधित्व करती है और उप-स्वामी बुध होकर द्वादशेश बनता है और मंगल से प्रभावित होता है, तो गर्भाशय को शल्य चिकित्सा द्वारा हटाने की स्थिति बनती है।
  • लेखन कार्य की पूर्णता: यदि जातक के जीवन में तीसरे और ग्यारहवें भाव के संकेतक सक्रिय हों और उनके साथ बुध का संबंध स्थापित हो रहा हो, तो जातक द्वारा किसी पुस्तक के लेखन का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होता है।

Variant Readings

विभिन्न शास्त्रीय और नाड़ी ग्रंथों में द्वादश भाव में बुध की स्थिति को लेकर कई अनूठे और विशिष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत किए गए हैं। इन भिन्न-भिन्न मतों को जातक के जीवन के विभिन्न पहलुओं के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है।

Physical Appearance and Health

  • गुदा संबंधी रोग: Sarvartha Chintamani के अनुसार, यदि Lagna (लग्न) का स्वामी, मंगल और बुध एक साथ चौथे या बारहवें भाव में स्थित हों और छठे भाव को प्रभावित कर रहे हों, तो यह जातक के गुदा मार्ग के निकट किसी रोग या शारीरिक समस्या को दर्शाता है।
  • पांडु रोग और कुष्ठ रोग: चिकित्सा ज्योतिष के एक अन्य विशिष्ट ग्रंथ के अनुसार, यदि लग्न का स्वामी मंगल हो और वह बुध के साथ चौथे या बारहवें भाव में युति कर रहा हो, तो जातक को पांडु रोग (एनीमिया) और कुष्ठ रोग जैसी त्वचा संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
  • त्रिदोष जनित रोग: The Encyclopedia of Vedic Astrological Dasha Systems के अनुसार, यदि बुध छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो, तो उसकी Dasha (महादशा) के दौरान जातक को वात (Vata), पित्त (Pitha) और श्लेष्मा (Sleshma) के असंतुलन से उत्पन्न होने वाले जटिल रोगों, पीलिया या आमवात (गठिया) का सामना करना पड़ सकता है।

Temperament and Mental State

  • हीनता और आलस्य: Phaladeepika के अनुसार, द्वादश भाव में बुध जातक को निर्धनता, असहायता, आलस्य, क्रूरता, शिक्षा की कमी और अपमान का अनुभव करा सकता है।
  • नम्रता और संकोच: इसके विपरीत, Scientific Hindu Astrology का मत है कि यदि द्वादश भाव में बुध स्थित हो, तो जातक एक अच्छा कार्यकर्ता होता है, भले ही वह निर्धनता में जीवन व्यतीत करे। उसमें लज्जा, संकोच, कोमल स्वभाव और नम्रता जैसे गुण प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
  • अस्थिर और विकृत सोच: How to Judge a Horoscope के अनुसार, इस भाव का बुध जातक को चंचल, मनमौजी, विवाहेतर संबंधों की ओर आकर्षित होने वाला और विकृत सोच के कारण दुखी रहने वाला बना सकता है।
  • भावनात्मक पीड़ा: एक अन्य अज्ञात शास्त्रीय स्रोत के अनुसार, यह स्थिति जातक को भावनात्मक रूप से दुखी, शारीरिक रूप से भूखा, दूसरों के प्रति घृणा रखने वाला और रिश्तेदारों के कारण नुकसान उठाने वाला बनाती है।

Wealth, Status and Life Events

  • बड़े भाई का पलायन: Learn Successful Predictive Techniques of Hindu Astrology के अनुसार, यदि तृतीयेश की महादशा और द्वादश भाव में स्थित बुध की Antardasha (अंतर्दशा) चल रही हो, तो जातक का बड़ा भाई घर छोड़कर चला जाता है या भटकने लगता है।
  • गंभीर कानूनी संकट: How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि द्वादश भाव में बुध, सूर्य और राहु की युति हो और वह आठवें भाव के नीच राशिगत स्वामी शनि और छठे भाव के स्वामी मंगल द्वारा निर्मित Papakartari Yoga (पापकर्तरी योग) से पीड़ित हो, तो जातक गंभीर अपराधों (जैसे हत्या) में लिप्त हो सकता है और उसे कारावास या मृत्युदंड जैसी कड़ी सजा भुगतनी पड़ सकती है।
  • दत्तक पुत्र की प्राप्ति: Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि बुध छठे, आठवें या बारहवें भाव में पंचमेश (पांचवें भाव के स्वामी) के साथ स्थित हो, तो जातक एक ऐसा पुत्र गोद लेता है जो उसके अपने वास्तविक पुत्र से भी अधिक श्रेष्ठ और योग्य सिद्ध होता है।
  • आध्यात्मिक और धार्मिक उन्नति: Doctrines of Suka Nadi का यह भी मत है कि यदि सूर्य और बुध द्वादश भाव में हों और दशमेश (दसवें भाव का स्वामी) बृहस्पति के साथ त्रिकोण भाव (पहले, पांचवें या नौवें भाव) में स्थित हो, तो जातक आगमों (Agamas) का प्रकांड विद्वान बनता है, गंगा स्नान करता है और भगवान शिव के चरणों को प्राप्त करता है।
  • भौतिक लाभ और पारिवारिक चिंताएं: Roots of Nadi के अनुसार, यदि शनि द्वादश भाव में हो और द्वादश भाव का स्वामी बुध (या शुक्र) हो, तो जातक विशिष्ट स्त्रियों के संपर्क के बारे में विचार करता है, संतान को लेकर चिंतित रहता है, और बुखार या अपच से पीड़ित होता है, लेकिन उसे भौतिक रूप से अच्छा लाभ प्राप्त होता है।

Aspect and Directional Strength

द्वादश भाव में स्थित बुध अपनी सातवीं पूर्ण Drishti (दृष्टि) से छठे भाव (Shashta Bhava) को देखता है। छठा भाव मुख्य रूप से शत्रुओं, ऋणों, रोगों, मुकदमों और दैनिक सेवा का प्रतिनिधित्व करता है। बुध एक नैसर्गिक शुभ ग्रह है, लेकिन द्वादश भाव (व्यय और अलगाव का भाव) में बैठने के कारण इसकी दृष्टि में भी उसी भाव की ऊर्जा समाहित हो जाती है। जब बुध छठे भाव को देखता है, तो यह जातक को अपने शत्रुओं, ऋणों और स्वास्थ्य समस्याओं से निपटने के लिए एक अत्यधिक बौद्धिक, तार्किक और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है। जातक विवादों को बातचीत और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने का प्रयास करता है। हालांकि, यदि बुध कुंडली में पीड़ित हो या किसी पापी ग्रह के प्रभाव में आकर क्रूर (Krura) बन गया हो, तो उसकी यह दृष्टि छठे भाव पर दबाव डाल सकती है, जिससे जातक को दैनिक जीवन के संघर्षों, अदालती मामलों या स्वास्थ्य को लेकर अत्यधिक मानसिक चिंता और तनाव का सामना करना पड़ता है। दिशात्मक बल (Digbala) के संदर्भ में, बुध प्रथम भाव (लग्न) में होने पर पूर्ण दिशात्मक बल प्राप्त करता है। द्वादश भाव लग्न के ठीक पीछे स्थित होता है, जो कि चक्र का अंतिम बिंदु है। इस कारण, द्वादश भाव में बुध अपने न्यूनतम दिशात्मक बल के निकट होता है। लग्न से दूर होने के कारण, बुध की तार्किक, बाहरी और अभिव्यक्तात्मक क्षमताएं भीतर की ओर मुड़ जाती हैं। जातक अपनी बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन बाहरी दुनिया में करने के बजाय एकांत में, गुप्त योजनाओं में या आध्यात्मिक चिंतन में अधिक करता है।

The Placement Across the Twelve Rashis

द्वादश भाव में बुध की स्थिति बारह अलग-अलग राशियों में जातक के जीवन को विभिन्न रूपों में प्रभावित करती है। प्रत्येक राशि के अनुसार इसका विश्लेषण नीचे दिया गया है:

Aries (Mesha)

मेष राशि में बुध उदासीन या सम (Neutral) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी मंगल है। यह स्थिति जातक के लिए वृषभ लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध द्वितीय (धन और वाणी) और पंचम (बुद्धि और संतान) भाव का स्वामी बनता है।
  • बौद्धिक दृष्टिकोण: नाड़ी ज्योतिष के अनुसार, मेष राशि का बुध जातक को तकनीकी ज्ञान प्राप्त करने की ओर अग्रसर करता है। पाश्चात्य पद्धति के अनुसार, जातक का मन किसी विषय का गहराई से अध्ययन करने के बजाय उस पर सीधे आक्रमण करने की प्रवृत्ति रखता है।
  • अस्थिरता और परिवर्तन: शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, मेष राशि में स्थित बुध की महादशा के दौरान जातक का जीवन अस्थिर और गैर-जिम्मेदाराना हो सकता है। उसे बार-बार अपने निवास स्थान और कार्यक्षेत्र को बदलना पड़ता है, और सट्टेबाजी या धोखे के कारण वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
चूंकि बुध यहां धन और बुद्धि के भावों का स्वामी होकर व्यय भाव में बैठा है, इसलिए जातक की संचित संपत्ति और बौद्धिक क्षमताएं विदेशी यात्राओं, आध्यात्मिक खोज या अचानक आने वाले खर्चों में व्यय हो सकती हैं।

Taurus (Vrishabha)

वृषभ राशि में बुध मित्र (Friendly) गरिमा में होता है और इस राशि की स्वामिनी शुक्र है। यह स्थिति जातक के लिए मिथुन लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध प्रथम (लग्न) और चतुर्थ (सुख और संपत्ति) भाव का स्वामी बनता है।
  • पारिवारिक ऋण: इस राशि में बुध की उपस्थिति जातक को अपने रिश्तेदारों या सगे-संबंधियों के कारण कर्ज में डाल सकती है।
  • भौतिक सुरक्षा: जातक का संचार और विचार प्रक्रिया मुख्य रूप से भौतिक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता पर केंद्रित रहती है।
  • वित्तीय फिजूलखर्ची: बुध की महादशा के दौरान जातक का व्यवहार अनियंत्रित हो सकता है और वह अत्यधिक वित्तीय फिजूलखर्ची कर सकता है।
चूंकि बुध स्वयं लग्न और सुख भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में स्थित है, इसलिए जातक का अपना व्यक्तित्व और घरेलू सुख सीधे तौर पर व्यय, अलगाव या विदेशी भूमि से जुड़ जाता है।

Gemini (Mithuna)

मिथुन राशि में बुध अपनी स्वराशि (Own Sign) की गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी स्वयं बुध है। यह स्थिति जातक के लिए कर्क लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध द्वादश (व्यय) और तृतीय (साहस और भाई-बहन) भाव का स्वामी बनता है।
  • बौद्धिक प्रतिभा: मिथुन राशि का बुध जातक को अत्यधिक सक्रिय, सुसंस्कृत, कूटनीतिज्ञ, संगीत प्रेमी और आविष्कारक बनाता है, हालांकि जातक में थोड़ा अहंकार या डींग मारने की प्रवृत्ति हो सकती है।
  • शुभ परिणाम: यदि बुध पीड़ित न हो, तो जातक एक अत्यंत भद्र, उदार और समाज में मान-सम्मान पाने वाला व्यक्ति बनता है।
  • पारिवारिक मतभेद: इसकी महादशा के दौरान जातक का जीवन सामान्यतः सुखी रहता है, लेकिन धन को लेकर माता के साथ कुछ वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं।
स्वराशि में होने के कारण बुध द्वादश भाव के सकारात्मक पक्षों को मजबूत करता है, जिससे जातक को गहरी आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि, सफल विदेश यात्राएं और एकांत में उत्कृष्ट लेखन क्षमता प्राप्त होती है।

Cancer (Karka)

कर्क राशि में बुध शत्रु (Inimical) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी चंद्रमा है। यह स्थिति जातक के लिए सिंह लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध एकादश (लाभ) और द्वितीय (धन) भाव का स्वामी बनता है।
  • भावनात्मक विचार प्रक्रिया: कर्क राशि का बुध जातक की बुद्धि को अत्यधिक संवेदनशील और भावनात्मक बनाता है। जातक का मन तार्किक तथ्यों के बजाय भावनात्मक छापों और पुरानी यादों को अधिक संजोकर रखता है।
  • चंचलता और कूटनीति: जातक मजाकिया, संगीत का शौकीन, कूटनीतिज्ञ और लचीला होता है, लेकिन उसमें कामुकता और मानसिक अस्थिरता भी देखी जा सकती है।
चूंकि बुध यहां धन और लाभ के दोनों प्रमुख भावों का स्वामी होकर व्यय भाव में शत्रु राशि में स्थित है, इसलिए यह जातक के लिए एक प्रतिकूल वित्तीय स्थिति का निर्माण करता है। जातक की आय और संचित धन अक्सर भावनात्मक आवेगों, पारिवारिक आवश्यकताओं या गुप्त खर्चों में नष्ट हो जाते हैं।

Leo (Simha)

सिंह राशि में बुध मित्र (Friendly) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी सूर्य है। यह स्थिति जातक के लिए कन्या लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध दशम (कर्म) और प्रथम (लग्न) भाव का स्वामी बनता है।
  • अहंकार और भटकाव: सिंह राशि का बुध जातक को थोड़ा घमंडी, घुमक्कड़ स्वभाव का और कभी-कभी अविवेकी बना सकता है।
  • स्वास्थ्य संबंधी खतरे: यदि सिंह राशि में स्थित बुध पर किसी पापी ग्रह की दृष्टि हो, तो जातक को गंभीर ज्वर (बुखार) के कारण शारीरिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
चूंकि बुध लग्न और कर्म भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में बैठा है, इसलिए जातक का करियर और व्यक्तिगत जीवन अस्पतालों, जेलों, विदेशी कंपनियों या आध्यात्मिक संस्थानों जैसे एकांत स्थानों से जुड़ सकता है।

Virgo (Kanya)

कन्या राशि में बुध उच्च (Exalted) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी स्वयं बुध है। यह स्थिति जातक के लिए तुला लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध नवम (भाग्य और धर्म) और द्वादश (व्यय और मोक्ष) भाव का स्वामी बनता है।
  • असाधारण तार्किक क्षमता: कन्या राशि में बुध अपनी सर्वोत्तम स्थिति में होता है। यह जातक को अत्यंत बुद्धिमान, गुणी, वाक्पटु, उत्कृष्ट स्मृति शक्ति वाला और तार्किक बनाता है, हालांकि जातक में कभी-कभी अत्यधिक कठोर सोच या आलस्य भी देखा जा सकता है।
  • मास्टरी और कौशल: यदि इस उच्च के बुध पर मंगल की दृष्टि हो, तो जातक मशीनरी और जल आपूर्ति इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी क्षेत्रों में पूर्ण महारत हासिल करता है।
उच्च का बुध द्वादश भाव में होने से जातक को असाधारण आध्यात्मिक ज्ञान, मोक्ष की प्राप्ति और विदेशी भूमि से अत्यधिक मान-सम्मान व भाग्य का साथ मिलता है।

Libra (Tula)

तुला राशि में बुध मित्र (Friendly) गरिमा में होता है और इस राशि की स्वामिनी शुक्र है। यह स्थिति जातक के लिए वृश्चिक लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध अष्टम (बाधाएं और रहस्य) और एकादश (लाभ) भाव का स्वामी बनता है।
  • स्वास्थ्य और करियर में गिरावट: तुला राशि में स्थित बुध की महादशा जातक के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से अच्छी नहीं मानी जाती है। जातक को वजन घटने, शारीरिक कमजोरी और डिजाइन या कला के क्षेत्र में असफल प्रयासों का सामना करना पड़ सकता है।
  • वित्तीय उतार-चढ़ाव: इस अवधि के दौरान जातक को अपने करियर को स्थापित करने में कड़े संघर्षों का सामना करना पड़ता है।
चूंकि बुध अष्टम और एकादश भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में स्थित है, इसलिए जातक के लाभ और आय अचानक आने वाली बाधाओं, बीमारियों या गुप्त खर्चों के कारण व्यय हो जाते हैं।

Scorpio (Vrischika)

वृश्चिक राशि में बुध उदासीन या सम (Neutral) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी मंगल है। यह स्थिति जातक के लिए धनु लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध सप्तम (साझेदारी और विवाह) और दशम (कर्म) भाव का स्वामी बनता है।
  • खोजी और तीक्ष्ण बुद्धि: वृश्चिक राशि का बुध जातक को एक अत्यंत सूक्ष्म, खोजी और जासूसी प्रवृत्ति की बुद्धि प्रदान करता है। जातक एक अच्छा चिकित्सक, थेरेपिस्ट या रहस्यमयी विषयों का लेखक बन सकता है, हालांकि उसकी वाणी तीखी हो सकती है।
  • शारीरिक और नैतिक कमजोरी: शास्त्रीय ग्रंथों के अनुसार, यह स्थिति जातक को शारीरिक रूप से कमजोर, कंजूस, आलसी और अनैतिक कार्यों की ओर झुकाव रखने वाला भी बना सकती है।
चूंकि बुध सप्तम और दशम भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में बैठा है, इसलिए जातक के व्यावसायिक संबंध, विवाह और करियर विदेशी व्यापार, अनुसंधान या गुप्त गतिविधियों से संचालित होते हैं।

Sagittarius (Dhanu)

धनु राशि में बुध उदासीन या सम (Neutral) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति जातक के लिए मकर लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध छठे (शत्रु और ऋण) और नवम (भाग्य) भाव का स्वामी बनता है।
  • विस्तृत दृष्टिकोण: धनु राशि का बुध जातक को छोटी-छोटी बारीकियों के बजाय बड़े परिदृश्य (बिग पिक्चर) पर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता प्रदान करता है।
  • धार्मिक और दार्शनिक ज्ञान: जातक वेदों, शास्त्रों और धार्मिक दर्शन का प्रकांड ज्ञाता बनता है और समाज में एक धार्मिक उपदेशक के रूप में ख्याति प्राप्त करता है।
चूंकि बुध छठे और नवम भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में स्थित है, इसलिए जातक अपने भाग्य और जीवन के संघर्षों को आध्यात्मिक ज्ञान, दर्शन और विदेशी यात्राओं के माध्यम से हल करने में सफल होता है।

Capricorn (Makara)

मकर राशि में बुध उदासीन या सम (Neutral) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी शनि है। यह स्थिति जातक के लिए कुंभ लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध पंचम (बुद्धि और संतान) और अष्टम (रहस्य और आयु) भाव का स्वामी बनता है।
  • व्यावहारिक और चतुर बुद्धि: मकर राशि का बुध जातक को एक व्यावहारिक, मितव्ययी, चतुर और व्यापारिक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
  • मानसिक अशांति: जातक स्वभाव से थोड़ा बेचैन हो सकता है और उसे कुछ शारीरिक रोगों या व्यसनों (नशे की लत) का सामना करना पड़ सकता है।
चूंकि बुध पंचम और अष्टम भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में स्थित है, इसलिए जातक की रचनात्मक बुद्धि और शोध क्षमताएं एकांत, गुप्त विद्याओं या विदेशी संस्थानों में अधिक सक्रिय होती हैं।

Aquarius (Kumbha)

कुंभ राशि में बुध उदासीन या सम (Neutral) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी शनि है। यह स्थिति जातक के लिए मीन लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध चतुर्थ (घरेलू सुख) और सप्तम (विवाह और साझेदारी) भाव का स्वामी बनता है।
  • तीव्र विचार प्रक्रिया: कुंभ राशि का बुध जातक को अत्यंत तीव्र गति से सूचनाओं का विश्लेषण करने की क्षमता प्रदान करता है।
  • शनि का नकारात्मक प्रभाव: चूंकि यह शनि की राशि है, इसलिए बुध यहां पीड़ित होने पर जातक को डरपोक, शारीरिक रूप से कमजोर और अस्वच्छ प्रवृत्ति का बना सकता है।
  • वित्तीय और सामाजिक हानि: इसकी महादशा के दौरान जातक को धन, सामाजिक प्रतिष्ठा और अपनी मूल्यवान वस्तुओं को खोना पड़ सकता है।
चूंकि बुध चतुर्थ और सप्तम भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में स्थित है, इसलिए जातक के पारिवारिक सुख और वैवाहिक जीवन में दूरी, अलगाव या विदेशी प्रवास के कारण तनाव उत्पन्न हो सकता है।

Pisces (Meena)

मीन राशि में बुध नीच (Debilitated) गरिमा में होता है और इस राशि का स्वामी बृहस्पति है। यह स्थिति जातक के लिए मेष लग्न का निर्माण करती है, जहां बुध तृतीय (साहस और संचार) और छठे (रोग और ऋण) भाव का स्वामी बनता है।
  • कमजोर निर्णय क्षमता: मीन राशि में बुध के नीच होने के कारण जातक की तार्किक बुद्धि कमजोर हो सकती है, जिससे वह चिड़चिड़ा, दूसरों पर निर्भर और गलत कार्यों में लिप्त होने वाला बन सकता है। हालांकि, उसमें देवताओं और ब्राह्मणों के प्रति आदर भाव बना रहता है।
  • स्वास्थ्य पर भारी खर्च: इसकी महादशा के दौरान जातक को किसी पुरानी या गंभीर बीमारी का सामना करना पड़ सकता है, जिससे उसका अत्यधिक धन चिकित्सा कार्यों में व्यय होता है।
चूंकि बुध यहां तृतीय और छठे भाव का स्वामी होकर द्वादश भाव में नीच का है, इसलिए जातक को अपने साहस, संचार और स्वास्थ्य को लेकर कड़े संघर्षों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, यदि कुंडली में Neecha Bhanga (नीच भंग) हो रहा हो, तो यह जातक को असाधारण आध्यात्मिक और दार्शनिक ऊंचाइयों पर ले जाता है।

Conjunctions in This House

द्वादश भाव में बुध की अन्य ग्रहों के साथ युति जातक के जीवन में अत्यंत महत्वपूर्ण और विशिष्ट योगों का निर्माण करती है:

Sun with Mercury

द्वादश भाव में Sun with Mercury (सूर्य और बुध) की युति को शास्त्रीय रूप से बुधादित्य योग कहा जाता है, लेकिन व्यय भाव में होने के कारण यह जातक को एकांत में बौद्धिक कार्य करने की ओर प्रेरित करता है। Doctrines of Suka Nadi के अनुसार, यदि यह युति द्वादश भाव में हो और दशमेश बृहस्पति के साथ त्रिकोण भाव में स्थित हो, तो जातक शास्त्रों का प्रकांड विद्वान बनता है, गंगा स्नान करता है और मोक्ष प्राप्त करता है।

Moon with Mercury

Moon with Mercury (चंद्रमा और बुध) की युति जातक की भावनाओं और बुद्धि को एक साथ मिला देती है। द्वादश भाव में यह युति जातक को अत्यधिक कल्पनाशील, संवेदनशील और कभी-कभी गुप्त चिंताओं से घिरा रहने वाला बनाती है। यदि यह युति पीड़ित हो, तो जातक को मानसिक अस्थिरता और भावनात्मक निर्णयों के कारण वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है।

Mars with Mercury

Mars with Mercury (मंगल और बुध) की युति एक अत्यंत ऊर्जावान लेकिन आक्रामक योग है। medical astrology horoscop of sthethoscop के अनुसार, यदि लग्न का स्वामी मंगल हो और वह बुध के साथ चौथे या बारहवें भाव में युति करे, तो जातक को पांडु रोग और कुष्ठ रोग जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। यह युति जातक को तीखी वाणी और अचानक होने वाले बड़े खर्चों की प्रवृत्ति भी देती है।

Jupiter with Mercury

Jupiter with Mercury (बृहस्पति और बुध) की युति ज्ञान और बुद्धि का एक अत्यंत शुभ मिलन है। द्वादश भाव में यह युति जातक को दर्शनशास्त्र, अध्यात्म और गुप्त विद्याओं में गहरी रुचि प्रदान करती है। जातक अपनी बुद्धिमत्ता और धन का उपयोग धार्मिक, धर्मार्थ और परोपकारी कार्यों में करता है।

Venus with Mercury

Venus with Mercury (शुक्र और बुध) की युति जातक को कलात्मक, रचनात्मक और कूटनीतिक कौशल प्रदान करती है। द्वादश भाव में यह युति जातक को एकांत में कला का आनंद लेने वाला, गुप्त प्रेम संबंधों की ओर आकर्षित होने वाला और विलासिता की वस्तुओं पर अत्यधिक खर्च करने वाला बनाती है।

Saturn with Mercury

Saturn with Mercury (शनि और बुध) की युति जातक को अत्यंत अनुशासित, गंभीर और व्यावहारिक बनाती है। Roots of Nadi के अनुसार, यदि शनि द्वादश भाव में हो और द्वादशेश बुध हो, तो जातक स्त्रियों के संपर्क के बारे में विचार करता है, संतान को लेकर चिंतित रहता है, और शारीरिक कष्ट भोगता है, लेकिन उसे अच्छा भौतिक लाभ प्राप्त होता है।

Rahu with Mercury

Rahu with Mercury (राहु और बुध) की युति बुध की बौद्धिक क्षमताओं को अत्यधिक बढ़ा देती है, लेकिन द्वादश भाव में यह जातक को भ्रमित, गुप्त शत्रुओं से घिरा रहने वाला और अपरंपरागत विचारों वाला बनाती है। How to Judge a Horoscope के अनुसार, यदि द्वादश भाव में बुध, सूर्य और राहु की युति हो और वह अत्यधिक पीड़ित हो, तो जातक को गंभीर कानूनी मुकदमों या कारावास का सामना करना पड़ सकता है।

Ketu with Mercury

Ketu with Mercury (केतु और बुध) की युति जातक को भौतिक संसार से विरक्त कर आध्यात्मिक मोक्ष की ओर ले जाती है। द्वादश भाव में यह युति जातक को अत्यंत अंतर्ज्ञानी, ध्यानमग्न और रहस्यमयी बनाती है, हालांकि जातक को अपनी तार्किक अभिव्यक्ति और सामाजिक संचार में कठिनाई का अनुभव हो सकता है। जब तीन या अधिक Grahas (ग्रह) द्वादश भाव में एक साथ युति करते हैं, तो यह जातक के जीवन की संपूर्ण ऊर्जा को व्यय, एकांत, विदेशी भूमि और आध्यात्मिक खोज पर केंद्रित कर देता है। यह भारी जमावड़ा अक्सर जातक के भीतर Sanyasa (संन्यास) की प्रवृत्तियों को जाग्रत करता है, जिससे वह भौतिक संसार से विरक्त होकर अपनी बुद्धि को परम चेतना की खोज में लगा देता है।

Aspects Received

द्वादश भाव में स्थित बुध पर अन्य ग्रहों की दृष्टि जातक के जीवन में निम्नलिखित प्रभाव उत्पन्न करती है:

Jupiter's Aspect

बृहस्पति की दृष्टि बुध पर होना अत्यंत शुभ और सुरक्षात्मक माना जाता है। यह दृष्टि बुध की तार्किक बुद्धि को आध्यात्मिक ज्ञान और विवेक में बदल देती है। जातक के व्यय और हानियां सकारात्मक कार्यों, जैसे दान और धर्मार्थ कार्यों में बदल जाती हैं, और जातक को मानसिक शांति प्राप्त होती है।

Saturn's Aspect

शनि की दृष्टि बुध पर होने से जातक के विचारों में गंभीरता और अनुशासन आता है, लेकिन यह मानसिक तनाव, अवसाद और अलगाव की भावना को भी बढ़ा सकती है। जातक को अपने संचार में बाधाओं और वित्तीय मामलों में अत्यधिक देरी का सामना करना पड़ता है।

Mars's Aspect

मंगल की दृष्टि बुध पर होने से जातक की विचार प्रक्रिया में आक्रामकता और जल्दबाजी आती है। यह जातक को विवादों, अचानक होने वाले बड़े खर्चों, दुर्घटनाओं या शल्य चिकित्सा (सर्जरी) की ओर धकेल सकती है, विशेष रूप से यदि मंगल कुंडली में अशुभ स्थिति में हो।

Rahu's Aspect

राहु की दृष्टि बुध पर होने से जातक के मन में अजीबोगरीब डर, भ्रम और गुप्त चिंताएं उत्पन्न होती हैं। जातक शॉर्टकट के माध्यम से धन कमाने का प्रयास कर सकता है, जिससे उसे अचानक बड़े वित्तीय नुकसान या कानूनी संकट का सामना करना पड़ सकता है।

Ketu's Aspect

केतु की दृष्टि बुध पर होने से जातक के भीतर वैराग्य और अलगाव की भावना मजबूत होती है। जातक का झुकाव ध्यान, योग और एकांत साधना की ओर बढ़ता है, हालांकि व्यावहारिक जीवन में वह खुद को थोड़ा कटा हुआ महसूस कर सकता है।

Strength and Condition

द्वादश भाव में बुध का वास्तविक प्रदर्शन और उसके परिणामों की तीव्रता को समझने के लिए निम्नलिखित ज्योतिषीय कारकों का विश्लेषण करना अत्यंत आवश्यक है:

Baladi Avastha

ग्रह की अवस्था उसके अंशों (डिग्री) के आधार पर तय होती है, जो यह दर्शाती है कि ग्रह अपना परिणाम देने में कितना सक्षम है।
  • विषम राशियां: मेष, मिथुन, सिंह, तुला, धनु और कुंभ राशि में अंशों का क्रम इस प्रकार होता है:
    • 0-6°: बाल (Bala) अवस्था (कमजोर परिणाम)
    • 6-12°: कुमार (Kumara) अवस्था (मध्यम परिणाम)
    • 12-18°: युवा (Yuva) अवस्था (पूर्ण और मजबूत परिणाम)
    • 18-24°: वृद्ध (Vridha) अवस्था (अत्यंत कमजोर परिणाम)
    • 24-30°: मृत (Mrita) अवस्था (निष्क्रिय परिणाम)
  • सम राशियां: वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर और मीन राशि में यह क्रम बिल्कुल विपरीत हो जाता है, जहां 0-6° मृत (Mrita) अवस्था होती है और 24-30° बाल (Bala) अवस्था होती है।
बुध की अपनी राशियां मिथुन (विषम) और कन्या (सम) हैं, जिनमें इन अवस्थाओं का प्रभाव तदनुसार देखा जाना चाहिए।

Ashtakavarga

अष्टकवर्ग (Ashtakavarga) प्रणाली में द्वादश भाव को प्राप्त होने वाले बिंदु (Bindu) बुध के परिणामों को तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यदि बुध के अष्टकवर्ग में द्वादश भाव को उच्च बिंदु (28 से अधिक) प्राप्त होते हैं, तो जातक अपने व्यय को नियंत्रित करने में सफल होता है और उसे आध्यात्मिक व विदेशी यात्राओं से शुभ फल मिलते हैं। इसके विपरीत, कम बिंदु होने पर जातक को अनियंत्रित खर्चों, मानसिक अशांति और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

Nakshatra

बुध जिस नक्षत्र और उसके स्वामी के प्रभाव में स्थित होता है, वह उसके परिणामों को गहराई से प्रभावित करता है। यदि बुध किसी शुभ या मित्र ग्रह के नक्षत्र (जैसे बृहस्पति या शुक्र के नक्षत्र) में स्थित हो, तो वह द्वादश भाव के नकारात्मक प्रभावों को कम कर जातक को शुभ फल प्रदान करता है। यदि वह किसी शत्रु या पापी ग्रह के नक्षत्र में हो, तो जातक को मानसिक और वित्तीय संकटों का सामना करना पड़ता है।

Navamsha (D9)

नवांश (Navamsha) कुंडली को जन्म कुंडली के वादों की पुष्टि करने वाला माना जाता है। यदि बुध जन्म कुंडली के द्वादश भाव में कमजोर या नीच का हो, लेकिन नवांश कुंडली में वह उच्च का, स्वराशि का या वर्गोत्तम होकर मजबूत स्थिति में बैठा हो, तो उसके नकारात्मक परिणामों में भारी कमी आती है। यदि वह नवांश में भी छठे, आठवें या बारहवें अंश (Amsha) में चला जाए, तो उसके शुभ परिणाम अत्यंत कमजोर हो जाते हैं।

Lord of the 12th House

द्वादश भाव के स्वामी (द्वादशेश) की स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि द्वादशेश मजबूत, शुभ ग्रहों से दृष्ट और बुध का मित्र है, तो बुध इस भाव में बैठकर भी जातक को सकारात्मक परिणाम (जैसे सफल विदेश यात्राएं, आध्यात्मिक उन्नति) देने में सक्षम होता है। यदि द्वादशेश स्वयं पीड़ित, अस्त या नीच का हो, तो बुध इस भाव के शुभ फलों को प्रकट नहीं कर पाता और जातक को केवल हानियों का सामना करना पड़ता है।

In the KP System

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP System) में ग्रहों के विश्लेषण के लिए कस्पल सब-लॉर्ड (उप-स्वामी) को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस पद्धति के अनुसार द्वादश भाव में बुध की स्थिति के निम्नलिखित विशिष्ट नियम हैं:
  • चुनावी समर्थन: यदि किसी व्यक्ति के शासक ग्रह (रूलिंग प्लैनेट्स) छठे या ग्यारहवें भाव के संकेतक हों, तो लोग आपको वोट देंगे (आपका समर्थन करेंगे)। यदि वे पांचवें या बारहवें भाव के संकेतक हों, तो वे आपके खिलाफ वोट देंगे (आपका विरोध करेंगे)।
  • ऋण की प्राप्ति: यदि छठे भाव का उप-स्वामी द्वादश भाव का संकेतक हो और वह छठे, आठवें या बारहवें भाव से जुड़ा हो, तो जातक निश्चित रूप से कर्ज या ऋण के जाल में फंसता है।
  • अंग विच्छेदन: यदि कोई राशि किसी शारीरिक अंग का प्रतिनिधित्व करती है और उसका उप-स्वामी बुध होकर द्वादशेश बनता है और मंगल से प्रभावित होता है, तो उस शारीरिक अंग (जैसे गर्भाशय) को शल्य चिकित्सा द्वारा शरीर से अलग करना पड़ता है।
  • ऋण मुक्ति: यदि द्वितीय भाव का संबंध बारहवें और सातवें भाव से हो, और द्वितीय भाव छठे से नौवां भाव हो, तो सूर्य के नक्षत्र में गोचर करते हुए बुध की दशा-भुक्ति-अंतर्दशा (DBA) के दौरान जातक अपने ऋणों का भुगतान करने में सफल होता है।
  • शिक्षा में बाधा: यदि चतुर्थ भाव का उप-स्वामी द्वादश भाव के उप-स्वामी के नक्षत्र में स्थित हो, तो यह जातक के शैक्षणिक प्रयासों में गंभीर खतरों और बाधाओं को दर्शाता है।

Practical Significations

व्यावहारिक जीवन में द्वादश भाव में बुध की स्थिति को निम्नलिखित प्रमुख श्रेणियों के अंतर्गत समझा जा सकता है:

Spiritual and Mental Isolation

  • एकांत प्रिय विचारक: जातक को अकेले रहकर विचार करना, लिखना या शोध करना अत्यंत प्रिय होता है। वह अपनी भावनाओं को आसानी से दूसरों के सामने व्यक्त नहीं करता।
  • आध्यात्मिक झुकाव: जातक का झुकाव ध्यान, योग, सपनों के विश्लेषण और अवचेतन मन की गुत्थियों को सुलझाने की ओर अधिक होता है।

Financial Patterns

  • अनियंत्रित व्यय: जातक को अपने बजट को नियंत्रित करने में कठिनाई होती है। धन का व्यय अक्सर स्वास्थ्य, दान, यात्राओं या गुप्त गतिविधियों पर होता है।
  • विदेशी संबंध: जातक को आयात-निर्यात, विदेशी कंपनियों में नौकरी या विदेशी भूमि पर व्यापार के माध्यम से धन कमाने के अवसर प्राप्त होते हैं।

Frequently Asked Questions

क्या द्वादश भाव में बुध हमेशा बुरा परिणाम देता है?
नहीं, द्वादश भाव में बुध हमेशा बुरा परिणाम नहीं देता। यदि बुध अपनी स्वराशि (मिथुन) या उच्च राशि (कन्या) में स्थित हो, या उस पर बृहस्पति जैसे शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो यह जातक को असाधारण आध्यात्मिक ज्ञान, उत्कृष्ट लेखन क्षमता और सफल विदेश यात्राओं के अवसर प्रदान करता है। बुरा परिणाम केवल तभी मिलता है जब बुध अत्यधिक पीड़ित या नीच का हो।
क्या द्वादश भाव का बुध विदेश यात्रा का योग बनाता है?
हां, द्वादश भाव मुख्य रूप से विदेशी भूमि और अलगाव का प्रतिनिधित्व करता है। बुध जो कि व्यापार और यात्राओं का कारक है, जब इस भाव में बैठता है, तो यह जातक को शिक्षा, नौकरी या व्यापार के सिलसिले में विदेश जाने और वहां बसने के मजबूत अवसर प्रदान करता है।
द्वादश भाव में बुध होने पर स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
यदि द्वादश भाव में बुध पीड़ित हो, तो यह जातक को वात, पित्त और कफ के असंतुलन से होने वाले रोग, त्वचा संबंधी समस्याएं, पीलिया, मानसिक तनाव, अनिद्रा और नेत्र रोग दे सकता है। इसके अतिरिक्त, यदि मंगल का प्रभाव हो, तो शरीर के किसी अंग की शल्य चिकित्सा (सर्जरी) की नौबत भी आ सकती है।
क्या इस स्थिति से शिक्षा में बाधा आती है?
हां, यदि बुध द्वादश भाव में नीच का हो या पापी ग्रहों (जैसे राहु या शनि) से पीड़ित हो, तो जातक को एकाग्रता की कमी, मानसिक भटकाव और शिक्षा में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, यदि शुभ ग्रहों का प्रभाव हो, तो जातक गुप्त विद्याओं और शोध कार्यों में उच्च शिक्षा प्राप्त करता है।
द्वादश भाव में बुध के लिए कौन सी राशि सबसे अच्छी मानी जाती है?
द्वादश भाव में बुध के लिए कन्या राशि (जहां वह उच्च का होता है) और मिथुन राशि (जहां वह स्वराशि का होता है) सबसे अच्छी मानी जाती हैं। इन राशियों में होने पर बुध जातक को गहरी तार्किक क्षमता, आध्यात्मिक ऊंचाइयां और विदेशी भूमि से प्रचुर धन व सम्मान दिलाता है।
क्या द्वादश भाव में बुध धन हानि का कारण बनता है?
हां, चूंकि द्वादश भाव व्यय का भाव है, इसलिए यहां बुध की उपस्थिति जातक के खर्चों को बढ़ा देती है। जातक अक्सर बिना सोचे-समझे खर्च करता है या गलत निवेश के कारण धन खो देता है। विशेष रूप से बुध की महादशा के दौरान वित्तीय सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक होता है।
क्या बुध का अन्य ग्रहों के साथ होना इसके प्रभाव को बदलता है?
हां, बुध एक अत्यंत संवेदनशील ग्रह है जो अपने साथ बैठने वाले ग्रह की प्रकृति को अपना लेता है। यदि वह सूर्य के साथ हो तो बुधादित्य योग बनाता है, बृहस्पति के साथ होने पर ज्ञान बढ़ाता है, लेकिन यदि वह राहु, केतु या शनि जैसे क्रूर ग्रहों के साथ हो, तो जातक को मानसिक और कानूनी संकटों का सामना करना पड़ता है।

Remedial Measures

द्वादश भाव में बुध के नकारात्मक प्रभावों को कम करने और इसके शुभ फलों को बढ़ाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं:

Standard Remedies for Mercury

  • आध्यात्मिक उपाय:
    • प्रत्येक बुधवार को बुध के बीज मंत्र "ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः" का 108 बार जाप करें।
    • प्रतिदिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या सुनें।
    • तांबे के पात्र से सूर्य देव को जल (अर्घ्य) अर्पित करें।
  • व्यवहारिक उपाय:
    • अपनी बहनों, मौसी, बुआ और छोटी कन्याओं का सम्मान करें और उन्हें समय-समय पर हरे रंग के उपहार भेंट करें।
    • अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें और किसी को कटु वचन न बोलें।
  • दान कार्य:
    • बुधवार के दिन साबुत हरी मूंग की दाल, हरे कपड़े या कांसे के बर्तनों का दान करें।
    • गरीब और जरूरतमंद छात्रों को पुस्तकें, पेन और अन्य शैक्षणिक सामग्री दान करें।
  • रत्न चिकित्सा (Gemstone Warning):
    • बुध का मुख्य रत्न पन्ना (Panna) है। चेतावनी: पन्ना केवल तभी धारण करना चाहिए जब बुध जातक की कुंडली में एक कार्यात्मक शुभ ग्रह (Functional Benefic) हो, जैसे वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न के जातकों के लिए।
    • यदि बुध कुंडली में कार्यात्मक अशुभ ग्रह (Functional Malefic) है, जैसे मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन लग्न के जातकों के लिए, तो पन्ना कभी भी धारण नहीं करना चाहिए। अशुभ ग्रह का रत्न पहनने से उसकी नकारात्मक शक्तियां और अधिक बढ़ जाती हैं, जिससे जातक को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जातक को अपनी कुंडली में द्वादश भाव में बुध की स्थिति का सटीक विश्लेषण करने के लिए केवल इस एक स्थिति को ही अंतिम नहीं मानना चाहिए। इसके लिए जातक को बुध की राशि, उसके नक्षत्र स्वामी, नवांश कुंडली में उसकी स्थिति, उस पर पड़ने वाले शुभ-अशुभ ग्रहों के प्रभाव और वर्तमान में चल रही महादशा व अंतर्दशा का समग्र रूप से अध्ययन करना चाहिए, तभी किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना संभव है।

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Sources consulted

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